भारत को अपनी ताकत पहचानने की आवश्‍यकता

: मंथन में पूर्व राजनयिक रोमेश भंडारी हुए पत्रकारों से रूबरू : आने वाले समय में भारत और चीन एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर सकते हैं, इसलिए हमें पाकिस्तान की ओर से ध्यान हटाकर उसे चीन के साथ संबंधों पर केन्द्रित करना चाहिए। किसी भी देश की विदेश नीति बहुत कुछ राष्ट्रीय हितों के साथ-साथ आर्थिक और औद्योगिक नीतियों को ध्यान में रख कर तैयार की जाती है।

न्यूज़ एक्सप्रेस टीवी चैनल के मंथन कार्यक्रम में पत्रकारों से चर्चा करते हुए प्रख्यात राजनयिक रोमेश भंडारी ने कहा कि भारत के लोगों को दरअसल अपनी ताकत का एहसास ही नहीं है और हममें खुद को बहुत छोटा आंकने की आदत है। दूसरे हमारी ताकत को पहचानते हैं और इसका भरपूर फायदा भी उठाते हैं। उन्होंने भारत की तुलना उस हाथी से की जिसे अपनी ताकत के बारे में खुद पता नहीं होता, लेकिन बाकी सबको उसकी ताकत का पूरा एहसास होता है।

रोमेश भंडारी ने कहा कि भारत और सोवियत संघ के बीच की गई रक्षा संधि रणनीतिक लिहाज से एक बेहतरीन उपलब्धि थी और इसका फायदा 1971 की लड़ाई में मिला। उन्होंने कहा कि तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में आंदोलनकारियों पर पाकिस्तानी सरकार जुल्म ढा रही थी और वहां से भारी तादाद में लोग भाग कर भारत आ रहे थे। लिहाजा भारत के लिए वहां हस्तक्षेप करना जरूरी बन गया था।

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के रूप में विवादित होने के कारणों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक भ्रष्टाचार इसका एक बड़ा कारण था क्योंकि वहां बड़ी संख्या में विधायकों की खरीद फरोख्त के आसार थे। इसलिए मैंने कल्याण सिंह को सरकार बनाने के लिए कम समय दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आज भी मायावती उन्हीं सिद्धांतों को फॉलो कर रही हैं जो उन्होंने उस समय अपने छह महीने के शासन के दौरान अपनाया था।

लीबिया के हालात को भारत के लिए चिंता की वजह बताते हुए भंडारी ने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात अभी सामान्य नहीं होने वाले और भारत को वहां अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के बारे में सोचना चाहिए। प्रेस विज्ञप्ति

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