नई पीढ़ी के पत्रकारों में खबरों की भूख नहीं है : प्रभु चावला

इंडियन एक्‍सप्रेस के संपादकीय निदेशक प्रभु चावला को नई पीढ़ी के पत्रकारों से ज्‍यादा उम्‍मीद नहीं है. प्रभु चावला को नए पत्रकारों में खबरों की भूख नहीं दिखती है. खबरों को खोजने और तथ्‍यों की कसौटी पर परखने की बजाय आज के पत्रकार नेताओं और कारपो‍रेट घराने की मेनुपुलेटेड खबरों को लिख रहे हैं. प्रभु चावला इंडियन इंस्‍टीट्यूट आफ जर्नलिज्‍म एंड न्‍यू मीडिया (आईआईजेएनएम) , बंगलुरू के दीक्षांत समारोह में 2011 के पत्रकारिता के छात्रों को संबोधित कर रहे थे.

प्रभु ने कहा कि भारतीय मीडिया में कुछ सड़ रहा है. पत्रकार सख्‍त और तीखे सवाल करना भूल गए हैं. ऐसा करने की बजाय वे सुपरकॉप, न्‍यायधीश और जल्‍लाद के रोल में दिखना चाहते हैं. आज के पत्रकारों को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे खबरों के प्रति उनकी जिज्ञासा और भूख नहीं रह गई है. इसके चलते पत्रकारिता की विश्‍वसनीयता खोती जा रही है. मेनुपुलेटेड खबरें लिखी जा रही हैं.

प्रभु ने कहा कि नई पीढ़ी प्रशिक्षण के अभाव से गुजर रही है. ज्‍यातातर पत्रकार अच्‍छी खबरों की तरफ ध्‍यान नहीं दे रहे हैं. न ही संपादक युवा पत्रकारों को बेहतर स्‍टोरियों के लिए कह रहे हैं, दबाव डाल रहे हैं. टीवी चैनल ने आसान रास्‍ता पा लिया है, खबरों की गहराई तक जाने की बजाय दर्शकों द्वारा दी गई सूचना या जानकारी को ही खबर बना रहे हैं.

प्रभु ने कहा कि अच्‍छी प‍त्रकारिता के लिए उपभोक्‍ताओं के सहयोग की जरूतर है. भारतीय मीडिया को विज्ञापनदाताओं के चंगुल से मुक्‍त किया जाना चाहिए, इसके लिए पाठकों को आना चाहिए कि वे क्‍या पढ़ना और देखना चा‍हते हैं.

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Comments on “नई पीढ़ी के पत्रकारों में खबरों की भूख नहीं है : प्रभु चावला

  • Rajeev Verma says:

    Chama kare prabhu ji kisi ke haath pair bandh kar aap ye nahi keh sakte ki tum aazad ho. nayi peedhi ke patrakaro ko varishtho ki kripa roopi gulami se aazadi mile to wo apni pratibha ke atulya darshan kara denge, magar kai varishth aise hai jo dikhave ko to yuvaon ka sahyog karte hai magar andar hi andar unki jade khokli kar unhe apne samne jhuk kar chalne ko majboor kar rahe hai.. main aap ki baat se bilkul bhi ittefaaq nahi rakhta hu..

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  • davil thapar says:

    प्रतिभा तो बहुत है ………………….लेकिन गुलामी की जकडन इतनी ज्यादा है की खबर की भूख को दबा देती है ..आप चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते. पहले नौकरी लेने के लिए गुलामी करो ………………..फिर उसको कायम रखने के लिए भी ……………….पापी पेट का सवाल है …………तो करना की पड़ेगा .नहीं तो भूखों मर जायेंगे

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  • Jitendra Singh says:

    आप बहुत बड़े तीस मार खान हैं. सीधी बात में आज तक कभी कोई टेढा सवाल आया नहीं.आप हमेशा लक्ष्मी सुखासन में डूबे रहे आपके अंदर कितनी पत्रकारिता जागी हैं पहले अपने अंदर खुद झांको तब नयी पीढ़ी के बारे में सोचना.नयी पीढ़े तो अपने बड़ों से ही सीखती हैं अगर नयी पीढी में खबरों की भूख ख़त्म हो चुकी है तो आप जैसे खबर्बाजों की वजह से.

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  • akhilesh says:

    Aapki bato se main 100 percent sahmat hoon. yuva peedhi ab khabro kee pichhe nahi balki paiso ke pichhe bhag rahi hain. Akhir yuva patrakar to aapko hi apna ikon manti hai isliye aapke nakshe kadam par chal rahe hain.
    Akhilesh,
    Dhanbad.

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  • मदन कुमार तिवारी says:

    लिजिये इंडियन एक्सप्रेस को भी आप हीं मिले थे । चलिये पहले अंकुर का हाल समाचार बताईये। आजकल कोई नया घोटाला करने में लगा हुआ है या बेरोजगारी झेल रहा है । राडिया जी से मुलाकात हुई इधर या नही । आप वही प्रभु दशरथ चावला है न आजतक फ़ेम ? पत्रकार क्या करें । आपलोगो ने जगह हीं कहां छोडी , सत्य लिखेंगे तो निकाल दिये जायेंगे । वैसे आपने स्टेज पर यह सब बोला है , तालियां तो खुब बजी होगी , लेकिन बचकर रहियेगा आजकल के नये लडके बडे दुष्ट हैं देखा न बरखा को खदेड दिया । बचकर रहियेगा जमाना खराब है झुठे आदर्श बखारने वाले को खदेड दे रहे हैं।

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  • asif khan says:

    चावला जी इतनी भूख भी किस काम की जो आपको राडिया के दर पंहुचा दे….और पत्रकार से दलाल बना दे।हम छोटी भूख में ही खुश है।आपकी ज्यादा भूख से सब वाकिफ है।कृपया नसीहत ना दे।

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  • amitvirat says:

    prabhu ji nayi peedi mein aapko saari khami nazar aati hai jab kafi sangharsh ke baad logon ko naukari milti hai. corporate ke yug nayi peedi ke patrakar vahi karega jo aap jaise bujurg chahte hain. aapne kitne yuva patrakaron ko protsahit kiya pehle to aap batao saval poochhne ka gyan bata rahe ho. seedhi baat mein khees niporkar aap kaunse umda saval poochhte the sivay khees niporne ke. doosron ko gyan de rahe ho aap ne dalali ke simaye paar kar bade patrakar ban gaye aaj gyan bagharne aa gaye.

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  • Jaya banwale says:

    Hi Prabhu sir,
    reality to ye hain ki aaj media ( news channels) mein sirf wahi log dikhte hain jo kisi ke rishtedaar hote hain ,phir bhale hi unhe reporting aati hain ya nahi or khabron ka knowledge ho ya nahi ,,, mauka dijiye unhe jo wo position deserve karte hain , phir dekhiye ki young reporters mein kitna dum hain,,,i am also correspondent , and i had also faced this problem,,,,

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  • Jaya banwale says:

    Hi Prabhu sir,
    reality to ye hain ki aaj media ( news channels) mein sirf wahi log dikhte hain jo kisi ke rishtedaar hote hain ,phir bhale hi unhe reporting aati hain ya nahi or khabron ka knowledge ho ya nahi ,,, mauka dijiye unhe jo wo position deserve karte hain , phir dekhiye ki young reporters mein kitna dum hain,,,i am also correspondent , and i had also faced this problem,,,,

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  • Jaya banwale says:

    Hi Prabhu Sir,
    well sach to ye hain ki aaj news channels mein sirf unlogo ko reprter banaya jata hain jo kisis ke rishtedaar hote hain , jinhe reporting ka A bhi pata nahi hota hain, ek baar talent ko to mauka dijiye phir wo bataye ki aajke reporters mein khabar ki kiitni bhukh hain,,, beleive me,,

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  • BIJAY SINGH says:

    wowwwwwwwwww,,,,,,, really surprising.How can Prabhu chawla teach young journalists? He can not be a role model for any genuine journalist.
    every one know the role of prabhu chawala in radia-tata case.
    before teaching and giving suggestions to others ,one should see inside his /her soul.
    Mr prabhu has you ever done only genuine journalism?

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  • Samajh me nahi aa raha ki in mahoday (Prabhu Chawla) par kaun si ukti jyada uchit hai… “Kauwa chala hans ki chaal” ya “Muh me Ram, dimaag me Sukhram”…. Prabhuji…bada dukh deena in nikamme yuva journaliston ne…. Prabh, aage bade (khabaron ki bhookh ki aad me dalali ki opportunities dhoodane me), hum tumhare peeche hain….

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  • ashutosh says:

    हे ईश्वर मेरे प्रमु जी…..जरा ध्यान दिजिए अब लिखी जा रही बातों पर। आप आजतक की सीधी बात से जब ईटीवी की खरी बात में पहुंच चुके हैं। और जो ईटीवी अपने क्षेत्रिए चैनलों को लाने के बाद ग्रामीण इलाके और खासकर समाज और राज्य में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। जिसके सर्वेसर्वा रामोजी राव के विचार भी पत्रकारिता के प्रति काफी पवित्र हैं। लेकिन कभी आपने झांककर देखा है। उन लाखों स्ट्रींगरों के दर्द को। जो डिग्री लेने के बाद चापलूसी का फंडा नहीं अपनाते हैं उनका तड़पा-तड़पाकर मानसिक और शारीरिक शोषण किया जाता है। कभी स्ट्रींगर रहकर देखिए। पता किजिए। देश के नाम से निकलने वाले अखबार और सबसे ज्यादा सर्कुलेशन का दंभ भरने वाले अखबार और कई क्षेत्रिए चैनलों में काम करने वाले अंशकालिकों की स्थिति क्या है। पता करिए फिल्ड में जाकर क्यों कोई अच्छा लिखने वाला दलाल बन जाता है। सवाल किजिए जरा रामोजी राव से कि इंटव्यू में जाति देखकर कापि एडिटर बनाया जाता है । सवाल किजिए शोभना भरतिया से उन्हें मालूम है जिसे वो 60000 रुपए महीने देती हैं वह दारू पिकर सोता है और छ हजार का कापी एडिटर रात भर पेज बनाता है………..उसके बाद भी जब पेज में चनपटिया रेलखंड की जगह रेललंड छप जाता है तो संपादक कैसे उस छ हजार वाले की मां बहन करता है। आपको तो देश के कई इलाके के पत्रकार खोज रहे हैं………जरा झाडिए और समझाईए उनको पत्रकारिता। क्यों नहीं आप सीधी बात में राखी सावंत की जगह किसी समाज के मेहनतकश का सक्षात्कार करते थे। क्योंकि राखी सावंत की छाती दिखने पर विज्ञापन ज्य़ादा आता था। आपको कोई अधिकार नहीं नई पीढ़ी को सिख देने की ……….माफ करें…..पहले पहल करें तब बात करें

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  • जीतेंदर जीत says:

    प्रभु जी, नमस्कार
    माना कि आप उस दौर के पत्रकार हैं जिस दौर में स्वंतत्र पत्रकार के मायने होते थे. बेरोजगारी की समस्या नहीं होती थी और मालिकों का किसी खबर को रोकने या लगाने के लिए दबाव नहीं होता था.
    ये आप भी अच्छी तरह जानते हैं कि आज स्थिति एकदम विपरीत है. आज मीडिया केवल मालिकों का है. पत्रकारों पर क्या-क्या दबाव हैं, ये आप भी जानते हैं. पत्रकार वो ही परोसते हैं, जो मालिक चाहते हैं. यही कारण है कि मैनुपुलेतेद ख़बरें लिखी जा रही है. प्रभु जी, आप भावी पत्रकारों को बेशक ये बताइए कि उनके अंदर क्या नहीं है, लेकिन ये जरूर बताइए कि आज कि परिस्थिति में उनको अपने आपको कैसे बचा कर रखना है. अपनी नौकरी कैसे सेफ रखनी है.

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  • apki tarah sabko ek adad radiya mile tab na yuwa patrkar apni pratibha dikhayen,pet ki bhookh se ladnewaalo ko khabron ki bhookh ki naseehat kam se kam aap to na dijiye,waise apne ankur bhaiya ko bhukh ka matlab khoob samjhaayaa hai

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  • सुनील कुमार says:

    वाह, क्या खूब कहा है प्रभु चावला ने। पत्रकारिता में कुछ सड़ रहा है। प्रभु से एक सवाल है, जरा यह भी स्पष्ट कर देते कि कुछ का मतलब क्या है, क्या सड़ रहा है। क्या वाकई युवा पत्रकारों की वजह से पत्रकारिता अपनी विश्वसनीयता खो रही है ? ऐसे कितने युवा पत्रकार होंगे जिनकी वकत सत्ता के गलियारों तक होगी, या कॉर्पोरेट घरानों के बीच लाइजनिंग करने की क्षमता होगी ? युवा पत्रकारों को प्रोत्साहित करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों ने क्या-क्या गुल खिलाये हैं, सब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। फिर भी वो सम्माननीय है, वरिष्ठ जो हैं। वाह-अदभुत कहा प्रभु, वाह। खबर की भूख बहुत है प्रभु, मौका तो दीजिेये युवा पत्रकारों को।

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  • vasi zaidi says:

    bilkul galat……….zitni bhuk aaj ke yuva patrakar ko hai…….wo kisi bhi yug ke patrakar ko nahi hui……………compition ke is dor mai……….news ki value samajhta hai aaj ka patrakar……..or phir uske baad bhi aap jaise logo ke office ke chakkar katne padte hai……………..ek adad nokri ke liye…………

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  • Bhool Gaye Kaise gariya raha tha tumko amar singh…. us waqt kaha gaii thi tumhari patrakarita mr. chawla… kya bhookh mar gaii thi.

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  • manishajay says:

    yes sawaliya nishan lagane ka haque prabhu ko nahin hai. aaj patrakarita jis daur se gujar rahi hai usme khabaron ko ek product bana diya gaya hai. aur ese product bananewale prabhu jaise log hi hain. tv chanalon ki shuruwat ke sath jin longon ne patrakarita ka beda par lagane ki koshish ki unme prabhu ki ek mukam rakhte the. tab unhon ne kyon nahi awaj uthai. aaj jab tv today se bahar kiye gaye to patrakarita yaad aane lagi. yahi nahin jis chanel par aap apna talk show kar rahen hain uske baare mein kya kahenge. jahan reportaron ki yogyta panch ticker likhane se hoti hai. bhale ni wo mahine mein 5 achchhi khabaren dikhata ho. lekin chenel ke karta dhartaon ki nazar mein nikkama hai. to kyon nahin us chanel ke karta dhartaon se is par charcha karte hain. prabhu ji pravachan dena aasan hota hain. karna bahut mushkil.

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  • BHARAT YADAV KAKORI LUCKNOW says:

    ap ke andar ketne bhookh hay wo puray bharat ne dhakha hay .. neera radea ke sath apka naam juda aaj tak naws channel say nekaly gay etv ne rkha ..seedhe bat say sacche bat per aa gaye … ager may ap say seedhay sawal tadhay sawal karunga to aapka pata nahe ? hoga …hay sawal karna aata hay bas bhook ap ke jetnee nahe hay……….

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  • murar kandari says:

    kojkar ka passa too prbhuji aap laa uaay raddeay ssmahak leaa udady ab patkarita ma josh ki baat aap ka baraam muka sa achee nahi lagte hai janaab

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