देहरादून में अखबार के संपादक पर हमला, अपहरण की कोशिश

देहरादून के मालसी डियर पार्क के समीप सोमवार को हथियारबंद बदमाशों ने दून के प्रमुख सांध्य दैनिक समाचार पत्र के संपादक प्रवीण भारद्वाज पर कातिलाना हमला व उनके अपहरण का प्रयास किया। बदमाशों के साथ महिलाएं भी शामिल थीं। बदमाशों ने हथियार लहराते हुए प्रवीण भारद्वाज को कार से बाहर निकालने का प्रयास किया। खौपफजदा प्रवीण व उनके साथी ने किसी तरह फोन पर दून पुलिस को सूचना दी।

पुलिस के आने तक प्रवीण भारद्वाज ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल निकाल कर किसी तरह अपनी जान बचाए रखी। कुछ ही देर में राजपुर पुलिस दल बल के साथ मौके पर पहुंची और प्रवीण भारद्वाज को बदमाशों के चंगुल से बामुश्किल मुक्त कराया। यहां चर्चाओं से बाजार गर्म है कि प्रवीण भारद्वाज के अपहरण के लिए पश्चिम यूपी के कुख्यातों को लाखों की सुपारी दी गई है। उत्‍तराखंड पुलिस के अधिकारी तो जैसे बदमाशों के सामने पानी भर रहे हैं। इसका एक नमूना प्रवीण भारद्वाज मामले में देखने को मिला। मुजफ्फरनगर के 10 से 12 बदमाशों ने राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत दादागिरी करते हुए उनके ऊपर हमला तथा अपहरण की कोशिश किया फिर पुलिस के एक अधिकारी की शह पर साफ बच निकले। इससे नाराज पत्रकारों ने सीएम से मिलकर विरोध जताया तथा उचित कार्रवाई की मांग की।

सांध्य दैनिक समाचार पत्र के संपादक प्रवीण भारद्वाज ने राजपुर थाना क्षेत्र के मालसी डियर पार्क में साल 2010 के मार्च माह में एक जगह जाखन शिवम विहार निवासी धर्मेन्‍द्र सिंह राणा से ली, एग्रीमेंट के मुताबिक प्रवीण ने धर्मेन्‍द्र को लाखों रूपए सिक्योरिटी के रूप में दी। इस वर्ष के मार्च माह में नया एग्रीमेंट अगले 6 सालों के लिए कराया गया। बताया जा रहा कि रेस्टोरेंट अच्छा चल निकला तो धर्मेन्‍द्र वह जगह प्रवीण से खाली कराना चाहता है। बताया गया कि इसके लिए धर्मेन्‍द्र ने पश्चिम यूपी के कुख्यात बदमाश सुशील मूंछ का सहारा लिया। बीती शनिवार को प्रवीण के मोबाइल पर फोन आया। रिसिव करने पर दूसरी तरफ से प्रवीण को धमकाते हुए कहा गया कि ‘रेस्टोरेंट खाली कर दो, तुम हमें जानते नहीं।’ पीड़ित प्रवीण के अनुसार ध्मकाते हुए कहा गया कि रविवार तक रेस्टोरेंट से सामान समेट लो वरना जान ले ली जाएगी। उन्होंने इस बात की लिखित शिकायत एसएसपी जीएस मर्तालिया से की।

एसएसपी के आदेश के बाद एसओ राजपुर ने क्षेत्रा में बाहरी संख्या की गाड़ियों की चेकिंग शुरू कर दी। इसी दौरान एक जगह कुछ बाहरी नम्बरों की गाड़ियों को पुलिस ने खंगाला। कल दोपहर प्रवीण भारद्वाज अपने साथी के साथ कार में सवार होकर घर लौट रहे थे। इसी समय मालसी डियर पार्क के समीप चार कारों में सवार 10-12 बदमाशों ने उनकी कार को रोक लिया। गालियां देते हुए प्रवीण भारद्वाज को कार से बाहर खींचने का प्रयास किया गया। बंद शीशों को बदमाशों ने तोड़ने का प्रयास किया। खौपफजदा प्रवीण ने फोन पर पुलिस अधिकारियों को अपने अपहरण के प्रयास की सूचना दी। चंद समय बाद एसओ राजपुर पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रवीण को बदमाशों से मुक्त कराया और सभी को कब्जे में लिया साथ ही उनकी गाड़ियों को भी थाने में खड़ी करवा दी। घटना की सूचना पर एसपी सिटी, सीओ मसूरी व अन्य अधिकारी भी राजपुर थाने पहुंचे। एसओ राजपुर ने बताया कि खौफजदा प्रवीण भारद्वाज ने बंद कार में अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर निकाल ली थी,  जिसके चलते बदमाश उनका अपहरण नहीं कर सके। प्रवीण भारद्वाज की तहरीर पर राजपुर थाने में रविन्द्र राणा, चेतन, हेमंत व अन्य 10-12 बदमाशों पर 147/341/504/506 आईपीसी की धराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

हमला

बदमाशों के हाथ बिके एसपी सिटी : इस मामले की एक बानगी देखिये कि किस तरह से बदमाश पुलिस के हाथ आने के बाद भी फुर्र हो गये। हुआ ये कि रविवार की दुपहर मुजफ्फरनगर के बदमाशों ने दून के प्रमुख सांध्य दैनिक अखबार के संपादक प्रवीण भारद्वाज के अपहरण का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बदमाशों की मंशा परवान नहीं चढ़ने दी और उन्हें हिरासत में ले लिया। राजपुर थाने में अभी बदमाशों से पूछताछ हो ही रही थी कि एसपी सिटी अजय जोशी वहां पहुंचे। पीड़ित ने उन्हें अपने साथ हुई घटना से अवगत कराया। उसके बाद एसपी सिटी ने कहा कि आरोपियों से बात करेंगे। एक बंद कमरे में मात्र दस मिनट हुई बातचीत के बाद एसपी सिटी के आदेश के बाद अखबार के संपादक पर कातिलाना हमले व अपहरण के प्रयास करने के सभी आरोपियों को पुलिस ने छोड़ दिया।

घंटी बजी और छूट गए बदमाश : बताया जा रहा कि जिस समय एसपी सिटी आरोपियों से बात कर रहे थे, उनके फोन पर कहीं से एक कॉल आई जिसके बाद पुलिस अधिकारी बेबस दिखे और उन्होंने बदमाशों को छोड़ देने के आदेश दिए। पुलिस सूत्रों की माने तो फोन कॉल सत्ताधरी किसी नेता के करीबी की आई थी। आरोपियों के घनिष्ट संबंध उस नेता के करीबी से होना बताया जा रहा है।

‘मर्डर’  हो जाएगा तो बता देना –  एसपी सिटी : अखबार संपादक के अपहरण के प्रयास की घटना के बाद दून में मीडिया जगत में आक्रोश भर गया है। आज इस मुद्दे को लेकर कई अखबारों के संपादक व मीडियाकर्मी डीजीपी ज्योति स्वरूप पाण्डे से मिले। डीजीपी को रविवार की दोपहर हुई घटना से अवगत कराया गया। पीड़ित के अनुसार उन्होंने पुलिस अधिकारियों को कल दोपहर अपने साथ हुई घटना की जानकारी फोन पर दी। एसपी सिटी अजय जोशी को भी इसकी शिकायत की गई। पीड़ित का कहना है कि एसपी सिटी ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि बदमाशों के वाहन की तलाशी ली गई, उनके पास कोई हथियार नहीं मिला। एसपी सिटी ने पीड़ित को कहा कि उसे कुछ नहीं होगा। डीजीपी को बताया गया कि एसपी सिटी ने प्रवीण भारद्वाज से कहा कि जब ‘मर्डर’  हो जाएगा तो बताना, हम बदमाशों को पकड़ लेंगे।

डीजीपी ने कहा जांच की जा रही है : आज पुलिस मुख्यालय में अखबार संपादकों व मीडिया कर्मियों की शिकायत सुनने के बाद पुलिस महानिदेशक ज्योति रूवरूप पाण्डे ने कहा कि मामले की जांच राजपुर पुलिस कर रही है। उन्होंने कहा कि राजपुर एसओ मौके के प्रत्यक्ष गवाह हैं। उनके दिए बयानों में यह पुष्ट हुआ कि उन्होंने ही पीड़ित को मौके पर अपहरणकर्ताओं के कब्जे से मुक्त कराया है। बदमाशों को थाने से छोड़े जाने की बात पर डीजीपी ने कहा कि राजपुर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। उन्होंने कहा कि एसपी सिटी ने पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया, डीजीपी के अनुसार मुकदमा दर्ज है और कभी भी सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है।

दर्ज मुकदमे में धाराओं का खेल : दून में बाहुबलियों का साम्राज्य इस कदर पैठ कर गया कि पुलिस चाहकर भी बदमाशों पर उचित धराओं में कार्रवाई नहीं कर पा रही है। मालसी डियर पार्क पर कार सवार प्रवीण भारद्वाज को चार कार में सवार कई बदमाशों ने घेर लिया और उनके अपहरण का प्रयास किया। पुलिस ने दर्ज मुकदमे में अन्य धराएं तो लगाई किन्तु पीड़ित की तहरीर में अपहरण का प्रयास लिखे होने पर भी बदमाशों पर अपहरण की धराएं नहीं लग सकी।

तो क्यूं दी गई पुलिस सुरक्षा : इधर एसपी सिटी कह रहे हैं कि आरोपियों की मंशा गलत नहीं थी वहीं राजपुर पुलिस ने प्रवीण भारद्वाज की जान खतरे में पाते हुए उन्हें पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई है। राजपुर पुलिस ने प्रवीण भारद्वाज की 24 घण्टे की सुरक्षा के लिए एक सिपाही उनके साथ तैनात किया है। वहीं उनके रेस्टोरेंट में भी दो सिपाही अनिश्चित समय के लिए सुरक्षा के मद्देनजर तैनात किए गए हैं।

Comments on “देहरादून में अखबार के संपादक पर हमला, अपहरण की कोशिश

  • Meri samajh me nahi ata ki ye kaise patrakar hain jinhe jan ka itna khatra rahta hai ki har samay revolver sath me rakhte hain? Kuchh log Patrakarita ke nam par apne avaidh dhandhe chhupane ka ka kam kar rahe hain.

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  • uttarakhandi says:

    लगे हाथों इन पत्रकार साहब द्वारा निकले जाने वाले अख़बार का नाम भी बता दीजिये. उत्तराखंड में आजकल ऐसे बहुत से पत्रकार पैदा हो गए हैं जो अख़बार की आड में ब्लेकमेलिंग और अपना उल्लू सीधा करते हैं.

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  • mini sharma says:

    Jab newspaper ke editor kaa yeh Haal hai too aam janta ka kya hoga…..pahle kahte the kee dehradun too swarg hai… per ab yahee swarg badmaso kaa swarg ho gaya hai………..
    sach bhee hai jis rajya kaa raja hee chor ho too parja kaa too bhagwan hee maalik hai………….

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  • pankaj piyush says:

    ghatnaa dkhd hai. lekin aamtoor par jo bota vahi kata jata hai.. ek akabar ke sampadk (o bhe shandhya dainik jise janta jantee hi nahe serf suchna vibhag kee failoo me rata hoga) lakho ka restorent laisesee riwalwar.baharhal, jo hoowa galat hoowa

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  • satyendra says:

    patrakaro ke surakcha ke liye kuch adhikaar banana hoga. police ka rawaiya aiasa nahi hona chahiye jaisa editor ke mamle me huwa.

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  • Sanjay Shrivastav says:

    जनाब यशवंत जी इस तथाकथित पत्रकार प्रवीण भरद्वाज की सच्चाई बता दूँ आपको… ये तथाकथित पत्रकार प्रवीण भारद्वाज एक संध्या दैनिक चलते हैं जिसका प्रकाशन मात्र 1500 कॉपी है. डी एल रोड पर जहाँ से ये ऑफिस चलाते हैं वो किराये पर लिया था जिस पर अब ये कब्ज़ा करके बैठे हैं, इसी मामले में मकान मालिक इन पर धोखाधड़ी का मुकदमा करा चूका है.. ये इस मामले में जेल भी काट आये हैं. मोहिनी रोड पर स्थित करोड़ो की बिल्डिंग के फर्स्ट फ़लूर पर इन्होने फर्जी तरीके से कब्ज़ा कर लिया है, इसका भी मामला इन पर पुलिस में दर्ज है. ये जगह जहाँ पर इन्होने अपना अपहरण करने की बात बताई है इनकी है ही नहीं… जिन शरीफ लोगो पर ये अपहरण का आरोप लगा रहे हैं उनसे लीज पर ली थी बस ये ही उन शरीफ लोगो की गलती थी. इनसे पूछिए की इन पर धोखाधड़ी करने के इतने मुक़दमे है तो शायद आपको भी पता चल जायेगा. अभी भी धोखाधड़ी के दो एन बी डब्लू निकले हुए हैं

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