न्याय के मजाक का गवाह बना पत्रकार

रायबरेली के लालगंज में अमर उजाला के पत्रकार अवनींद्र पर हुए कातिलाना हमले का आरोपी पकड़ा नहीं जा सका. उसके पीछे कारण था कांग्रेस के एमएलसी दिनेश सिंह का पावर और उनकी पहुंच. आरोपी केशव सिंह को अदालत ने जमानत भी दे दी. मामला सिर्फ इसी घटना का नहीं है. केशव के ऊपर करीब दर्जन भर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

उसका खुलेआम इस तरह से घूमना क्या किसी राजनीतिक शरण का नतीजा है. जबकि इस बार मामला रायबरेली का है, जहां से चुनी गई सांसद सोनिया गांधी के घर से देश की समूची राजनीतिक दिशा तय हो रही है. कांग्रेस के  एमएलसी दिनेश सिंह के दबाव के कारण पुलिस आरोपी को पकड़ने की हिम्मत नहीं दिखा सकी. सवाल इस बात का है कि अब न्याय दरवाजा कहां से खुलेगा. क्या अब न्याय की आस लेकर पुलिस के पास जाने के बजाय नेताओं के पास जाना शुरू करना चाहिए.

सवाल इस बात का भी है कि अगर इस बार फिर हमला हुआ, गोली सटीक निशाने पर बैठी तो कौन जिम्मेदार होगा या फिर आम जनता को अपनी सुरक्षा तय करने के लिए खुद ही हथियार उठा लेना चाहिए? और अगर न्याय यही है तो फिर नक्सली लाख गुना अच्छे हैं. सोशल इंजीनियरिंग से अच्छा तो पहले सामाजिक न्याय की बात करनी चाहिए. जहां अपराधी हो, पीड़ित हो और न्य़ाय हो. न जाति हो न धर्म हो. और न किसी पार्टी की विचारधार को ढाल बनाकर किसी छूट की गुंजाइश हो.

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