नेपाल की पत्रकारिता पर पुस्तक प्रकाशन के लिए मिला अनुदान

शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा राजकीय महाविद्यालय पालमपुर के जनसंचार विभाग के सहायक प्रो. डॉ. कौशल कुमार पांडे को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसन्धान परिषद ने नेपाल में जनमाध्यमों का विकास एवं प्रवृत्तियां विषयक शोध प्रबंध को प्रकाशित करने के लिए 50  हजार का अनुदान दिया हैं. यह शोध कार्य डॉ. पांडे ने मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान काशी विद्यापीठ वाराणसी के निदेशक प्रो. ओम प्रकाश सिंह के निर्देशन में पीएचडी उपाधि हेतु 2007 में किया हैं.

पत्रकारिता विषय में पहली बार नेपाल की पत्रकारिता पर यह शोध कार्य हुआ हैं. इसमें नेपाल का इतिहास, नेपाल में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का विकास एवं प्रवृत्तियां, नेपाल की न्यूज़ समिति राष्ट्रीय समाचार सेवा आदि पर गहन अध्ययन हैं. भारतीय सामाजिक अनुसन्धान विज्ञान परिषद ने इस कार्य को 500  प्रतियों में प्रकाशित करने हेतु 50 हजार का अनुदान दिया हैं. निश्चित रूप से यह पत्रकारिता के छात्रों के लिए लाभदायक होगी. इसका प्रकाशन क्लासिकल पब्लिसिंग कंपनी नई दिल्ली द्वारा किया जायेगा.

Comments on “नेपाल की पत्रकारिता पर पुस्तक प्रकाशन के लिए मिला अनुदान

  • कुमार सौवीर, महुआ न्‍यूज, लखनऊ says:

    पहले तो डाक्‍टर कौशल कुमार पाण्‍डेय को बधाई।
    तद्उपरांत, भारतीय सामाजिक अनुसंधान विज्ञान परिषद की निंदा।
    अरे परिषद वालों। पचास हजार रूपये में तो इतने बडे विषय की पुस्‍तक के छपने में ही खर्च हो जाएगा, फिर अनुसंधान का खर्च कैसे पूरा होगा। क्‍या यह बात भेजे में नहीं आयी आप लोगों के। कम्‍म्‍म्‍म्‍म्‍माल है आपकी मेधा।
    दरअसल, सरकारी कामकाज के तौरतरीके ऐसे ही शर्मनाक होते हैं, यह बात एक बार फिर साबित तो हो ही गयी।
    अब यह कौशल पांडेय पर निर्भर करता है कि वे इस चुनौती को किस तरह पूरा करते हैं। मेरे योग्‍य कोई जरूरत हो तो बताइयेगा।
    और हां, अगर जरूरत पडे तो नेपाल की पत्रकारिता पर श्रद्धेय आनंद स्‍वरूप वर्मा से जरूर सम्‍पर्क कीजिएगा। उनकी नेपाल की राजनीति और पत्रकारिता पर गहरी दृष्टि है
    । पता है— क्‍यू-63, सेक्‍टर-12, नोएडा।
    कुमार सौवीर, महुआ न्‍यूज, लखनऊ

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  • kausal ki aap ko badhai ho.
    upar kumar sauvir ji ka comment padha mahua news ke hain. inhone likha hai ki ansandhan kaise pura hoga .are mahodaya puri khabar to padhiye anusandhan ho chuka hai uske bad pustak publish ho rahi hai.

    aap ka koi dosh nahi hai jaldibazi ki aadat hi aaj kal k patrakaro ko piche le jarahai hai aur dusare ki nida karne ke pahale puri sachai ka bhi pata nahi karte.

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  • रिंकू सिंह says:

    काशी विद्यापीठ में तो फर्जी शोध होते हैं,वहाँ का पत्रकारिता विभाग तो चौर्यकला में निष्णात है

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