फिर पीपली लाइव बना दिल्ली का मीडिया

शेष नारायण सिंहदिल्ली में बाढ़ का पानी कम होना शुरू हो गया है. यमुना नदी में इस साल अपेक्षाकृत ज्यादा पानी आ गया था. और उस ज्यादा पानी के चलते तरह तरह की चर्चाएँ शुरू हो गयी थी. इस सीज़न में ज़्यादातर नदियों में बाढ़ आती है लेकिन इस बार दिल्ली में यमुना नदी में आई बाढ़ को बहुत दिनों तक याद रखा जाएगा. उसके कई कारण हैं. सबसे प्रमुख कारण तो यह है कि मानसून सीज़न के ख़त्म होते ही दिल्ली में कामनवेल्थ खेल आयोजित किये गए हैं.

कुछ आलसी और गैरजिम्मेदार कांग्रेसी नेताओं की वजह से इन खेलों की तैयारी अपने समय से नहीं हो पायी है. अब तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं और घूसजीवी अफसरों और कांग्रेसियों की चांदी है. खेलों की तैयारी से सम्बंधित सब कुछ अब जिस रफ़्तार से हांका जा रहा है, उसमें धन की कोई कीमत नहीं रह गयी है. भाई लोग जम कर लूट रहे हैं. डेंगू, स्वाइन फ़्लू और वाइरल बुखार का ख़तरा बना हुआ है. ज़्यादातर अफसरों और नेताओं की ईमानदारी सवालों के घेरे में है और उनकी विश्वसनीयता पर तरह तरह के सवाल उठाये जा रहे हैं. लेकिन इस सारी प्रक्रिया में सबसे ज़्यादा सवाल मीडिया पर उठ रहा है.

एक बड़े मीडिया घराने पर तो यह भी आरोप लग चुका है कि उसके अखबार ने कामनवेल्थ खेलों की पब्लिसिटी के ठेके के लिए कोशिश की थी लेकिन जब नहीं मिला तो आयोजन समिति के प्रमुख को औकात बताने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया और कामनवेल्थ खेलों पर आरोपों की झड़ी लगा दी. मीडिया कंपनी पर आरोप इतने गंभीर पत्रकार ने अपने लेख में लगाया है कि उस मीडिया  कंपनी सहित किसी की भी हिम्मत उसका खंडन करने की नहीं है.

बहरहाल आजकल टेलीविज़न के खबर देने वाले चैनलों ने बाढ़ को अपनी कवरेज के रेंज में ले लिया है. और बाढ़ का ऐसा चित्र प्रस्तुत किया कि दूर-दूर से लोग घबड़ा कर दिल्ली में रहने वाले अपने रिश्तेदारों को फोन करने लगे और पूरी दुनिया में प्रचार हो गया कि दिल्ली बुरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गई है. लेकिन यह सच नहीं था. दिल्ली के कुछ निचले इलाकों में पानी आ गया था. वहां रहने वालों की ज़िंदगी दूभर हो गयी थी लेकिन पूरी दिल्ली बाढ़ की चपेट में हो, ऐसा कभी नहीं था. लेकिन टी वी न्यूज़ वालों ने कुछ इस तरह का माहौल बनाया कि दुनिया की समझ में आ गया कि दिल्ली बाढ़ के लिहाज़ से एक खतरनाक शहर है.

इस सारे गड़बड़झाले में आंशिक-सत्य, अर्ध-सत्य और असत्य का भी सहारा लिया गया. सबसे अजीब बात तो यह थी कि दिन रात टीवी चैनलों में खबर आती रही कि हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज से पता नहीं कितने लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाने वाला है, जिसके बाद दिल्ली में हालात बहुत बिगड़ जायेगें. इस में आंशिक-सत्य, अर्ध-सत्य और असत्य सब कुछ है. सचाई यह है कि इन खबरों के पैदा होने के लिए जो लोग भी जिम्मेवार थे, उन्होंने होम-वर्क नहीं किया था. उन्हें पता होना चाहिए था कि किसी भी बैराज से पानी छोड़ा या रोका नहीं जा सकता.

बैराज बाँध की तरह ऊंचे नहीं होते. इसलिए पानी को बांधों की तरह रोका नहीं जा सकता, अगर बैराज के गेट न खोले जाएँ तो पानी अपने आप छलक कर बहने लगता है. बैराज नदी की तलहटी से नदी में बह रहे सतह का पानी रोकने का इंतज़ाम है. इसलिए जब नदी में ज़रुरत से ज्यादा पानी आ जाता है तो वह अपने आप बैराज की दीवार के ऊपर बह जाता है. बैराज कोई बाँध नहीं है जिसमें पानी को रोका जा सके. जबकि बाँध में पानी को रोका भी जाता है और बाकायदा कंट्रोल किया जाता है. हथिनी कुंड के पानी की रिपोर्टिंग में यह बुनियादी गलती है.

टेलीविज़न के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों से जब इस विषय पर चर्चा की तो उन्होंने कहा कि आजकल रिपोर्टर बिना तैयारी के ही आ जाते हैं और अपने ज्ञान को अपडेट नहीं करते. जब उन्हें बताया गया कि यह तो आपका ही ज़िम्मा है, तो बगलें झांकने लगे. अपनी टीवी पत्रकारिता के वे दिन याद आ गये जब एक अतिज्ञानी और मालिक की कृपापात्र पत्रकार ने मेरे ऊपर दबाव डाल कर यह कहलवाने की कोशिश की थी कि पीएलओ एक आतंकवादी संगठन है. किसी तरह जान बचाई थी.

एक बार मुझे लगभग स्वीकार करना पड़ गया था कि चीन की राजधानी शंघाई है, बीजिंग नहीं, क्योंकि इसी पत्रकार ने तर्क दिया कि उसने दोनों ही शहरों को देखा है और शंघाई बड़ा और अच्छा शहर है. उस संकट की घड़ी में आज के एक नामी चैनल के मुखिया भी उसी न्यूज़ रूम में आला अफसर थे, और उन्होंने मेरी जान बचाई थी और कहा था कि चलो अगर शेषजी इतनी जिद कर रहे हैं तो बीजिंग को ही राजधानी मान लेते हैं. बाद में उन्होंने ही ऊपर तक बात करके मुसीबत से छुटकारा दिलवाया था.

जब मैंने पीपली लाइव देखा तो मुझे यह घटना बरबस याद हो गयी क्योंकि उस फिल्म की निर्देशक, भी उसी दौर में उसी न्यूज़ रूम में इस तरह के ज्ञानी पत्रकारों से मुखातिब होती रहती थी.  मुराद यह है कि टीवी पत्रकारिता एक गंभीर काम है और न्यूज़ रूम में काम करने वाले सभी लोगों की जानकारी और क्षमता को मिलाकर टीवी न्यूज़ प्रस्तुत की जानी चाहिए. अगर ऐसा हो सके तो देश और समाज का बहुत भला होगा लेकिन दुर्भाग्य यह है कि बार-बार की गलतियों के बाद भी ऐसा नहीं हो रहा है. और एक बार फिर मीडिया गाफिल पाया गया है. कोशिश की जानी चाहिए कि टीवी के पत्रकार पीपली लाइव को हमेशा नज़र में रखें और अपने आपको मजाक का विषय न बनने दें. 

लेखक शेष नारायण सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Comments on “फिर पीपली लाइव बना दिल्ली का मीडिया

  • शेष जी, आपने जो तस्वीर खींची है, यकीनन वह एक कड़वी हकीकत है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तो अब पूरी तरह से सनसनी फैलाने और भांडगीरी पर उतर आया है। अपने कई साथी इस काम को हंसते-हंसते अंजाम दे रहे हैं। कहना पड़ेगा कि यह सारी बातें प्रिंट मीडिया की स्थिति को मजबूत बनाएंगी।

    Reply
  • is desh ka durbhag hai, ki yaha khabron ke bane ka kaam hota hai, yeh hi wajah hai aaj bhi media aam aadmiyon se dur hai…..

    Reply
  • Saadhuwaad !
    Par shesh ji , Buniyaadi sawaal ye hai ki Aaj TV ke karta-dharta kaun log hain? 120 crore ka mulq hai, jis ke baare mein kaha jaata hai ki yahan HAR KOS PAR PAANI AUR BHAASHA badal jaati hai , Aur is vishaal desh ke **National TV channels* mein wo log bade patrakaar kahe jaate hain , jinhone is mulq ke ek chote se hisse mein bhi , Bataur Patrakaar-thode samay ke liye hi sahi, apna jeevan nahi guzara, par news channels ke *Bade anchor aur bade patrakaar* ke khitaab se nawaaz diye jaate hain . Internet aur stringer se mili jaankaari hi unki KUL JAMAPUNJI rahti hai , ye alag baat hai ki stringer apni story ke paise tak ke liye pareshaan hota hai
    Ye *Naamcheen* patrakaar 7-8 saalon ke ander kai awards bhi pa chuke hote hain. jabki puraane aur chote shahron ke patrakaar jee jaan laga kar in *Naamcheen* patrakaaron ko shaandaar report bhejte hain par unhe 7-8 saal to kya, ta-umra awards nahi milta . Haalaanki, TV mein aaj bhi kai chehre hain jinhone Bataur patrakaar is desh ke kai hisson ko dekha aur jaana hai aur phir awards ke haqdaar bane .
    Par aap ek list utha kar dekh lijiye ki Aaj kee taarikh mein aise logon ki sankhya kitni hai, Jinhone patrakaarita mein kai saal jee-jaan mehnat kar awards paaya ?
    TV channels ke Anchor aur bade patrakaaron mein se kitne aise hain , jinhe us channels ke mukhiya ne kaha ki , 6 mahine ya saal bhar ke liye hi sahi par bataur patrakaar id vishaal desh ko jaano ? koi TV channels nahi kahta . wo jaanta hai ki stringer ye kaam kar sakta hai .
    To phir awards kisko aur kyon milna chaaiye ? Bhaari-Bharkam salary ka haqdaar kise hona chaaiye ?
    Sirf NDTV ya IBN7 ya ZEE ( Jahan, Patrakaarita ke lihaaz se paripakwa aur anubhavi log hain ) chod dijiye to baaki har jagah aap ko naye yuwa chehre milenge , jinse na is desh ko jaan ne ka aagrah kiya jaata hai na hi wo khud Delhi ke baahar jaana chahte hain .
    Jab tak Channels ke KARTA-DHARTAAON ki ya maansikata rahegi ki sirf Delhi aur Mumbai hi India hai , tab tak Aisee reporting hoti rahegi .
    Par aisee soch waale patrakaaron ko samajhna hoga ki hindustaan 120 crore ki aabaadi waala mulq hai , jise samajhane mein umra guzar jaati hai, 7-8 saalon ke ander awards to bahut dur ki baat hai (HA ! Stringer aur Internet kripa kar de to ye sahaj rup se mumkin hai aur ye ( Thode samay mein awards paane ka ) Karishma aap studio ke ander baithe-baithe hi kar sakte hain. Aap ko is desh ko jaan ne ya samajhne ki zarurat nahi hai . Shaayad Bilkul bhi nahi !

    Reply
  • Namaskar Sir…
    Shesh Narayan Singh ji aur na jane hi kitne bare patrakar sikh bahut dete hain …lekin manayawar shayad tv media ko channel mein chalne wali khabron ki tarah hi dekhker comment likh rahein hain…aapki kabiliyat aur seniority ko dandwat pranam hai ..lekin sir samajne ki jarurat hai ki aakhir hum jaise tv reporters ke in halaton per koun aanshu bahaye…hamare paas to aanshu bahane ke liye bhi samay nahin hati to baandh aur bairaj ke difference ko samajne ke liye samay kaha se nikale…kabhi -kabhi khud bhi bura lagta hai ki jis subject ke baare mein pata nahin hai us per tv camera ke samne khare hoker live karne ko kaha jata hai…karein to karein ky…aap jaise senior baatein to bari bari karte hain …lekin channels ke head aur Editor-in-Chief ki post per baithe logon se press club mein daaru ke pag ke sath bhi charcha nahin karte hain…kabhi to kaha hota ki bhai tum log 6lakh…8lakh …leker bhi samajhna kyon nahin chahte ho…ki reporters ko bhi samay do…acchi facilities provide karo…jisse ki wo free mind se gyan le …aur agli baar baandh aur bairaj ke antar ko samajhe…manyawar…maaf kigiye ga…lekin media khasker electronic media ke patan ke kaaran hain…jinhone kabhi bhi es charcha mein bhag nahin liya ki ek reporter rakhne ke kya maapdand or qualification honi chahiye…aur na hi iss baat per vichar kiya ki kyon bihari ..UPion…Thakur…aur brahmin ke naam per hi reporter rakha jata hai….Aap hi hamare marg darshak ho…aap jab khud hi raasta nahin bata sake to hume galat disha bhi barna hi tha…ab jab mein bhi input-out head banunga…to mein bhi wahi chandukhana karoonga…jo hamare boss ker rahe hain….galat likha ho to comment ker meri bhi pharene ka adhikar hai aapko…namaskar

    Reply
  • Maanas ! Bahut Achcha aur sahi kaha . Tumhari ek-ek baat sahi hai ki jab TV channels par ul-julool Khabar dikha kar hi TRP badhaani hai to Upar baithe logon ya Bina naubhav ke Anchor ( ye baat un Anchors par laagu nahi hai , jo patrakaarita ke, ek lambe daur ke baad anchor bane ) ban kar baithe logon ko, Bhaari-bharkam salary kis baat ki ?
    Itni zyaada Salary to BOSS isliye hi deta hai ki aap news channel mein News dikha kar TRP badhaao , Par jab INDIA TV ki raah par hi chal-na hai to is salary ka hissa unke haq mein daalo , jo jee-jaan laga kar report laata hai, desk par jee jaan laga kar report ko sanwarataa hai , Technically badhiya karte hain .
    Par ye TV channels ke maaliq maanenge nahi ! ye sahi maayane mein kaam karne waalon AUR Stringer ko paise ke liye tarasaa denge aur **bade naam** ka tag laga kar ghumane waalon ko moti salary denge ! kisliye ? INDIA TV BAN NE KE LIYE !
    NDTV aur ZEE ko chodkar (Jahan aaj bhi, INDIA TV ki raah par chalne ki koshish na ke baraabar hai ) har jagah haalat wahi hai . News ki jagah India TV waala pattern par salary ke naam par **mathadhesshon** ko tarzeeh !

    Reply
  • इलेक्ट्रोनिक मीडिया पिपली लाइव की ही तर्ज पर कम क्र रहा है इसका तजा उद्धरण ऋषिकेश मैं बढ़ की रेपोयोंग है. मैं ऋषिकेश मैं ही रहता हु पर मुजको तो नही दिखा की ऋषिकेश डूब गया. गंगा के बिच मैं बनी शिव की मूर्ति क्या बह गयी मीडिया ने इसको रास्ट्रीय आपदा बता दिया, मगर चैनल वालू ने ये जानने की कोशिश नै की की क्या आश्रम वालू के ये घाट कितने सही हैं, चैनल वाले उन जगाहू पर नही गया जहा पर सच मैं बढ़ आई थी बल्कि अपने को खबर की रेश मैं आगे रकने के लिए गलत खबरे दिखा रहा है. जिन जगह पर बढ़ का पानी घुसा वो सुब अतिकर्मन है , लोग परेशां है की आखिर ऋषिकेश मैं बढ़ आई कहा है. हद तो तब हो गयी जब स्टार न्यूज़ ने x-cm के पीए को मौषम scientest बता के उसका interview दिखा दिया. speling main galti hai sorry

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.