परिचय के नाम पर चुपचाप हो गया डीजीपी का कार्यक्रम

: मान्‍यताप्राप्‍त पत्रकारों की एसोसिएशन एक बार फिर बेपर्दा : पदाधिकारियों की कार्यशैली से पत्रकारों में रोष : लखनऊ : मान्‍यताप्राप्‍त पत्रकारों की एसोसिएशन एक बार फिर चर्चा में आ गयी। वजह है इसके पदाधिकारियों के कामकाज की शैली। ताजा मामला है यूपी के नये डीजीपी ब्रजलाल से पत्रकारों का आमना-सामना कराना। तीन दिन पहले अचानक ही पता चला कि एसोसिएशन ने प्रदेश के नये डीजीपी ब्रजलाल को मुख्‍यमंत्री कार्यालय स्थित मीडिया सेंटर में बुला लिया।

बताया गया कि इसी बहाने नये डीजीपी का स्‍वागत-सत्‍कार कर उन्‍हें यह नया पद सम्‍भालने की बधाई दी जाएगी। वैसे भी डीजीपी ब्रजलाल पत्रकारों में खासे लोकप्रिय हैं। आमतौर पर मीडिया सेंटर में पांच बजे प्रदेश की कानून-व्‍यवस्‍था की हालत पर पुलिस ब्रीफिंग की परम्‍परा है जिसे अब तक सामान्‍यतय: ब्रजलाल ही सम्‍बोधित करते रहे हैं। तो, इस समारोह का समय साढे़ चार बजे का तय किया गया। तयशुदा वक्‍त पर ब्रजलाल और एडीजी कानून-व्‍यवस्‍था सुबेश्‍ा कुमार मीडिया सेंटर के मीडिया हाल में पहुंच गये। एक शख्‍स को चाय-काफी का जिम्‍मा दिया गया।

पत्रकारों में इस बात को लेकर खासा क्षोभ है कि इसके बारे में आम सदस्‍यों को जानकारी ही नहीं दी गयी और चंद लोगों ने खुद को पत्रकारों का प्रतिनिधि घोषित करते हुए ब्रजलाल और महेश्‍वरी की आवभगत की। जानकारों के मुताबिक इस दौरान वहां सामान्‍य तौर पर मौजूद रहने वाले पत्रकारों के अलावा एसोसिएशन के वे चंद लोग ही मौजूद थे, जो आमतौर पर प्रेस ब्रीफिंग जैसे कार्यक्रमों में नहीं आते।

बहरहाल, क्षुब्‍ध पत्रकारों का कहना है कि यदि ऐसा कोई कार्यक्रम आयोजित किया जाना लाजिमी ही था, तो एसोसिएशन के सभी सदस्‍यों को इस बारे में सूचित किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा न करके इन चंद पत्रकारों ने एसोसिएशन की परम्‍परा का उल्‍लंघन किया है।

Comments on “परिचय के नाम पर चुपचाप हो गया डीजीपी का कार्यक्रम

  • jab vote chahiye hota hai tabhi inhe manyata prapt patrakaro ki jarurat mahsoos hoti hai bad me apna kam nikalne ke alava inke pas koi kam nahi hai ye hume jagane ke liye kafi hai ki aagami chunav me aise patrakaro ko jita kar laye jo sahi mayaene me sabhi ko samjhe par aise log hai kaha ye bhi badi bat hai ye neta patrakar patrakar nahi balki politician ki tarah apne ko neta mante hai mai to mayavati ji se kahunga ki inhe bhi lal batti de de jismne khali ye apna kam kare na ki patrakaro ko badnam .

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