टाटा ने दी सफाई, नीरा का साथ लेना मजबूरी

2जी स्पेक्ट्रम मामले तथा नीरा राडिया से बातचीत के मामले में आरोपों से घिरे रतन टाटा ने सफाई दी है. टाटा का कहना है कि उन्‍होंने नीरा के जरिए सरकारी नियमों को तोड़ने या बदलवाने की कभी कोशिश नहीं की. उन्‍होंने नीरा की सेवाएं सिर्फ इसलिए लीं क्‍योंकि उनकी प्रतिद्वंद्वी कम्‍पानियां कुछ बड़े पत्रकारों के साथ मिलकर उनके हितों को नुकसान पहुंचा रही थीं. नीरा राडिया को उन्‍होंने सिर्फ इसलिए रखा था ताकि उनकी बात को ठीक से सुना जा सके. क्‍योंकि उनके पास इसका मुकाबला करने के लिए अपना कोई सम्‍पर्क नहीं था.

दूरसंचार क्षेत्र में उनके प्रतिद्वंद्वी तथा राज्‍य सभा सदस्‍य राजीव चंद्रशेखर द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में उन्‍होंने कहा कि वो राजीव खुद क्‍यों राजनीतिज्ञों को प्रभावित करने के लिए कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों का समर्थन लेने का प्रयास कर रहे थे. उन्‍होंने कहा कि वे खुद के लाभ के लिए कभी किसी नियम की अवहेलना नहीं की.

टाटा ने कहा कि जब तक किसी का दोष सिद्ध नहीं होता, उसे आरोपी बताना या दोषारोपण करना ठीक नहीं है. उन्‍होंने कहा कि सरकार को इन टेपों को अपने कब्‍जे में ले लेना चाहिए, जिससे मीडिया इसे दिखा न सके. मीडिया में किए जा रहे हमले बंद होने चाहिए क्‍योंकि अभी दोष सिद्ध नहीं हुआ है. उन्‍होंने 2जी मामले में मीडिया में अप्रमाणित तथ्‍यों पर आधारित कतिपय रिपोर्टों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सरकार को या नियमों को प्रभावित करने का मुद्दा नहीं बल्कि बिना बारी के स्‍पेक्‍ट्रम आवंटन तथा कुछ बड़ी कंपानियों द्वारा नि:शुल्‍क स्‍पेक्‍ट्रम की जमाखोरी जैसे मुद्दे महत्‍वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच करवाई जानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो.

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