‘जागरण लाचार, खोजे नहीं मिल रहे पत्रकार’

आज फेसबुक पर दैनि‍क जागरण के एक रिपोर्टर ने अपनी फेसबुक पर लिखा है कि जागरण, सिलीगुड़ी को हिंदी और बांगला में काम करने वाले चाहिए. इच्‍छुक लोग उनसे सम्‍पर्क करें. इन रिपोर्टर का नाम है पवन शुक्‍ला. हम जानना चाहते हैं कि जागरण की हालत इतनी खराब हो गई है कि अब उसे अपने रिपोर्टर को जिम्‍मेदारी दी है कि वो काम करने वालों को खोज कर लाए. वैसे भी जागरण, सिलीगुड़ी में कोई जाना नहीं चाहता.

पिछले दो महीनों में ही दस लोग रिजाइन दे चुके हैं. किसी तरह यहां पर काम चलाया जा रहा है. पर हालात इतने खराब होंगे इसकी उम्‍मीद तो किसी को नहीं थी. बताया जाता है कि यहां कम पैसा और काम की अधिकता की वजह से कोई पत्रकार काम करना नहीं चाहता. फेसबुक पर पवन शुक्‍ला की अपील देखी जा सकती है, जो जागरण, सिलीगुड़ी की लाचारी व्‍यक्‍त कर रहा है.

फेसबुक

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

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Comments on “‘जागरण लाचार, खोजे नहीं मिल रहे पत्रकार’

  • बेनामी says:

    सर जी, विपिन बहुगुणा को दैनिक हिंदुस्तान से खड़े-खड़े निकाल दिये जाने की खबर तो आपने तुरंत छाप दी थी अब ये भी तो छाप दीजिये कि ढाई महीने बेरोजगार रहने के बाद उनको आज समाज में काम मिल गया है। वो खेल का पन्ना ही देखेंगे।

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  • pawan shukla danik jagran mai naukari dilane ke naam per kia logo se wasuli kar chuke hai. siliguri ke sath hee yeh bhagalpur jagaran mai bhi bharti karane ke lea theka lete hai. batate hai woh mere bahnoi hai.

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  • कमल शर्मा says:

    पवन जी संपादक बनाओ तो मैं आने पर विचार करुं। ;D;D;D;D

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  • कमल शर्मा says:

    पवन जी यदि मुझे संपादक बनाओं तो मैं आने पर विचार करुं। ;D;D;D;D;D

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  • yasvant ji ek samy aayega ki chnnl ke malik kud hi repoter ban jaayege aaur chann me tala lag jaayegi imandar reporter se vigyapan magaavo aur intern se sehath banoo

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  • सावधान…………कोई मीडिया में नहीं आना चाह रहा ..स्थायीत्वा नहीं है …. भायीओ अब वो दिन दूर नहीं कि मीडिया में काबिल और अनुभवि लोगो कि कमी हो जाएगी … रही बात जागरण की तो अपने मीडिया स्कूल के लोगो को मौका दे ….. [b][/b]

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  • संजय कुमार सिंह says:

    मेरा तो निश्चित मानना है कि हिन्दी अखबारों को कुछ दिनों बाद काम करने वाले नहीं मिलेंगे। अभी तो कुछ लोग हैं जो जायज-नाजायज तरीके से कार्यकर्ता ढूंढ़कर अखबार निकाल देंगे। पर कुछ समय बाद जब संपादक नामक जीव नहीं रह जाएगा तो मालिकों की दलाली करने वाले पिटेंगे और मालिक जब तक सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए संभलेंगे तब तक देर हो गई रहेगी। अभी तो कुछ पत्रकार पत्रकारिता पढ़ाने के नाम पर भी कार्यकर्ता तैयार कर दे रहे हैं पर वो भी ज्यादा दिन नहीं चलेगा। देखते रहिए।

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  • ek pathak siliguri se... says:

    Dear yashwant jee, Siliguri jagran ke sampadak gyaneswar jee ki dabagai se sabhi paresan hain. Unhe kuch chatukaro ke siwa kisi par bharosa nahi rahta. Jo jitna kam karta hai, usi par bojh aur dal diya jata hai. Jabki kamchoro aur chatukar aram farmate rahte hain. Yahi karan hai ki siliguri unit se Province Incharge hemant tiwari, Har desk ka anubhav prapat kar chuke Local In charge kishore kr, Front page Incharge Vikrant Ghosh aur Reporter Rita Das Kam chodh Chuke hain. Gyaneswar jee dwara 10000 ke salary par laye gaye Gorakhpur ke Badnam Reporter Laxmikant dubey aur “Net ke chor” Dinesh Ch. Mishra (15000 salary) bhi unhe Dhoka dekar nikal liye. Itna sab hone ke bad v siliguri ke sampadak ko samajh nahi aayi hai Aur we kam wale logo ko pachan nahi saken hai. Ab to iss unit ka bhagwan hi malik hai…

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  • जागरण का एक पूर्व पत्रकार says:

    दैनिक जागरण ऊपर के पदों पर आसीन लोगों को तो अच्‍छा पैसा देता है, लेकिन रिपोर्टरों और सब एडिटरों को पैसा देने में कंजूसी। अगर जागरण को अच्‍छे रिपोर्टर चाहिए तो अच्‍छा पैसा देना होगा। लखनऊ में जिस बीट के दिग्‍गज अमर उजाला चले गए, वो बीट बर्बाद हो गई। उदाहरण के तौर पर मेडिकल, क्राइम, एजूकेशन, आदि। उनकी भरपाई आज तक नहीं हो सकी। जागरण वाले सोचते हैं आज भी उन्‍हें पांच-छह हजार में रिपोर्टर मिल जाए, 3-4 साल का एक्‍सपीरियंस होगा, तब मरी गिरी हालत में 10 हजार देते हैं, साहब 10 हजार में अब कुछ नहीं होने वाला, क्‍योंकि आप ही के अखबार के संपादकीय में रोजाना महंगाई की मार की चर्चा सबसे ज्‍यादा होती है।

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