चिटफंडिये ने यशवंत देशमुख को लूटा या खुद लुट गया? …कानाफूसी जारी आहे

: संपर्कों के धनी, संकटमोचक कहे जाने वाले और लाखों रुपये पाने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह भी देशमुख की डूबती कंपनी का भला नहीं कर पा रहे : भड़ास वाले यशवंत जी, पता नहीं आपका अपने नाम वाले यशवंत (सी वोटर वाले) से क्या याराना है. यशवंत देशमुख की कंपनी में क्या से क्या हो गया, और आप लोग हैं कि चुप्पी साधे हुए हैं. कोई खबर नहीं छाप रहे. कोई जानकारी नहीं दे रहे.

यह पत्र बहुत उम्मीद से लिख रहा हूं कि कई महीनों से सेलरी के लिए तरस रहे मीडियाकर्मियों की व्यथा को आप सुनेंगे और पोर्टल पर जगह देंगे. मैं हिंदी में टाइप नहीं कर पाता इसलिए पूरी बात रोमन में लिख रहा हूं जिसमें हिंदी में आप करा लेंगे, यह उम्मीद करता हूं.  भाषाई त्रुटियां भी मिलेंगी, जिसे दुरुस्त करा लेंगे, यह आशा करता हूं. शुरुआत कहां से करूं. शुरुआत अशुभ से करता हूं, अंत की आशंका से करता हूं. वह यह कि अब सीवीबी न्‍यूज का बचना मुश्किल नजर आ रहा है.

सीवीबी न्यूज यानि सी वोटर ब्राडकास्ट न्यूज. पहले इसी का नाम यूएनआई टीवी हुआ करता था. यूएनआई वालों ने अपना ब्रांड नेम वापस ले लिया तो सी वोटर चलाने वाले यशवंत देशमुख को ब्रांड नेम भी सीवी वोटर ब्राडकास्ट यानि सीवीबी न्यूज करना पड़ा. यशवंत देशमुख की मीडिया और देश में ठीकठाक छवि रही है. लेकिन यूएनआई टीवी से सीवीबी न्यूज तक की यात्रा में यशवंत ने अपनी छवि पर बट्टा तो लगाया ही, सैकड़ों पत्रकारों की जिंदगी को भी मुश्किल में डाल दिया.

चिटफंडियों के साथ गलबहियां करने का जो हश्र हो सकता है, वही यशवंत देशमुख का हुआ. वीडियो न्यूज एजेंसी यूएनआई टीवी उर्फ सीवीबी न्यूज में पैसा लगाया एक चिटफंडिये ने. बाद में इसने यहां हो रहे खेल तमाशे को देखकर खुद को इससे अलग कर लिया. इसी कारण जुलाई महीने से ही इस नये नवेले चैनल की हालत खराब है. इस चैनल के लगभग सारे ब्‍यूरो बंद किये जा चुके हैं या हो चुके हैं. खबरों का प्रवाह रुक गया है. पर यह सब कुछ किसी की महत्‍वाकांक्षा तो किसी के विश्‍वास पर खरे न उतरने के चलते हुआ. और इसका परिणाम भोगने को मजबूर हैं सैकड़ों बेगुनाह पत्रकार.

कथाक्रम के मुताबिक सीवीबी न्‍यूज में एसई इनवेस्‍टमेंट चिटफंड कंपनी का संचालन करने वाले पुरुषोत्‍तम अग्रवाल तथा यशवंत देशमुख पार्टनर थे. बताया जाता है कि इनके बीच क्रमश: 55 एवं 45 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी थी. यूएनआई टीवी से करार टूटने के बाद दोनों पार्टनरों के बीच सीवीबी न्‍यूज चैनल चलाने के लिए तीन साल तक का करार हुआ था, जिसके तहत दोनों को इन तीन सालों में तीस-तीस करोड़ रुपये इनवेस्‍ट करने थे. पुरुषोत्‍तम अग्रवाल ने अपने हिस्‍से की राशि एकमुश्‍त यशवंत देशमुख को दे दी, जिसके बाद यह टीवी न्यूज एजेंसी ने जोर शोर से काम शुरू कर दिया.

टीवी न्यूज एजेंसी सीवीबी की जिम्‍मेदारी पुरुषोत्‍तम अग्रवाल की बजाय उनके पुत्र सुनील अग्रवाल, सचिन अग्रवाल एवं इनकी पत्‍नी शिखा अग्रवाल संभालने लगीं. शुरू में सब ठीक ठाक चला परन्‍तु यशवंत देशमुख ने तमाम शहरों में ब्‍यूरो खोलकर पूरा पैसा तीन साल की बजाय एक साल में ही इनवेस्‍ट कर दिया तो अग्रवाल कुनबे का माथा ठनका. इसके बाद फिर पैसों की किल्‍लत शुरू हो गई, जिसके बाद यशवंत देशमुख ने पैसों की मांग चिटफंडिये कुनबे से की. अग्रवाल परिवार ने अपने हिस्से का पूरा पैसे दे चुकने की बात कहकर यशवंत देशमुख को सलाह दी कि अब वे अपने हिस्से का पैसा लगाएं. बताया जाता है कि यशवंत देशमुख ने अपना पैसा लगाने से हाथ खड़ा कर दिया और कई परेशानियों का जिक्र करते हुए तत्‍काल पैसा लगा पाने में असमर्थता जता दी.

इसके बाद अग्रवाल परिवार किसी तरह पैसे देकर चैनल को चला रहा था. पर असली पेंच निकल कर सामने तब आया, जब ज्‍वॉयस सेबेस्टियन की इंट्री सीवीबी न्‍यूज में हुई. सूत्रों का कहना है कि इस बीच यशवंत देशमुख ने कोलकाता में सुपर ब्‍यूरो खोला, जिसमें ममता बनर्जी से उनकी लगभग पन्‍द्रह करोड़ की डील हुई. इसके बाद ही 14 मार्च, 2011 से सीवीबी न्यूज़ बांग्ला भाषा में अपनी विशेष सेवाएं शुरू की. सूत्रों ने बताया कि यह डील ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की हवा बनाने के लिए की गई थी. इस डील की खबर यशवंत देशमुख ने अग्रवाल परिवार को नहीं दी.

सूत्रों ने बताया कि जब ज्‍वॉयस सेबेस्टियन को इस डील के बारे में जानकारी हुई तो उनकी महत्‍वाकांक्षा जाग उठी. उन्‍होंने इसकी जानकारी तत्‍काल अग्रवाल परिवार को मुहैया कराई तथा डील की रकम भी बता दी. इसके बाद दोनों पार्टनरों के बीच थोड़ी खटास हुई पर मामला किसी तरह चलता रहा. इसी बीच सेबेस्टियन यशवंत देशमुख को हटाकर खुद अग्रवाल के साथ पार्टनर बनने की कोशिशों में लग गए, जिसके बाद देशमुख और अग्रवाल्‍स के बीच दूरियां और बढ़ गईं. बाद में सेबेस्टियन को बाहर का रास्‍त दिखा दिया गया परन्‍तु तब तक मामला बिल्‍कुल बिगड़ चुका था.

यशवंत और अग्रवाल्‍स के बीच दूसरी कंट्रोवर्सी उस समय उत्‍पन्‍न हुई जब सचिन अग्रवाल की पत्‍नी शिखा अग्रवाल ने ज्‍यादा पैसा लेकर कम आउटपुट देने वालों को एजेंसी से बाहर निकालने को कहा. इसमें सबसे पहला नाम आया यशवंत देशमुख की खासमखास एवं वर्टिकल स्‍टोरी एडिटर अंशु शर्मा एवं उनकी टीम का. अग्रवाल्‍स का कहना था कि सेलरी के हिसाब से इनका आउटपुट काफी कम है अत: इन्‍हें बाहर किया जाना चाहिए. पर यशवंत देशमुख नहीं माने, जिससे इनके बीच की दूरी और अधिक बढ़ गई. इसके बाद 19 एवं 20 जुलाई को दोनों पार्टनरों के बीच टकरार हुई. इसके बाद से ही अग्रवाल्‍स ने इनवेस्‍ट करने से इनकार कर दिया तथा ऑफिस आना भी बंद कर दिया.

खबर है कि इसके बाद से ही कर्मचारियों को सेलरी के लाले पड़ गए. तमाम ब्‍यूरो बंद हो गए. एक दिन में 70 से 80 स्‍टोरियां करने वाला सीवीबी न्‍यूज अब मुश्किल से 25 स्‍टोरी कर पा रहा है. जुलाई के बाद से कई कर्मचारी खुद छोड़कर चले गया या उन्‍हें निकाल दिया गया. प्रसेन्‍नजीत डे, उमेश चतुर्वेदी, आशुतोष पांडेय जैसे लोगों ने छोड़ दिया या तो निकाल दिए गए. अब भी दर्जनों मीडियाकर्मी सीवीबी न्‍यूज में अपनी सेलरी को लेकर चिंतित हैं. ये लोग जब अपने वरिष्ठों से अपनी सेलरी के बारे में पूछते हैं तो इन्हें जवाब में डांट मिलती है या फिर चुप्पी.

सीवीबी का भविष्‍य तो नजर नहीं आ रहा परन्‍तु सेलरी न मिलने से तमाम जूनियर पत्रकारों ने भी कार्यालय आना बंद कर रखा है. उनका कहना है कि अब उनके पास कार्यालय आने तक के लिए पैसे नहीं हैं. प्रबंधन किसी तरह इंटर्नों का जुगाड़ करके अपनी गाड़ी खींच रहा है. यानी कुछ लोगों की फितरत और महत्‍वाकांक्षा ने सैकड़ों पत्रकारों को बेरोजगार करके रख दिया है. मजेदार यह कि यशवंत देशमुख ने इस टीवी न्यूज एजेंसी का संपादक ऐसे आदमी को बना दिया है जिसका रिकार्ड रहा है कि वह जहां रहा, वहां चीजें गड़बड़ ही हुईं, बेहतर नहीं हुईं.

सीएनईबी से हटने के बाद प्रदीप सिंह ने यशवंत देशमुख का जो साथ पकड़ा तो फिर अभी तक पकड़े रहे. प्रिंट के पत्रकार रहे प्रदीप सिंह अपने बड़े बड़े संपर्कों और संकटमोचन रूप के लिए जाने जाते हैं. पर उनका संकटमोचक व्यक्तित्व यशवंत देशमुख की कंपनी के संकट को खत्म नहीं कर सका. लाखों रुपये सेलरी लेने वाले प्रदीप सिंह को यशवंत देशमुख ने गले से लगा रखा है जबकि कंपनी लगातार डूब रही है पर कुछ हजार रुपये पाने वाले पत्रकारों की छंटनी पैसे न होने और पार्टनर के भाग जाने के नाम पर की जा रही है. इस अन्याय का सजा वक्त जरूर देगा क्योंकि उपर वाले के यहां देर जरूर है, अंधेर नहीं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. पत्रकार ने नाम गोपनीय रखने का अनुरोध किया है. अगर किसी को उपरोक्त तथ्यों, जानकारियों में कमी-बेसी दिखे-लगे तो अपनी आपत्ति नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए दाखिल कर सकता है या फिर bhadas4media@gmail.com पर मेल कर सकता है. आप अगर किसी कंपनी के अंदर के हालात के बारे में गोपनीय सूचना देना चाहते हैं तो भी आप bhadas4media@gmail.com का सहारा ले सकते हैं. जानकारी देने वालों के नाम-पहचान का खुलासा कभी नहीं किया जाएगा, यह वादा है. भड़ास की कोशिश ट्रांसपैरेंसी की है. अंदर के खदबदाते हालात-हलचलों को बाहर लाने की है. ताकि खाने और दिखाने के दांत लोग अलग-अलग और ठीक-ठीक देख परख सकें.

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Comments on “चिटफंडिये ने यशवंत देशमुख को लूटा या खुद लुट गया? …कानाफूसी जारी आहे

  • Esa Kuch Bhi nahi Hai Sab Bakawas Hai, Hume Vishwas Hai ki Hum Fhir Uchaiyo Par Jayenge Esa pehli Bar Kisi Company me nahi Hua hai, pehle bhi kai company me esa Hota aya hai, aaj mano to sayer market niche hai to kal upar bhi ayegi, sab log ye bhi dekhenge.

    all the best.
    vijay(teamcvoter)

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  • ashutosh awasthi says:

    mahanubhav aapko namashkar, apki story abhi bhadas pe padhi..aisa laga ki company k halaat k sath sath aap kuch logo se vyaktigat roop sejyada kunthit hai..mai cvb ka employee to nahi lekin kafi nazdik selagbhag sabhi logo ko personaly janta hu..jin yashwant deshmukh k bare me aap tippadi likh rahe hai,jaha tak meri jankari hai aap jaise tathakathit jo kahi bhi naukari na pa rhae ho unko apni company me panah di aur pet pale..sharam aani chahiye kuch patrakaro ko jo is tarah ki viprit samay me is tarike ki afwafe uda rahe hai..agar mann laga k kaam kiya hota,to sambhavtah ye din na dekhne padte…….!

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  • बेनाम जी, आपके पत्र में नायर एंड कंपनी का जिक्र कहीं नहीं आया?

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  • anuragamitabh says:

    भड़ास पर छपी ये खबर पढ़ी..CVB के बारे मैं यशवंत देशमुख के बारे मैं,.मैं नहीं जानता इसमें कितनी सच्चाई है की नहीं..लेकीन इतना जानता हूँ यशवंत देशमुख जैसा शक्श पत्रकारिता की duniaa मैं मिलना मुश्किल हो और सामाजिकता की दुनिया मैं भी..मैं अब यशवंत जी के साथ काम नहीं कर रहा हूँ..लेकीन कभी किया है..इसलिये मैं उन्हें जानता हूँ उनके व्यक्तित्वा को भी..जो इंसान सिर्फ अपने गुरु के कहने पर दूसरो को नौकरी दे दे..जो जानते हुए भी कोई शक्श नाकारा है उसे उपकृत करने मैं देर न लगाए ये बहुत बड़ी बात है..मैंने २००७ देखा है यशवंत देशमुख के दफ्तर मैं..देखा है की कैसे उनके गुरु अच्युतानंद जोशी के एक आदेश पर उन्होंने माखनलाल के तीन बच्चो को इन्टरन पर रखा..बिना किसी बातचीत के..बिना किसी संदेह के..उनमे से दो को उन्होंने इन्टरन के बाद तुरंत जॉब भी दिया..एक को मध्य प्रदेश भेजा CVOTER के लिए..यशवंत देशमुख तो ठीक है उनके साथी शैलेन्द्र महाजन उनकी परछाई है ..उनके यंहा काम करने वाले एक अदने से लड़के को एक इंटरनेश्नल NGO मैं जॉब मिलने वाली थी…लड़का परेशां क्यूंकि विदेशी NGO वाले लाखो डॉलर एड देते थे ..नौकरी नहीं….शैलेन्द्र ने उस लड़के को खुद लेटर बना कर दिया जिससे उस तरह का लेटर नौकरी के वक्त वन्ही NGO दे,,एक प्रतिशत भी बुरा नहीं लगा शैलेन्द्र को यशवंत को..उस लड़के को इन दोनों के चेहरे पर ख़ुशी दिखी की उनके यंहा काम करने वाला लड़का मुकाम पा रहा है..बाद मैं उसी लड़के का एक राष्ट्रीय समाचार चेनल मैं सेलेक्शन हुआ..तो यशवंत खुश थे शैलेन्द्र भी..चाहे CVOTAR का चपरासी हो या उनके ख़ास शैलेन्द्र यश्वनत देशमुख ने सबके साथ बैठकर रोज खाना खाया है..यशवंत चाहते तो किसी भी न्यूज़ चेनल मैं एंकर की नौकरी लाख दो लाख मैं पाकर खुश हो जाते मालिक की सलामी बजाते लेकीन यशवंत वो नाम है जिसने पचासों को बिना किसी मदद के नौकरी दी…बड़ा सपना देखा खुद के लिए उनके लिए भी जो उनके साथ जुड़े थे..अफ़सोस सपना आधुरा रह गया लेकीन यशवंत देशमुख जैसा इंसान मिलना मुश्किल है जो समझे इंसान को चाहे वो चपरासी हो या उनका दोस्त जो जानता है सम्मान करना चाहे दोस्त हो दुश्मन ..जिन्दगी लम्बी है यशवंत देशमुख हारता नहीं बस गिर पड़ता है कभी लेकीन उसे उठ कर फिर जीतनी की लड़ाई करना आता है..उसके साथीयो को भी…CVOTER ज़िंदा था ज़िंदा है और ज़िंदा रहेगा और देश को देगा ऐसी रीढ़ वाले पत्रकार जो जानते है बिना बिके काम करना शर्तो पर जीना..अनुराग अमिताभ(CVOTER)

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  • Let me correct some of the false claims made in this article in a deliberate attempt to tarnish CVB News Service’s image. But, before that let me point out that Bhadas4media is doing no good to media persons or the cause of journalism by publishing such aspersions leveled by incompetent and unworthy people.

    I am sure the author chooses to remain anonymous because he fears his falsehood will be revealed. Yashwant (editor – Bhadas), you say that you believe in bringing transparency. For God sake do not cheat yourself and your readers. The writers can create news from their imagination and find an audience on your portal because it is titillating. I wonder what journalism or media has taught you and what ethics you have.

    [b]Let me now come to the false claims made in this article:[/b]

    1. CVB News Service is still doing over 50 stories per day maintaining high standards by any degree. If Editor of this portal or any of the readers needs proof, subscribe to the agency and see how many stories you get or ask any of the agency’s clients.

    2. The author mentions – again falsely that s/he is in ‘great’ pain for not getting his salary. The truth is employees at CVB have been told that those in real need can still ask for their salaries and the management has been providing them even till date.

    3.The imaginary deal of Rs 15 crore with Mamata Banerjee that the author has cunningly weaved only points that the aim of creating such stories is to defame CVB News Service and its proprietor. May I point out that Mr Yashwant Deshmukh, owner of CVB News Service, is a brilliantly dignified man and such evil designs by you can’t even touch him, leave aside tarnishing his image which I presume is your aim. He stands tall among entrepreneurs of this country with his distinct style of giving his business a human touch.

    About the other bullshit that the author mentions, please note my email conscious_dipu@yahoo.com or you can meet me anytime and find out the truth and motives of this concocted story.

    Thank you
    Dipu Shaw

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  • बबिता अस्थाना says:

    महोदय जी आप जो भी हैं लेकिन आपने बहुत बारीकी से ये पत्र लिखा है इस बात के लिए तो आपकी तारीफ़ करनी चाहिए लेकिन अगर आप पत्रकार हैं तो कम से कम अपना नाम तो आपको लिखना ही चाहिए, खैर ये आपका व्यक्तिगत मामला है। वैसे आपका व्यक्तित्व तो इस पत्र की पहली दो लाइनों से ही उजागर हो रहा है जैसा कि आपने अपने लेख में लिखा है।

    [b]भड़ास वाले यशवंत जी, पता नहीं आपका अपने नाम वाले यशवंत (सी वोटर वाले) से क्या याराना है. यशवंत देशमुख की कंपनी में क्या से क्या हो गया, और आप लोग हैं कि चुप्पी साधे हुए हैं. कोई खबर नहीं छाप रहे. कोई जानकारी नहीं दे रहे…[/b]

    इसी से पता चल रहा है कि आप उन लोगों में से हैं जो अपने सुख से इतने सुखी नहीं जितने दूसरों के दुख से हैं। आपको मज़ा आता है लोगों को मुसीबत में देखने से आपको मसालेदार ख़बरें चाहिए….माफ़ कीजिएगा आप जैसे लोगों ने ही पत्रकारिता में ख़बरों का मतलब बदल दिया है।
    वैसे आप अगर वाकई सी वी बी में काम करने वालों के हितैषी हैं तो क्या आपको लगता है कि आपके एक पत्र लिख देने से या इस तरह अपनी भड़ास निकालने से सब ठीक हो जायेगा? जवाब मैं देती हूं ठीक तो कुछ होगा नहीं बल्कि लोगों को कानाफूसी करने का मौक़ा ज़रूर मिल जायेगा जो आपने दिया है….इसीलिए हमारे बुज़ुर्ग समझाते हैं कि घर में कोई भी दिक्कत तो कम से कम सार्वजनिक तो नहीं की जाती। यशवंत सर के बारे में Joys सर के बारे में आपने कितना कुछ लिखा है लेकिन आपको ये बता दूं कि Joys सर इस कम्पनी में बीच में नहीं आये बल्कि इस कम्पनी को यशवंत सर और Joys सर ने मिलकर शुरू किया। उनके सम्बंध आज भी वैसे ही हैं जैसे पहले थे। मैंने ऑक्टूबर 2009 में यू एन आई/ सी वी बी जॉइन किया था तब हम लोग मात्र 9 लोग थे जिनमें मैं अकेली लड़की थी…कितनी मेहनत की है हमने अपनी इस कम्पनी के लिए हमसे बेहतर कोई नहीं जानता। फिलहाल सैलरी मेरी भी नहीं मिली मैं भी अपने घर से दूर इस अनजान शहर में रहती हूं लेकिन मैं जानती हूं कि हंगामा करने से कुछ नहीं हो सकता….इसीलिए सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना हमारा मक्सद नहीं होना चाहिए। एक दिन वो भी था जब हमें 6 तारीख़ को सैलरी मिल जाया करती थी तब आप जैसे लोगों ने भड़ास पर नहीं लिखा कि सी वी बी में सैलरी टाइम से पहले मिल रही है। मैं ये बिल्कुल नहीं कह रही कि दिक्कत नहीं है दिक्कत बिल्कुल है सैलरी न मिलना हम जैसे लोगों के लिए बहुत बड़ी दिक्कत है लेकिन क्या सिर्फ आरोप-प्रत्यारोपों से दिक्कत दूर हो सकती है। अपने आप से सवाल पूछे तो जवाब ज़रूर मिल जायेगा। एक बात बताना चाहुंगी कि मैं फिलहाल सी वी बी नहीं जा रही लेकिन मैंने अभी वहां से इस्तीफा नहीं दिया है। घर के प्रति मेरी ज़िम्मेदारियां हैं इसलिए बाहर से जो थोड़ा बहुत काम मिल रहा है वो कर रही हूं….सी वी बी के बाकी लोग भी ऐसा कर सकते हैं किसी को वहां से ऐसा करने के लिए मना नहीं किया गया है। यशवंत सर और सभी सीनियर्स जानते हैं कि घर की ज़िम्मेदारी सम्हालना आसान नहीं होता शायद यही वजह है कि किसी ने मुझे और जो लोग ऑफिस नहीं आ रहे उन्हें आने के लिए मजबूर नहीं किया। महोदय जी एक बात और आपसे कहना चाहुंगी कि स्थिति अभी ठीक नहीं है, लेकिन ठीक होगी इसका मुझे और कई लोगों को यक़ीन है। इसलिए नकारात्मकता का साथ छोड़ सकारात्मकता का हाथ थाम लीजिए बेहतर होगा।

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  • shrikant kaushal (Badarpur) says:

    sahi kaha aisa toh har jageh hota hai.or ab toh kai channels 2 months bhi theek se nahi chal pate.

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  • The only thing i can Comment is about the deal of Rs 15 Crore with Mamta Bannerjee it is totally baseless allegation,such kind of deal never happened and i can also prove on the above allegation.
    The Car which was hired for Kolkata Office i think its owner was related to Mamta Bannerjee and since there was late of two months in paying the rent of Car Bill, he use to come and shout at Kolkata Office saying i m relation of Mamata Bannerjee i wl do this i wl do that and if such kind of deal happened with Mamata he wud have never shouted at office for a petty payments.

    Everyone goes thru some gud and some bad phase,presently CVB is going thru same phase hopefully it will be sorted out.Insha Allah…….
    Hope for the Best.
    Md Suffian
    CVB-Bhubaneswar Bureau

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  • whoever has written this letter, must check his facts. I have worked with Yashwantji and Shalinderji and i can guarantee that they are trustworthy people. Rare ones in the field of journalism. They will never do unjustice to anyone and they are capable of coming out of any bad phase( if there is any)

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  • shruti gupta says:

    बेनाम महोदय……..आप जो भी है पर आपका लेख पढकर मुझे यह यकीन ज़रूर हो गया है की आप सी.वी.बी. के हितैषी तो नहीं ही है… मुझे इस बात का बुरा नहीं लगा की आपने अपनी व्यथा को लिखा है पर दुःख तो इस बात का लगा की आपने अपने लेख में लिखी कई बाते झूठी लिखी है…अगर वाकई आप कभी सी.वी.बी. से जुड़े रहे है तो मुझे इस बात का बहुत दुःख है की आप यशवंत जी,प्रदीप जी जैसे लोगो को नहीं पहचान पाए…भले ही आज यह कंपनी बुरे दौर में चल रही हो लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह है की कंपनी ने अपने किसी भी इम्प्लाय को निकाला नहीं बल्कि उदारता दिखाते हुए यह कहा की आप सभी स्वतंत्र है कंपनी छोडने के लिए क्योकि सभी पर अपने अपने परिवार की जिम्मेदारी है और इस समय हमारी कंपनी आपको सैलरी देने की स्थित में नहीं है … और साथ ही साथ यह यकीन भी दिलाया की कंपनी की स्थिति ठीक होने पर वो हम सभी को दोबारा मौका देगे … अब भला इससे जयादा कोई क्या उदारता दिखा सकता है…
    आपको पता नहीं होगा की मैं भी इसी संस्था का ही एक हिस्सा हू और मैं भी अपने घर से दूर रहती हू और खुदका और अपनी बहन का खर्च उठती ही .. एकाएक कपनी के बुरे दौर की वजह से मैं भी काफी दुखी हुयी लेकिन निराश नहीं .. क्योकि मेरा मानना है की जहाँ चाह है वह राह है….और चाह रखने वालो को उनकी राह ज़रूर मिलती है… आज भले ही मैंने रोजी का दूसरा कामचलाऊ विकल्प ढूढ़ लिया हो लेकिन फिर भी मैं इस कम्पनी के लिए खबरे भेज रही हू और बिना किसी अपेक्षा के कंपनी से जुडी रहने की उम्मीद करती हू… उम्मीद करती हू की यशवंत जी और उनकी टीम कुछ न कुछ अच्छा ज़रूर करेगी क्योकि पत्रकारिता की दुनिया में यशवंत जी जैसे लोग कम ही होते है… ….
    इसलिए महोदय आप से उम्मीद करती हू की इस तरह से रोष प्रकट करने की बजाये यदि आप आगे बढ़ने की सोंचे तो शायद ईश्वर भी आपका साथ देगे…और पत्रकारिता की सबसे बुरी आदत दूसरों पर आरोप प्रत्यारोप को करना भी छोड़ दीजिए हमेशा खुश रहेंगे…
    ये मत सोंचो की आपने क्या खो दिया बल्कि ये सोंचो की आप और क्या पा सकते है….
    Shruti Gupta(Lucknow)

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