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मायावती, अपने अफसरों की करतूत देखो

सुश्री मायावती जी, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, माननीया, हम आपका ध्यान उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों की ओर दिलाना चाहते हैं। पत्रकारों पर ये हमले अपराधी तत्वों द्वारा नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस के अफसरों द्वारा किए जा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे पुलिस ने पत्रकारों से कोई बदला लेने की ठान रखी है। कानपुर में पुलिस के एक आला अफसर अखबारों को सबक सिखाने पर तुले हुए है। लखनऊ में हाल ही में दिल्ली की जामा मससिद के शाही इमाम ने एक पत्रकार को सवाल पूछने पर पीट डाला।

<p style="text-align: justify;">सुश्री मायावती जी, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, माननीया, हम आपका ध्यान उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों की ओर दिलाना चाहते हैं। पत्रकारों पर ये हमले अपराधी तत्वों द्वारा नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस के अफसरों द्वारा किए जा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे पुलिस ने पत्रकारों से कोई बदला लेने की ठान रखी है। कानपुर में पुलिस के एक आला अफसर अखबारों को सबक सिखाने पर तुले हुए है। लखनऊ में हाल ही में दिल्ली की जामा मससिद के शाही इमाम ने एक पत्रकार को सवाल पूछने पर पीट डाला।</p>

सुश्री मायावती जी, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, माननीया, हम आपका ध्यान उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों की ओर दिलाना चाहते हैं। पत्रकारों पर ये हमले अपराधी तत्वों द्वारा नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस के अफसरों द्वारा किए जा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे पुलिस ने पत्रकारों से कोई बदला लेने की ठान रखी है। कानपुर में पुलिस के एक आला अफसर अखबारों को सबक सिखाने पर तुले हुए है। लखनऊ में हाल ही में दिल्ली की जामा मससिद के शाही इमाम ने एक पत्रकार को सवाल पूछने पर पीट डाला।

इस बारे में शिकायत दर्ज होने के बाद आज कर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उत्तर प्रदेश में आपकी सरकार बनने के बाद पत्रकारों पर हमले ज्यादा हुए हैं। दिल्ली के पत्रकार यशवंत सिंह की माँ को गाजीपुर की पुलिस ने अठारह घंटे तक थाने में बंधक बना कर रखा। इस मामले में उन्होंने और कुछ संगठनों ने तमाम आला अफसरों से गुहार लगाई। इसके बावजूद आज दोषी अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। किसी पत्रकार से नाराजगी के चलते उसके परिवार की बुजुर्ग महिलाओं को थाने में बन्द करने की राज्य में पहली घटना है।

आपसे अनुरोध है कि श्री सिंह की माताजी को बिना कसूर पकड़ने और थाने में जबरन बिठाए रखने की जांच कराके दोषी पुलिस अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कराने के आदेश देने का कष्ट करें।

रासविहारी

उपाध्यक्ष

नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स( इंडिया)

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0 Comments

  1. SHAILENDRA PARASHAR

    October 24, 2010 at 6:37 am

    यसवंत जी
    हम लोग कुछ कर नहीं सकते इन बेलगाम पोलिसे बालो का उ.प्र. का हर इन्सान बस अ ही दुआ करता है की मेरा सव कुछ ले लो लेकिन बस खुशाल उ.प्र. हमे दे दो सरकार हम लोग बनाते है और हम ही आज बेबस बैठे है इन पोलिसे वाले गुंडे सरेआम आतंक फैला रहे है सर जव देश बचने का जिम्बा हम पत्रकार को है तो चर्च नहीं एक जंग छेड़नी होगी हम सव आपके साथ है !
    शैलेन्द्र पराशर-खबर माला मेग्जियन प्रधान संपादक
    राजा नगायच –

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