प्रधान की पदवी डिलीट, अब सिर्फ संपादक कही जाएंगी

Mrinal Pandeyमीडिया के गलियारों की एक बड़ी चर्चा। दैनिक हिंदुस्तान की संपादक मृणाल पांडेय और उनके कई स्थानीय संपादकों की विदाई के कयास लगाए जाने लगे हैं। इसके पीछे कई मजबूत तर्क है। सबसे बड़ा घटनाक्रम यही है कि मृणाल पांडेय का पद प्रधान संपादक की जगह संपादक कर दिया गया है। इस बदलाव का गवाह है दैनिक हिंदुस्तान का कल और आज का अखबार। प्रिंट लाइन में मृणाल पांडेय का पद घटा दिया गया है।

मृणाल पांडेय के नाम के पहले लगा प्रधान संपादक की पदवी छोटी करते हुए सिर्फ संपादक लिख दिया गया  है। हालांकि एचटी मीडिया लिमिटेड से जुड़े़ लोग इसे आरएनआई की गाइडलाइन के तहत किया गया कार्य बताते हुए बेहद तकनीकी मामला करार दे रहे हैं पर जानकारों का कहना है कि मामला सिर्फ तकनीकी भर नहीं है। मीडिया विश्लेषक इसे एक तरह का डिमोशन करार दे रहे हैं।

मीडिया जगत के उच्च पदस्थ सूत्रों की बातों पर भरोसा करें तो उनके मुताबिक पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रमों पर निगाह दौड़ाई जाए तो साफ हो जाता है कि एचटी मीडिया प्रबंधन बेहद योजनाबद्ध तरीके से बदलाव की मुहिम शुरू कर चुका है। इस मुहिम के पीछे वजह है हिंदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान अखबार को वर्तमान स्थिति (कंटेंट व प्रसार दोनों लिहाज से) से निकालकर एक नई स्थिति और नई उंचाई पर ले जाने का लक्ष्य। फिलहाल जो उंचाई इस मीडिया हाउस के अखबारों ने पाई हुई है, उतने मात्र से प्रबंधन संतुष्ट नहीं है। वो विस्तार और प्रसार के इस दौर में सबसे तेज और सबसे आगे रहना चाहता है। इसी के तहत जमे जमाए वरिष्ठ लोगों पर लगातार एक एक कर गाज गिर रही है। पिछले दिनों हिंदुस्तान टाइम्स के दिल्ली संस्करण के संपादक राहुल शर्मा और मैनेजिंग एडीटर पंकज कौल से प्रबंधन ने इस्तीफा ले लिया।  ये अब साकाल ग्रुप के दिल्ली से लांच होने वाले अंग्रेजी अखबार में चले गए हैं। इससे पहले हिंदुस्तान टाइम्स, लखनऊ के संपादक सीके नायडू को हटाया गया।

उधर,  हिंदुस्तान में एक खास तरह का माहौल क्रिएट हो जाने के चलते वहां से लोग लगातार पलायन कर रहे हैं। अगर पिछले कुछ महीनों का आंकड़ा देखा जाए तो ढेर सारे सीनियर लोग यहां वहां बड़े पदों पर चले गए। इनमें प्रमुख हैं रासबिहारी, हरवीर, उर्मिलेश, अनूप भटनागर, शशि कुमार झा। हरवीर ने बिजनेस भास्कर के दिल्ली संस्करण के संपादक का पद संभाला है तो इसी अखबार में उर्मिलेश ने बतौर राजनीतिक संपादक के रूप में ज्वाइन किया। उर्मिलेश हिंदुस्तान के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे और उन्हें हिंदी के अच्छे वरिष्ठ पत्रकारों में से एक माना जाता है। इसी तरह 20 वर्षों से हिंदुस्तान के साथ जुड़े रासबिहारी ने नई दुनिया के दिल्ली में आने वाले नए अखबार के मेट्रो एडीटर के रूप में ज्वाइन किया। उन्हीं के साथ अनूप भटनागर ने भी एडीटर लीगल अफेयर्स के रूप में ज्वाइन किया है। उपरोक्त के अलावा हिंदुस्तान से जूनियर लेवल पर कई सारे लोग इधर-उधर हुए हैं। इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार के डिजाइन व लेआउट सेक्शन से भी ढेर सारे लोगों ने नाता तोड़कर दूसरे मीडिया हाउसों का दामन थामा है।

कभी अपने बेहतर पद व पैकेज के लिए जाने जाना वाले हिंदुस्तान में पिछले कुछ वर्षों में एक खास तरह का माहौल पैदा हो गया है। आरोप है कि इस अखबार का संपादकीय नेतृत्व एक खास तरह के लोगों को ही अपने यहां अप्वाइंटमेंट देता है। इसके चलते मीडिया जगत में मृणाल पांडेय और उनके अधीनस्थ प्रमुख लोगों के बारे में धारणा लगातार उलटी होती जा रही है। सूत्रों का कहना है कि एक खास मानसिकता के लोगों की नियुक्ति और उन्हें बढ़ावा देने की प्रवृत्ति से हिंदुस्तान अखबार के अंदर ही तगड़ी गोलबंदी हो चुकी है। इस खेमे में फिट न बैठ पाने वाले लोग लगातार दूसरे बैनरों में जाने का प्रयास कर रहे हैं और जिन्हें मौका मिल रहा है वो जा भी रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि मृणाल पांडेय के अलावा उनकी टीम के कई स्थानीय संपादकों पर भी गाज गिरने के पूरे आसार हैं। उल्लेखनीय है कि मृणाल पांडेय जब दैनिक हिंदुस्तान के साथ जुड़ी थीं तो उन्हें धीरे धीरे एचटी मीडिया के समस्त हिंदी सेक्शन का प्रभारी बनाकर ग्रुप एडीटर बना दिया गया। इनमें एचटी मीडिया की हिंदी मैग्जीन कादंबिनी और नंदन भी शामिल हैं। पर अब उनके अधिकारों में कटौती की कवायद शुरू कर दी गई है। सूत्रों का कहना है कि हो सकता है इन स्थितियों में (प्रधान संपादक की जगह संपादक किए जाने) अपने खास तेवर व विचारधारा के लिए मशहूर मृणाल पांडेय खुद भी इस्तीफा दे दें पर इस बारे में सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं।

एचटी मीडिया के प्रबंधन के सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन अब दो-तरफा रणनीति बनाकर चल रहा है। एक पुरानी नेतृत्वकारी टीम को बदलकर नई उर्जावान टीम के हाथों हिंदुस्तान को सौंपना और खर्चों में कटौती करते हुए नए संस्करणों को फटाफट लांच करना। इसी के तहत बताया जाता है कि हिंदुस्तान के साथ सातों दिन बांटे जाने वाले सप्लीमेंट्स की जगह दिल्ली के बाहर के एडीशन को अब सिर्फ पांच दिन ही सप्लीमेंट दिए जाएंगे और दो दिनों मंगल और बुध को कोई सप्लीमेंट नहीं दिया जाएगा। उधर, प्रबंधन ने नए संस्करणों की लांचिंग की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। एचटी मीडिया प्रबंधन हिंदुस्तान के नए संस्करण खोलने की मुहिम के साथ साथ एक टैबलायड हिंदी अखबार भी प्रकाशित करने की तैयारी में है। इस सबके पीछे एचटी मीडिया की बस एक रणनीति है कि आगे आने वाले दिनों में एचटी मीडिया के अखबारों को देश का नंबर वन अखबार बनाया जाए।

(अगर आपको इस रिपोर्ट पर कुछ कहना है तो  yashwant@bhadas4media.com पर मेल कर सकते हैं या सीधे 09999330099 पर काल कर सकते हैं)

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