राडिया और टाटा का नंगा सच

: नीरा के रतन बिखरेंगे अदालत में : नीरा राडिया और रतन टाटा के बीच जो भी अंतरंग बाते हुई हैं और जिन्हें छिपाने के लिए रतन टाटा सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गए थे, वे आखिरकार अदालतों तक पहुंच ही गईं. रतन टाटा की नब्बे कंपनियों के लिए नीरा राडिया का वैष्णवी कम्युनिकेशन काम करता था और नीरा राडिया को साठ करोड़ रुपए का साल का भुगतान होता था. इसके अलावा लगभग 52 वर्षीय और तलाकशुदा नीरा और 72 वर्षीय और अविवाहित रतन टाटा के बीच निजी दोस्ती भी काफी अच्छी थी. इसके प्रमाण अब तक जारी टेपों में मिल चुके हैं.

रतन टाटा जानते हैं कि हजारों टेपों में से कम से कम 100 तो उनके ही होंगे. टेप करने वाले आयकर अधिकारियों का कहना है कि रतन और नीरा के बीच कई संवाद तो घंटों लंबे हैं और ज्यादातर रतन टाटा द्वारा विदेश से किए गए हैं. हालांकि रतन टाटा को पैसे की कोई कमी नहीं थी, न है, मगर देश के रईसों का बिग ब्रदर बनने के लिए और उन्हें सलाह बेचने के लिए भी रतन टाटा नीरा का इस्तेमाल करते थे. अब अगर यह सामने आ गया तो रतन टाटा की रही सही इज्जत भी धुल में मिल जाएगी.

मगर रतन टाटा और नीरा के संकोच की असली वजह उनकी वे बातचीत है जिनमें वे धंधे पानी से अलग एक दूसरे के सुख दुख के सात जन्म के साथी दिख रहे हैं. सूत्रों के अनुसार एक टेप ने तो रतन टाटा नीरा से यह कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि तुमसे बात नहीं कर लूं तो दिल अधूरा लगता है और यह भी कि तुमने इतनी जिंदगी मेरे बगैर कैसे बिता दी और यह भी हमारा तुम्हारा रिश्ता यह दुनिया नहीं समझ पाएगी. नीरा राडिया के प्रति किशोर भावनाओं का यह इजहार रतन टाटा को उनकी कर्मठ छवि की बजाय जोकर बना देगा.

इसके अलावा नैनो से जुड़े अभियान में शुरू में रतन टाटा ने नरेंद्र मोदी के बारे में अनपढ़ जाहिर, काठ का उल्लू और चङ्ढी वाला जैसे शब्द कहे है. नरेंद्र मोदी की अंग्रेजी का भी बातचीत में खूब मजाक उड़ाया गया है. अब टाटा का विराट नैनो कारखाना गुजरात के साणंद में लगा है और नरेंद्र मोदी गुजरात के सबसे ताकतवर आदमी है और उनकी यह स्थिति बदलने का कोई कारण फिलहाल तो नहीं दिखता. ये टेप सामने आए तो तीखे तेवरो वाले नरेंद्र मोदी को एक मिनट नहीं लगेगा और रतन टाटा को धूल चाटनी पड़ जाएगी. फिलहाल वे अपना उत्तराधिकारी खोज रहे हैं लेकिन हो सकता है कि उन्हें फिलहाल टाटा समूह को गिरने से बचाना पड़े.

नीरा और रतन टाटा के बीच कुल 5851 किश्तों में अगस्त 2008 से दिसंबर 2008 और मई 2009 से जुलाई 2009 तक के बातचीत के रिकॉर्ड मौजूद हैं. देश का इतना बड़ा उद्योगपति देश की इतनी बड़ी दलाल से 8 महीने 30 दिन में 5851 बार बात करता है तो उन्हें आधुनिक युग का लैला मजनू कहने में किसी को क्यों ऐतराज होना चाहिए? रतन टाटा का कॉरपोरेट रिकॉर्ड बताता है कि अपनी कंपनी के सबसे खास लोगों जैसे टाटा मोटर्स और जमशेदपुर प्लांट के मुखिया से भी पूरे साल में औसतन 70 बार रतन टाटा की बात हुई है. जाहिर है कि रतन टाटा अपनी बेइज्जती से बचना चाहते थे और देश की सबसे बड़ी अदालत में उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी. रतन और नीरा का नंगा सच कभी न कभी तो सामने आएगा ही.

लेखक आलोक तोमर देश के जाने-माने पत्रकार हैं. रतन टाटा और नीरा राडिया के टेप सुनने के लिए क्लिक करें- रतन-नीरा संवाद एक और रतन-नीरा संवाद दो

Comments on “राडिया और टाटा का नंगा सच

  • krishna murari says:

    Do debate dekhne ke baad to yahi lagta hai ki ye log is bhav me hon ki bachchu tumhe nahi pata ki shirsh tak pahuchne ke kya kya karna padta hai.Rajniti aur media to bilkul nirlajj ho chuki hai.parakashta hai ye.Ab thomas bhai sahab ko hi le lijiye.Kis nirlajjta se vo bayanbaji kar rahe hai.Tata ka to smajh me bhi aata hai ko apna business badhane ke liye kisi bhi had tak ja sakte hai. yekin in logo ka kya jo din bhar parvachan bagharte hai aur sham jabardast ayyasi karte hai. ye log to jholachhap babao se bhi ghinone hai.Yaad kare kisi tawayaf ka kotha, jahan ik mausi hoti hai aur mausi ko saath denewale kai saare chhakke (chhakke sab mujhe maaf karna aaplog achhchhe hote hai khaskar inlogo se) in mausi aur chhakke se hi kotha chalta hai. Tawyafo ki saari kamai in mausi ke paas hi aati hai. mausi sham me paise chhakko ko bant,ti hai. lagbhag saara paisa inlogo ke bich hi bant,ta hai.tawayafo ko itna kam paisa diya jaata hai ki wo mushkil se apna jivan chala sake.Tawayafo ki dono chije jaati hai ijjat bhi aur paisa bhi.Amuman tawayafe apne 4/8 ke bed pe sisakti hi rahti hai.Aamlogo ki halat bhi aisi hi ho gayi hai.Mausi aur chhakke milkar ayyasi kar rhe hai aur aamlog roj dar roj pis rahe hai.

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  • alok ji maaf kare aapke sooch bahut gandi hai……ratan tata apni niji zindagi me kya karte hai usse unko judge karna jahalat hai….aur nira radia bhi talak shuda hai aur agar do akele log ek dusro ka dukh sukh baat rahe hai to apko isme kya taklif hai…isme to naitikta ki bhi baat nahi aati…..

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