निलंबित इंस्‍पेक्‍टर ने दी पत्रकार और उसके बच्‍चे को जान से मरवाने की धमकी

मुजफ्फरपुर में अब पत्रकार हो रहे हैं सिरफिरे पुलिस वालों के शिकार. मुजफ्फरपुर के कजिमोह्मदपुर थाना के प्रभारी सह इंस्पेक्टर बालेश्वर प्रसाद ने मोटी रकम ले कर के सीसी घोटाला के अभियुक्‍त पिंकी को भागने दिया, बात बढ़ने पर जोनल आईजी गुप्तेश्वर पाण्डेय ने अनुसंधानक, जो खुद इंस्पेक्टर थे, को हटाकर डीएसपी मनीष कुमार को अनुसंधानक बनाया. अब निलंबित इस्‍पेक्‍टर एक पत्रकार को धमकी दे रहा है.

डीएसपी मनीष कुमार ने मुजफ्फरपुर में एक निजी चैनल में कार्यरत स्ट्रिंगर अरुण श्रीवास्तव से पुलिस रेड का विसुअल माँगा. इसी पर इंस्पेक्टर बालेश्वर प्रसाद ने फ़ोन कर अरुण श्रीवास्तव को जान से मरवाने की धमकी दे डाली और तो और हद तो तब हो गई जब इस पत्रकार को उसके बच्चे को भी मार देने की धमकी दी गई. साथ ही गलत मुक़दमें में फंसा कर जेल भेज देने तक की धमकी दी गई. इंस्पेक्टर बालेश्वर प्रसाद के पागलपन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने डीएसपी मनीष कुमार, जो पूरे मामले के अनुसंधानक हैं, को भी यही धमकी दे डाली.

पत्रकार अरुण श्रीवास्तव ने पूरे मामले और धमकी दिए जाने की शिकायत जोनल आईजी गुप्तेश्वर पाण्डेय से की है. जोनल आईजी गुप्तेश्वर पाण्डेय ने पत्रकार अरुण श्रीवास्तव को पूरी सुरक्षा और इंस्‍पेक्‍टर के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई का आश्‍वासन दिया है.

महोदय मैं जागरण अखबार के मुजफ्फरपुर एडिशन में छपी कुछ खबरों का अंश भी भेज रहा हूं.


 

केसीसी रैकेट में काजी मुहम्‍मदपुर इंस्‍पेक्‍टर निलंबित

मुजफ्फरपुर, कासं : शहर स्थित बैंकों से फर्जी ढंग से केसीसी लोन दिलाने वाले चर्चित रैकेट पिंकी प्रकरण के मुख्य आरोपी पिंकी को बचाना काजीमुहम्मदपुर थाना के इंस्पेक्टर बालेश्वर प्रसाद को महंगा पड़ा। जांच में दोषी पाए जाने के बाद जोनल आईजी गुप्तेश्वर पांडेय ने शुक्रवार को इंस्पेक्टर बालेश्वर प्रसाद को निलंबित कर दिया। साथ ही उनका मुजफ्फरपुर जिला पुलिस बल से तबादला कर बेतिया जिला पुलिस बल में योगदान देने का आदेश दिया गया है। मालूम हो कि 22 दिसंबर को सुनियोजित तरीके से इंस्पेक्टर बालेश्वर प्रसाद ने पिंकी के रैकेट में शामिल रहे धर्मेन्द्र चौधरी की लिखित शिकायत पर कन्हौली स्थित पिंकी के घर पर छापेमारी कर विभिन्न बैंकों के कागजात, केसीसी लोन के नाम पर जमा किए गए सैकड़ों लोगों के पेपर आदि जब्त किए थे। जबकि इस दौरान घर पर मौजूद पिंकी को गिरफ्तार नहीं किया गया था। दूसरी ओर पीएनबी की गोबरसही शाखा के प्रबंधक सुधीर कुमार सिन्हा को उसी रात गिरफ्तार कर थाना न लाकर शहर के एक होटल में रखा गया। इंस्पेक्टर द्वारा 24 घंटे तक प्रबंधक की गिरफ्तारी की सूचना पुलिस अधिकारियों को भी नहीं दी गई। जांच में स्पष्ट हुआ है कि छोड़ने के लिए सौदेबाजी चलती रही। इंस्पेक्टर की तरफ से मोटी रकम का डिमांड होने के बाद जब प्रबंधक की तरफ से बात नहीं बनी तो गिरफ्तारी के 48 घंटे बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इधर, इंस्पेक्टर के खिलाफ उठती आवाज पर आईजी ने इस केस की जांच स्वयं ले ली और डीएसपी मनीष कुमार को जांच अधिकारी बनाया। जांच में इंस्पेक्टर के खिलाफ काफी साक्ष्य मिलने के बाद डीएसपी ने दो दिन पूर्व कोर्ट में 164 के तहत चार स्वतंत्र गवाहों का बयान दर्ज कराया। सभी गवाहों ने इंस्पेक्टर के खिलाफ तीन लाख रुपये रिश्वत लेकर पिंकी को भगाने व बचाने संबंधी बयान दिए।

कमाई के लिए पिंकी को किया था बेनकाब

संजीव कुमार :  काजीमुहम्मदपुर थानाके थानेदार सह इंसपेक्टर बालेश्र्वर प्रसाद अपने थाना के अलावा पूरे शहर में रैकेट चला रहे थे। काफी साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस पदाधिकारियों ने इंस्पेक्टर के करतूतों की जो काली चिट्ठी तैयार की है। उससे यह खुलासा हुआ है कि इंस्पेक्टर बालेश्वर प्रसाद काफी तेज और झांसा देकर लोगों को चंगुल में फंसाने वाले थे। जांच रिपोर्ट में इनकी करतूतों की परत दर परत खुलासा हो गई हैं। संभावना है कि अगले दो दिनों के भीतर जिले के आला पुलिस पदाधिकारियों द्वारा इंस्पेक्टर के करतूतों की सीडी मीडिया के सामने जारी की जाएगी।

आखिर क्यों नहीं पकड़ी गई पिंकी

कासं : अब सवाल यह उठ रहा है कि जब पिंकी के घर पर पुलिस ने छापेमारी की तो इतने सारे गैर कानूनी कागजात के बाद भी इंस्पेक्टर ने पिंकी को क्यों नहीं गिरफ्तार किया। जांच में यह बात सामने आई है कि छापेमारी के दौरान पिंकी के साथ इंस्पेक्टर का सौदा तय हो गया था। इसलिए उसे नहीं पकड़ा गया। पुलिस द्वारा समय दिए जाने के बाद जब पिंकी अपने घर से दूसरे जगह शिफ्ट कर गई तो देखावटी के लिए रात में उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की गई। डिटेल में इंस्पेक्टर से घंटों बातचीत के साक्ष्य जांच के दौरान पिंकी और इंस्पेक्टर के साथ बातचीत करने का कॉल डिटेल में खुलासा हुआ है। मामला प्रकाश में आने के पंद्रह दिनों तक पिंकी शहर में रही। पुलिस द्वारा पिंकी की गिरफ्तारी नहीं की गई। जांच अधिकारी की माने तो इंस्पेक्टर व पिंकी के कॉल डिटेल में एक ही टावर व एक ही जगह बात करने के कई दिनों तक साक्ष्य मिले हैं। उसके बाद पिंकी को बनारस में शिफ्ट करा दिया गया और इंस्पेक्टर तब तक मदद करते रहे जब तक पिंकी को जमानत नहीं मिल गई।

ऐसे बनी कमाई की योजना

कासं :  इंस्पेक्टर ने काजीमुहम्मदपुर थाना में योगदान देने के कुछ ही दिन बाद अपना रैकेट चलाना शुरू कर दिया था। सबसे पहले उसने जूरन छपरा के एक डाक्टर के तीन लाख तीस हजार रुपये बकाया वसूलने के बाद एक दलाल के जरिए इस सौदे को पक्का किया। सौदे के बाद इंस्पेक्टर ने डाक्टर के दो लाख रुपये वसूल कराये और अपनी जेब भी गर्म की। इसी दौरान दलाल के जरिए जूरन छपरा में ही इंस्पेक्टर को पिंकी के फर्जीवाड़ा केसीसी रैकेट की जानकारी मिली और साजिश के तहत उन्होंने मामला कहीं का और कलमबाग स्थित एक होटल में घटनास्थल को दिखाकर प्राथमिकी दर्ज कराया और अपना खेल शुरू कर दिया। केसीसी रैकेट में शामिल पिंकी के साथ काम करने वाले धर्मेन्द्र को उससे अलग करके इंस्पेक्टर ने उसके ही बयान पर केस दर्ज किया और पिंकी के घर पर छापेमारी कर उपलब्धि हासिल की।

इंस्पेक्टर के कार्यकाल की चर्चित घटनाओं पर नजर

संजीव कुमार, मुजफ्फरपुर, कासं : काजीमुहम्मदपुर थाना के निलंबित इंस्पेक्टर बालेश्वर प्रसाद और पिंकी प्रकरण का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। इसके बाद इंस्पेक्टर की अन्य करतूतों की जांच में भी पुलिस पदाधिकारी जुट गए हैं। मामले में नई बात यह है कि थाना क्षेत्र में इंस्पेक्टर के कार्यकाल में जितनी भी चर्चित घटनाएं घटी, उनकी समीक्षा की जाएगी। आईजी कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि उनके कार्यकाल की चर्चित घटनाओं को तारीखवार स्टेशन डायरी से लेकर प्राथमिकी, गिरफ्तारियां और चार्जशीट की भी समीक्षा की जाएगी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि माधुरी तिवारी हत्याकांड, रवि हत्याकांड, डा. रदन रंजन प्रकरण और चिकू हत्याकांड समेत कई अन्य मामलों की समीक्षा होगी। सभी मामलों की समीक्षा का नेतृत्व स्वयं जोनल आईजी गुप्तेश्वर पांडेय करेंगे।

इन घटनाओं का बरकरार है संस्पेंस

– शहर के प्रतिष्ठित सर्जन डा. वीरेन्द्र किशोर के घर डाका मामले में इंस्पेक्टर ने गुत्थी नहीं सुलझाई और दूसरे गिरोह पर शंका जाहिर करते हुए पुलिस के आलाधिकारियों को गुमराह करके मोतिहारी से इसका तार जोड़ दिया।

– शिक्षिका माधुरी तिवारी से चेन छीनने के क्रम में गोली मारकर हत्या करने के मामले में भी सही गिरोह का खुलासा नहीं हुआ। सस्पेंस व तथाकथित कहानी बताकर गोल्डन समेत दो को पकड़कर मुंबई के दाऊद इब्राहिम से इसका तार जोड़कर अपना नाम कमाया।

– डा. रदन रंजन प्रकरण में बहू के बयान पर डाक्टर के खिलाफ यौन शोषण के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की और डाक्टर को गिरफ्तारी नहीं करने के लिए सौदेबाजी करते रहें। अंत में पुलिस की मदद से उन्हें कोर्ट से जमानत मिली।

– पिंकी प्रकरण में भी यही हुआ। गिरफ्तारी से बचने के लिए शहर के विभिन्न होटलों में वे छिपती रही और उससे सौदेबाजी चलती रही। अंत में उसे भी इनकी मदद से कोर्ट से जमानत मिली।

– नेहरू युवा केन्द्र में फर्जी ढंग से नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ। लेकिन इन मामले में भी वे लीपापोती करके अभियुक्त को बचाने का काम किए।

निलंबन के बाद शिकायतों का अंबार

मुजफ्फरपुर : इंस्पेक्टर बालेश्वर प्रसाद की प्रताड़ना से तंग थाना क्षेत्र के कई लोग शनिवार को जोनल आईजी और एसएसपी से मिलकर शिकायतों का अंबार लगा दिए। आमगोला के आशुतोष शाही ने आरोप लगाया है कि इंस्पेक्टर ने इंश्योरेंस के नाम पर दो लाख रुपये लिए लेकिन इंश्योरेंस नहीं किया और राशि हजम कर लिया। रक्सौल के एक व्यवसायी ने इंस्पेक्टर व प्रशिक्षु दारोगा पर 87 हजार रुपये छीनने का आरोप लगाया है। चर्चित ठेकेदार सत्येन्द्र दुबे हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी मंटू से पिटाई नहीं करने के लिए एक लाख रुपया लिया गया। फिर सत्येन्द्र दुबे के परिवार से भी मंटू को जहर का सुई देने के नाम पर एक लाख रुपये वसूल किए गए थे। इस तरह की कई शिकायतों के आवेदन जोनल आईजी के यहां आए हैं। आईजी सभी मामलों की जांच का आदेश एसएसपी को दिए हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

Comments on “निलंबित इंस्‍पेक्‍टर ने दी पत्रकार और उसके बच्‍चे को जान से मरवाने की धमकी

  • arun bhai apne ko akela na samjhe hum sabhi apne samaj ke log aap ke sath hai.yah inspector me mere ek mitra se 80,000 le kar harap liya hai.apni beti ko ek company ka agent bata kar insurance ke naam par paisa liya or phir harap liya.;
    muzaffarpur me aap apne ko akela na samjhe hum sabhi aap ke sath hai.marne wala se bachane wala jyada bada hota hai.
    kumar Chandan muzaffarpur

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  • ramesh shahi says:

    ARUN BHAI GHABRANA NAHI HAI.AAP KE MAMLE ME S.S.P NE FIR KA ADESH DE DIYA HAI.AISE BHARST OFFICER KE KHILAF APNE AWAZ UTHAI HAI.DARNE KI BAAT NAHI HAI.PURA SAMAJ AAP KE SATH HAI.AAP KE KARAN AB EK NIRDOSH JO ZAIL ME HAI WAH BHI BAHAR AA GAYGA.THANKS.RAMESH SHAHI

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