यहां पत्रकारों की सुनने वाला कोई नहीं

दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा में अफसरशाही इस कदर हावी हो चली है कि मंत्री के प्रवास पर पत्रवार्ता के दौरान पत्रकारों ने सवालों के तीर छोडऩे के साथ अफसरों के खिलाफ अपनी भड़ास भी निकाली। मंत्री महोदय को भी पत्रकारों की दशा पर थोड़ा तरस आया। उन्होंने दिलासा भी दिया। लेकिन पत्रकारों पर हावी होती अफसरशाही आपे से बाहर होता जा रहा है। तभी तो पहली दफा किसी मंत्री ने अपने प्रवास के दौरान दो अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की तो एक वरिष्ठ पत्रकार ने मौका पाकर चौका जड़ दिया।

अब यह खबर अफसरों को रास नहीं आ रही है। लेकिन खबर को लेकर जनप्रतिनिधियों के अलावा पत्रकारों में खुशी का माहौल है। पिछले कुछ महीनों से पत्रकारों और प्रशासन के आला अफसरों में घमासान मचा हुआ है। मंत्रीजी के प्रेस कांफ्रेंस में ही एक पत्रकार ने यह शिकायत कर दी कि कलेक्टर साहब फोन नहीं उठाते। यह सुन मंत्री महोदय को भी ताजुब्‍ब हुआ। जो भी हो देश के सबसे नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में पत्रकारिता काफी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में अफसरशाही अगर हावी हो तो पत्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन आखिर कैसे करें? जब उनकी यहां सुनने वाला कोई नहीं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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