राजीव अग्रवाल बिलासपुर से औरंगाबाद पहुंचे

: संदीप और शिव ने पत्रिका ज्‍वाइन किया : नवभारत, बिलासपुर से जनरल मैनेजर राजीव अग्रवाल ने इस्‍तीफा दे दिया है. अब वे महाराष्‍ट्र में लोकमत से जुड़ गए हैं. उन्‍होंने औरंगाबाद में लोकमत के जनरल मैनेजर के पद पर ज्‍वाइन किया है. वे यहां पर लोकमत के हिंदी, अंग्रेजी और मराठी के एडिशनों को हेड करेंगे.

राजीव पिछले बीस सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. इनका सबसे ज्‍यादा वक्‍त अमर उजाला के साथ बीता. वे 17 वर्षों तक अमर उजाला के साथ रहे. इनके कार्यकाल में ही अमर उजाला ने बनारस, गोरखपुर तथा इलाहाबाद यूनिट को लांच किया था. अमर उजाला से इस्‍तीफा देने के बाद ये स्‍वतंत्र वार्ता के तीनों हिंदी एडिशन हैदराबाद, विशाखापट्टनम और निजामाबाद के प्रभारी के रूप में जुड़ गए थे. फिर बिलासपुर में नवभारत ज्‍वाइन कर लिया था. माना जा रहा है कि औरंगाबाद में भास्‍कर के दिव्‍य मराठी के लांचिंग को देखते हुए ही लोकमत ने राजीव को यह महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी सौंपी है.

दैनिक भास्‍कर, भोपाल से न्‍यूज कोआर्डिनेटर संदीप चौरसिया और नेशनल डेस्‍क पर जिम्‍मेदारी निभा रहे शिव शर्मा ने इस्‍तीफा दे दिया है. दोनों ने अपनी नई पारी पत्रिका, जबलपुर के साथ शुरू की है. दोनों काफी समय से भास्‍कर को अपनी सेवाएं दे रहे थे.

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Comments on “राजीव अग्रवाल बिलासपुर से औरंगाबाद पहुंचे

  • O. P. Srivastava, Deoria (U.P.) says:

    Rajeeva Aggrawal Sir ne Gorakhpur men Amar Ujala ke liye kya-kya nahi kiya. Unhone Amar Ujala ka yahan par paudha lagaya aur ushe apane khoon se shichan aur hum jaise logon se shichwaya bhi. Lekin Amar Ujala ke management ne jish tarah se Holi ke tyohar ke awsar par unko be rang kiya, uski yadden aj bhi hume bhahut dukh pahuchati hai.
    Waise ek bat spashta hai ki akhbar ki dunia me chahe aap akhbar ke liye apni jan hi kyon na de do. Akhbar ka managment aap ko kab jor ka jhatka dhire se dega, pata hi nahi chalega.
    Rajeev ji ko Lokmat se judane ke liye bahut bahut badhai aur shubhkamnayen.
    Rajeev Aggrawal ji ka hum dil se bahut samman karte hain aur chahate hai ki wo Lokmat ko itna majboot kar de ki uske samne Amar Ujala pani bharne lage.
    Ek bar phir Rajeev ji ko Dhanyawad is ummeed ke sath ki wo Gorakhpur kabhi awan aur hum jaise logo se jarur milen.
    Unka Chota bhai.
    O.P. srivastava
    10 june 2011

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