पुलिस की पिटाई ने ली पत्रकार की जान!

: फतेहपुर में आपस में ही उलझे पुलिसकर्मी : उत्तर प्रदेश पुलिस को जनता से मित्रवत व्यवहार करने की नसीहत देने वाले पुलिस महानिदेशक करमवीर सिंह की मित्र पुलिस की परिकल्पना को प्रदेश मे स्वेक्षाचारी पुलिसकर्मियों द्वारा ही पलीता लगाया जा रहा है। अपने ही अधिकारियों पर हमलावर होने वाली पुलिस का वीभत्स चेहरा फतेहपुर मे भी देखा जा रहा है। यहां लगभग एक सप्ताह पूर्व क्षे़त्रीय पत्रकार से खुन्नस खाये एक दरोगा ने उसे मानसिक और शारीरिक संत्रास देकर जेल क्या भेजा, उसकी मौत ही हो गयी।

ना! ना! डीजीपी साहब, हमारी मंशा आपकी मित्र पुलिस पर बेवजह उंगली उठाने की बिल्कुल नही है। पर इसे आप क्या कहेंगे, जब आप प्रदेश में आने वाले समय में खड़ी हो सकने वाली कानून व्यवस्था से सम्बंधित चुनौतियों को लेकर पूरे प्रदेश का तूफानी दौरा कर रहे हैं। अपने सहयोगियों को पुलिस मित्र होने की नसीहत दे रहे हैं। आज जब आप अपने तूफानी दौरों के क्रम में फतेहपुर पुलिस लाइन में हेलीकाप्टर से उतरे तो भले ही आपने सलामी लेने को महत्व न दिया हो, लेकिन उसी पुलिस लाइन की एक बैरिक मे आपके आगमन की पूर्व संध्‍या पर मित्र पुलिसकर्मियों ने दारू के पैसे को लेकर अपने ही एक साथी को पीट-पीट कर मरणासन्न करते हुए ‘भइया आल इज वेल‘ की तर्ज पर सलामी दे दी थी।

दोनों मामलों की जानकारी यह है कि जनपद के किशनपुर थाना क्षेत्र की चौकी विजईपूर के चौकी प्रभारी मनोज पाठक ने एक सप्ताह पूर्व क्षेत्रीय पत्रकार दलित राम भरोसे गौतम को उसकी आये दिन की खबरों से तंग आ कर जुए के फर्जी मामले पकड़ा। इस दौरान उसे इस तरह की मानसिक एवं शारीरिक प्रताणना दी कि उसकी मौत हो गयी। मित्र पुलिस इससे इनकार कर रही है लेकिन मित्र पुलिस के दूसरे कारनामे के रूप में 12 सितम्बर की रात लगभग साढ़े नौ बजे पुलिस लाइन की बैरक में दारू के पैसों के लेनदेन को लेकर श्रीकृष्णसिंह तोमर नामक सिपाही को मित्र पुलिस के दो सिपाहियों धर्मेन्द्र सिंह बाबा व महेन्द्र सिंह ने लोहे की राड से इतना पीटा कि उसे मरणासन्न हालत में अस्पताल ले जाना पड़ा।

पुलिस लाइन में पुलिस मित्रों के बीच घटी इस घटना को आला अधिकारी किस प्रकार लेते है? यह देखने की जरूरत से पहले जनपद में मठाधीशी कर रहे पुलिस के पत्रकार मित्रों से भी दलित और गरीब ग्रामीण पत्रकार रामभरोसे गौतम की मौत की कैफियत मांगने की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता। सीबी सिंह त्‍यागी

फतेहपुर से सीबी सिंह त्‍यागी की रिपोर्ट.

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Comments on “पुलिस की पिटाई ने ली पत्रकार की जान!

  • Rizwan Mustafa says:

    Khabar Pada Sadma Laga Ek Saathi ko Phir Maya Ki Zalim police ne Maar dala, Reporter hum aaj bhi aapsi gutham-guttha me lage hai,dalalo ke aage asli reportero ka jina haram ho gaya hai ,Bade patrakar aaram me hai chote mare ja rahe iske baad shayad inhi ki numbar aaye tab dekhiye ye kitana chil po machayenge, abhi bhi waqt hai reportaro ki aan,baan, shaan ko bachao, maya ki police ke zulm ki awaz uthao,kuch na dila pao to samman to dila do

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