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जिंदा होते तो जेडे भी न मानते पुलिस की थ्योरी

मुंबई. पवई के हीरानंदानी इलाके में 11 जून को वरिष्ठ पत्रकार जे. डे की हत्या के बाद उनकी व्यक्तिगत एवं पेशवर जिंदगी पुलिस और मीडिया की जांच के दायरे में आ गई है। एक ऐसा आदमी जो गोपनीयता बनाए रखता था। अपनी जिंदगी और परिवार को लेकर वह बहुत संजीदा था। अब उसी जे. डे की जिंदगी के पहलुओं को माइक्रोस्कोप के लेंस की मदद से जांचा जा रहा है। डे की हत्या को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई।

मुंबई. पवई के हीरानंदानी इलाके में 11 जून को वरिष्ठ पत्रकार जे. डे की हत्या के बाद उनकी व्यक्तिगत एवं पेशवर जिंदगी पुलिस और मीडिया की जांच के दायरे में आ गई है। एक ऐसा आदमी जो गोपनीयता बनाए रखता था। अपनी जिंदगी और परिवार को लेकर वह बहुत संजीदा था। अब उसी जे. डे की जिंदगी के पहलुओं को माइक्रोस्कोप के लेंस की मदद से जांचा जा रहा है। डे की हत्या को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई।

इनमें से कुछ में डे की छवि को खराब करने की कोशिश भी हुई। यह विचार आया कि जे. डे अंडरवर्ल्ड गैंग के काफी करीब पहुंच गए थे और हो सकता है कि उन्होंने कहीं पर लक्ष्मण रेखा लांघ ली हो। हालांकि जो लोग सालों से पेशेवर रूप से जे. डे को जानते हैं, वह इस विचार को मानने से स्पष्ट इनकार करते हैं। डे भले ही अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर्स से संपर्क में थे, लेकिन खबर से ज्यादा उनके लिए कुछ नहीं था। वह अपनी लक्ष्मण रेखा नहीं लांघ सकते।

एक दशक से ज्यादा समय से डे को जानने वाले एक पत्रकार का कहना है, ‘डे सभी अंडरवर्ल्ड गैंग के गैंगस्टर्स को जानते थे। वास्तव में मुंबई के वह ऐसे पत्रकार थे, जिनकी पहुंच सभी गैंगस्टर्स तक थी। लेकिन उन्होंने कभी भी अपने पेशागत आदर्शो का उल्लंघन नहीं किया।’ साथी पत्रकारों के ‘दादा’ डे बहुत ही मधुभाषी थे। नए पत्रकारों की मदद को हमेशा तैयार रहते थे। डे अक्सर कहते थे, ‘यह भविष्य की पीढ़ी है। यदि उन्हें इस उम्र में उचित मार्गदर्शन मिला तो वे आगे जाकर अच्छे जर्नलिस्ट बन सकते हैं।’

मुंबई पुलिस ने सोमवार को दावा किया कि गैंगस्टर छोटा राजन ने डे की हत्या की सुपारी दी थी। यह डे के कई करीबी दोस्तों के लिए बहुत बड़ा आश्चर्य है। बीत वर्षो में कई मौकों पर डे ने राजन से बातचीत की है। हमेशा से उसने लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखा। वास्तव में यदि वह जिंदा होते और उन्हें बताया जाता कि राजन उन्हें मारने की साजिश रच रहा है, तो वह हंसकर टाल जाते। वे कहते, ‘मैं बहुत छोटा आदमी हूं, राजन मुझे क्यों मारेगा।’

दैनिक भास्कर में प्रकाशित निखिल दीक्षित की रिपोर्ट

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