मीडिया की खबर लेती मायावती सरकार

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में दलित, वंचित, महिला और मीडिया सभी सरकार के निशाने पर हैं। कभी बुजुर्ग महिला को बंधक बनाकर रात भर  थाने में रखा जाता है तो एक दलित बच्ची के साथ अगड़ी जातियों के दबंग लंपट सामूहिक बलात्कार करते हैं और पुलिस इसकी रपट लिखने में कोताही करती है। अपाहिज महिला को थाने में ढाई घंटे तक खड़ा रखा जाता है। कानपुर में पुलिस एक के बाद दूसरे अख़बार की खबर लेने में जुटी है। इसे लेकर पत्रकार संगठन आवाज उठा रहे हैं। यह कोई एकाध घटना नहीं है बल्कि मायावती के सत्ता में आने के बाद से यह सिलसिला जारी है।

बुजुर्ग पत्रकार महरुद्दीन खान को पुलिस ने एक नेता के इशारे पर लड़की भगाने के षड़यंत्र के आरोप में मुजफ्फरनगर जेल भेज दिया गया और जनसत्ता की खबर पर जब यह मामला संसद में उठा तो सरकार चेती और वे रिहा हुए। इसी तरह लखीमपुर में सम्युद्दीन नीलू को फर्जी मुठभेड़ में मारने की साजिश हुई और नाकाम रहने पर फर्जी मामले में फंसा कर जेल भेज दिया गया। यह सब हुआ तत्कालीन एसपी एन पदम्जा के इशारे पर जो बाद में जब गोंडा गईं तो वहां के पत्रकार राजेंद्र सिंह को फरार होना पड़ा। यह बानगी है उस उत्तर प्रदेश की जहाँ पिछले छह महीने में आधा दर्जन पत्रकार मारे जा  चुके हैं।

ताजा मामला दिल्ली के पत्रकार यशवंत सिंह का है जिनकी माँ को गाजीपुर की पुलिस ने अठारह घंटे तक थाने में बंधक बना कर रखा। इस मामले आला अफसरों से गुहार लगाने के बावजूद भी कोई कायर्वाही अभी तक नही हुई है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा- मायावती सरकार मीडिया को सबक सिखा रही है। जिस तरह की घटनाएं सामने आई है उससे लगता नहीं की सरकार नाम की कोई चीज है। किसी बुजुर्ग महिला को थाने में बंधक बनाकर रखना शमर्नाक है और उस पर दोषी पुलिस वालों को बचाना सरकार की नीयत को दर्शाता है। इस मामले में दोषी पुलिस वालों के खिलाफ कायर्वाही होनी चाहिए। आजमगढ़ में जिस तरह दलित युवती के साथ सामूहिक बलात्कार होता है वह दलित मुख्यमंत्री के राजकाज का पर्दाफाश कर देता है।

गौरतलब है कि पंचायत चुनाव की रंजिश में हत्या के बाद गाजीपुर की पुलिस पत्रकार यशवंत सिंह की माँ को भी थाने ले आई जाकि आरोपी उनका चचेरा भाई था। यशवंत सिंह ने कहा- यह प्रकरण आला पुलिस अफसरों करमवीर सिंह और बृजलाल के आदेश पर घटित हुआ। नीचे के अफसरों से बात करने पर जवाब मिलता है कि ऊपर का दबाव है। दरअसल किसी आम आदमी से पुलिस कैसा व्यवहार करती है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। यशवंत की माँ के साथ उनकी अपाहिज चाची को बैसाखी पर खड़ा रखा गया।

भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा- गाजीपुर पुलिस ने एक पत्रकार की माँ के साथ जो व्यवहार किया वह अक्षम्य है। इसी तरह आजमगढ़ में दलित के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला सरकार की साख को ख़त्म करने वाला है, बेहतर हो सरकार दोनों मामलों में कड़ी कायर्वाही करे। इस बीच दलित किशोरी के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले की जानकारी अनुसूचित जाति आयोग को भेज दी गई है।

यह घटना आजमगढ़ के कुरहंस गाँव की है। जहाँ 18 अक्तूबर को सायं सात बजे 17 वर्ष की युवती के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। युवती के पिता जयराम के मुताबिक 19 अक्टूार को जब वह अपनी पुत्री को लेकर थाने गये तो उसे न्याय देने की बजाय पुलिस के लोग पैसे का प्रलोभन  देकर सुलह करने के लिए दबाव बनाने लगे, इसके बाद 20 अक्तूबर को शाम चार बजे प्राथमिकी दर्ज की गयी और शाम सात बजे के बाद चिकित्सीय परिक्षण कराया गया। प्राथमिकी दर्ज होने की इस देरी के पीछे पूरे मामले को हल्का बनाने की कोशिश थी। इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका बहुत ही अन्यायपूर्ण तथा उपेक्षापूर्ण है। इन दोनों उदाहरणों से साफ़ है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस अब पूरी तरह अराजक हो चुकी है।

साभार : जनसत्ता

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Comments on “मीडिया की खबर लेती मायावती सरकार

  • dhirendra pratap singh says:

    mitra ashutosh ji aap ne jitana bhi up me mayaraj ke baare me likha vo bilkul sahi h.lekin nirash hone ki koi jarurat nahi h.anyay aur atyachar ki umra bahut chhoti hoti.

    dhirendra pratap singh dehradun

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  • shailendra parashar says:

    आशुतोस जी
    आप ने आवाज़ उठाकर बाकी बोहत अच्छा किया मायाबती सरकार ने तो उ.प्र. मैं इतना आतंक केवल पत्रकार ही नहीं आम जनता पर भी आतंक मचारखा है जो बुंदेलखंड की सीधी साधी जनता कम कानून की जानकारी कम होने की बजह से पुलिस की मर से पिस रही है और दम से पैसा केस लगाने के नाम पर लिया जाता है?

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  • yashwant ji apne haal he mai apne ek article mai likha tha ki agar patrakar apni aukaat mai aa jaye to bade bade uske samnay ghutnay tek de? na jane ye baat apne kaisay likh di. kyun ki aaj patrakarita ka ster itna gir gaya hai ki ab ye baatein hazam nahi hoti hai. to kripya in baato ka istamaal aaj kal ke time mai na he kiya jaye to behter hoga.

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  • anjna singh parmar says:

    आशुतोष जी, यूपी सरकार के खिलाफ आपने जो आवाज उठाई है उसमेँ सभी पत्रकारोँ और इस क्षेत्र से जुङे तमाम लोगोँ को एकजुटता दिखानी चाहिए। यहाँ तो दलितोँ के राज मेँ ही दलितोँ के साथ अन्याय हो रहा है। लेकिन सिँहासन पर बैठी दलित महारानी के कान पर जूँ तक नहीँ रेँगता। वो तो बस दलित प्रेम का चोला ओङ धन बटोरने मेँ व्यस्त हैँ। और यदि किसी ने उनके खिलाफ चीँ भी की तो फिर पुलिस तो है ही उसका फन कुचलने के लिए। जिसका यूपी सरकार बखूवी इस्तेमाल करना जानती है। लेकिन यहाँ तो अन्याय की हद हो गई।

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  • sumant bhattacharya says:

    यशवंत भाई, बेहद शर्मनाक हरकत है की पुलिस ने। मां तो मां है, चाहे पत्रकार की हो या फिर आम आदमी की। मानवाधिकार के अध्यायों से कितनी दूर है हमारी पुलिस, इसकी का नमूना है हमारी मां के साथ किया गया पुलिसिया सलूक। मुझे बेहद अफसोस हो रहा है खुद के उत्तर प्रदेश का होने पर। क्या इस पर बिखरी प्रतिक्रियाओं की जगह हमें संगठित तौर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास चल सकते हैं। मैं तैयार हूं।
    सुमंत भट्टाचार्य
    सहायक संपादक
    आउटलुक (हिंदी)

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  • bhishm singh dewal says:

    यू पी पुलिस की कार्यशैली जाहिर है, जो मामल अपने उठाया है वह बेहद संगीन है, किसी की माँ बहन की इज्जत को तट-तर करने में माहिर यू पी पुलिस अब पत्रकारों की माँ बहनों को बेइज्जत करने पर उतर आई है तो पत्रकारों को भी एकजुट होकर पुलिस की करतूत के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए, आज यशवंत जी की माँ के साथ हुआ है, कल मेरी माँ के साथ हो सकता है और हाँ परसों आपकी माँ के साथ भी………..
    भीष्म सिंह देवल
    मुरादाबाद

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  • vivek khare says:

    aree bhai aab tho mayawati bhi aapna paper Jansandesh naam se la rahi jismai sarkar aur mayawati ki aachi tasveer dekhayee degi . dekhana hai keya Channel ki tarah p[aper mai bhi bolo ko salry ke liye rona padeega

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  • shailendra kumar shukla says:

    अरे जब दलितॊं के शॊषकॊं कॊ सत्ता पाने के लिए टीकट देंगे तॊ एसा ही हॊगा भाइ। इसमें भला हल्ला मचाने की क्या जरुरत है। भारतीय राजनीति में तॊ सब कुछ जायज है।

    Reply
  • हैरानी की बात यह है कि विश्व के सबसे ज्यादा बिकने वाले अख़बारों जिनके हर जिले में संस्करण है और झौवा भर संपादक है और भड़ास रोज इन अखबारों के पत्रकारों
    की खबर देता रहता है किसी ने इस घटना पर सिंगल कालम की खबर तक नही दी .दैनिक हिन्दुस्तान से लेकर उजाला जागरण तक अपने अखबार के जिला
    और प्रखंड संवादाता की हत्या पर जब खबर न छापे तो वे वेब पत्रकारों के बारे में क्या लिखेंगे . वेब वाले ही उनके बारे में कम्पूटर तोड़े रहते है .
    एस के सिंह

    Reply
  • हैरानी की बात यह है कि विश्व के सबसे ज्यादा बिकने वाले अख़बारों जिनके हर जिले में संस्करण है और झौवा भर संपादक है और भड़ास रोज इन अखबारों के पत्रकारों
    की खबर देता रहता है किसी ने इस घटना पर सिंगल कालम की खबर तक नही दी .दैनिक हिन्दुस्तान से लेकर उजाला जागरण तक अपने अखबार के जिला
    और प्रखंड संवादाता की हत्या पर जब खबर न छापे तो वे वेब पत्रकारों के बारे में क्या लिखेंगे . वेब वाले ही उनके बारे में कम्पूटर तोड़े रहते है .
    एस के सिंह

    Reply
  • सत्यप्रकाश "आजाद" says:

    जिन पर अत्याचार हो रहा है, जब तक वो एकजुट होकर विरोध/प्रतिकार नहीं करेंगे तब तक कुछ नहीं हो सकता….चाहे वो पत्रकार हों या आम जनता…….

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  • vedkumarmaurya says:

    jab patrakar chaplush ho jata hai to nateeja yahi hota hai; aisi khabar padh kar ye to clear ho gaya ki u.p me ab news paper mayawati hi chala rahi hai

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