पुलिसिया भाषा लिखने से नाराज लोगों ने भास्‍कर की प्रतियां फूंकी

दैनिक भास्कर, धनबाद में पाठकों की मर्जी भांपने में पूरी तरह असफल है। जिसका प्रमाण 28 अप्रैल को शहर के कई हिस्से में पाठकों द्वारा दैनिक भास्कर की प्रतियां जलाना तथा पैर से कुचलना है। घटना इस तरह है कि 27 अप्रैल को बीसीसीएल कंपनी के अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस द्वारा फायरिंग किए जाने से चार लोगों की मौत और सैंकड़ों लोगों के घायल होने की घटना घटी थी।

इस घटना का विरोध कर रहे कई नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। धनबाद के सभी अखबारों ने इस घटना को पुलिसिया बर्बरता बताते हुए समाचार छापा। लेकिन दैनिक भास्कर ने इसके लिए सीधे नेता और आम जनता को जिम्मेवार ठहराते हुए खबर प्रकाशित किया। साथ ही लोगों को आगे कर नेताओं के भाग जाने तथा गिरफ्तार नेताओं का थाना हाजत में मुर्गा पार्टी का आनंद लेने का समचार प्रकाशित किया गया।

भास्‍कर

बताते हैं कि 28 अप्रैल को बाजार में अखबार आते ही लोगों ने इस तरह की खबर पढ़कर आग बबूला हो गये और भास्कर की प्रतियां जलानी शुरू कर दी। कई जगह भास्कर को जमीन पर फेंक उसे पैर से कुचला भी गया।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

Comments on “पुलिसिया भाषा लिखने से नाराज लोगों ने भास्‍कर की प्रतियां फूंकी

  • Chander Sharma says:

    Surprised to read your news that Bhaskar has stoop to this level. I remember how MD Sudhir Aggarwal used to tell all of us in Chandigarh to be only and only reader friendly though its editions in Haryana gradually became govt friendly. The problem with language papers is that they tend to be poor in contents and gradually look towards govts for revenue generation. It appears as if Bhaskar has some particular agenda in Dhanbad and needs support of police to implement this.
    Chander Sharma

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