ये हैं वीर सांघवी और नीरा राडिया के बीच बातचीत के तीन टेप

वीर सांघवी और नीरा राडिया
वीर सांघवी और नीरा राडिया
बरखा दत्त के बाद अब नीरा राडिया और वीर सांघवी के भी बातचीत का टेप जारी हो चुका है. भारतीय मीडिया के इतिहास का यह काला प्रकरण है. बाजारीकरण ने जिस कदर संस्थाओं को भ्रष्ट बनाया है और नष्ट किया है, उसका यह प्रकरण मिसाल है. अब मीडिया पर कोई क्यों भरोसा करे, कोई कारण समझ में नहीं आता. उन्हीं लोगों ने इन संस्थाओं को बाजार का रखैल बना दिया जिनके कंधों पर इसकी पवित्रता व शुचिता की जिम्मेदारी थी. कुख्यात दलाल नीरा राडिया और वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी के बीच बातचीत के टेप यूट्यूब पर अपलोड हैं जिसे हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं. नीचे दिए गए वीडियो पर क्लिक करे बातचीत को सुनें. कुल तीन वीडियो हैं जिसमें सिर्फ आवाज है. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

Comments on “ये हैं वीर सांघवी और नीरा राडिया के बीच बातचीत के तीन टेप

  • madan kumar tiwary says:

    It is right Gov. has exclusive right over natural resources, not only that even trade of few commodities are under complete control of Government for example, intoxicating material like alcohal and no one claim it as under the constitutional provision of freedom to trade. but in the same time Government can part with that exclusive previlege by way of granting licence , lease or of any other type of instrument. In mukesh-Anil matter, GOV. has parted right to exploration and sale of crude to Reliance and reliance, in the process of demerger, made private agreement with RNRL (Anil ) to sale the crude at cheaper than market rate or the rate at which crude was available to Reliance. It was a flawless agreement. GOV, after parting with his right to Reliance , was not having any privilege to say to whom and at what rate , Reliance will sale the crude. Interference of GOV In mukesh -Anil Dispute was motivated with ill-will. and sorry to say but the issue whether the Government has right to intervene, after parting privilege was biggest one that was not dealt properly in Mukesh-Anil Case. I would like to suggest Mr. Yashvant to get opinion of Mr. Jethmalani . Judgement in Mukesh-Anil dispute was shocking for a legal expert.

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  • विष्णु तिवारी says:

    सूचना प्रौद्योगिकी का कमाल है. कल तक जो बातें दबी छिपी रहती थीं वे अब सामनें आ रही हैं. मसला यह है की प्रवर्तन निदेशालय के “किसी और” प्रयोजन के लिये नीरा राडिया के फोन सरकारी इजाजत के साथ टेप करवाये थे. किसे पता था कि खोदा पहाड़ और निकली चुहिया की जगह लोमड़ी (FOX) निकल आयेगी. खैर, तो रिकार्डिग के सारे टेप आयकर विभाग को बिना सुने भेज दिये गये. बस, वहीं कोई राष्ट्रभक्त था जिसने आपके हमारे लिये और भारत की जनता के लिये ये रिकार्डिंग निकाल बाहर की. भारत की जनता को सुनाइये. अपनी वॉल पर साझा करिये. सबको बताइये की क्या बला है यह अबला बरखा दत्त, यह वीर वीर सांघवी और गंदी बाद करने वाला प्रभु चावला. इसके जैसे बाकी और बिचौलियों के भी भेद इसी तरह खोलिए. टेप में कई और लोमड़ी हैं.

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