मीडिया की आड़ में क्लीनिक चलाता फर्जी सेक्सोलॉजिस्ट

अरविंद त्रिपाठी कानपुर में काकादेव क्षेत्र में लगातार दूसरी बार भारत गौरव पुरुस्कार प्राप्त देश के नंबर-1 सेक्सोलोजिस्ट होने का दावा करने वाले एक डॉक्टर के क्लीनिक पर 18 जुलाई को कानपुर के आला स्वास्थ्‍य अधिकारियों का छापा पड़ा.  डॉक्टर का क्लीनिक अवैध तरीके से चलाये जाने के कारण से सील कर दिया जाता है. डॉक्टर ने इसके बाद सफाई देते हुए एक प्रेस कांफ्रेंस की.

अपने बेहतर मीडिया संबंधों के कारण उसने अगले दिन अपनी बची-खुची साख को बचाने के लिए लिफाफा संस्कृति के दम पर शहर के सभी प्रमुख समाचार-पत्रों में स्थान पाया. इस डॉक्टर के क्लीनिक सील हो जाने से सबसे ज्यादा परेशान कानपुर अमर उजाला के स्वास्थ्य संवाददाता ने खबर लिखने में सारी सीमाएं तोड़ दी. कभी हिन्दुस्तान अखबार के संवाद-सूत्र रहे व्यक्ति का बेटा आनंद झा कानपुर में काकादेव में अंग-विशेष के “कड़ा-खड़ा और बड़ा” करने का क्‍लीनिक चलाता है. अपने काम के प्रति इतना मशहूर हो चला है कि उसके क्लीनिक और घर की गली तक “झा वाली गली” कहलाती है. उसके बाबा और बाप भी यही धंधा वर्षों से कर रहे थे. उसकी बहन मीनाक्षी झा हिन्दुस्तान “नई दिल्ली” में पत्रकार है.

नयी पीढ़ी के उत्तराधिकारी आनंद झा की उम्र कुल मिलाकर २५-२८ के बीच होगी. ये जैसे ही थोड़ा से जवान होते हैं पड़ोस की एक मासूम लड़की को ले भागते हैं. बाप की दवाओं का असर

आनंद झा
कहिये या फिर अविकसित मानसिक स्तर. आज वो लड़की इनकी पत्नी के रूप में इनके साथ है और सावन और रक्षाबंधन जैसे मायके से जुड़े रहने वाले त्यौहारों से महरूम है. कारण मायके के लोगों का इस डॉक्टर और बाकी परिवार से कोई नाता नहीं रहा. कानपुर के सारे चिकित्सा बीट के पत्रकारों के साथ इसकी बढ़िया सेटिंग के कारण इसके काले कारनामे अखबारों का हिस्सा नहीं बन सके. बड़े अखबारों में सभी अवसरों पर अंधाधुंध विज्ञापन देने के कारण भी ये सुरक्षित बना रहा.

18 जुलाई के छापे के बाद शारीरिक और मानसिक बीमारी का शिकार और इस डॉक्टर का असली खैर-ख्वाह अमर उजाला का स्वास्थ्य संवाददाता रजा शास्‍त्री ने अपनी खबर में एक इतिहास रच दिया. इन महोदय को वास्तव में सैकड़ों बीमारियाँ घेरे हों ऐसा इनका रूप है. बेहतर डॉक्टरी संबंधों के चलते मुंह में किलो भर पान-मसाला भरे कैंसर को खुलेआम चुनौती देते हुए रजा शास्‍त्री ने कल के समाचार-पत्र में सावन के मौसम में शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाओं की खबर के लिए बाई लाइन पाई. ये वास्तव में उनकी दमित यौनाकांक्षा ही थी. जिसके लिए उनका ये डॉक्टर झा सलाह उपलब्ध कराता था. डॉक्टर इनकी चिकत्सीय जरूरतों का खास आपूर्तिकर्ता है.

डॉक्टर के यहाँ छापे की खबर में इन्होंने लिखा कि ये छापा किसी “कथित पत्रकार” की शिकायत पर पड़ा. तो पहली बात तो ये की कोई पत्रकार कभी कथित नहीं होता बल्कि तथाकथित होता है. अगर वो पत्रकार गलत आदमी है तो उसकी शिकायत की शिकायत प्रशासन से क्यों नहीं की गयी? सबसे बड़ी बात ये कि उसकी शिकायत सही है या गलत इसकी जांच करने आने वाले प्रशासनिक अधिकारियों पर अपना दबाव बनाने की क्या जरूरत है? सबसे बढ़कर शिकायत सही पाए जाने पर इतना स्यापा क्यों? कौन से ऐसे व्यक्तिगत लाभ थे जिनके प्रभावित हो जाने का भय सामने आ गया था? डॉक्टर झा कहता है कि उसने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था. 2006  से क्लीनिक चला रहा था, देश भर में विज्ञापन करा रहा था और इतना भोला था कि ये सब नहीं जानता था.

ऐसा है कि उसे इन्हीं रजा शास्‍त्री का पूरा प्रश्रय था. झा की बहन कभी रजा की साथी रह चुकी है. सबसे बड़ी बात ये की झा ने अपनी प्रेस-कांफ्रेंस में बताया कि उसे 5 जुलाई को नोटिस दिया गया और उसने 13 जुलाई को रजिस्ट्रेशन का आवेदन दिया. जबकि झा को बचाने और शिकायतकर्ता को नीचा दिखाने की हड़बड़ी में रजा भाई ने लिखा कि झा ने रजिस्ट्रेशन का आवेदन 6 जुलाई को कर दिया था. केवल और केवल झा को बचाने और प्रशासन पर अपने सम्मानित अखबार का रुआब ग़ालिब करने के लिए किया गया ये कृत्य अत्यंत शर्मनाक है.

प्रत्येक महीने कुछ हज़ार रुपयों की इकजाई, महंगे गिफ्टों और विज्ञापन के लालच में स्वस्थ और निर्भीक पत्रकारिता का गला घोटने में तत्पर रजा जैसे लोग पत्रकारिता पर एक बद-नुमा दाग हैं. फर्जी दावे करने वाले डॉक्टर के पक्ष में खड़े होकर अगर शिकायतकर्ता से लड़ना एक मुद्दा है तो मंच और भी थे, अमर उजाला के अखबार का प्रयोग क्यों?  होना तो ये चाहिए था कि अखबार को ढूंढकर ऐसे शिकायतकर्ता का नागरिक-सम्मान करना चाहिए था जो सारी दुनियावी भ्रष्टाचारी ताकतों से अकेले ही लड़ने चल पड़ा होगा. अगर वो कथित-पत्रकार भी हो तो इस भारत देश का नागरिक तो होगा ही. जिसे अपनी शिकायत करने का पूरा अधिकार होगा. क्या अब “रजा” अमर उजाला के मंच से किसी सच की आवाज उठाने वाले का इसी तरह से गला घोंटेंगे?

समाचार-पत्र के व्यावसायिक हित क्या पत्रकारिता पर इतना हावी हो जायेंगे कि एक विज्ञापन-प्रदाता को बचाने के लिए शिकायतकर्ता की जांच आवश्यक हो जायेगी? जब इस बारे में स्थानीय संपादक दिनेश जुयाल से इस कथित पत्रकार कि वास्तविकता के बारे में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई कि वो कौन है? उन्होंने रजा से पूछकर बताने का आश्वासन दिया. जो अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है. डॉक्टर झा के द्वारा गिफ्टेड फोन से रजा केवल अपने क्लाइंटों से ही बात करते हैं. दूसरों से आयोजित-प्रायोजित प्रश्न पूछने के आदी रजा को ये प्रश्न स्वास्थ्य और आर्थिक दोनों, लिहाज से भी भारी पड़ेंगे. कारण ये कि उन्हें अपने मुंह से भैंस के गोबर भरा जैसा पान-मसाला थूकना पड़ सकता है. जो संभव है,  उन पर ही आ गिरे.

लेखक अरविंद त्रिपाठी कानपुर में पत्रकार हैं तथा चौथी दुनिया से जुड़े हुए हैं.

Comments on “मीडिया की आड़ में क्लीनिक चलाता फर्जी सेक्सोलॉजिस्ट

  • deepak shukla says:

    nice job…………… sir yai klm ki takt hai bs……………………. jo kbhi km na hogiiiiiiiiiiiii

    Reply
  • praveen shukla says:

    पत्रकारिता और निर्भीकता एक दुसरे के पर्याय होते है जो कि आपकी लेखनी से परिलीक्षित होते है… रही बात तथाकथित पत्रकार की तो वो तो स्पष्ट है कि किसी रोजाना अखबार में वेतन पाने वाला ही पत्रकार नहीं होता न ही वो जो अपने हित साधन के लिए कलम का दुरुपयोग करे,, अपनी आत्मा का सौदा करे.. बल्कि पत्रकार वो होता है जिसके अन्दर सच को सामने लाने की हिम्मत हो !
    स्वास्थ्य जगत और कलम के कलंको का पर्दाफाश करने के लिए आप बधाई के पात्र है….

    Reply
  • Harishankar Shahi says:

    वाह सर जी आप तो बेचारे को नग्न कर दिया. साथ ही पत्रकारिता में बढ़ रहे लिफाफा संस्कृति पर भी गहरी चोट कर आपने कर दी है. बड़े से लेकर छोटे जिलों में ऐसे डाक्टरों के साथ पत्रकार गलबहियां करते रहते हैं. डाक्टरों के सहारे जीने वाले पत्रकारों के उदाहरण हमने भी कुछ करीब से देखें हैं. भाई आपने तो बढ़िया काम किया एक तो फर्जी क्लिनिक बंद करवा दी दूसरा फर्जी पत्रकारिता भी खोल दी बधाई.

    Reply
  • ASHOK SINGH says:

    ye bhadaas likhne wale mr. arvind ji kabhi apne girebaan me jhaank kar dekh liya hota shahar ke sabse bade dalaal to tum ho . kitne logo ko blackmail kar loota hai tumne agar kaho to duniya ke saamne tumhara kachcha chittha khol kar rakh du

    Reply
  • ishan awasthi says:

    बहुत खूब अरविंद… अच्‍छी पोल-खोल स्‍टोरी है… दिनेश जुयाल साहब को भी तो जवाब देना चाहिए इन सब बातों का… आखिर रजा है तो उन्‍हीं के यहां न…। खैर आपने साहस किया और ऐसे डॉक्‍टरों और उनके सरपरस्‍तों पर मुक्‍त हस्‍त प्रहार किया… उसके लिए आपको शुभकामनाएं…। ऐसी और खबरों का इंतजार रहेगा…।।।

    Reply
  • Annuj Mohit Nigam says:

    सर, यहाँ पर कुछ भी कहने के लिए पत्रकारिता क्षेत्र में मै बहुत छोटा हूँ, बस इतना ही कहना चाहूँगा की आपके इस सत्य उजागर एवं निर्भीक बातों से मेरे साथ साथ आज के युवा पत्रकार भाइयों को भी बहुत कुछ सिखने को मिलेगा . पत्रकारिता – मिशन या प्रोफेशन , फैसला हमारे हाथों में है.

    Reply
  • arvind bhai bht bhadhayi aapko ki apki mehnat rang layi aur eaise farji dr ki hakkekat samne ayi … rahi baat raja shastri ki to eaise bht se patrakaar ke naam par dhandha karne wale is shar me hai inki dal roti aur pariwaar dalali se hi chal raha hai aur ap dhekha jald hi wo cancer se marega kyounki usne cancer ke dr se setting banane ke bajaye khada aur bada karne wale dr se setting banayi hai to uska elaaj kaun karega. dusri baat ho sakta hai wo khud kisi gupt roag ya mardaan akamjori ka shikaar ho to jahir hai ki zha se usko madad mil rahi ho apne aap ko thk karne me….. kul mila kar aapka pryaas sarahniya hai

    Reply
  • arvind bhai bht bhadhayi aapko ki apki mehnat rang layi aur eaise farji dr ki hakkekat samne ayi … rahi baat raja shastri ki to eaise bht se patrakaar ke naam par dhandha karne wale is shar me hai inki dal roti aur pariwaar dalali se hi chal raha hai aur ap dhekha jald hi wo cancer se marega kyounki usne cancer ke dr se setting banane ke bajaye khada aur bada karne wale dr se setting banayi hai to uska elaaj kaun karega. dusri baat ho sakta hai wo khud kisi gupt roag ya mardaan akamjori ka shikaar ho to jahir hai ki zha se usko madad mil rahi ho apne aap ko thk karne me….. kul mila kar aapka pryaas sarahniya hai

    Reply
  • vijay singh says:

    arvind tum itna gahra aarop raza bhai par mat lagao, behad sharif aur nek insaan hae wo, rahi baat tumhari to tum m.ch. kathit patrakar ho, khud gaer janpad me sarkari teacher ho aur patrakarita ki aad me waha padhane nahi jaate, saale tum hi ho kathit patrakar, tumhari jaanch honi chahiye. prashashan ko arvind jaese jhantu teacher aur dalal ko nilambit karna chahiye. brahmano par badnuma daag ho tum. shame on you

    Reply
  • Shashwat singh says:

    Arvind, lagta hai tumhara ilaaj nahin kiya jha ne tabhi pagal kutte ki tarah bhaunk rahe ho, rahi baat patrakarita ki to tumhare baare mein to pura kanpur janta hai ki tum bhaduwe ke siva kuch nahin ho isiliye afsar tumhara khayal rakhte hain aur tum har tarah se afsaron ka, website pe detail batani thik nahin rahegi kyonki ye waisa hi hoga jaise rape ki shikaar ladki ki identity khol di.

    Reply
  • manohar shukla says:

    arvind dalal hae, mujhe pata hae ye jha se rupaye maangne gaya tha, lekin isko waha nirasha lagi. iske baad isne apna khel dikhaya. mae ye nahi kahta ki doctor jha sahi aadmi hae lekin arvind 100 fisad dalal hae, commissonar ke office to kabhi bsa daftar me dalali karta hae. kanpur mandal ke ek janpad me sarkari sikshak hae, kabhi padhane nahi jata, kanpur ke ek chhote se akhbaar se jude hone ka dava kar dalali karta hae, khud ka kanpur transfer karane me adhikariyo ke pote taul raha hae, raza shastri jaese nirbhik aur imandaar reporter par galat ilzam lagaya kyonki unhone hi is kathit patrakar ke baare me akhbaar me likha tha. arvind tum fauran raza sahab se mafi maango, varna tumhare khilaf mae allahabaad highcourt me bodhwaar ko yachica dayar karunga, yashvant ji kisi ka alekh chhapne se pahla pusti zarur kare, ye arvind kanpur ka bada dalal hae

    Reply
  • pramod tewari says:

    arvind ko dalal ya jha se vasuli ka aarop uchit nahin hain. main jha ke khilaf opretion se puri tarah vakif hoon. arvind ko kathit patrakar mat kaho. purn patrakar kaho . agar purn patrakaron ne vigyapan AUR khabaroon ke liye lifafe n liye hote to ye sach mukya dhara ke media se ujagar hona chahiye tha.

    Reply
  • yogendra singh says:

    ये मेरा कमेंन्ट उन लोगो के लिए है जो इस पोर्टल के माध्यम से गाय को डंडा दिखाकर डराने का काम कर रहे है … अगर इस डॉ.झा की खबर में सत्यता नहीं है तो आप लोंग अरविन्द त्रिपाठी के दलाली के उन पन्नो को सामने लाइए जिनका आप लोंग डंका पीट रहे है …..और रही बात खबरों को लिखने और चलाने के बाद अक्सर लोगो पर इस तरह के आरोप लगते है …जिसे सीढी बनाकर आप लोंग भड़ास 4 मीडिया के इस पोर्टल पर अपना नाम चस्पा करना चाहते है ….

    Reply
  • suneet pandey says:

    Is khabar ke pachh aur vipachh me likhne walo ki bhasha ka antar dekh kar saaf malum pad gaya ki kaun sachha patrakaar hai kaun jhoota,, sabhi logo ne apne apne parvaarik sanskaar aur khandaan ka parichay de diya hai .. ek farjeewada khone par kuch logo ki jo sulag rahee hai wo to arvind ji ko aur sulgani chahiye,, jab tak ye patrakarita na seekh jaaye..

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *