बजरंग दास गर्ग का गुलाम हुआ भास्कर

भास्‍कर आदरणीय कल्पेश जी, पिछले दिनों आप हरियाणा के पत्रकारों को आक्रामता और पाठकों के साथ न्याय कराने का पाठ पढ़ाकर गए थे। भड़ास में यह खबर पढक़र हमें बहुत अच्छा लगा था कि आजकल आप जैसे संपादक भी बचे हुए हैं, लेकिन आपके अखबार के संपादकों की करतूत मुझे अपनी भड़ास निकालने पर मजबूर कर रही है।

दरअसल हरियाणा में आपका अखबार जिस तरह से सरकार के एक चापलूस चेयरमैन की चापलूसी में जुटा हुआ है, उसे देखकर तो ऐसे लगता है कि भास्कर कानफेड के चेयरमैन बजरंग दास गर्ग का गुलाम हो गया है। दरअसल नवंबर माह में ही बजरंग दास गर्ग की सरकारी चापलूसी भरी छह खबरें दैनिक भास्कर के हरियाणा पेज पर प्रकाशित हो चुकी हैं। शुक्रवार को ये महाशय शाहबाद आए और यहां की लोकल कार्यकारिणी गठित की। यह खबर दैनिक भास्कर के हरियाणा पेज पर प्रकाशित हुई है। अब संपादक पाठकों को यह बताएं कि शाहबाद जैसे छोटे से कस्बे की यह खबर हिसार, रोहतक या सोनीपत जिले के पाठकों के लिए किस मतलब की है।

नवंबर महीने में ही महान बजरंग दास गर्ग की खबर दैनिक भास्कर में पांच, आठ, दस, बारह, तेरह और पंद्रह तारीख को प्रकाशित हो चुकी हैं और अभी तो आधा महीना बाकी है। एक जमाना था जब ये महाशय दैनिक भास्कर अखबार में घुसने से भी डरते थे, लेकिन अब पानीपत और हिसार जोन के संपादक बदलने के बाद इनकी पौ बारह हो गई है और सुना है कि अब चंडीगढ़ में भी इनकी बढिया सेटिंग हो गई है, इसलिए पाठकों के सामने इनकी घटिया सूरत भास्कर में हर रोज ही दिखाई देगी।

भास्‍कर

भड़ास में खबर पढक़र आप अगर इस बारे में संपादकों पर लगाम कसेंगे तो पाठकों पर आपका बहुत बड़ा अहसान होगा। हमें अच्छा लगेगा अगर भास्कर के संपादक बजरंग दास गर्ग से हिसाब मांगें कि उन्होंने व्यापारियों के लिए अब तक किया ही क्‍या है। खुद लालबती की गाड़ी में घूमने वाले बजरंगी को हांसी में व्यापारियों के खून से सनी सडक़ दिखाई नहीं देती या दैनिक भास्कर के संपादक बजरंग की नौकरी करने में जुटे हैं, इसका जवाब तो ये ही दे सकते हैं।

आपका अपना

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

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