क्या पत्रकार जेडे के दाऊद से रिश्ते थे?

मुंबई. वरिष्‍ठ पत्रकार ज्‍योतिर्मय डे (जेडे) की हत्‍या मामले की जांच में जुटी मुंबई पुलिस ने काफी दिनों बाद एक ऐसा बयान दिया है जिससे हत्याकांड की जांच नई दिशा में मुड़ गई है. मुंबई पुलिस के एक सनसनीखेज खुलासे में कहा गया है कि पत्रकार जेडे के माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम से रिश्‍ते हो सकते हैं. पुलिस के मुताबिक संभव है कि जेडे ने बीते अप्रैल में लंदन में दाऊद के सहयोगी इकबाल मिर्ची से मुलाकात की.

मुंबई में जेडे की उनके घर के सामने हत्‍या के बाद पुलिस शुरुआत में इन सवालों का जवाब ढूंढने में जुट गई थी कि क्‍या जेडे ने अपनी लंदन यात्रा के दौरान इकबाज मिर्ची उर्फ इकबाल मेमन से मुलाकात की थीय हालांकि पुलिस लंदन में मेमन की मौजूदगी की पुष्टि नहीं कर सकी थी. हाल में लंदन में मिर्ची की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्‍या जेडे अपनी लंदन यात्रा के दौरान मेमन के संपर्क में आए थे. एक सीनियर पुलिस अधिकारी का इस बारे में कहना है कि हमारी जांच से संकेत मिले हैं कि जेडे अप्रैल में लंदन यात्रा के दौरान मेमन से मिले हो सकते हैं. छोटा राजन को लगा कि जेडे ने दाऊद के सहयोगी मेमन को उसके बारे में कुछ सूचना दी इसके बाद उसने पत्रकार को मारने का हुक्‍म दिया.

ज्ञात हो कि मुंबई स्थित एक अखबार में पत्रकार रहे जे डे की बीते 11 जून को पावई इलाके में मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस के अनुसार जे डे की हत्या के पीछे छोटा राजन का हाथ है और उसने ही हमलावरों को 5 लाख की सुपारी दी थी।

जिंदा होते तो जेडे भी न मानते पुलिस की थ्योरी

मुंबई. पवई के हीरानंदानी इलाके में 11 जून को वरिष्ठ पत्रकार जे. डे की हत्या के बाद उनकी व्यक्तिगत एवं पेशवर जिंदगी पुलिस और मीडिया की जांच के दायरे में आ गई है। एक ऐसा आदमी जो गोपनीयता बनाए रखता था। अपनी जिंदगी और परिवार को लेकर वह बहुत संजीदा था। अब उसी जे. डे की जिंदगी के पहलुओं को माइक्रोस्कोप के लेंस की मदद से जांचा जा रहा है। डे की हत्या को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई।

इनमें से कुछ में डे की छवि को खराब करने की कोशिश भी हुई। यह विचार आया कि जे. डे अंडरवर्ल्ड गैंग के काफी करीब पहुंच गए थे और हो सकता है कि उन्होंने कहीं पर लक्ष्मण रेखा लांघ ली हो। हालांकि जो लोग सालों से पेशेवर रूप से जे. डे को जानते हैं, वह इस विचार को मानने से स्पष्ट इनकार करते हैं। डे भले ही अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर्स से संपर्क में थे, लेकिन खबर से ज्यादा उनके लिए कुछ नहीं था। वह अपनी लक्ष्मण रेखा नहीं लांघ सकते।

एक दशक से ज्यादा समय से डे को जानने वाले एक पत्रकार का कहना है, ‘डे सभी अंडरवर्ल्ड गैंग के गैंगस्टर्स को जानते थे। वास्तव में मुंबई के वह ऐसे पत्रकार थे, जिनकी पहुंच सभी गैंगस्टर्स तक थी। लेकिन उन्होंने कभी भी अपने पेशागत आदर्शो का उल्लंघन नहीं किया।’ साथी पत्रकारों के ‘दादा’ डे बहुत ही मधुभाषी थे। नए पत्रकारों की मदद को हमेशा तैयार रहते थे। डे अक्सर कहते थे, ‘यह भविष्य की पीढ़ी है। यदि उन्हें इस उम्र में उचित मार्गदर्शन मिला तो वे आगे जाकर अच्छे जर्नलिस्ट बन सकते हैं।’

मुंबई पुलिस ने सोमवार को दावा किया कि गैंगस्टर छोटा राजन ने डे की हत्या की सुपारी दी थी। यह डे के कई करीबी दोस्तों के लिए बहुत बड़ा आश्चर्य है। बीत वर्षो में कई मौकों पर डे ने राजन से बातचीत की है। हमेशा से उसने लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखा। वास्तव में यदि वह जिंदा होते और उन्हें बताया जाता कि राजन उन्हें मारने की साजिश रच रहा है, तो वह हंसकर टाल जाते। वे कहते, ‘मैं बहुत छोटा आदमी हूं, राजन मुझे क्यों मारेगा।’

दैनिक भास्कर में प्रकाशित निखिल दीक्षित की रिपोर्ट

शर्मनाक! पुलिस-सरकार 13 दिन बाद भी जेडे के हत्यारों तक न पहुंच सकी

: अंडरवर्ल्ड ही नहीं, पुलिस से भी है पत्रकारों को खतरा : नई दिल्ली : आज मीडिया व पत्रकार कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। खासकर वे पत्रकार ज्यादा असुरक्षित हैं, जो खोजी या अपराध विशेष समाचारों में जुटे हुए हैं। हैरत की बात यह है कि पत्रकारों को सिर्फ बदमाश, माफिया, नेता और अंडरव‌र्ल्ड से ही खतरा नहीं है, बल्कि वे पुलिस और जांच एजेंसियों के भी निशाने पर हैं।

लिहाजा, सभी पत्रकारों को एकजुट होकर इसका मुकाबला करना चाहिए। कुछ यही निष्कर्ष था फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में गुरुवार को आयोजित विचार संगोष्ठी का। मुंबई में जागरण समूह के अंग्रेजी अखबार मिड डे के पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या से उपजे सवालों पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। ”शूटिंग द मैसेंजर्स” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार जे डे की हत्या के 13 दिन बीतने पर भी हत्यारों को गिरफ्तार न करने पर मुंबई पुलिस की कड़ी निंदा की गई।

संगोष्ठी का संचालन सीएनएन-आईबीएन की डिप्टी एडिटर सागरिका घोष ने किया। संगोष्ठी की शुरूआत करने से पहले जे डे की याद में एक मिनट का मौन रख उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। तत्पश्चात मुंबई मिड डे के कार्यकारी संपादक सचिन कालबाग ने जे डे की हत्या के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जे डे की हत्या के पीछे कोई एक खोजी स्टोरी नहीं कही जा सकती क्योंकि जे डे ने न केवल तेल माफिया, अंडरव‌र्ल्ड, बदमाश व स्थानीय नेताओं पर दर्जनों खोजपरक रिपोर्ट छापी, बल्कि पुलिस पर भी कई खबरें की। यही हत्या की वजह बनी। लेकिन बहुत शर्म की बात है कि पुलिस और सरकार 13 दिन बाद भी उनके हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी है। साभार : दैनिक जागरण

महाराष्ट्र के सीएम और गृह मंत्री की पीसी का बायकाट करेंगे पत्रकार

: JUSTICE FOR J DEY : AN UPDATE : After the overwhelming protests and sit-ins by journalists on Monday, June 13, yesterday Wednesday saw a day-long hunger strike by over 200 journalists at the Marathi Patrakar Sangh compound. Chain hunger strikes were also organized at all district headquarters like Pune and Nagpur.

Tempers ran high through the day since the chief minister Prithviraj Chavan not only turned down the demand for transferring the investigation into the J Dey killing to the CBI, but also failed to push through the law for protection of journalists as he had promised on Monday. Reports emerging from the cabinet meeting held yesterday said that both ruling NCP and Congress ministers opposed the law for security of journalists and instead demanded a state level body where ministers and others can lodge complaints against journalists!

A solemn and well-attended condolence meeting was also held yesterday evening in the memory of J Dey at the protest site in Mumbai. Senior Hindi journalist O P Tiwari, and DNA editor Aditya Sinha were among those that spoke on the occasion.

SUSPECTS RELEASED

The highlight of yesterday’s cabinet briefing was the news that 3 suspects had been detained and a police theory was leaked that it was the Chota Shakeel mob that had done the job. The name of a Sandalwood smuggler has also been mentioned as the possible conspirator who had organized the hit. By the morning of today June 15, all these theories had evaporated, as the Mumbai Police was forced to release the suspects for want of evidence. Chota Shakeel, speaking from his den, denied he had anything to do with the execution.

The complete confusion and possible collusion was highlighted by counsel for the Press Club, Navroz Seervai, who pressed the prayer that the investigations be transferred to the CBI. The Press Club and the Marathi Patrakar Parishad have moved an intervention application along with two criminal PILs pleading for the transfer of the J Dey case to the CBI. The bench of Ranjanna Desai and More JJ have admitted the intervention application and have directed the Mumbai Police to file a report on the progress of the case. The High Court bench will hear the matter again on Tuesday June 21. Considering the gravity of the case, the Advocate General has been directed to appear on behalf of the government on Tuesday.

FUTURE ACTION

The coordination committee of journalist organizations is considering calling for a boycott of all press and electronic coverage of meetings and briefings by the chief minister and home minister R R Patil. A final decision will be taken soon. A large number of Press Clubs and other journalist organizations have held protest rallies and condolence meetings all over the country. These include protests in Delhi, Bangalore, Ahmedabad and Agartala.

More importantly, editors of national newspapers and TV networks are meeting in Mumbai on Saturday afternoon to take up the issue of justice for J Dey with the state government. They will also address a gathering of journalists in the evening. This will be followed up with representations to Union Home minister P Chidamabaram and the Prime Minister Mr Manmohan Singh next week.

Keep the fires burning!

Secretary

Press Club

Mumbai

June 16, 2011

जेडे हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने के लिए मुंबई के पत्रकार भूख हड़ताल पर

मुंबई से खबर है कि जेडे हत्याकांड की जांच सीबीआई से न कराने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले के विरोध में आज पचास से ज्यादा पत्रकारों ने क्रमिक भूख हड़ताल की. मूसलाधार बारिश के बावजूद पत्रकार क्रमिक भूख हड़ताल के लिए ‘मुम्बई मराठी पत्रकार संघ’ में जुटने लगे. मुम्बई प्रेस क्लब के अध्यक्ष गुरबीर सिंह का कहना है कि कई और पत्रकार भूख हड़ताल में शामिल होंगे.

पत्रकार हल्ला विरोधी क्रुति समिति (पीएचवीकेएस) के अध्यक्ष एस.एम.देशमुख ने कहा कि राज्य के विविध हिस्सों में इसी तरह की सांकेतिक हड़तालें आयोजित की गई हैं. मुम्बई पत्रकार क्लब के सचिव सुनील शिवदेसानी ने कहा, ‘मुख्यमंत्री ने गृहमत्री आर.आर. पाटील के इस्तीफे और शहर के पुलिस आयुक्त अरूप पटनायक के निलम्बन की हमारी मांगों पर विचार करने से इंकार कर दिया है इसके मद्देनजर पीएचवीकेएस ने आज से क्रमिक भूख हड़ताल के साथ अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है.’ देशमुख ने बताया, ‘मुम्बई में जहां आंदोलन जारी रहेगा वहीं इसी तरह की सांकेतिक भूख हड़तालें पुणे, औरंगाबाद, नागपुर और राज्य के कई अन्य जिलों में भी आयोजित की गई हैं.’

सोमवार को 500 से ज्यादा पत्रकारों के जुलूस के बाद राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया था कि वह पत्रकारों की हिफाजत के लिए कानून बनाएगी लेकिन उसने डे की हत्या की जांच का दायित्व सीबीआई को सौंपने से इनकार कर दिया था. मंगलवार को मुख्यमंत्री चव्हाण ने एक बार फिर इस हत्याकांड की जांच संघीय जांच एजेंसी से कराने की मांग ठुकरा दी. हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि मुम्बई पुलिस को इस हत्याकांड का कुछ सुराग लगा है.

साभार : नवभारत टाइम्स

मेरे बेटे जेडे के हत्यारे जेल जाएं, यही मेरी आखिरी इच्छा : मां

ज्योतिर्मय डे को हत्या से पहले मुम्बई के बाहर बहुत कम लोग जानते होंगे। वे अपराध से संबंधित पत्रकारिता से जुड़े हुए थे। बीसियों बरसों तक हिंदुस्तान टाइम्स-इंडियन एक्सप्रेस वगैरह में काम करने के बाद पिछले चार वर्षों से मिड डे मुम्बई में थे। इसी दौरान उनकी दो पुस्तकें खल्लास..एन ए टू जेड गाइड टू द अंडरववर्ल्ड और जीरो डायल.. द डेंजरस वर्ल्ड ऑफ इन्फोर्मर्स आईं।

ये दोनों पुस्तकें अंडरवर्ल्ड के रहस्यों का बेबाकी से खुलासा करती हैं.. ऐसी ही ज्योतिर्मय की पत्रकारिता थी। उनके निशाने पर अंडरवर्ल्ड और दाऊद इब्राहिम रहा और आतंकवाद  की चुनौतियों से जनता को जागरूक करने के काम में जुटे रहे। वे खुद मौकों पर जाते थे और घटना की गहराई में जाकर पाठकों को उसकी जानकारी देते थे। पिछले दिनों ही जब दिल्ली हाईकोर्ट के सामने विस्फोट हुआ तो उन्होंने खबर दी कि मुम्बई के कोर्टों की कितनी कम हिफाजत है और वहां कभी भी आतंकवादी घटना हो सकती है। पेट्रोल की कीमत में 5 रुपए लीटर की बढ़ोत्तरी हुई तो उन्होंने दस हजार करोड़ रुपए की तस्करी का सनसनीखेज भंडाफोड़ किया। डीजल की अंतरर्राष्ट्रीय तस्करी से लेकर उसकी आपूर्ति तक का रहस्योद्घाटन करके उन्होंने मुंबई को चौंका दिया। ओसामा बिन लादेन को मार दिए जाने के बाद उन्होंने कराची में रह रहे दाऊद के बारे में खोजपूर्ण खबर दी।

निश्चय ही, वे एक बड़े पत्रकार थे और अपराध से संबंधित पत्रकारिता का गुरु भी उन्हें कहा जा सकता है लेकिन वे तामझाम व पीत पत्रकारिता और सुविधाओं के पीछे नहीं भागते रहने के कारण विशुद्ध रूप से पत्रकारीय धर्म के निर्वहन और परिवार पोषण से जुड़े हुए थे। इसी महीने उन्हें ऑफिस के काम से फिलीपींस भी जाना था और हत्या वाले दिन वे उसी यात्रा के संबंध में कुछ कागजी कार्रवाई में लगे हुए थे तथा अपनी धर्मपत्नी को फोन किया कि आधे घंटे में घर पहुंच रहे हैं। वह आधा घंटा पूरा नहीं हुआ। पवई के भीड़ भरे इलाके में चार अपराधियों ने उन्हें गोलियों से भून दिया।

अब सवाल यह तो है कि ज्योतिर्मय की हत्या के पीछे कौन है.. अंडरवर्ल्ड, तेल माफिया या कथित पुलिस अधिकारी.. जिसकी शिकायत ज्योतिर्मय महाराष्ट्र के गृहमंत्री आर.आर. पाटील से कर चुके थे और जिससे उन्हें धमकी मिली बताई जाती है। कहा जा रहा है कि मुम्बई के उस पुलिस अधिकारी ने दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पाटकर की मदद की थी; जबकि ज्योतिर्मय हसीना के खिलाफ लिखते रहे थे। ज्योतिर्मय ने उस अधिकारी के भ्रष्टाचार के सबूतों और एसीबी जांच रिपोर्ट के बारे में भी गृहमंत्री से बात की थी। इसके बाद अधिकारी को कम महत्व वाले पद पर लगाया भी गया। एक पूर्व इन्काउंटर विशेषज्ञ भी संदेह के घेरे में है। पुलिस और पत्रकारों के लिए ज्योतिर्मय की हत्या की गहराई में जाना जरूरी है। पुलिस के साथ-साथ मुम्बई के पत्रकारों को भी इस घटना के दोषियों का पता लगाने की मशक्कत करनी चाहिए।

ज्योतिर्मय की वृद्ध मां बीना ने यही सवाल उठाया है, ‘मेरे बेटे ने जीवन भर दूसरों के लिए संघर्ष किया.. अब उसके लिए कौन आगे आता है!’ उनका कहना है कि वे जब तक बेटे के हत्यारों को जेल की सलाखों के पीछे नहीं देख लेतीं तब तक मरना भी नहीं चाहतीं। ज्योतिर्मय की मां जिस सवाल का जवाब चाहती हैं.. उसे पूरा करना पूरे समाज का दायित्व है.. पत्रकारों की भी बड़ी भूमिका है।

अभी राजस्थान पत्रिका ने घाना के जिन पत्रकार एनास आर्मेयाव एनास को के.सी. कुलिश अवार्ड दिया है.. वे एनास पुरस्कार लेने इसीलिए दिल्ली नहीं आ सके क्योंकि उनकी जान को खतरा है तथा विरोधियों ने उन्हें सरकार से धन लेकर पत्रकारिता करने जैसे आरोपों में फंसा रखा है। वे चेहरा ढंककर रहते हैं। भारत में भी पत्रकार ज्योतिर्मय की शहादत इन छह महीनों में तीसरी ऐसी घटना है। पिछले महीनों ही बिलासपुर प्रेस क्लब के महासचिव और दैनिक भास्कर के संवाददाता सुशील पाठक को गोलियों से भून दिया गया। वे ऑफिस से घर लौट रहे थे। उनके हत्यारों का पता नहीं लगाया जा सका। छत्तीसगढ़ सरकार ने वह मामला सीबीआई को जांच के लिए सौंपा है। नई दुनिया के पत्रकार उमेश राजपूत को भी घर के बाहर नकाबपोशों ने गोली मार दी; अपराधी यह पर्चा छोड़कर गए कि उनके खिलाफ लिखोगे तो यही अंजाम होगा।

आरोप है कि उन्होंने आंखों के ऑपरेशन में की जाने वाली लापरवाही पर लिखा था। उस संबंध में गिरफ्तारियां भी हुईं लेकिन जब तक दोषीजनों को सजा नहीं हो, तब तक इन सबका विशेष अर्थ नहीं है। ज्योतिर्मय के बारे में महाराष्ट्र सरकार 48 घंटों में अपराधियों को पकडऩे का दावा कर रही थी.. जो पूरे हो चुके हैं। दूसरी ओर, हाल यह है कि अपराधियों के जारी किए गए स्कैच की सत्यता पर भी संदेह है। जिन प्रत्यक्षदर्शी की निशानदेही पर स्कैच बने हैं.. उनका कहना है कि बरसात और शीशे के अंदर से देखने के कारण वे हत्यारों को ठीक से पहचानने में असमर्थ हैं। यानी, हत्यारे पकड़ से दूर हैं और गहरी तफ्तीश की जरूरत है।

यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं है; हालांकि कोई भी हत्या कम गंभीर नहीं होती। लेकिन यह बड़ा विषय है कि ज्योतिर्मय पत्रकारिता के जिस पवित्र पेशे से जुड़े रहकर पत्रकारिता धर्म का निर्वाह कर रहे थे और उस अंडरवर्ल्ड की कारगुजारियां उजागर कर रहे थे; जिनसे पुलिस-प्रशासन भी खौफ खाता है। वे चाहते तो एसी रूम में बैठकर प्रेस विज्ञप्तियों के सहारे जिंदगी बिता देते लेकिन नाम के अनुरूप ज्योतिर्मय को वह मंजूर नहीं था। वे समाज को सम्मानपूर्ण और सुखद बनाने के लिए ही अपराधियों और अपराधों का पर्दाफाश करते रहे.. वे सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहे बल्कि पत्रकारिता धर्म का निर्वहन करने वाले पत्रकारों के प्रतीक बनकर सामने आए। इसलिए न केवल ज्योतिर्मय की हत्या का खुलासा होना चाहिए बल्कि उनके हत्यारों को सजा मिलने तक की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए।

समाज खासकर सरकार को यह सोचना चाहिए कि जान की बाजी लगाकर काम करने वाले पत्रकारों के प्रति उनका क्या कर्तव्य है। जिस तरह सैनिक युद्ध में देश के लिए जान देता है.. पुलिस सदैव अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तत्पर होती है; उसी तरह, एक पत्रकार भी हर जोखिम लेकर सच्चाई को उजागर करता है। शेष दोनों की तरह पत्रकारों के पास हथियार भी नहीं होते.. पत्रकारों को हथियार चाहिए भी नहीं.. कलम ही उनका हथियार है और सदैव समाज के लिए समर्पित है। इसलिए उन पत्रकारों की रक्षा का दायित्व समाज और सरकार पर है।

यदि किसी पत्रकार की हत्या होती है.. हमला होता है या धमकियां दी जाती हैं तो समाज-सरकार को ज्यादा सचेष्ट होकर विषय को देखना चाहिए। ज्योतिर्मय को मिली धमकी के बाद यदि सरकार सावधान होती और ज्योतिर्मय की सुरक्षा का प्रबंध किया जाता तो इस अनहोनी से बचा जा सकता था। अपराध से संबंधित कवरेज करने वाले पत्रकारों को तो सदैव खतरों के बीच रहना ही पड़ता है; भ्रष्टाचार तथा अन्य प्रकार की अनियमितताएं उजागर करने वाले पत्रकार भी उसी तरह के खतरों से रूबरू रहते हैं। उनके बारे में.. उनकी सुरक्षा के बारे में और उनसे संबंधित कानूनों के बारे में विशेष रूप से सोचने की जरूरत है। भयमुक्त वातावरण बनाए जाने से ही पत्रकारिता के उद्देश्यों की पूर्ति हो सकेगी। शहीद पत्रकार ज्योतिर्मय डे को यह सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

लेखक गोपाल शर्मा पत्रकार हैं और महानगर टाइम्स से जुड़े हुए हैं.

Hunger strike to protest J Dey’s gruesome murder.

Dear all, Following our protest March on Monday to arrest the killers of our esteemed colleague J Dey, the Maharashtra government assured to accept our demand to bring in a law to protect journalists although it refused to hand over the probe to CBI. The Chief Minister also refused to consider our demand for resignation of home minister R R Patil and suspension of the city Police Commissioner Arup Patnaik.

In view of our pending demands, the Patrakar Halla Virodhi Kruti Samiti has decided to continue the agitation by resorting to relay hunger strike from Wednesday, June 15, 2011. Journalists will sit on a chain hunger strike in the compound of Marathi Patrakar Bhavan, Azad Maidan. The hunger strike will commence from 9 am. All are requested to participate.

Thanks and regards

Sunil Shivdasani
Secretary
Press Club, Mumbai

जेडे हत्याकांड के खिलाफ आज कैंडल मार्च, कल प्रेस क्लब में बैठक

दिल्ली : जेडे हत्याकांड और पत्रकार उत्पीड़न के खिलाफ पूरे देश में उबाल है. दिल्ली में पत्रकारों ने अपने अपने कार्यक्रम घोषित किए हैं. भड़ास4मीडिया के पास पहुंची दो प्रेस रिलीजों में अलग अलग आयोजनों की जानकारी दी गई है. एक  प्रेस रिलीज में कहा गया है- ”आज (13 जून) इंडियन मीडिया वेल्फेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में इंडिया गेट पर पत्रकार स्व. ज्योर्तिमय डे, की हत्या के विरोध में पत्रकार रात 8 बजे कैंडल मार्च निकालेंगे और दो मिनट का मौन रखेंगे और भारत सरकार के गृह मंत्री को ज्ञापन देंगे।”

एक अन्य प्रेस रिलीज के मुताबिक- ”पूरे देश में पत्रकारों पर लगातार जानलेवा हमले बढ़ रहे हैं जो बेहद चिंता का विषय है. सरकारें इस मसले पर न केवल खामोश है बल्कि किसी न किसी रूप में पत्रकारों के हमलावरों की हिमायत करती ही दिखती हैं. मुंबई में एक पत्रकार की हत्या हुई, ठीक उसके बाद दिल्ली में प्रधानमंत्री की नाक के नीचे एक पत्रकार को थाने में रात भर रखकर थर्ड डिग्री प्रयोग की गयी. ये घटनाएं पत्रकारिता में बढ़ रहे खतरों की ओर ध्यान खींचती हैं. इस विषय पर चिंतन करने और भविष्य की रूपरेखा तय करने के लिए प्रेस क्लब दिल्ली में 14 जून को सायं ३.३० पर पत्रकारों की एक बैठक आयोजित की गयी है. पत्रकार साथी हर हाल में समय निकालकर पहुंचें.”

जेडे हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने से महाराष्ट्र सरकार का इनकार

: नाराज पत्रकारों ने 15 जून से आजाद मैदान पर क्रमिक अनशन की घोषणा की : मुंबई के सैकड़ों पत्रकारों ने प्रेस क्लब से मंत्रालय तक जुलूस निकाल प्रदर्शन किया : सीबीआई जांच के लिए कोर्ट जाएंगे और पीएम से मिलेंगे पत्रकार : मुंबई : मुंबई के पत्रकारों ने जबर्दस्त एकता दिखाई. मिड के इनवेस्टिगेटिंग एडिटर और वरिष्ठ पत्रकार जेडे की हत्या के विरोध में सोमवार को पत्रकारों ने मंत्रालय के सामने विशाल मोर्चा निकाला.

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के साथ पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों की बातचीत में मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई पर सीएम इसके के लिए तैयार नहीं हुए. अब पत्रकार संगठनों ने अपनी मांगो के समर्थन में 15 जून से आजाद मैदान पर क्रमिक अनशन शुरू करने का एलान किया है.  मुंबई महानगर में दिनदहाड़े हुए पत्रकार की हत्या से क्षुब्ध सैकडों पत्रकार सोमवार की  सुबह प्रेस क्लब पर जुटे और वहां से मोर्र्चे की शक्ल में मंत्रालय पहुंचे.

पत्रकारों की मांग पर मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने मंत्रालय के गेट पर आकर पत्रकारों से मुलाकात की. उन्होंने कहा- ”इस हत्याकांड की कई स्तरों पर जांच चल रही है. आज भी मैंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से इस बाबत चर्चा की है. हम आप की भावनाओं को समझते हैं. पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सभी जरुरी कदम उठाए जाऐंगे. सरकार ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है.”

मुख्यमंत्री के आश्वासन से पत्रकार संतुष्ठ नहीं हुए और उन्होंने जेडे हत्याकांड की सीबीआई जांच के लिए सिफारिश किए जाने की मांग की. मुख्यमंत्री के साथ पत्रकार संगठनों की कई दौर की बातचीत हुई पर मुख्यमंत्री ने यह कह कर सीबीआई जांच से इंकार कर दिया कि मामले की जांच क्राईम ब्रांच कर रही हैं और सरकार को अभी सीबीआई जांच की जरूरत नहीं महसूस होती. इसके बाद पत्रकार हमला विरोधी कृति समिति ने घोषणा की कि 15 जून तक इस मामले में कोई ठोस परिणाम नहीं निकला तो पत्रकार संगठन आजाद मैदान में भूख हडताल करेंगे. समिति ने फैसला किया है कि सीबीआई जांच को लेकर बाम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर किया जाएगा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाकात की जाएगी.

मुंबई से विजय सिंह कौशिक की रिपोर्ट

The Foreign Correspondent Club of South Asia statement on killing of J.Dey

The Foreign Correspondents Club of South Asia condemns the murder of J. Dey, the highly-respected investigative journalist and crime reporter, in Mumbai, and the recent killing in Pakistan of the acclaimed Syed Saleem Shahzad. At the time of their deaths, each were working on stories of great importance: Jyotirmoy Dey had exposed Mumbai’s powerful oil mafia and money-launderers, Syed Saleem Shahzad had revealed how al-Qaeda militants had infiltrated the Pakistan Navy.

Both were providing a brave and vital service to their societies when they were killed for doing their jobs well. Between 1992 and 2010, 27 journalists were killed in India, while in Pakistan Syed Saleem Shahzad was the 37th journalist murdered in the last 16 years. It is not enough for officials and politicians to condemn these killings. They must bring those responsible to justice, and recognize the essential role journalists perform.

FCC South Asia Executive Committee

प्रेस रिलीज

पत्रकारों की हत्या की गुत्थी सुलझाने में पाकिस्तान से भी पीछे है भारत

नई दिल्ली। मुम्बई में वरिष्ठ क्राइम रिपोर्टर की हत्या के बीच आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्रकारों की हत्या की गुत्थी सुलझाने में भारत का दुनिया भर में 13 वां स्थान है। पत्रकार सुरक्षा समिति (सीपीजे) की रिपोर्ट के अनुसार 13 देशों में भारत सातवें स्थान पर है। 1 जनवरी 2001 से 31 दिसम्बर 2010 के बीच केवल 13 देशों में ही पांच या पांच से ज्यादा पत्रकारों की हत्या की गुत्थी सुलझा नहीं पाने वाले देशों को ही इस सूची में शामिल किया गया।

सीपीजे की रिपोर्ट में हर देश की जनसंख्या के आधार पर अनसुलझे मामलों की गणना की गई। इराक में सबसे ज्यादा 92 मामले अनसुलझे मिले। जबकि फिलीपीन्स 52 अनसुलझे मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। पाकिस्तान दसवें और भारत 13 वें स्थान पर रहा। जबकि बंग्लादेश को 11वें स्थान पर रखा गया है। उधर, मुंबई में जानेमाने खोजी पत्रकार जेडे की हत्या के बाद मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने आपात बैठक बुलाकर घटना की जांच के आदेश दिए। उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर को दोषियों को जल्द पकड़ने के आदेश भी दिए। बैठक में गृह राज्य मंत्री आर आर पाटिल, कमिश्नर पटनायकर, जॉइन्ट कमिश्नर हिमांशु रॉय समेत कई पुलिस और सरकारी अधिकारी मौजूद थे।

पत्रकार जेडे की हत्या सुपारी देकर तेल माफिया ने कराई!

: जेडे का अंतिम संस्कार : सोनिया ने दुख व्यक्त किया : पत्रकार हत्याकांड की निंदा का दौर जारी : मुंबई। वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या की जांच कर रही पुलिस ने रविवार को कहा कि इसके पीछे तेल माफिया का हाथ हो सकता है और यह भी हो सकता है हत्या के लिए मुम्बई के बाहर के बदमाशों को सुपारी दी गई हो। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम इस मामले की हर पहलू की जांच कर रहे हैं।

लेकिन हमारी जांच इसमें तेल माफिया से संबंधित लोगों के जु़ड़े होने की संभावना पर मुख्य रूप आधारित होगी। पत्रकार ने विस्तृत रूप से तेल माफिया पर कई समाचार रिपोर्ट लिखी थीं। हो सकता है इन खबरों ने ही उन्हें उनकी हत्या करने के लिए उकसाया हो। डे ने गत दो दशक के दौरान अपराध और अंडरवर्ल्ड की विस्तृत रिपोर्टिंग की। अधिकारी ने कहा कि इस मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच के लिए अपराध शाखा की चार टीमें गठित की हैं। हमारे पास यह मानने के लिए आधार हैं कि हत्या के लिए मुम्बई के बाहर के हत्यारों को सुपारी दी गई या हो सकता है कि हत्यारे महाराष्ट्र के बाहर के हों। अधिकारी ने कहा कि जिस तरीके से हत्या की गई उससे स्पष्ट है कि कि हत्यारों ने पत्रकार की हत्या के लिए अचूक योजना बनाई थी। इस बीच सरकारी जेजे अस्पताल की ओर से तैयार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्रकार पर पांच गोलियां चलायी गई। चार गोलियां उसकी शरीर को भेदकर निकल गईं जबकि एक उनके दाहिने छाती में अटक गई। अधिकारी ने कहा, तीन गोलियां उनके बाएं हाथ पर और एक बाईं छाती पर लगी। एक गोली उनके दाहिनी छाती में फंस गई।

जेडे का रविवार को मुंबई में घाटकोपर के राजाव़ाडी शमशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे पहले उनका पार्थिव शरीर घाटकोपर में उनके पारिवारिक आवास पर अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया। उनको श्रद्धांजलि देने के लिए महाराष्ट्र के पीडब्ल्यूडी मंत्री छगन भुजबल और बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी इकट्ठा हुए थे। डे के परिवार में पत्नी शुभा शर्मा और मां हैं। भुजबल ने डे के परिजन को आश्वासन दिया कि अपराधियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा। भुजबल ने संवाददाताओं से कहा कि यह काफी दुखद घटना है। हत्या की जांच अपराध शाखा की विशेष टीम कर रही है। वे तेल माफिया और अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों की संलिप्तता की भी जांच कर रहे हैं। उधर, महाराष्ट्र के मीडियाकर्मियों ने और कड़े कानून की मांग करते हुए कहा है कि पत्रकारों पर हमले को गैर जमानती अपराध बनाया जाए।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मुंबई में वरिष्ठ पत्रकार ज्योर्तिमय डे की हत्या पर दुख व्यक्त करते हुए महाराष्ट्र में पार्टी की सरकार से कहा है कि वह आरोपियों को पकड़ने में कोई कसर न छोड़े। अपने संदेश में सोनिया ने डे की दिनदहाड़े हत्या पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि सभ्य समाज में ऐसे कायराना कृत्य सहन नहीं किए जाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण के नेतत्व में प्रदेश सरकार तेजी से कार्रवाई करेगी और हत्या की जांच में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। राष्ट्रमंडल पत्रकार संघ ने जेडे की हत्या की निंदा की है। पत्रकार संघ ने पुलिस से मामले की जल्द और प्रभावी ढंग से जांच की मांग की है।

जेडे की हत्या की निंदा करते हुए एडिटर्स गिर्ल्ड ऑफ इंडिया ने आज महाराष्ट्र सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की कि हत्यारों को इंसाफ के कठघरे में लाया जा सके। गिल्ड के अध्यक्ष टी एन नैनन और महासचिव कूमी कपूर ने एक बयान में कहा, “एडिटर्स गिल्ड अपनी जान जोखिम में रखकर अपनी पेशेवर ड्यूटी में लगे पत्रकार की जिंदगी की रक्षा करने में कानूनी एजेंसियों की अक्षमता की निंदा करता है।” दोनों ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट से लगता है कि इस हत्या के पीछे अपराध माफिया का हाथ हो। उन्होंने डे को एक साहसी पत्रकार के रूप में याद किया जिन्होंने अंडवर्ल्ड को बेनकाब करने का जिम्मा हाथ में लिया था। मिड-डे अखबार में विशेष खोजी दल के संपादक के रूप में और उससे पहले इंडियन एक्सप्रेस अखबार में उन्होंने कई धमकियों के बावजूद मुम्बई के आपराधिक माफिया को बेनकाब किया। नैनन और कपूर ने कहा, “गिल्ड की मांग है कि राज्य प्रशासन डे के हत्यारों को जल्दी से इंसाफ के कठघरे में लाए।”

जर्नलिस्ट्स यूनियन फॉर सिविल सोसायटी (जेयूसीएस) ने मिड डे के संपादक जेडे की हत्या और पूर्व में बिजनेस स्टैंर्डड से जुड़े रहे पत्रकार कपिल शर्मा की दिल्ली पुलिस द्वारा निर्मम पिटाई की कड़ी निंदा की है। जे. डे की शनिवार को मुंबई में अज्ञात हमलावरों ने गोलियों से छलनी कर दिया। जबकि उसी समय दिल्ली के तिमारपुर थाने में पत्रकार कपिल शर्मा को पुलिस ने बुरी तरह से प्रताड़ित किया। पुलिस कपिल को एक झूठे मामले में फंसाने की कोशिश कर रही है। संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में प्रेस पर बढ़ते इस हमले की निंदा करते हुए दोनों ही मामलों की स्वतंत्र एजेंसियां से जांच की मांग की गई। संगठन ने आरोप लगाया कि कपिल शर्मा के मामले में पुलिस का रवैया भी अपराधियों जैसा है। पत्रकारों पर बढ़ रहे ऐसे हमलों से प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में पड़ती जा रही है। इस समय पत्रकारों को सरकार और गैर कानूनी काम करने वाले लोगों व संस्थाओं दोनों के ही हमलों का सामना करना पड़ रहा है। जेडे और कपिल शर्मा का मामला इसका ताजा तरीन उदाहरण है। पत्रकारों पर हो रहे इस तरह के हमलों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकार खतरे में पड़ गए हैं। संगठन ने मानवाधिकार आयोग और प्रेस परिषद से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने और पत्रकारों को न्याय दिलाने की मांग की है।

rally to demand justice for JD from press club to mantralya

: june 13 at 12 noon : The Press Club, Mumbai expresses shock over the killing of veteran crime journalist, J Dey.  Dey, Editor-Investigations of Mid-Day, was shot dead in broad daylight at Powai on Saturday by unidentified assailants. Though the motive of the murder is yet to be established, Dey had recently written a series of stories on the adulteration of diesel in Thane and sought police protection after he received threatening calls.

The Press Club, Mumbai demands the perpetrators and conspirators of this heinous killing of the senior journalist be arrested and brought to book immediately. To demand immediate action and for the resignation of home minister R.R.Patil and Police Commissioner Arup Patanik, all journalist organizations will march in a rally to Mantralaya from the Press Club at 12 Noon on Monday, June 13, 2011. Please join in large numbers.

The killing of J Dey also underlines the increasing threat investigative journalists are being subject to by powerful political and business interests indulging in illegal acts. Scores of incidents of journalists being beaten or threatened by politicians and local mafia have been brought to the fore in recent weeks and months. The latest incident in February this year involved no less than the Deputy Chief Minister Ajit Pawar who threatened and evicted journalists during a rally in his home constituency of Nanded.

Journalist organizations have been demanding a law to make attacks on journalists a non-bailable offence but the political class have ensured that the proposed draft has never seen the light of day.  Our heartfelt condolences go out to his wife Shubha and the rest of his family.

Gurbir Singh
President
Sunil Shivdasani
Secretary

हरामखोर है मुंबई पुलिस और निरीह हैं असली पत्रकार

मुंबई. मिड डे के वरिष्ठ पत्रकार ज्योर्तिमय डे की हत्या को पुलिस प्रशासन ही नहीं, पत्रकारों को भी बहुत ही गंभीरता से लेनी होगी. इसके लिए सिर्फ पुलिस की ढिलाई को ही जिम्मेदार मानकर पत्रकार अपने कर्तब्यों से मुंह नहीं मोड़ सकते. डे की दिनदहाड़े हुई हत्या ने साफ़ कर दिया है कि अपराधियों का मनोबल बहुत ज्यादा बढ़ चुका है. अब वे मीडिया तक को अपना निशाना बनाने लगे है.

आज भी मुंबई पुलिस पत्रकारों के मामले में गंभीर नहीं रहती. पत्रकारों ने बार-बार पुलिस से निवेदन किया है कि वे अपने पुलिस स्टेशन के अंतर्गत रहने वाले पत्रकारों की सूची पुलिस स्टेशन में रिकार्ड के तौर पर रखें, लेकिन आश्चर्य आज तक ऐसा नहीं हुआ. मैं इस बारे में सबसे पहले अपने बारे में बताना चाहता हूं. मैं कुरार विलेज पुलिस स्टेशन के क्षेत्र में करीब 30 साल से रहता हूं और पिछले 20 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हूं, लेकिन कुरार पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है. इतना ही नहीं, 19 नवम्बर 2002 को मैंने सबसे पहले साँझा लोकस्वामी में तेलगी स्कैंडल से जुड़ी खबर प्रकाशित की थी.

यहाँ इस बात को बताने के पीछे मेरा मकसद सिर्फ यह है कि मुंबई पुलिस पत्रकारों के बारे में कितनी लापरवाह है. अगर किसी थाने में एक नया अधिकारी आता है तो वह वहां के विशिष्ट व सम्मानित लोगों के बारे में जानकारी रखने में अपनी उत्सुकता नहीं दिखाता क्योंकि उससे उन्हें कुछ लाभ होने वाला नहीं है. वह वहां के गैरकानूनी धंधों से जुड़े अड्डे, जैसे बियर बार, देशी दारु व मटका अड्डा, क्लब आदि की जानकारी रखने में ज्यादा रूचि दिखाता है. खैर, इस बारे में हम लोग फिर कभी बात करेंगे. आज हमारे एक ऐसे साथी पत्रकार की निर्मम हत्या हुई है जो, कभी अपनी लेखनी को किसी से डर कर रोका नहीं.

मुंबई में अपराधियों का मन बढाने के पीछे उन तथाकथित छुटभैय्ये पत्रकारों का सहयोग है, जो दो-पांच सौ रुपये के लिए घंटों शराब माफियाओं, मटका-क्लब के अड्डों पर खड़े रहते हैं. इतना ही नहीं दो पैग शराब के लिए रात भर उसकी वाचमैनी (पहरेदारी) करने से भी नहीं कतराते और इनके कर्मों का नतोजा जे डे जैसे निडर पत्रकारों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है. तथाकथित पत्रकारों की लिस्ट अगर आपको देखनी हो तो मुंबई सबअर्ब के किसी भी ब्यूटी पार्लर या बियर बार वाले से पूछ लें. इनकी पत्रकारिता का वसूल ही हफ्ताखोरी है.

जेडे जी को असली श्रद्धांजलि यही होगी कि उसके असली हत्यारे तत्काल पकड़े जायें और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले. इसके साथ ही हमें भी उन तथाकथित खबरियों पर रोक लगानी होगी, जो पत्रकारिता को बदनाम करने की सुपारी लिए घूम रहे हैं.

विजय यादव

जर्नलिस्ट

मुंबई

BEA condemns murder of Investigation Editor J Dey

: Broadcast Editors’ Association : Press Statement/ New Delhi, 11 June : The Broadcast Editors’ Association (BEA) condemns the daylight murder of Mid Day Investigation Editor J Dey in Mumbai today. We demand that the Maharashtra Government take immediate action against the perpetrators of this crime. Government should take steps to ensure that journalists can work without fear in the state.

Shazi Zaman
President, BEA

N.K.Singh
General Secretary, BEA

जे डे की कुछ तस्वीरें

किताब विमोचन समारोह में सबसे बाएं जेडे
किताब विमोचन समारोह में सबसे बाएं जेडे
जेडे ने अंडरवर्ल्ड के बारे में दो किताबें लिखीं. एक का नाम है ”जीरो डायल : द डैंजरस वर्ल्ड आफ इनफार्मर्स” और दूसरी किताब का नाम है- ”खल्लास”. जीरो डायल किताब का पिछले साल ही विमोचन कराया गया.

विमोचन किया था एक्टर अजय देवगन ने. उस मौके की कुछ तस्वीरें मिली हैं जिसमें जेडे भी दिखाई दे रहे हैं. जेडे इन दिनों दाउद पर सीरिज लिखने का प्लान किए हुए थे और उसी पर काम कर रहे थे. जेडे को उनकी शोधपरक अपराध रिपोर्टिंग के लिए आए दिन धमकियां मिलती रहती थीं लेकिन उन्होंने कभी भी धमकियों को गंभीरता से नहीं लिया. जेडे ने आयल माफिया पर हाल-फिलहाल स्टोरीज की थी जिससे करीब दस हजार करोड़ रुपये के घोटाले का पता चला था. यह आयल माफिया पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स में मिलावट करता था. मिडडे के एडिटर सचिन कालबाग का कहना है कि उन्होंने कुछ ऐसी स्टोरीज ड्राप कर दीं जिसे जेडे ने लिखा था, और ड्राप करने का सिर्फ एक कारण था कि इन स्टोरीज से जेडे की जान को खतरा हो सकता था.

जे डे
जे डे

पुस्तक विमोचन समारोह में सबसे बाएं जेडे
पुस्तक विमोचन समारोह में सबसे बाएं जेडे

एक्टर अजय देवगन के हाथों विमोचित जेडे की किताब
एक्टर अजय देवगन के हाथों विमोचित जेडे की किताब

56 वर्षीय पत्रकार ज्योति डे को साढ़े तीन बजे चार शूटरों ने पांच राउंड गोलियां मारी

ज्योति डे
ज्योति डे
अंग्रेजी टैबलायड मिड-डे के एडिटर स्पेशल इनवेस्टीगेशन ज्योतिर्मय डे उर्फ ज्योति डे उर्फ जेडे को पांच गोलियां आज दिन में करीब साढ़े तीन बजे मारी गईं. 56 वर्षीय जेडे को अस्पताल ले जाया गया पर उन्हें बचाया नहीं जा सका. यह जानकारी मुंबई के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर ला एंड आर्डर रजनीश सेठ ने दी.

मुंबई पुलिस के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर विश्वास नागरे पाटिल ने बताया कि गोली मारने वालों की संख्या चार थी और ये दो बाइकों पर सवार होकर आए थे. घटना पवई के हीरानंदानी इलाके में हुई. उन्हें नजदीकी हीरानंदानी अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. करीब पांच राउंड गोलियां चलाने के बाद शूटर फरार हो गए. उधर, महाराष्ट्र सरकार के पूर्व गृहमंत्री और वर्तमान में पीडब्लूडी मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि डे बेहद इमानदार आदमी थे. वे अंडरवर्ल्ड पर लिखते थे. वे किसी को टारगेट करके नहीं लिखते थे. मिड डे के संपादक सचिन कालबाग ने कहा कि डे की हत्या अखबार का बड़ा नुकसान है. डे को नए क्राइम रिपोर्टर गुरु कहा करते थे. ऐसा सम्मान डे को अपराध से संबंधित खबरों में विशेषज्ञता के कारण मिला हुआ था. सचिन कालबाग ने कहा कि अभी कुछ कह पाना जल्दबाजी होगा कि डे की हत्या के पीछे कौन लोग थे और उनकी मंशा क्या थी.

बीस साल से अंडरवर्ल्ड कवर कर रहे पत्रकार जेडे की हत्या अंडरवर्ल्ड वालों ने कराई!

ज्योर्तिमय डे उर्फ जेडे नहीं रहे. उन्हें मुंबई में तब गोली मारी गई जब वे अपने घर में प्रवेश करने ही वाले थे. चार बदमाशों ने उनके करीब आकर गोलियां मारीं और भाग गए. जेडे करीब बीस वर्षों से अंडरर्वल्ड कवर कर रहे थे. मुंबई के मीडिया जगत में अपराध रिपोर्टिंग में जेडे का बड़ा नाम था. उनकी अंडरवर्ल्ड पर दो किताबें भी हैं. जेडे इन दिनों डी कंपनी उर्फ दाउद गैंग से जुड़ी कई खबरों पर काम कर रहे थे.

अभी यह तय नहीं है कि किसने जेडे की हत्या कराई पर यह स्पष्ट है कि अंडरवर्ल्ड के लोगों ने ही जेडे की जान ली. जेडे की किसी से निजी दुश्मनी नहीं थी. मिडडे में क्राइम और इनवेस्टिगेटिव एडिटर जेडे की हत्या से मुंबई-दिल्ली का मीडिया जगत शोक संतप्त है. अंडरवर्ल्ड की बहुत सारी खबरें ब्रेक करने वाले जेडे की हत्या ने मुंबई में खराब ला एंड आर्डर की पोल खोलकर रख दी है.

कुछ दिनों पहले मुंबई के जाने माने पत्रकार अकेला को जेल भेजा गया था, इस कारण कि उन्होंने अत्याधुनिक हथियारों की खराब रखरखाव पर स्टोरी की थी जिससे सरकारी महकमा चिढ़ गया था. एक तरह से देख जाए तो मुंबई में पत्रकार अब बदमाशों और सरकारी अफसरों, दोनों के निशाने पर है. ऐसे माहौल में ईमानदार पत्रकारिता करना मुश्किल होता जा रहा है.

मुंबई के क्राइम ब्रांच के अफसरों ने अपनी शुरुआती टिप्पणी में कहा है कि जेडे पिछले काफी दिनों से तेल माफिया और अंडरवर्ल्ड के विरोध में कलम चला रहे थे. पर हत्या के कारणों के बारे में अभी ठीक ठीक कह पाना मुश्किल है. उधर, सूत्रों का कहना है कि जेडे की हत्या में शक की सुई अंडरवर्ल्ड की तरफ घूम रही है. पर इसकी पुष्टि पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ पाएगी कि किस गिरोह ने किस कारण जेडे की हत्या कराई.

मुंबई में मिड डे के क्राइम रिपोर्टर की गोली मारकर हत्‍या

: अपडेट : पत्रकारों के लिए एक स्तब्धकारी खबर है. मुंबई के पवई इलाके में मिड डे के वरिष्‍ठ पत्रकार ज्‍योतिर्मय डे उर्फ ज्योति डे उर्फ जेडे को अज्ञात बदमाशों ने गोली मार दी. डे को नजदीक के हीरानंदानी हास्‍पीटल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. क्राइम रिपोर्टर डे को चार अज्ञात बदमाशों ने गोली उस समय मारी जब वे पवई इलाके के हीरानंदानी गार्डेन के पास स्थित अपने घर में प्रवेश करने जा रहे थे.

गोली मारने के बाद चारों बदमाश फरार हो गए. बदमाश दो बाइकों पर सवार होकर आए थे. गोली की आवाज सुनकर बाहर आए उनके परिजन तथा स्‍थानीय लोगों ने उन्‍हें तत्‍काल हीरानंदानी हास्‍पीटल पहुंचाया.  डे पिछले बीस सालों से अंडरवर्ल्‍ड कवर कर रहे थे. उन्होंने पिछले दिनों तेल माफिया के खिलाफ स्टोरीज लिखी थी.