प्रदीप कहते थे- ‘अभी बहुत दूर जाना है’, पर इतने दूर चले जाएंगे, ये आशंका न थी

आज सुबह सुबह कुछ पुराने दोस्तों के मैसेज आये कि अपना एक पुराना साथी अब इस दुनिया में नहीं रहा… मन में जिज्ञासा हुई कि कौन है वो, तभी मैंने कुछ दोस्तों को फोन मिलाया तो पता चला कि जी न्यूज के काबिल व तेज तर्रार रिपोर्टरों में से एक प्रदीप राय नहीं रहे। प्रदीप से मेरी मुलाकात कुछ 5 साल पहले फील्ड में हुई थी.. तब मैं आजाद न्यूज में क्राइम रिपोर्टर हुआ करता था। उन्हीं दिनों प्रदीप दिल्ली में नये-नये आये हुए थे।

इसके पहले बनारस में जी न्यूज में हुआ करते थे, लेकिन दिल्ली आफिस ने एक अच्छा रिपोर्टर बनारस में पड़ा हुआ है, सोच कर दिल्ली बुला लिया। दिल्ली में पहली मुलाकात खबरों को लेकर हुई थोड़ी बहुत बात हुई… उसके बाद हम दोनों ने एक दूसरे को अपने-अपने नंबर दिए और फिर रोज बातें होने लगी। प्रदीप से उन दिनों रोजाना सुबह खबरों को लेकर बात हो जाया करती थी, लेकिन धीरे-धीरे खबरों की दोस्ती व्यक्तिगत हो गयी और घनिष्टता इसलिए भी बढ़ गयी कि मैं गोरखपुर से था और प्रदीप गाजीपुर से… और प्रदीप का वो देशी अंदाज हाथ में सिगरेट लिए हर बात में कहना बाबा टेंशन कांहे ले रहे अभी सब ठीक कर लिया जाएगा… प्रदीप खबरों को लेकर हमेशा से संजीदा रहा करते थे, लेकिन कभी न तो तनाव लेते थे और न ही किसी को तनाव में देख सकते थे… फिर तभी मैं सीएनईबी चैनल चला गया और मेरी बीट बदल गयी… क्राइम से पॉलिटिकल बीट कवर करने लगा। धीरे-धीरे मेरी और प्रदीप की मुलाकतें कम होने लगीं।

प्रदीप और मैं दोनों अलग-अलग बीट कवर करने लगे और इस दौरान व्यस्तता के कारण मेरी प्रदीप की मुलाकत और बात कम होती गयी, लेकिन जब कभी हम मिलते तो उसी जिंदादिली और जज्‍बे से… जब कभी मैं दिल्ली की जिंदगी और असफलताओं से परेशान हो जाया करता तो प्रदीप मुझे हमेशा हिम्मत दिलाते और कहते विपिन भाई जब हम लोग छोटे-छोटे शहरों से इतनी दूर आएं हैं तो हमें अभी और दूर जाना है.. प्रदीप की बातों से हिम्मत आती और फिर वही हंसी-ठिठोली शुरु हो जाती… देखिए बातों ही बातों में बताना भूल गया कि प्रदीप हमेशा फोन करके मुझसे मेरी नई नौकरी के लिए पार्टी की मांग करते और मैं बस अगले हफ्ते का वादा करता। इस दौरान 3 साल और बीत गए और मैंने न्यूज24 ज्वाइन कर लिया और मुझे लखनऊ भेज दिया गया।

ये सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि लखनऊ आने की बात प्रदीप को नहीं बता सका और लखनऊ आने के बाद प्रदीप भाई का फोन आया और नाराज होने लगा, लेकिन फिर जब सारी बात बताई तो प्रदीप ने अपनी खुशी जताई और दो-दो पार्टी पेंडिंग है बोल के फोन रख दिया। इसके बात कई बार प्रदीप से बात हुई और हर बार मैं दिल्ली आकर पार्टी देने का वादा करता और प्रदीप लखनऊ आकर पार्टी लेने का वादा… अक्सर बातों-बातों में प्रदीप भी दिल्ली छोड़ कर वापस बनारस जाने कि बात किया करते थे और मुझसे शिकायत की बाबा भाई को अकेले छोड़ कर चले गए. इसी दौरान प्रदीप की शादी हुई एक बेटी भी हुई और अचानक आज सुबह इस दुख भरी खबर ने बिल्‍कुल हिला कर रख दिया। मैंने अपना एक बेहतरीन साथी खो दिया… अब भी भरोसा नहीं हो रहा कि मुझसे नौकरी की पार्टी के लिए हमेशा झगड़ा करने वाला प्रदीप अब नहीं रहा… लेकिन प्रदीप मुझे हमेशा तुमसे एक शिकायत रहेगी कि मैंने दिल्ली छोड़ा, तुम तो हम लोगों को हमेशा के लिए इस दुनिया में अकेला छोड़ कर चले गए…. भगवान आपकी आत्मा को शांति दें और आपके परिवार को इस दुख भरी घड़ी, मुश्किल भरी घड़ी में लड़ने की हिम्मत दें.

विपिन चौबे

न्यूज24

लखनऊ

Comments on “प्रदीप कहते थे- ‘अभी बहुत दूर जाना है’, पर इतने दूर चले जाएंगे, ये आशंका न थी

  • Sonu Mishra says:

    ye mera Soubhagya tha jo 2007 me is Mahan Patrakar se meri ek choti si mulakat hui thi..ye mulkat zindagi bhar nai bhulunga. Bhagwan unki atma ki raksha kare

    Reply
  • Vinay Singh, Ghazipur says:

    Pradeep (Babloo)1998 mein Jabalpur se Gazipur aaya aur yaha humlogon ne sath Electronic media ki neev rakhi. ek weekly news video magzine bana kar. Shuru se mehanti aur mahtvakanchha wala vyaktitva raha hai Pradeep ka. 2009 ki shuruaat mein vo Delhi gaya apne prayaas se Zee mein kaam kiya kintu Leaver ki problem se vo thoda bimaar tha, aaj achanak ek common mitra ne ye dukhad suchna di. bada dukhad raha.. Kyunki hajir jawab aur betakalluf Pradeep jaise log kam milte hain is field mein.
    Hum sabhi uski aatma ki shanti ke liye prabhu se prarthna karte hain.

    Reply
  • Fahad Mahmood says:

    Afsoos…. Ghazipur ne ek azeem shaksiyat ko khoo diyaa…. Badaa Ajeeb saa lag raha hai.. yee sun ke.. koi alfaaz bhi nahi hai…. Kis tarah apni bhavnaon ko likhu….. Bass…. Bhai… Kaa Chehraa samne aa jata hai…. badaa hi milansar…. enthusiastic….. aur bhi bahot kuch………..

    Reply
  • faisal khan says:

    pardeep ji ki asamay maut ka maloom huva to sun kar bada hi afsos huva.itni kam umar mai jitni traqqi ki har koi uske bare mai soch bhi nahi sakta,upar wale se yahi prarthna hai ki unki aatma ko shanti de aur unke ghar walon ko sabr de,,m faisal khan(channel one news)saharanpur

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *