‘महान पत्रकारों’ के राडिया से वार्ता का हिंदीकरण

टेप और अंग्रेजी टेक्स्ट तो आप लोग सुन-पढ़ चुके हैं, इसी पोर्टल पर लेकिन कई पाठकों की मांग थी कि इस बातचीत को हिंदी में उपलब्ध कराया जाए ताकि वे संपूर्णता के साथ अवगत हो सकें कि ‘महान’ लोग कैसी ‘महान महान’ बातें करते हैं. सो, उनके अनुरोध को देखते हुए राडिया की बरखा दत्त, वीर सांघवी और प्रभु चावला से पूरी बातचीत को हिंदी में प्रकाशित किया जा रहा है. हिंदीकरण का काम चौथी दुनिया ने किया है, सो उन लोगों का सलाम-प्रणाम. हालांकि दैनिक भास्कर ने इन बातचीत को हिंदी में प्रकाशित कर आम जन तक पूरे प्रकरण को पहुंचाने का काम किया है लेकिन देश के कई हिस्सों में दैनिक भास्कर नहीं पहुंचता इस कारण पूरी बातचीत को एक जगह हिंदी में फिर दे देना सही रहेगा.  -एडिटर, भड़ास4मीडिया

सबसे पहले बरखा – नीरा वार्तालाप

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बरखा - नीराराडिया : नमस्ते, क्या मैंने तुम्हें जगा दिया?

बरखा: नहीं, मैं जगी हुई थी.

राडिया: हां सुनो, बात यह है कि उन्हें उससे ही बात करनी है, समस्या इसी वजह से है.

बरखा: हां, लगता है पी एम वास्तव में इस बात से नाराज़ हैं कि वह जनता में गए.

राडिया: पर वह तो बालू कर रहा है न, करुणानिधि ने उसे ऐसा करने को नहीं कहा है.

बरखा: ओह, उन्होंने नहीं कहा?

राडिया: नहीं. उसे बाहर आकर यह कांग्रेस आलाकमान को बताने को कहा गया था.

बरखा: और वह जनता में चला गया?

राडिया: अच्छा, मीडिया बाहर थी.

बरखा: हे भगवान, अब? मैं उनसे क्या कहूं? तुम्हीं बताओ मैं क्या कहूं उनसे?

राडिया: मैं तुम्हें बताती हूं समस्या क्या है. मेरी उसकी बीवी और उसकी बेटी दोनों से बात हुई.

बरखा: हां, हां.

राडिया: समस्या यह है कि किसी और से नहीं, कांग्रेस को बालू से परेशानी है, उन्हें जाकर करुणानिधि से बात करनी चाहिए. करुणानिधि से उनके बहुत अच्छे संबंध हैं.

बरखा: सही, हां.

राडिया: तुमने देखा होगा, क्योंकि बालू और मारन के सामने वे नहीं बात कर सकते.

बरखा: हां.

राडिया: इसलिए उसे सीधे ही बताना होगा. तमिलनाडु में बहुत से कांग्रेसी नेता हैं. उन्हें वहां जाकर उसे सब कुछ बताना होगा. उन्हें चाहिए कि वह सीधे जाकर अपनी बात कहें.

बरखा: वह ठीक है, पर क्या करुणा बालू को छोड़ देगा?

राडिया: देखो, अगर तुम उसे कहोगे कि बालू ही एक अकेली समस्या है, मुझे पता है वह उन्हें हटा देगा.

बरखा: पर यह देखो कि अभी तो पोर्टफोलियो को लेकर भी समस्या है न.

राडिया: नहीं. उन्होंने कुछ नहीं कहा है. पोर्टफोलियो के बारे में तो बात भी नहीं हुई.

बरखा: कांग्रेस का दावा है कि जो भी हो, डीएमके भूतल परिवहन, बिजली, आईटी, दूरसंचार, रेलवे और स्वास्थ्य चाहता था.

राडिया: और कांग्रेस मीडिया और बाक़ी माध्यम से यह सूचना फैला रही है कि मारन सबके बीच में अकेला स्वीकार्य व्यक्ति है.

बरखा: वो…हां हां हां…यह मुझे पता है.

राडिया: पर यह ठीक नहीं है न?

बरखा: नहीं, मुझे पता है, हमने वह हटा लिया है.

राडिया: लेकिन कांग्रेस को करुणानिधि को यह भी बताना होगा कि हमने मारन के बारे में कुछ नहीं कहा है.

बरखा: ठीक है, मुझे उनसे दोबारा बात करने दो.

राडिया: हां, उम्मीदवारों का चुनाव हम तुम पर छोड़ते हैं. बालू के बारे में हमारी कुछ आपत्तियां हैं, उन्हें आपत्तियों के बारे में बता दो. और हमने मारन के बारे में कुछ नहीं कहा है.

22 मई, 2009 10:47:33

बरखा: हां नीरा?

राडिया: बरखा, मैंने कल तुमसे कांग्रेस के बारे में जो कहा था न, जाने वे डीएमके में किसके बारे में विचार कर रहे हैं?

बरखा: हां…मारन ही होगा.

राडिया: नहीं, वे कहते हैं कि बुनियादी पोर्टफोलियो मारन या बालू को नहीं दिया जाना चाहिए.

बरखा: नहीं. ऐसा इसलिए है कि वे यह पोर्टफोलियो अपने पास रखना चाहते हैं.

राडिया: उन्हें राजा को टेलीकाम देने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

बरखा: ओह, अच्छा!

राडिया: उन्होंने शायद यह बात किसी और से कही होगी या मारन से कहा होगा, जो सच नहीं बता रहा है.

बरखा: मेरे ख़याल से मारन से कहा होगा.

राडिया: हां. तो अब होना यह चाहिए कि वे कनि से बात करें, जिससे वह अपने पिता के साथ चर्चा कर सके, क्योंकि यहां तक कि प्रधानमंत्री और करुणानिधि के बीच बातचीत को भी उनकी बेटी ही अनुवाद कर रही थी और यह चर्चा बहुत छोटी थी…मिनट की.

बरखा: ओ के.

राडिया: हमें इसे दुरुस्त करना होगा और जल्दबाज़ी में ऐसा कोई फैसला न हो, जो हम लोगों के हक़ के विरुद्ध हो.

बरखा: नहीं, वे जैसे ही बैठक से बाहर आते हैं, मैं करती हूं.

राडिया: पता है, वह यह कह रही है कि गुलाम नबी आज़ाद जैसा कोई सीनियर ही यह बात प्रधानमंत्री तक पहुंचा सकता है.

बरखा: हां हां हां.

राडिया: ठीक है, हम जो भी बात होगी, कनिमोझी को बता देंगे. फिर वह अपने पिता को बता सकती है कि मुझे कांग्रेस से यह संदेश मिला है.

बरखा: ठीक है कोई समस्या नहीं. मैं आज़ाद से बात कर लूंगी. रेसकोर्स रोड से बाहर निकलते ही मैं आज़ाद से बात कर लूंगी, इसमें कोई समस्या नहीं है.

राडिया: हां, फिर उसने कहा है कि जब पिता जी आएंगे तो उनसे बात करेगी.

बरखा: ठीक है.

22 मई, 2009 15:31:29

राडिया: वे उससे बात करेंगे?

बरखा: हां.

राडिया: कौन? गुलाम?

बरखा: गुलाम. हां.

राडिया: पता है कनिमोझी… बजे की फ्लाइट है चेन्नई वापस आने को, दयानिधि मारन शपथ ग्रहण में शामिल होने जा रहा है, जबकि स़िर्फ राजा शपथ ग्रहण में शामिल होने को अधिकृत है. मारन ने करुणानिधि से जाकर कह दिया कि अहमद पटेल ने ख़ास तौर पर उसे शपथ ग्रहण में शामिल होने को कहा है.

बरखा: अहमद कहता है कि यह सब बकवास है.

राडिया: पर मैं कह रही हूं न, ऐसा है. करुणानिधि बहुत असमंजस में हैं.

बरखा: नहीं, पर कनिमोझी रुककर क्यूं नहीं शपथ ग्रहण में शामिल होती?

राडिया: वह नहीं शामिल होना चाहती, क्योंकि उसके पिता ने उसे वापस आने को कहा है. उसे अपने पिता का कहा मानना होगा. गुलाम को फोन करो.

22 मई, 2009 19:23:

बरखा: कांग्रेस में जिसे भी जानती हूं, सब शपथ ग्रहण में हैं, इसलिए मैं ऊपर के लोगों से बात नहीं कर पाई. मेरा काम अभी ख़त्म हुआ और अब मैं फोन करने जा रही हूं.

राडिया: कनि अभी चेन्नई पहुंची है, अभी मैंने बात की.

बरखा: दया कहां है? मारन कहां है?

राडिया: मारन शपथ ग्रहण में नहीं आया, क्योंकि उसे वापस बुला लिया गया था, क्योंकि उसने करुणानिधि को जाकर यह कहा कि अहमद पटेल ने उससे शपथ ग्रहण में आने को कहा था. इस पर करुणानिधि ने नाराज़ होकर कहा कि तुम कांग्रेस में ही चले जाओ.

बरखा: (हंसती है) तो अब?

राडिया: राजा ही अब अकेला शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने को अधिकृत है, वह अब फ्लाइट पकड़ने जा रहा है.

प्रभु – नीरा वार्तालाप

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राडिया : कुछ खास बात नहीं, मैं तो तुम्हारे विचार जानना चाहती थी, क्योंकि तुम काफी समझदार आदमी हो.

प्रभु: हैं..हैं..हैं.. ऐसा तो कुछ नहीं, बस लोगों को जानता हूं, दोस्ती निभाता हूं और काम चलाता हूं.

राडिया: अभी तो मैं जानना चाहती हूं कि अंबानी बंधुओं के बीच झगड़े में सुप्रीमकोर्ट ने जो फैसला दिया और देश के हित से ऊपर दो भाइयों का हित रखा, इस पर तुम्हारी क्या राय है? तुम क्या सोचते हो?

प्रभु: जब ये दो भाई किसी चीज में शामिल हों तो देश तो अपने आप ही शामिल हो जाता है. समस्या यह है कि दोनों भाई आपस में बात नहीं करते और कोई ऐसा नहीं है, जो उनमें बात करा सके. मैंने भी कोशिश की थी, मगर कुछ हुआ नहीं. कभी अनिल पकड़ में नहीं आता तो कभी मुकेश लापता हो जाते. वैसे ग़लती मुकेश की ज़्यादा है.

राडिया: मेरी आज ही सुबह मुकेश से बात हुई थी और वह कह रहा था कि अनिल को लगता है कि मीडिया ख़रीद कर और दैनिक भास्कर या जागरण या बिजनेस स्टैंडर्ड में लेख छपवा कर कंपनी चला लेगा तो मुझे अफसोस होता है.

प्रभु: असल में मुकेश अपनी बीवी के कहने पर चलता है. अनिल से मेरी अच्छी दोस्ती है और उसकी बीवी कहीं टांग नहीं अड़ाती. अनिल तो राजनीति, मीडिया, नेता सबका इस्तेमाल कर लेता है  मुकेश कहीं बाहर गए थे, वापस आ गए क्या?

राडिया: वह तो एक हफ्ते से भारत में ही हैं और दिल्ली में ही हैं. कभी-कभी शाम को बॉम्बे चले जाते हैं. तुम्हारी बात नहीं हो पा रही?

प्रभु: मैं दो-तीन बार बॉम्बे गया. मुकेश ने मुझे खाने पर बुलाया था, मगर अचानक ग़ायब हो गया. कल भी बॉम्बे जा रहा हूं. कोशिश करूंगा. मैं तो दोनों का भला चाहता हूं. मुकेश की दिक्कत यह है कि धीरू भाई ने जो चमचे पाले थे, वे अब किसी काम के नहीं रहे. जमाना बदल गया है, मगर मुकेश ने अपने लोग नहीं बदले.

राडिया: मुकेश को तो तुम्हारे जैसे लोग चाहिए.

प्रभु: मैं तो सेवा करने को हमेशा तैयार हूं, मगर मुकेश पूरा विश्वास किसी पर नहीं करता. मैंने दो-तीन एसएमएस डाले, उनका भी जवाब नहीं आया. मैंने तो उसे यह बताना चाहा था कि सुप्रीमकोर्ट का फैसला उसके ख़िला़फ आ रहा है, मगर वह तो इतना घमंडी है कि मैं क्या कहूं. अब भुगतेगा. इस देश में सब कुछ फिक्स होता है और सुप्रीमकोर्ट का जजमेंट फिक्स करना कोई कठिन काम नहीं है. अनिल घूमता ज़्यादा है, पैसे ख़र्च कम करता है. मुकेश तो धीरू भाई के जमाने से आगे बढ़ना ही नहीं चाहता. तुम समझ रही हो न, मैं क्या कह रहा हूं? बेचारे मुकेश को तो सही जानकारी तक नहीं मिल पाती. मुझे पता है कि मुकेश सुप्रीमकोर्ट के लिए क्या कर रहा था और जो कर रहा था, वह ग़लत कर रहा था. सबको पता था. आजकल तो सब फिक्स होता है. अब सुप्रीमकोर्ट के फैसले ने इसे ख़त्म कर दिया न.

राडिया: अभी तो सुप्रीमकोर्ट का फाइनलाइज़ नहीं हुआ है.

प्रभु: अब तो और बड़ी गड़बड़ होने वाली है. प्राइम मिनिस्टर मुरली देवड़ा के पीछे पड़े हैं. दुनिया में गैस के दाम बढ़ने वाले हैं. अगर भारत सरकार अपनी ही गैस नहीं ख़रीद सकती तो उसे अदालत जाना ही पड़ेगा. देश का हित पहले है, देश का नुक़सान नहीं होना चाहिए.

राडिया: यही तो मुकेश ने अनिल से कहा कि तेरा जितना बनता है, तू ले ले, एनटीपीसी अगर नहीं लेता तो वो भी तू ले ले, मगर फैसला तो सरकार को करना है. 328 पेज का एमओयू है और उसमें सब कुछ साफ लिखा है. मुझे तो लगता है कि इसी एमओयू को पेनड्राइव में डालकर सुप्रीमकोर्ट के कंप्यूटर में लगा दिया गया होगा, क्योंकि दोनों की भाषा भी एक जैसी है. एटॉर्नी जनरल गुलाम वाहनवती ने भी खेल किया है.

प्रभु: जब मैं इंडियन एक्सप्रेस में था तो वाहनवती हमारा वकील होता था. नुस्ली वाडिया उसे लेकर आया था. मेरा अच्छा दोस्त है, मगर आज की तारीख़ में अनिल अंबानी का आदमी है. यह बात मुकेश को बता देना और कह देना कि मैंने बताई है. हंसराज भारद्वाज ने तो उसे कभी पसंद नहीं किया. जब अनिल का पावर प्लांट ही शुरू नहीं हुआ तो उसे गैस का क्या करना है? मगर मुकेश भी क्या करेगा? मुकेश भी किसी और को गैस नहीं बेच सकता. आनंद जैन था, उसे हटा दिया गया. मनोज मोदी प्रोफेशनल है.

राडिया: प्रभु, आनंद जैन आज भी वहीं हैं, मगर आज भी इस मामले में मनोज मोदी ज़्यादा काम कर रहा है.

प्रभु: अनिल ने फिर से सुप्रीमकोर्ट में रिट डाली है और उसे यह करना भी चाहिए. मगर मुकेश से कहना कि जो हो रहा है, वह ग़लत हो रहा है. जो तरीक़े वह अपना रहा है, वे ग़लत हैं. जिन पर भरोसा कर रहा है, वे गड़बड़ हैं. लंदन में बैठकर. वैसे दिल्ली में राजनैतिक सिस्टम भी बदल गया है. कमल नाथ फैसला करता है तो प्रणब मुखर्जी और जयराम रमेश या मोंटेक उसे टाल देते हैं. अनिल अंबानी डीएमके के ज़रिए चीफ जस्टिस को पटा रहे हैं. मुझे पता है कि मुकेश को किसको पटाना चाहिए, मगर वह मुझसे बात तो करे.

राडिया: यह लंदन वाला चक्कर क्या है, तुम्हें यह कहां से पता लगता है?

प्रभु: लीगल सोर्सेज से. अनिल ने तो मेरे बेटे अंकुर चावला को यानी उसकी कंपनी को रिटेनर रखा है, मगर इस मामले में मेरा बेटा नहीं है. अब दोनों भाइयों से मेरी दोस्ती होने का नुक़सान मेरे बेटे को भुगतना पड़ रहा है. छोटा भाई बड़ा हरामी है…

राडिया: हरामी तो है, लेकिन हर रोज हरामीपना लास्ट नहीं करता न…

वीर – नीरा वार्तालाप

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वीर - नीरावीर सांघवी: हाय नीरा

राडिया: हाय वीर, तुम कहां हो? दिल्ली में या कहीं और?

वीर: जयपुर में हूं, शाम को आ रहा हूं.

राडिया: ओ के. मैं कुछ कहना चाह रही थी. असल में मैं तमिलनाडु वाले दोस्तों से बात कर रही थी. वह ज़रूरी भी था. मुझे नहीं मालूम कि तुम कांग्रेस में किसी से बात करने की हालत में हो या नहीं, लेकिन मैंने अभी कनिमोझी से बात की. मैं उससे मिली थी.

वीर: अच्छा?

राडिया: आज शाम को या रात को हम लोग बैठेंगे तब मैं बताऊंगी. असल में समस्याएं बहुत हैं.

वीर: मुझे आज सोनिया से मिलना था. मैं यहां जयपुर में अटक गया हूं. अब कल ही मुलाक़ात होगी. मैं जब चाहता हूं, मिल लेता हूं. वैसे भी राहुल से तो चाहे जब मुलाक़ात होती रहती है. तुम मुझे बताओ, क्या करना है?

राडिया: मैं क्या बताऊं? कांग्रेस वाले समझ ही नहीं रहे हैं. वे ग़लत आदमी यानी दयानिधि मारन से बात कर रहे हैं. मारन ग़लत आदमी है. करुणानिधि ने भी उसे बातचीत करने का अधिकार नहीं दिया है, मगर तुम जानते हो कि यहां तो जंगलराज है और आंधी चल रही है.

वीर: जब मारन को सब लोग नफरत करते हैं तो वह बीच में कहां से आ गया?

राडिया: वह कुछ है ही नहीं, यह मुझे पता है, तुम्हें पता है, मगर कांग्रेस वालों की समझ में नहीं आती. प्रधानमंत्री भी मारन से बात कर रहे हैं और डीएमके को कमाई वाले मंत्रालय देने का वायदा कर रहे हैं, मगर मारन ख़ुद अपने लिए टेलीकॉम चाहता है. आफत यह है कि कनि का भाई अलागिरि भी चुनाव जीता है और भारी नेता है.

वीर: मैं जानता हूं. वह स्टालिन से ज़्यादा अक्ल रखता है.

राडिया: अब मारन कांग्रेस से कह चुका है कि अलागिरि को राज्यमंत्री बना दो, स्वतंत्र प्रभार दे दो और बाक़ी मुझ पर छोड़ दो.

वीर: इतनी हिम्मत आ गई दयानिधि में?

राडिया: दयानिधि तो टी आर बालू और राजा को भी गाली देता है. करुणानिधि की बेटी को स़िर्फ राज्यमंत्री बनवाना चाहता है, जबकि अलागिरि आधे  से ज़्यादा तमिलनाडु को काबू में रखता है और करुणानिधि यह बात जानते हैं. वह मारन से पद और कद,  दोनों में बड़ा है. उसने तो पिता से कह दिया है कि अगर आप मारन को मंत्री बनाएंगे तो मैं मंत्री नहीं बनूंगा.

वीर: अच्छा, यह तो बड़ा मजेदार है. क्या कांग्रेस इसे समझ रही है?

राडिया: वही तो समझाना है. कांग्रेस वालों को कनि के ज़रिए सीधे करुणानिधि से बात करनी चाहिए.

वीर: सोनिया ने करुणानिधि  से कल बात की थी.

राडिया: नहीं, तुम्हारी जानकारी ग़लत है. मनमोहन ने बात की थी और कनि वहां बैठी हुई थी, इसलिए सारी बात को अनुवाद करके  सुना रही थी. यह मामला अपने को सुलझाना पड़ेगा. गुलाम नबी आज़ाद को कनिमोझी से बात करने के लिए कहो.

वीर: ठीक है, मैं इंतज़ाम करता हूं.

राडिया: मैं मज़ाक नहीं कर रही. स़िर्फ यही एक तरीक़ा है और कनि ही कांग्रेस वालों को करुणानिधि के पास ले जा सकती है.

वीर: मैं अभी सोनिया को इसमें नहीं डालूंगा. उसकी समझ में ज़्यादा आता नहीं है. मैं पहले अहमद पटेल  से बात करके देखता हूं. पटेल समझदार भी है और सोनिया उसकी सुनती भी है. और मैं सोच रहा था कि डीएमके ने वाकई मारन को नियुक्त किया है.

राडिया: नहीं नहीं नहीं नहीं और नहीं…डीएमके ने अपनी लिस्ट में पांच मंत्रालय और नाम भेजे थे और मारन का नाम भी उसमें था. उन्हें उम्मीद थी कि कांग्रेस राजा के  बारे में उनसे बात करेगी. आख़िरकार बात तीन मंत्रालयों पर आकर टिक जाती, मगर बात ही ग़लत आदमी से हो रही है.

वीर: मैं समझ गया. मैं अहमद से बात करूंगा.

राडिया: कनि से बात करना ज़्यादा आसान होता. कनि बेटी है और उसके सामने कोई भी बात की जा  सकती है. कांग्रेस को कहना पड़ेगा कि उन्हें मारन नहीं चाहिए. यह इंतज़ाम हर क़ीमत पर तुम्हें करना पड़ेगा.

वीर: ठीक है, अभी से लगता हूं इसमें. अहमद से, राहुल से या सीधे  सोनिया से कुछ न कुछ तो रास्ता निकालूंगा. वैसे कनि अभी कहां है?

राडिया: साउथ एवेन्यू वाले अपने घर पर.

वीर: कोई मोबाइल भी तो होगा?

राडिया: मैं अभी उससे मिलकर आ रही हूं. वहां कुछ तमिलनाडु कांग्रेस के लोग भी थे, जो बाहर बैठे हुए थे. वीर, तुम तो गुलाम को पकड़ो, वही काम का आदमी है.

वीर: नीरा, तुम अभी बात कर सकती हो?

राडिया: बोलो न, तुम्हारे लिए जान हाज़िर है.

वीर: मारन सोनिया से नहीं मिला.

राडिया: मुझे पता है, मगर यह बात सबको पता नहीं लग रही.

वीर: मैंने इंतज़ाम कर लिया है कि मारन सोनिया से कभी नहीं मिल पाए. वह गया था, मगर उसे साफ कह दिया गया कि तुम्हें हम डीएमके का प्रवक्ता नहीं मानते. मेरे पास भी उसका फोन आया था और गुलाम का भी फोन आया था. गुलाम परेशान था कि मारन हर आधे घंटे में उसे फोन कर रहा है. जहां तक अपन लोगों का सवाल है तो दो बीवियां हैं, एक भाई है, एक बहन है, एक भतीजा है और इससे चीजें और ज़्यादा उलझ रही हैं. हमने अपना ऑफर दे दिया. अब करुणानिधि को जवाब देना है कि वह सोनिया गांधी से  सीधे बात करना चाहते हैं या नहीं. अभी तक उनकी बात मनमोहन सिंह  से हुई है, सोनिया की  चाबी तो मेरे पास है. मैं बात करा सकता हूं, लेकिन अब मैं पीछे नहीं पड़ूंगा. अब मारन को भी मैंने कह दिया है कि आपको हमारे प्रस्ताव का जवाब देना है.

राडिया: तुम्हारी गुलाम नबी से बात हुई?

वीर: मैंने अहमद से बात की. फैसला गुलाम नबी को नहीं, अहमद पटेल को करना है. अहमद ने मुझे बताया कि गुलाम मारन से बात कर रहा है, लेकिन गुलाम भी हमारा प्रवक्ता नहीं है. मारन के भी अहमद ज़्यादा भाव नहीं दे रहा है. ये डीएमके वाले लोग पागल हो गए हैं. पांच बड़े मंत्रालय मांग रहे हैं. अब करुणानिधि  हमसे बात करें. कनि हमसे आकर मिले, अपने पिता से जो भी बात करे या हमारी बात कराए, मगर मैं मारन से बात नहीं करूंगा और उसको मैंने कह दिया है कि गुलाम को भी परेशान मत करो. मारन चेन्नई चला गया है और वहां से फोन करेगा. चेन्नई भी इसलिए गया है क्योंकि मैंने उससे कहा है कि अब हम करुणानिधि से सीधे बात करेंगे. हम बुड्‌ढे की इज़्ज़त करते हैं, मारन तो फालतू आदमी है.

राडिया: यह बात मैं सबको बताती हूं.

वीर: मैंने एम के नारायणन से भी कह दिया है कि वह प्रधानमंत्री को ठीक से समझा दें. सोनिया से बात मैं कर लूंगा.

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