दैनिक जागरण के संपादक ने किया सिंचाई विभाग की सड़क पर कब्‍जा!

गोरखपुर में सिंचाई विभाग की सड़क पर कब्‍जा हो गया है और प्रशासन इस कब्‍जे को हटवाने में असहाय पा रहा है. आखिर मामला विश्‍व के नम्‍बर एक अखबार के संपादक से जो जुड़ा हुआ है. दैनिक जागरण, गोरखपुर के संपादक शैलेंदमणि त्रिपाठी ने काफी समय से सिंचाई विभाग की सड़क पर कब्‍जा कर रखा है. कुछ लोगों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की, इसके बावजूद प्रशासन उस अतिक्रमण को हटवाने के नाम पर जांच पर जांच किए जा रहा है. मतलब सीधी कार्रवाई से डर रहा है.

शैलेंद्रमणि ने काफी समय पहले सिंचाई विभाग के बगल में जमीन खरीदी थी. इस पर उन्‍होंने मकान बनवाया. उसके बाद उसके सामने स्थित सड़क पर कब्‍जा करते हुए उसके ऊपर टीन का शेड

सिंचाई विभाग
सिंचाई विभाग की सड़क के ऊपर लगाया गया टीन शेड
लगावा दिया. स्‍टेशन रोड पर स्थित सिंचाई विभाग की कालोनी में मेन रोड से जाने के लिए यही एकमात्र सड़क है. इसी सड़क के ऊपर शैलेंद्रमणि ने टीन का शेड डलवा दिया. जिससे लोगों को आवागमन में असुविधा होने लगी. सिंचाई विभाग के लोगों ने इसकी शिकायत डीएम संजय कुमार से की. मामला चूंकि नम्‍बर एक अखबार के संपादक से जुड़ा हुआ था लिहाजा प्रशासन ने सब कुछ आंखों के सामने सच-सच देखते हुए सीधी कार्रवाई करने के बजाय टेढ़ा तरीका अपनाया. डीएम ने इस मामले की जांच सिटी मजिस्‍ट्रेट जेपी सिंह को सौंपी. जेपी सिंह भी मौके पर न जाकर इस मामले की जांच रेलवे चौकी इंचार्ज को करने को कह दिया.

रेलवे चौकी इंचार्ज मौके पर पहुंचकर पूछताछ की कार्रवाई की. इसके बाद सड़क के ऊपर पहले से निर्माण होने की मौखिक शेडजानकारी सिटी मजिस्‍ट्रेट को दी. इसके बाद सिटी मजिस्‍ट्रेट ने दरोगा को लिखित रिपोर्ट देने को कहा. इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. खबर है कि प्रशासन प्‍यार से मामला सुलझाने की कोशिश में लगा हुआ है कि सांप भी मर जाए और उनकी लाठी भी ना टूटे. अगर यही किसी आम नागरिक ने किया तो यह प्रशासन मिनट भी नहीं लगता उसका घर भी जमींदोज कर दिया होता, लेकिन मामला बड़े संपादक से जुड़ा हुआ है तो प्रशासन भी उनके हिसाब से ही काम कर रहा है. सूत्रों का कहना है कि प्रशासन ने संपादक महोदय से खुद ही टीन के शेड को हटवा लेने की बात कही है ताकि उन्‍हें कार्रवाई न करनी पड़े. वैसे डीएम संजय कुमार ने नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है, परन्‍तु जब साफ दिख रहा है कि सड़क पर अवैध कब्‍जा है तब किस नियम की बात की जा रही है.

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Comments on “दैनिक जागरण के संपादक ने किया सिंचाई विभाग की सड़क पर कब्‍जा!

  • pankaj piyush says:

    ye jagrae waloo ho kaya gaya hai. isee liye akhbar me aatni hai kaya.koi sadak par kabja karta hai too koi car leleta hai lon nahee deta..jagran me kam karne wall chote karmcharee ke bare me to chliye maan lete hai hai ki use kam paisa miltaa hai inkee sampadako ko kaya ho gaya..lagta hai manniya vinod sukla ki aatmaa in sab me gai hai..jagran ka patrakar kam wetan pata hai sayad ise liye dalale karta hai. :-*:'(

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  • om prakash srivastava says:

    Are wah ek samachar parta ke sampadak ka mamla hai, wah bhi Dainki Jagran ke sampadak Manniya shri Mani Ji ka.
    Kishki hasiyat hai ki wah Mani ji ke Karyon me dakhal de de. Ushko Gkp me rahana hai ki nahi.
    Log apni aukat dekhkar ungali uthayen.
    Mani ji kuchh bhi kar sakate hain. Are bhai world ke sabase jyade padhe jane wale akhbar ke sampadak hai.
    App bhi Yashwant ji kisase Panga lene ja rahen hain. Mani ji ke hath bare lambe hai, Kanhi wah apka yeh portal hi na band karwa den.
    Waise apko bahut bahut badhai ki apne dusharon ki khabar lene wale ki khabar le li. Gkp ke ush patrkar ko dhanyad jishne itani badi khabar bhej kar dileri dikhayee hai. yadi wah patrkar milta to ushe mithai rasgulla jarur khilata. Gkp ka prasasan kabhi bhi bold hokar is mamle kam nahi karega yah pakka hai.
    Ab Manniya Mani Ji ka agla kadam kya hoga yeh dekhane wale baat hogi.

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  • B.K. Singh says:

    यशवन्त जी और गोरखपुर से यह समाचार लिखने वाले महोदय को जानकारी के लिए बताना चाहता हूं कि शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी दैनिक जागरण गोरखपुर संस्करण के संपादक नहीं बल्कि मुद्रक प्रकाशक हैं। और जहां तक ख़बर की बात है तो यह ख़बर दैनिक जागरण में भी छपनी चाहिए।

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  • uttarakhandi says:

    Patrakaron ki kamobesh yahi jamat rah gayi hai ab. Apne ap ko samaj ka chautha stambh kahne vale aur rajneetigyon aur naukarshahi ke bhrashtachar ki pol kholne vale ye patrakar ab unse bhi jyada bhrasht hain.

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  • रिंकू सिंह says:

    अब आगे आगे देखिये कब्जा होता है क्या।

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