मीडिया की विश्वसनीयता के मुद्दे पर सवाल!

शेषजीमीडिया के नाम पर ठगी की घटनाएं आजकल कुछ ज्यादा ही सुनने को मिल रही हैं. भड़ास4मीडिया पर इस तरह की खबरें अक्सर आती रहती हैं. पिछले 24 घंटों में भड़ास पर छपी 3 ख़बरों के हवाले से मीडिया की ज़िम्मेदारी पर चर्चा करने की कोशिश की गयी है. यह कोई बहुत ऊंचा आदर्श बघारना नहीं है. बल्कि यह पत्रकारों और पत्रकारिता की इज्ज़त बचाने के लिए भी ज़रूरी है. अगर फ़ौरन चौकन्ना न हुए तो बहुत देर हो जायेगी.

पत्रकार बिरादरी को चाहिए कि अपने फैसले खुद करे. ज़रुरत इस बात की है कि पत्रकार बिरादरी के लोग ही इस तरह की प्रवृत्तियों के खिलाफ लामबंद हों और इस बहस में शामिल हों. तीनों खबरों बिना टिप्‍प्‍णी के नीचे ज्‍यों की त्‍यों दी जा रही हैं.

घटना नंबर एक : ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब कोई मीडिया (खासकर इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया) की निरंकुशता का शिकार हुआ हो. पर अब यह प्रवृत्ति रुकनी चाहिए. दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि सब-कुछ ताजा-ताजा दिखाने व बताने वाले खबरिया चैनलों की वजह से मीडिया की विश्वसनीयता को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है.

दरअसल हुआ यह कि शनिवार को सभी न्यूज चैनलों पर एक फ्लैश चलना शुरू हुआ कि मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह के विर्लेपारले स्थित आवास पर आयकर विभाग का छापा पडा. यह फ्लैश सबसे पहले एक ऐसे हिंदी चैनल पर दिखाई दिया, जिसकी विश्वसनीयता को लेकर लोगों को संदेह रहता है. पर उसकी देखा-देखी सभी छोटे-बड़े हिंदी-मराठी न्यूज चैनलों पर यही फ्लैश दिखाई देने लगा.

खबर की सच्चाई जानने के लिए जब मैंने कोशिश की तो पता चला कि छापे जैसा कुछ नहीं है. न्यूज चैनल विर्लेपारले के जिस पर घर पर छापे की खबर दिखा रहे हैं. वहां अब कृपाशंकर सिंह रहते ही नहीं. वे पिछले 8 महीनों से बांद्रा में रह रहे हैं. शाम होते-होते मुंबई कांग्रेस की तरफ से प्रेस रिलीज भी आ गई कि मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष के घर पर कोई छापा नहीं पड़ा. उनको बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.

मिली जानकारी के अनुसार एक हिंदी न्यूज चैनल के अति उत्साही रिपोर्टर ने सभी रिपोर्टरों को छापे की खबर वाला एसएमएस भेज  दिया. उसके बाद किसी रिपोर्टर ने खबर को कंफर्म करने की कोशिश नहीं की और अपने-अपने चैनल पर न्यूज फ्लैश करने की होड़ में शामिल हो गए. बात मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष की ही नहीं है. खबरिया चैनल इस तरह की लापरवाही करते रहते हैं और यह भूल जाते हैं कि इससे सामने वाले को कितनी मानसिक तकलीफ होती है.

कुछ मिनट में पूरे देश को यह झूठी खबर देने के बाद गलती का अहसास होने पर सभी चैनलों ने छापे वाले फ्लैश हटा लिया, पर तब तक सारा देश जान चुका था कि मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष के घर आईटी का छापा पड़ा है. बाद में किसी चैनल ने यह फ्लैश करना जरुरी नहीं समझा की छापे की खबर गलत थी.

घटना नंबर दो : बिहार से खबर है कि किसी टी वी चैनल के खिलाफ एक एफ आई आर दर्ज हुआ है जिसके मुताबिक किन्हीं डा. मनीष कुमार ने पटना की कोतवाली में मामला दर्ज कराया है कि इन लोगों ने उनकी पत्‍नी को बंधक बनाकर झूठा समाचार चलवाया. पुलिस मामले की जांच कर रही है.डा. मनीष के अनुसार – ”मैं अपने निजी काम के चलते पटना के होटल विनायक में 17 दिसम्‍बर 2010 से रूका हुआ था. मेरे साथ मेरी पत्‍नी भी थी. इस बीच मैं महाराजा काम्‍पलेक्‍स गया तो वहां मेरी मुलाकात आर्यन टीवी के रिपोर्टर हीरालाल से हुई. मैं अपना एक एनजीओ खोलना चाहता था, इसी के चलते परेशान था. हीरालाल ने कहा कि मैं आपके एनजीओ का रजिस्‍ट्रेशन करा दूंगा.

31 दिसम्‍बर को हीरालाल ने मुझे फोन करके अपने ऑफिस बुलाया. लगभग 11 बजे हीरालाल ने कहा चलिए मेरे साथ. मैं जैसे ही आर्यन चैनल के ऑफिस के बाहर निकला, रीता देवी नाम की एक महिला ने मुझे चप्‍पलों से मारना शुरू कर दिया. इस सीन को पहले से तैयार आर्यन टीवी के हीरालाल और अन्‍य लोगों ने शूट करना शुरू कर दिया. इसके बाद कैमरा शूट बंद करके आर्यन के अन्‍य स्‍टाफ भी मुझे मारने लगे.

मारते हुए ही मुझे आर्यन के ऑफिस के कैंटीन में ले जाया गया. वहां मुझसे कहा गया कि जैसा कहा जा रहा है वैसा बोलो नहीं तो अभी और मारेंगे. इसके बाद सर्वेश कुमार ने मेरा मोबाइल छीन लिया और जिस होटल में मैं रूका हुआ था उसका पता पूछा. इसके बाद होटल जाकर हीरालाल ने मेरी पत्‍नी सुधारानी से कहा कि आपके पति की जान खतरे में है. मेरी पत्‍नी जब चैनल के ऑफिस में आई तो उसे मुझसे मिलने नहीं दिया गया.उसे अलग से एक कमरे में ले जाकर बंद कर दिया गया. मुझे सर्वेश और मनोज कुमार सिंह ने कहा अभी लाइव चलेगा. संजय मिश्रा ने कहा कि लाइव में वैसा ही बोलना जैसा हमलोग बोलेंगे. नहीं तो तुम्‍हारी पत्‍नी को वेश्‍यावृत्ति के केस में फंसा देंगे. लगभग दो बजे के बाद लाइव चला, जिसमें रीता देवी ने कहा कि मेरी बेटी के साथ यौन शोषण किया है पटना के होटल में. लाइव के समय ही पुलिस को बुलाया गया.”

डा. मनीष ने बताया कि जब पुलिस थाने में रीता देवी से पूछा गया क्‍या तुम्‍हारी बेटी के साथ यौन शोषण किया गया  है डाक्‍टर ने, तब रीता देवी ने कहा मुझे नहीं पता यौन शोषण क्‍या होता है! आर्यन चैनल वालों ने मुझे कहा था कहने के लिए इसलिए कह दिया. जब कोतवाली पुलिस ने यौन शोषण का मतलब समझाया तो उसने बताया कि डाक्‍टर ने कभी मेरी बेटी को देखा ही नहीं है तो यौन शोषण कैसे करेंगे. 20 फरवरी 11 को कोतवाली पटना में काफी दबाव के बाद एफआईआर लिखी गई. जिसमें संजय मिश्रा, सर्वेश कुमार सिंह, मनोज कुमार सिंह और हीरालाल को नामजद किया गया है. केस संख्‍या 64/11 है.

घटना नंबर तीन : एक अन्य घटना पर भी नज़र डाल लें . दिल्ली से प्रकाशित पुलिस पब्लिक प्रेस के सर्वेसर्वा (मालिक/संपादक) पवन कुमार भूत द्वारा 10,000 रुपए में प्रेस कार्ड दिए जा रहे हैं। यूं तो पवन कुमार भूत अपनी पत्रिका के माध्यम से भारत में बढ़ रहे अपराध के ग्राफ को कम करने व पुलिस व पब्लिक के बीच सामंजस्य स्थापित करने लिए एक पहल बताता है। पर सच्‍चाई इससे अलग है।

वह अपनी मासिक पत्रिका (जो कि कभी कभार ही छपती है) के रिपोर्टर बनाने के नाम पर लोगों से 10,000 रुपए लेकर ही प्रेस कार्ड दे रहा है। पत्रिका का रिपोर्टर बनने के लिए पत्रकारिता का अनुभव होना जरूरी नहीं है, जरूरी है 10,000 रुपए। दो नंबर का धंधा करने वाला हो या गाड़ी चलाने वाला ड्राइवर या हो किराने का व्यवसायी, सभी को दस हजार लेकर प्रेस कार्ड बांट रहा है पवन कुमार भूत.

इन खबरों को ज्यों का त्यों दिया जा रहा है, कोई टिप्पणी नहीं की गयी है. इन तीनों खबरों को देखें तो इन मुद्दों पर बहस की पूरी गुंजाइश बनती है कि कहीं हम टीआरपी, प्रसार और पैसे के लिए आम लोगों को परेशान, प्रताडि़त कर उनकी इज्‍जत को तार-तार तो नहीं करने लगे हैं?

लेखक शेष नारायण सिंह देश के जाने-माने पत्रकार और स्तंभकार हैं.

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Comments on “मीडिया की विश्वसनीयता के मुद्दे पर सवाल!

  • om prakash gaur says:

    ऐसा तो में दो दशक से ज्यादा समय से देख रहा हूँ. बस रूपये की मात्रा कम ज्यादा होती रहती है. लेने देने वाले दोनों बेईमान होते हैं इसलिए चिता व्यर्थ है…

    Reply
  • DHARMESH SHUKLA says:

    पत्रकारिता का विस्तार जहा समाज के लिए मानसिक विकास का कारक बन रहा है वाही पत्रकारिता के लिए घातक, क्योकी पत्रकारिता के विस्तार वादी युग में गलत और निहायत हलके किस्म के लोगो का प्रवेश हो गया है पुनः मंथन की जरूरत है सम्पूर्ण पत्रकारिता को, आज रजनीगंधा और तुलसी तम्बाकू पर बिकने को तैयार है हमारे स्वजातिये पत्रकार मित्र ,विश्वसनीयता को बनाए रखना होगा ,नहीं ऐसी स्थितिया सामने आती रहेगी.

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.