बीएचयू में पत्रकारिता शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति

महोदय, आप सभी का ध्यान बीएचयू के जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की ओर खींचना चाहता हूं. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में पत्रकारिता शिक्षा के नाम पर हो रही है खानापूर्ति. बीएचयू  के राजीव गांधी साउथ कैम्पस में तीन वर्षों से प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक पत्रकारिता में पी.जी. डिप्लोमा का पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है. पर यहां पर प्रैक्टिकल के लिए कोई भी उपकरण उपलब्ध नहीं कराया गया है. इसके बावजूद फीस 8000 से 30000 कर दिया गया है. शिकायत करने पर कहा जाता है कि आप लोगों ने जितना फीस दिया है, वो तो टीचर को दे दिया जाता है, उपकरण हम कहा से दें.

 

हम सभी छात्र इतने बड़े विश्वविद्यालय से जुड़ने के बाद भी अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. हमारी कोई नहीं सुनता है. यशवंत जी, आप भी इसी विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके हैं. कृपया हमारी कुछ मदद करें जिससे हमारा भी भविष्य उज्जवल हो और आने वाले नए छात्रों का भी. उम्मीद है इस पत्र को प्रकाशित कर समस्या की तरफ सबका ध्यान आकर्षित करेंगे जिससे समाधान तलाशने की दिशा में बीएचयू का जर्नलिज्म डिपार्टमेंट बढ़ सके. हम आपके सदैव आभारी रहेंगे.

छात्र

पत्रकारिता एवं जन संचार
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय

भड़ास4मीडिया के पास एक मेल के जरिए आई चिट्ठी. अगर इस पत्र में उल्लखित किसी तथ्य में कमी-बेसी हो तो शुद्धिकरण का कार्य नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए कर सकते हैं.

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Comments on “बीएचयू में पत्रकारिता शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति

  • Gumnaam Reporter says:

    स्टुडेंट का लैटर कुछ भी नहीं है. बी.एच.यू. मेन कैम्पस के पत्रकारिता विभाग का हाल और बुरा है. यहाँ जब से गेस्ट फेकल्टी के रूप में एक ‘दादा’ आये है तब से यहाँ पत्रकारिता कम और ड्रामा ज्यादा हो रहा है. पिछले कुछ सालों में यहाँ हुए सेमिनार पर नज़र डाली जाये तो आपको क्लीअर हो जायेगा की यहाँ न्यूज़ पर कम और सिनेमा पर ज्यादा काम हो रहा है. दादा हर फ़न मौला है. पत्रकार रह चुके है. रंगमच से भी जुड़ाव रहा है. फिल्मो में भी काफी ट्राई किया था मगर बात नहीं बनी. हां, एक और ख़ास बात है की दादा बनारस के एक विश्वविद्यालय से अपनी स्टुडेंट से छेड़छाड़ के आरोप में निकाले जा चुके है. इनके निष्कासन की न्यूज़ सभी पेपर्स में छपी थी. यहाँ के स्टुडेंट पत्रकार बने न बने, फिल्मो के समीक्षक जरुर बनेगे.

    Reply
  • madan kumar tiwary says:

    बीएचयू और सिर्फ़ कागज पर चलने वाले संस्थानो में क्या फ़र्क रह गया । यही कारण है की पुने , बंगलौर , मुम्बई और दक्षिण भारत के शिक्षा संस्थान आगे बढ रहे हैं। मेरी सलाह है की यूजीसी को शिकायत छात्र सब भेजें , बीएचयू केन्द्रीय विश्वविद्यालय है । केन्द्र सरकार को भी लिखा जा सकता है । छात्रों को मेरी एक सलाह है , इस अवसर को पत्रकारिता सिखने या ट्रेनिंग का पहला कदम मानते हुये कुव्यवस्था के खिलाफ़ आवाज उठायें । आप जितेंगे यह मेरा विश्वास है ।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *