‘आज’ अखबार की कीमत एक रुपया हो जाने के कारण बिहार के गया जिले के हाकरों ने आज ‘आज’ अखबार को बेचने से इनकार कर दिया है। दूसरे लोगों को भी ‘आज’ अखबार नहीं बेचने दे रहे हैं। हालांकि मैं आज अखबार नहीं पढता, मैं टाइम्स आफ़ इंडिया लेता हूं, लेकिन हाकरों द्वारा ‘आज’ अखबार बेचने से इनकार कर देने के बाद मैंने अपने हाकर को कह दिया की ‘आज’ अखबार बेचना शुरू करो अन्यथा मैं कोई अखबार नहीं लूंगा।
यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हर यूनियन अपने स्वार्थ से उपर कुछ भी नही सोचती है। चाहे वह अफ़सरों की यूनियन हो या अखबार के हाकरों की। रांची में भी अखबार के हाकरों ने दैनिक भास्कर के साथ ऐसा ही किया था। यह एक अलग तरीके का सेंसरशिप है। और यह सेसरशिप ज्यादा घातक है। एक और बात, आप सब इस गलतफ़हमी में न रहें कि हाकर 2-4 हजार कमाते हैं। एक-एक हाकर महीने में 10-15 हजार रुपया गया, पटना जैसे जगह में कमा लेता है। और भी कारनामे हैं हाकरों के, फिर कभी उस पर चर्चा करूंगा।
गया से मदन कुमार तिवारी की रिपोर्ट












shukla123
December 27, 2010 at 6:04 am
Madan je hawkaro ke karname padhana chahunga mai bhi bhilai me ek howker hu
Dhanraj
December 27, 2010 at 9:33 am
Madan Bhaiya Aaapki Baat Sahi hai. Aaapni Achi Baat Kahi hai.
Aur Details mein report dein.
thankyou
Dhanraj kumar
nageshwarraj
December 28, 2010 at 2:07 pm
bhai apko bhle hi hawkaroo ke is nirnay par dukh laga hai par reporter ki tarah hawkaro ko koi na to girft deta hai na hi koi naya sal ka mubara bad lififa me band kar ke deta hai
jab kimat hi aaj ne 1 rs kar diya hai to nanga nahaiga kya nichodega kya
ap ki tarh hawkar bade ghar se nahi ate hai kamate hai to khate hai
madan kumar tiwary
December 28, 2010 at 3:52 pm
शुक्ला जी मेरी मंशा हाकर की भावना को ठेस पहूंचाना नही था। मैं सिर्फ़ यह कहना चाहता था की आप अगर कोई दुकान खो्लें हैं, तो वह सामान भी बेचें जिसमें कम फ़ायदा हो। आम लोगों को जागरुक बनाने में आपलोगों का कम सहयोग नही है। दो आदमियों का मैं बहुत सम्मान करता हूं। एक डाकिया यानी पोस्ट मैन , दुसरा हाकर । बहुत कठिन है आपलोगों का काम , भले हीं अमीर लोग आप दोनों का महत्व न समझें। एक पोस्ट मैन नौकरी की चिठ्ठी पहुंचाता है। दुसरा हाकर रोज , बरसात , बारिश की परवाह न कर अखबार घर पहूंचाता हैं। परन्तु एक शिकायत है, जैसे तीस अखबार की जगह ३१ का बिल दे देना। खैर अगर मेरी बात बुरी लगी हो तो माफ़ किजियेगा।
prashant
February 16, 2011 at 10:16 am
chhattisgarh ma bhi patrika (rajasthan patrika) ki lounching ka baad agent paper distribution ko lekar strike kar chuke hai. Bhilai ma supela & power house ma aisi situation ho chuki hai , ek anya akhbar patrika ki copy pure 1.50/- per agento se kharid le raha hai, matlab patrika ki copy market ma nhi jana chahiye, ye kaisi print media ki ladai hai,