जागरण, दिल्‍ली में जीजा-साले के मन-मुताबिक होगा सेलरी इंक्रीमेंट

दैनिक जागरण के दिल्‍ली-एनसीआर में अपने मनमाफिक परिवर्तन कराने के बाद जीजा-साले की जोड़ी फिर फार्म में आ गई है. सूचना है कि पुराने इंचार्जों द्वारा रिकमंड किए गए वेतन वृद्धि के फैसले को दरकिनार करके इस पर नए सिरे से निर्णय लिया जाएगा. इस पर कैंची चलाने की योजना है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार दिल्‍ली के तीनों कार्यालयों बाहरी दिल्‍ली, ईस्‍ट दिल्‍ली और वेस्‍ट दिल्‍ली के लोगों की सेलरी बढ़ोत्‍तरी लिस्‍ट आईटीओ भेज दी गई है.

अब यहां साले कविलाश इनके वेतन पर अपना निर्णय लेंगे. पहले सूचना थी कि दिल्‍ली में बारह प्रतिशत तक वेतन बढ़ोत्‍तरी होगी, पर ताजा सूचना है कि जीजा-साले की सदाबहार जोड़ी अब आठ प्रतिशत वेतन वृद्धि देने वाली है. हां, चहेतों को जरूर बारह प्रतिशत तक सेलरी इंक्रीमेंट किए जाने की चर्चा है. आपको बता दें कि तीनों कार्यालयों के पत्रकारों के अप्रेजल फार्म पर पुराने कार्यालय प्रभारियों ने अपनी संस्‍तुति दे दी थी. परन्‍तु उन लोगों का जीजा-साले से याराना नहीं होने के चलते इस मामले को फिर से देखा जा रहा है.

बाहरी दिल्‍ली के पुराने प्रभारी नवीन गौतम, ईस्‍ट दिल्‍ली के प्रभारी कुमार संजय तथा वेस्‍ट दिल्‍ली के प्रभारी संजीव गुप्‍ता ने अपने तबादले से पहले ही कर्मचारियों के बारे में अपनी रिपोर्ट दे दी थी. परन्‍तु इन लोगों को किनारे लगाने के बाद यह जोड़ी फिर से अप्रेजल को अपने तरीके से करने की कयावद रच डाली है. अब उन्‍हीं को बढि़या इंक्रीमेंट मिलने की संभावना बन गई है, जो जोड़ी के आगे-पीछे घूमते रहते हैं. चरण बंदना करते हैं.

वैसे चर्चा तो यह भी है कि इस जोड़ी ने ये सारे बदलाव तथा अपने चहेतों को दिल्‍ली में बैठाने की तैयारी सिर पर आ चुके निगम चुनावों को देखते हुए किया तथा करवाया है. ताकि चुनावों के दौरान ज्‍यादा से ज्‍यादा मलाई काटी जा सके. दूसरी तरफ जीजा-साले के सेलरी इंक्रीमेंट के पुनरीक्षण तथा कटौती की संभावनाओं को देखते हुए पत्रकार एवं कर्मचारी काफी गुस्‍से में हैं. अब गुस्‍से में वे क्‍या करेंगे वे ही जाने, पर जीजा-साले की तो चांदी ही चांदी है.

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Comments on “जागरण, दिल्‍ली में जीजा-साले के मन-मुताबिक होगा सेलरी इंक्रीमेंट

  • रामाशीष says:

    अरे नहीं भाई यह केवल दिल्‍ली की बात ही नहीं है, दिल्‍ली से लेकर झारखंड उत्‍तर प्रदेश और अन्‍य शहरो में भी चरण वंदना पर वेतन इंक्रीमेंट तय होते रहे है होते रहेंगे जब तक कि जागरण का भटठा नहीं बैठ जाए। अभी झारखंड में सैलरी सिर्फ इसलिए रुकी हुई है कि कयोंकि यहां के संपादकों और प्रबंधकों के चहेतों के अनुसार वेतन इंक्रीमेंट नहीं हो रहा है। जागरण के कानून से उपर ये लोग हमेशा रहे है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। दिल्‍ली से झारखंड पहुंचे कमलेश रघुवंशी को भी चक्‍कर में यहां के संपादकों ने डाल दिया है। उन्‍हें भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि सच क्‍या है तो झूठ क्‍या। आखिर स्‍थानीय संपादक जिसे प्रोजेक्‍ट करेंगे उसी की तो सुनी जाएगी और वे अपने चहेतों को ही तो प्रोजेक्‍ट करेगे जैसा अब तक होता आया है। भास्‍कर का हौवा दिखाकर रांची, जमशेदपुर से लेकर धनबाद तक लोगों ने पहले ही मनमौजी इंक्रीमेंट ले लिया। जो 500 रुपये के लायक नहीं था उसे तोप बताकर 1000 से 3000 रुपये का इंक्रीमेंट दे दिया गया। मैनेजमेंट ने यह कभी नहीं पूछा की आखिर ये लोग इतने ही काबिल थे तो इन्‍हें दिल्‍ली अथवा रांची व्‍यूरों में जिम्‍मेदारी क्‍यूं नहीं दे दी गई । तब शायद उनकी योग्‍यता सामने आ पाती। यह कमाल भी चरण वंदन की परंपरा का पोषक ही रहा है। अब इन्‍हीं तेलुओं का भला करने के लिए आकाओं ने फिर एडी चोटी एक कर दी है। जागरण मैनेजमेंट को फिर से उल्‍लू बनाने की पूरी तैयारी है यह कहकर कि नये पैटर्न पर इंक्रीमेंट से गलत संकेत जाएगा। क्‍योंकि अगर नये पैटर्न पर इंक्रीमेंट हुआ तो संपादकों के तेलुओं पर ही सीधी गाज गिरेगी। अब अपने पैरौपुत्रों को बचाने के लिए की गई इन तथाकथितों की करतूत के कारण पूरे झारखंड में ही सैलरी रुकी हुई है और कर्मचारी परेशान है।

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  • ashok sharma atul says:

    khabar hai. achchi yaa buri jagran wale jaane, magar is khabar ne yeh jaroor sthapit kar diya ki jis media house mein “naaten rishtedaaron” ke munh dekhkar salar increment hoti hai, waise house mein patrakar nahi sirf oil polishing aur chamchagiri karne walon ka hi bhala ho sakta hai. yeh baate main yehan purvottar ke print media ke baare me bhi kah sakta hoon, kyunki main iska ek pratkhya sakshi hoon.
    aapka
    ashok s atul, guwahati, assam

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