रायपुर में पत्रकार ने करवाया तहलका के पत्रकार पर मामला दर्ज

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में तहलका मैगजीन के पत्रकार द्वारा संचालित ब्लॉग का आपत्तिजनक एसएमएस भेजकर अपमानित करने का मामला सामने आया है। प्रार्थी पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी तहलका के पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है तथा इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। दूसरी तरफ तहलका के पत्रकार ने भी शिकायत दर्ज कराने वाले पत्रकार के खिलाफ जान से मारने की धमकी की शिकायत दर्ज कराई है।

प्रफुल्ल पारे स्वयं एक पत्रकार हैं और रायपुर के अवंति विहार कॉलोनी के रहने वाला है। बताया जाता है कि प्रफुल्‍ल के ब्लॉग में बीते एक जनवरी को पंचशील नगर के रहने वाले राजकुमार सोनी ने आपत्तिजनक एसएमएस भेजकर अपमान किया। राजकुमार सोनी तहलका मैगजीन के छत्तीसगढ़ संवाददाता हैं। जिसके बाद पारे ने इसकी शिकायत तेलीबांधा थाना में की। मामले में पुलिस ने आरोपी राजकुमार के खिलाफ प्रौद्योगिकी संसाधन अधिनियम 2008 की धारा 66 ए के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। छत्तीसगढ़ में इस अधिनियम की इस धारा के तहत यह पहला मामला है।

यह तो हुई एक खबर। अब खबर के पीछे जाएं तो रायपुर के पत्रकारों के मुताबिक प्रार्थी प्रफुल्ल पारे और तहलका के संवाददाता राजकुमार सोनी के बीच पुरानी लाग-डांट है। सोनी ने हरिभूमि में रहते हुए पारे को काफी परेशान किया था। तब वह मोबाइल पर महिला की आवाज में पारे से अश्लील बातें करते थे। इसके अलावा उन्होंने उसके घर फोन कर के भी कई बार आपत्तिजनक बातें कही थी। इस संबंध में भी पारे ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ पुलिस में शिकायत करवाई थी।

गजब यह है कि इस दुश्मनी के पहले सोनी और पारे के साथ एक और वरिष्ठ पत्रकार की तिकड़ी जोरदार प्रसिद्ध हुआ करती थी। तब ये तीनों ही हमप्याला से लेकर हमनिवाला भी हुआ करते थे। इधर सोनी ने भी पारे के खिलाफ जान से मारने की धमकी की शिकायत बाद में सिविल लाइन थाने में दर्ज करवाई है। बहरहाल रायपुर में मीडिया जगत के लोग इस बारे में चटखारे लेकर चर्चा कर रहे हैं।

Comments on “रायपुर में पत्रकार ने करवाया तहलका के पत्रकार पर मामला दर्ज

  • अगर किसी इंसान में इंसान के अलावा सभी योनियों के गुण एक साथ आ जाएं तो यही होगा। ऊपर से वह पत्रकार भी हो तो…। भगवान भी सोचता होगा-हे, भगवान, मैंने क्या बना दिया। पुरुष बनाकर भेजा, आवाज महिलाओं की निकालता है। फोन पर ढिशुम…ढिशुम की आवाज निकालकर डराता है अज्ञात आदमी। छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में जिन लोगों के पैरों के पोटुओं के बराबर औकात नहीं है उनकी भी चड्डी बनियान खींचता है। विधानसभा में एकमात्र महिला पत्रकार कवरेज के लिए जाती थी। अज्ञात आदमी उससे पूछता था-तुमको श्वेत प्रदर तो नहीं है। एमसी तो नहीं है, वह भी दर्जनभर पत्रकारों के बीच। आधे मजा लेते थे। आधे अपनी इज्जत बचाने के लिए इधर-उधर हो जाया करते थे। मिलेनियम प्लाजा के काम्पलेक्स के कॉफी हाउस में खबरों को रुकवाने के लिए चार पत्रकारों से अज्ञात ने डीलिंग करवाई। दो ने मोबाइल से रिकार्डिंग कर ली है। वैष्णो देवी जाने के लिए एक मंत्री से 20 हजार मांगे। आखिर में पांच हजार लेकर माना अज्ञात।
    तो भाइयो, भगवान ने बनाया है, भगवान ही भला करेगा। परेशान न हों। तांत्रिकों के दम पर किसी का बुरा करने की चाह रखने वाले की मंशा कभी पूरी नहीं होगी।

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  • arunesh c dave says:

    मै पत्रकारिता से जुड़ा तो नहीं और जिनके बारे मे जिन्होने शिकायत की है उन्हे भी नही जानता परंतु ब्लाग जगत से लगाव के कारण मैने इस मामले मे कुछ पड़ताल जरूर की जिन धाराओं मे केस दर्ज हुआ वे इस केस में लागू नही होती दूसरे इस तरह का केस तभी हो सकता है जब कोई संक्षम उच्चाधिकारी सहमत हो और जिन सोनी साहब पर ये केस दर्ज हुआ है वे पिछले कुछ समय से तहलका मे सरकार के कार्यकलाप के खिलाफ़ लिख रहे हैं यदी किसी महिला के साथ दुर्व्यहवार उन्होने किया तो उसकी शिकायत कर्ता वह महिला ही हो सकती है इसीलिये ब्लागिंग के खिलाफ़ सरकार के इस पहले प्रहार से सावधान होने की जरूरत है वरना ब्लागर की हालत भी आम पत्रकार सी हो जायेगी निजी दोस्ती दुश्मनी के लिये अनेक रास्ते खुलें हैं और खुला मैदान इसके लिये सबसे उपयुक्त जगह है पर इस समय सभी ब्लागर बंधुंओ को पीड़ित के साथ खड़े होने की है वरना कल हालत ऐसी होगी कि एक लाईन लिखने से पहले सौ बार सोचना होगा

    पुनःश्च मैने वो ब्लोग पढ़ा है आशा है टिप्प्णी करने से पहले बाकी लोग भी पढ़ेंगे बाकी यदी सोनी जी ने कॊई अश्लील हरकत की है तो मै जरूर चाहूंगा कि उन्हे न्याय का सामना करना पड़े उसके लिये तथ्य न्याय के सामने प्रस्तुत करें इस मंच पर नही

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  • राजकुमार जी को जो जानते है वो फर्जी नाम की टिप्पनियों से प्रभावित नही होंगे। उनपर कीचर उछालने और उनको नीचा दिखाने की कई बार कोशिश की गई लेकिन हमेशा राजकुमार जी इस तरह की परेशानियों से निपटते रहे। अच्छी बात यह है कि वे इस तरह की परेशानियों से डरते नही,बल्कि और मुखर होकर ज्यादा बेहतर लिखते है। छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता के तथाकथित मठाधीशों का असली चेहरा लोगो के सामने लाने के बाद एक एफआईआर तो काफी कम है। लोगो का वश चले तो उन्हें सुली पर चढ़ा दे।

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  • एक दिन की बात है। अज्ञात आदमी पूर्व संस्थान की दो महिला पत्रकारों को अपने घर तबला बजाने और हारमोनियम सिखाने ले गया। बजा पाते उससे पहले ही गृह स्वामिनी पहुंच गर्इं। फिर क्या था…। वही हुआ जो होना चाहिए।
    पूर्व से पूर्व संस्थान में एक मार्केटिंग में महिला हुआ करती थी। उसे मकान बनवाना था। इन्होंने दो-तीन छुटभैय्यों उधार पैसा दिलवा दिया। उसका ब्याज इज्जत देकर चुकानी पड़ी। ब्याज भी चक्रवृद्धि। अज्ञात व्यक्ति इतना कमीना है कि अपनी मोटर साइकिल पर बैठाकर छोड़ता था लोगों के पास।
    पूर्व संस्थान में एक सहयोगी का एक्सीडेंट हुआ। पूरे बाजार से उसके लिए उगाही की। 20 फीसदी हिस्सा उन्हें दिया बाकी खा गए। उन्हें पता चला तो बिफरे। मगर इन्होने बेशर्मी से कहा-मैंने मेहनत की है। मेरा भी हक बनता है।
    एक पत्रकार के इलाज के लिए बाजार से 22 लाख रुपए उगाहे गए। उसमें भी इन्होंने अपना हिस्सा निकाल लिया। अब हालत यह है कि सज्जन और अच्छे लोगों के लिए कोई चवन्नी देने के लिए तैयार नहीं है।
    आखिर में…अज्ञात वो शख्स है अपनी मां तो नहीं छोड़ता। इसकी हरकतों से तंग आकर सम्मानीय माताजी इसके पास नहीं आना चाहतीं। यह घटिया आदमी उन्हें भी अपशब्द कहता है।
    इसके बावजूद आप सबको यह लगता है कि यह सम्मानीनय है आपकी सोच को प्रणाम…

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  • MORDHWAJ PATEL says:

    पत्रकारिता मे सबसे आसान आरोप होता है की कोई पत्रकार लड़की बाजी करता है,शराब पीता है और पैसे ख़ाता है . उपर प्रकाशित रिपोर्ट और किसी श्रीमान (मोनू) की टिप्पणी ये बताती है की खबर की नियत क्या है हम लोग राजकुमार सोनी की कलम और उसकी धार से वाकिफ़ है इसलिए ये दावे से कह सकते है की जो कुछ हुआ है उसके पीछे कोई ना कोई गहरा सड़यंत्र ज़रूर है.
    छत्तीस गढ़ की पत्रकारिता मे श्री सोनी जी का एक अलग मुकाम है और लोग उस महासय को भी जानते है जिसने ये रिपोर्ट दर्ज कराई है .

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  • MORDHWAJ PATEL says:

    पत्रकारिता मे सबसे आसान आरोप होता है की कोई पत्रकार लड़की बाजी करता है,शराब पीता है और पैसे ख़ाता है . उपर प्रकाशित रिपोर्ट और किसी श्रीमान (मोनू) की टिप्पणी ये बताती है की खबर की नियत क्या है हम लोग राजकुमार सोनी की कलम और उसकी धार से वाकिफ़ है इसलिए ये दावे से कह सकते है की जो कुछ हुआ है उसके पीछे कोई ना कोई गहरा सड़यंत्र ज़रूर है.
    छत्तीस गढ़ की पत्रकारिता मे श्री सोनी जी का एक अलग मुकाम है और लोग उस महासय को भी जानते है जिसने ये रिपोर्ट दर्ज कराई है .

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  • मैं पत्रकारिता के क्षेत्र मे नही हूँ और ना ही मेरा उस महाशय से मेरा परिचय है जिन्होने श्री सोनी पर इस तरह का गंभीर और हास्यास्पद आरोप लगाया है, गंभीर इसलिए क्योंकि एफ. आई. आर. करना और ऐसे आरोप लगा कर करना गंभीर तो है ही और हास्यास्पद इसलिए की जो लोग श्री सोनी को जानते हैं वो इस विषय की सच्चाई से अवगत हैं….मैं श्री सोनी को विगत कई वर्षों से जानती हूँ, और एक महिला होने के नाते उनके चरित्र पर लगे इस आरोप पर बस इतना कह सकती हूँ के ये सारे आरोप एक ऐसे पत्रकार की छवि धूमिल करने के कोरे प्रयास हैं,जो अपनी बात बेबाकी से कहने के लिए जाना जाता है. मोनू नाम के महाशय की टिप्पणी उन्हे खुद संदेहों के घेरे मे ले आती है क्योंकि प्रफुल पारे के आरोपों को गढ़ा रंग देने और गंदे और भद्दे शब्दों के प्रयोग से राजकुमार सोनी के लिए नफ़रत पैदा करने की नापाक कोशिश की हैं … केश की सच्चाई उजागर होते ही उन्हे अपने ही शब्द भारी पड़ेंगे
    दूसरी बात अगर आपके आरोपों मे थोड़ी भी सच्चाई है तो आप उस महिला पत्रकार को सामने लाइए. पत्रकार पर उसके चरित्र पर आरोप लगाने से अच्छा कोई आरोप नही हो सकता और शायद यही सोचकर प्रफूल्ल पारे ने ये खेल खेला है. और अपनी तरह का पहला मामला बना कर उसे अच्छा प्रचारित भी कर दिया है,पर सच को अंत मे सामने आना ही है.

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  • मैं पत्रकारिता के क्षेत्र मे नही हूँ और ना ही मेरा उस महाशय से मेरा परिचय है जिन्होने श्री सोनी पर इस तरह का गंभीर और हास्यास्पद आरोप लगाया है, गंभीर इसलिए क्योंकि एफ. आई. आर. करना और ऐसे आरोप लगा कर करना गंभीर तो है ही और हास्यास्पद इसलिए की जो लोग श्री सोनी को जानते हैं वो इस विषय की सच्चाई से अवगत हैं….मैं श्री सोनी को विगत कई वर्षों से जानती हूँ, और एक महिला होने के नाते उनके चरित्र पर लगे इस आरोप पर बस इतना कह सकती हूँ के ये सारे आरोप एक ऐसे पत्रकार की छवि धूमिल करने के कोरे प्रयास हैं,जो अपनी बात बेबाकी से कहने के लिए जाना जाता है. मोनू नाम के महाशय की टिप्पणी उन्हे खुद संदेहों के घेरे मे ले आती है क्योंकि प्रफुल पारे के आरोपों को गढ़ा रंग देने और गंदे और भद्दे शब्दों के प्रयोग से राजकुमार सोनी के लिए नफ़रत पैदा करने की नापाक कोशिश की हैं … केश की सच्चाई उजागर होते ही उन्हे अपने ही शब्द भारी पड़ेंगे
    दूसरी बात अगर आपके आरोपों मे थोड़ी भी सच्चाई है तो आप उस महिला पत्रकार को सामने लाइए. पत्रकार पर उसके चरित्र पर आरोप लगाने से अच्छा कोई आरोप नही हो सकता और शायद यही सोचकर प्रफूल्ल पारे ने ये खेल खेला है. और अपनी तरह का पहला मामला बना कर उसे अच्छा प्रचारित भी कर दिया है,पर सच को अंत मे सामने आना ही है.

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  • Lalit Sharma says:

    वैसे अरुणेश जी ने काफ़ी कु्छ कह दिया है।

    नफ़रत की लाठी तोड़ो-आपस में प्रेम करो मेरे देश प्रेमियों।

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  • सोनी जी के बारे में इस लेख में जो कुछ भी लिखा गया उसको पढ़कर तो यही लगता है की लिखने वाले ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर सोनी जी पर लगाए गए मनगढ़ंत आरोपों का जल्दबाजी में समर्थन कर दिया है. इस खबर की पहली पंक्ति ही यह बताने के लिए काफी है की राजकुमार जी को शुरू से लेकर अंत तक इस खबर में एक तरफ़ा निशाना साधा गया है. राजकुमार जी की गिनती छत्तीसगढ़ के ऐसे चुनिन्दा पत्रकारों में होती हैं जिन्होंने अपनी पहचान पत्रकारिता में किये गए अपने श्रेष्ठ कार्यों से बनायी है, सोनी जी पर इससे पहले भी कई बार निशाना साधा गया है. परदे की पीछे की बात यह है कि प्रशासन में पैठ बनाये कुछ चाटुकार लोग नहीं चाहते कि उनकी सच्चाई सामने आये इसलिए ऐसे निराधार आरोप लगाकर सोनी जी को परेशान करने कि कोशिश कि जा रही है, लेकिन ऐसा करने वाले शायद नहीं जानते कि सोनी जी ने पूर्व में भी ऐसे ही हालातों का बखूबी सामना किया है और शिकायतकर्ता प्रफुल्ल जी के बारे में पूरा रायपुर जानता है कि उनकी सच्चाई क्या है !!!

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  • avinash singh says:

    राजकुमार सोनी छत्तीसगढ़ के निर्भीक, निष्पक्ष और संवेदनशील पत्रकार हैं। उनके बारे में इस प्रकार की टिप्पणी करना ठीक नहीं है। तहलका से जुड़ने के बाद श्री सोनी की तरक्की से लगता है कुछ लोग परेशान हैं। इसलिये गंदे आरोपों से उन्हें परेशान कर रहे हैं। लेकिन सोनी जी आप डरे नहीं, आगे बढ़ें। रास्ते अपनी मंजिलें खुद तलाश लेते हैं।

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  • खबर अपने आप में इन्साफ नहीं करती …. खबर अधूरी और आरोप सच्चाई से कोसों दूर है. आरोप का स्तर भी कुछ ऐसा है जैसे कि कोई पांच साल का बच्चा अपनी क्लास टीचर से शिकायत कर रहा है. ऐसा लगता है जैसे शिकायतकर्ता ने बदहवासी में ही आरोप लगा दिया हो, समझ नहीं आता sms भेजकर कोई किसी का अपमान कैसे कर सकता है ? अपमान का प्रचलित अर्थ तो यह होता है कि उसमें आपके सम्मान को चोट पहुंचना, 2 लोगों के बीच संदेशों के आदान प्रदान को सार्वजनिक अपमान कि श्रेण में नहीं रखा जा सकता. आरोप लगाने वाले प्रफुल्ल स्वयं को पत्रकार कहते हैं लेकिन उनकी सोच और नज़रिए को जानकर तो यही लगता है कि उनको जितना जल्दी हो सके इस पेशे को छोड़ देना चाहिए ताकि पत्रकारिता कि पवित्रता सुरक्षित बनी रहे.

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  • एक वरिष्ठ और निष्कलंक पत्रकार के खिलाफ अज्ञात की टिप्पणियों से आहत एक व्यक्ति ने पूछा-वो दलाल रोज आपके खिलाफ कुछ न कुछ लिख रहा है। आप कुछ करते क्यों नहीं। उसने एक पुरानी और अच्छी कहानी सुनाई।
    जंगल में एक शेर था। सभी उसकी इज्जत करते थे। एक मोटे और काले सूअर को यह बात नागवार गुजरी। वह शेर को गालियां बकने लगा। बुराई करने लगा। चार जानवरों को इकट्ठा कर शेर के खिलाफ बिगुल फूंक दिया। शेर को पता चला। सूअर को समझाने पहुंचा। सूअर जंगल के सबसे गंदे नाले के किनारे बैठा था। शेर को देखते ही भद्दी-भद्दी गालियां बकने लगा। शेर को गुस्सा आया। उसे मारने दौड़ा। सूअर छलांग लगाकर नाले में कूद गया। मल-मूत्र से सनकर बाहर निकला और शेर का चुनौती दे दी। शेर उसे मारने दौड़ा तो बदबू के मारे बेहोश होते-होते बचा। सिर दर्द के मारे फटने लगा। बेबसी में सूअर को छोड़ दिया।
    उस दिन के बाद सूअर खुद को जंगल का राजा समझने लगा है। शेर इंतजार कर रहा है जब सूअर नाले से थोड़ा दूर मिलेगा।
    तो भाइयो, आप समझे कि नहीं…सूअर कौन और शेर कौन? अरे…सूअर की शक्ल का एक ही पत्रकार है छत्तीसगढ़ में….अज्ञात।

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  • avinash singh says:

    राजकुमार सोनी की पत्रकारिता किसी सर्टिफिकेट के लिये नहीं है कि उन्हें कोई कुछ भी आरोप लगा दे। राजकुमार सोनी ने अपनी पत्रकारिता के जरिये समाज की सच्ची सेवा की है और कर रहे हैं। सोनी निर्भीक पत्रकार हैं इसलिये तहलका में उनकी तरक्की कुछ लोगों के गले नहीं उतर रही है इसलिये वे गंदे और बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। राजकुमार सोनी ने तहलका में छत्तीसग़ढ़ की पत्रकारिता को बुलंद किया है। उन पर कीचड़ उछालना समुची पत्रकारिता को बदनाम करने जैसा है। सोनी जी किसी की चमचाई वाली पत्रकारिता नहीं करते हैं और न हीं उन्हें कोई उनके दायित्वों से पीछे हटा सकता है। अरुणेश जी की बात से हम सहमत हैं।, .यदि किसी का मन आहत होता है तो वह न्यायालय में जा सकता है परन्तु किसी को बदनाम करना अच्छा नहीं है। श्री सोनी जी हमेशा से लोगों की सेवा करते रहे हैं। उनको जानने वाले बता सकते हैं कि जरुरत पड़ने पर सोनी जी हर स्थिति में पीड़ितों के साथ खड़े होते हैं। मैं पत्रकारिता नहीं जानता पर सोनी जी को औरउनकी पत्रकारिता को जानता हूं। वे किसी से डरते नहीं हैं, छिपी बातों को साहस के साथ उजागर करना उनकी इमानदारी है. मोनू जी आप जिस गंदे और घटिया तरीके से अपनी बात कह रहे हैं उससे हमें आपकी स्थिति पर शक होता है आपको यह शोभा नहीं देता किसी महिला पत्रकार के बारे में गंदे विचारों को इस तरह प्रकट करें। महिलाओं के बारे में आपको संभलकर कुछ कहना चाहिये। भारतीय दर्शन में महिलाओं को बहुत उंचा स्थान मिला है वे देवी तूल्य हैं। आपको किसी महिला के संबंध में टिप्पणी करना गलत ही नहीं अपराधिक कृत्य भी है मोनू आपको महिलाएं माफ नहीं करेंगे भले ही राजकुमार सोनी माफ कर दें। राजकुमार सोनी आप इन टिप्पणियों से घबराएँ नहीं सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं। आप निर्भीक होकर काम करें । सच्चे लोग आपके साथ हैं।

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  • Dr.Shahid Ali says:

    श्री राजकुमार सोनी के बारे में अनर्गल टिप्पणियों को देखकर मन आहत हो गया। श्री राजकुमार सोनी लंबे समय से पत्रकारिता में हैंं। उनके बारे में कुछ कहना हो तो यह कहा जा सकता है कि वे इस दौर में भी पत्रकारिता को जनसेवा मानते हैं और उसके लिये अपना जीवन खपा रहे हैं। वरना व्यावसायिक पत्रकारिता के दौर में पत्रकारों ने समय के हिसाब से अपने को बदल लिया है। किन्तु राजकुमार सोनी ने पत्रकारिता के जरिये समय को ही चुनौती दे डाली है, ऐसे में उनके खिलाफ कोई भी वातावरण बन सकता है। चिन्ता नहीं करना चाहिये क्योंकि सच और झूठ एकसाथ नहीं रह सकते हैं। सच के साथ खड़े होने वालों के लिये कठिन राहें होती हैं किन्तु मंजिल उनका इस्तकबाल करती है। मुझे एक बात कहना है दोनों अपने झगड़े भूलकर बस्तर में हो रही निर्दोष आदिवासियों की मौतें, उनके घरों को जलाने की घटनाएं और बस्तर की शांति के लिये सोचें। आप दोनों ही वरिष्ठ पत्रकार हैं और आप दोनों ही सरस्वती के उपासक हैं। मां सरस्वती के पुत्रों को शब्दों और वाणी की पूजा करना चाहिये। मोनु जैसे लोगों के विचारों को तूल नहीं देना चाहिये। विश्वास कीजिये आप दोनों ही पत्रकारों की सकारात्मक सोच समाज का कई मायनों में भला कर सकती है। तहलका की पत्रकारिता समाज को दिशा देने के लिये है, भ्रष्ट लोगों के विरुद्ध आंदोलन खड़ा करने के लिये है। जरा सोचिये कब तक हम अपने इगो की लड़ाई के लिये समाज का नुकसान करते रहेंगे. श्री राजकुमार सोनी सुलझे और दबंग पत्रकार हैं उन्हें इन बातों में फंसाकर हम समाज का ही नुकसान करेंगे। दोनों पत्रकारों के बीच सुलह का रास्ता निकालने का काम हमें करना चाहिये न कि किसी गलत विचारों को प्रचारित करके समय और समाज का नुकसान करना चाहिये। एक बार फिर जरा सोचिये……

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  • DEVWRAT BHAGAT says:

    Rajkumar soni.. chhattisgarh me apni bebaak patrakarita me ek jana-mana naam hai..
    aur aise bebuniyaad aarop lagakar unki chabi kharab karne ki ye saajish hai… paare ji krapya apni dushmani nikalne ke liye is tarah ka rasta akhtiyaar na kare……

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  • DEVWRAT BHAGAT says:

    Rajkumar soni …Chhattisgarh me apni bebaak patrakarita ke liye ek jana- mana naam hai….aur is tahah se bebuniyaad aarop lagakar unki chabi ko dhunil karne ka prayas kiya ja raha hai…..paare ji kripya apni jyaati dushmani nikalne ke liye aisa rasta akhtiyaar na kare…..

    Reply
  • DEVWRAT BHAGAT says:

    Rajkumar soni …Chhattisgarh me apni bebaak patrakarita ke liye ek jana- mana naam hai….aur is tahah se bebuniyaad aarop lagakar unki chabi ko dhunil karne ka prayas kiya ja raha hai…..paare ji kripya apni jyaati dushmani nikalne ke liye aisa rasta akhtiyaar na kare…..

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  • saaket saah says:

    Hum Rajkumar ji soni ji se parichit hai, un par aisa arop lagna, ek sochi samjhi sazish hai, sach samne aane par pata chal jayega ki paare ji ke aropo me kitni sacchai hai…………!

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  • hardik rathor says:

    hum soni sir ko kafi lambe smay se jante, ye mamla kya hai hume nahi pata par itna viswash hai ki soni sir aisa nahi kar sakte, mujhe yaad hai wo din jab hum patrkarita me naye naye aaye the, us smay we hame patrakarita k sath ek ache insaan banne k gun sikhate the, or aise me ye iljam mere khayal se ye sab galat hai,

    Reply
  • संजीव तिवारी says:

    छत्तीमसगढ़ की मीडिया से जुड़े लोगों की अंदरूनी खबर प्रकाशित करने के लिए धन्यवाद। पुलिस के मामला दर्ज कर लेने से कोई अपराधी सिद्ध नहीं हो जाता। उपर दी गई जानकारी के अनुसार दोनों पत्रकारों पर अलग-अलग कानूनों के तहत् मामला दर्ज किया गया है जो न्यायालय पहुचने और अभियोजन की कार्यवाही तक दम ना तोड़े तब फैसला आयेगा। उसके पहले कयासों का ही प्रयास है।
    सूचना क्रांति की व्यापकता और इससे जुडे कानून की अल्पज्ञता से भविष्य में ऐसे ढेरों मामले सामने आयेंगें। मोबाईल एसएमएस के साथ ही हिन्दी ब्लॉगों की सुलभता नें इसकी संभावनाओं को और भी बढ़ा दिया है। विमर्श एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान के बदले और मुखर-स्वतंत्र अभिव्यक्ति के बहाने भड़ास निकालने का यह एक मुख्य साधन बन गया है।
    ब्लॉग पोस्टों से उपजी सनसनी और टिप्पणियों में बहस के बजाए, होते जूतम-पैजार को पढ़कर पोस्ट पर कोई धारणा बनाना अब मुश्किल हो चला है। खासकर तब जब, प्रायोजित छद्मनामी टिप्पणीकारों की फौज टिपिया-टिपिया कर मौज लेते हैं और प्रायोजित प्रतिटिप्पणीकार आंखें तरेरते नजर आते हैं 🙂 । सनद रहे कि टिप्पणियॉं सायबर ला से बाहर नहीं हैं, कानून के दायरे में आने वाले छद्मनामी तक, यदि इन्वेस्टीगेशन करने वाली सरकारी एजेंसी चाहे तो पहुंच पाना कोई बड़ी बात नहीं है।
    हम राजकुमार जी से परिचित हैं, तहलका में उनके तहलका मचा देने वाले रपट छप रहे हैं, किसानो की हत्या के आकड़ों व अनुत्तपरित प्रश्नों के तहलका में छपने से, हो सकता है कि उनपर राजनैतिक दबाव बनाया जा रहा हो और उनके तथाकथित ‘पर’ कतरने के दृष्य-अदृष्य प्रयास किए जा रहे होंगें। पिछले दिनों उनके तीखे तेवरों वाली ‘कमीनों से लड़ाई’ नें भी उनके विरोधी पैदा किए होंगें। … जो भी हो … व्यक्तिगत रूप से मैं राजकुमार सोनी जी से परिचित हूं, वे सहृदयी व तेवर वाले पत्रकार हैं। उनके सीनियर रहे पत्रकार अम्बरीश जी नें भी अपने एक पोस्ट में उनके तेवर के संबंध में लिखा है। मुझे लगता है कि, कहीं कोई गलतफहमी हुई है और मुझे विश्वास है कि ये गलतफहमी भी शीध्र ही दूर होगी।

    आरंभ (aarambha.blogspot.com)

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  • संजीव तिवारी says:

    छत्तीमसगढ़ की मीडिया से जुड़े लोगों की अंदरूनी खबर प्रकाशित करने के लिए धन्यवाद। पुलिस के मामला दर्ज कर लेने से कोई अपराधी सिद्ध नहीं हो जाता। उपर दी गई जानकारी के अनुसार दोनों पत्रकारों पर अलग-अलग कानूनों के तहत् मामला दर्ज किया गया है जो न्यायालय पहुचने और अभियोजन की कार्यवाही तक दम ना तोड़े तब फैसला आयेगा। उसके पहले कयासों का ही प्रयास है।
    सूचना क्रांति की व्यापकता और इससे जुडे कानून की अल्पज्ञता से भविष्य में ऐसे ढेरों मामले सामने आयेंगें। मोबाईल एसएमएस के साथ ही हिन्दी ब्लॉगों की सुलभता नें इसकी संभावनाओं को और भी बढ़ा दिया है। विमर्श एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान के बदले और मुखर-स्वतंत्र अभिव्यक्ति के बहाने भड़ास निकालने का यह एक मुख्य साधन बन गया है।
    ब्लॉग पोस्टों से उपजी सनसनी और टिप्पणियों में बहस के बजाए, होते जूतम-पैजार को पढ़कर पोस्ट पर कोई धारणा बनाना अब मुश्किल हो चला है। खासकर तब जब, प्रायोजित छद्मनामी टिप्पणीकारों की फौज टिपिया-टिपिया कर मौज लेते हैं और प्रायोजित प्रतिटिप्पणीकार आंखें तरेरते नजर आते हैं 🙂 । सनद रहे कि टिप्पणियॉं सायबर ला से बाहर नहीं हैं, कानून के दायरे में आने वाले छद्मनामी तक, यदि इन्वेस्टीगेशन करने वाली सरकारी एजेंसी चाहे तो पहुंच पाना कोई बड़ी बात नहीं है।
    हम राजकुमार जी से परिचित हैं, तहलका में उनके तहलका मचा देने वाले रपट छप रहे हैं, किसानो की हत्या के आकड़ों व अनुत्तपरित प्रश्नों के तहलका में छपने से, हो सकता है कि उनपर राजनैतिक दबाव बनाया जा रहा हो और उनके तथाकथित ‘पर’ कतरने के दृष्य-अदृष्य प्रयास किए जा रहे होंगें। पिछले दिनों उनके तीखे तेवरों वाली ‘कमीनों से लड़ाई’ नें भी उनके विरोधी पैदा किए होंगें। … जो भी हो … व्यक्तिगत रूप से मैं राजकुमार सोनी जी से परिचित हूं, वे सहृदयी व तेवर वाले पत्रकार हैं। उनके सीनियर रहे पत्रकार अम्बरीश जी नें भी अपने एक पोस्ट में उनके तेवर के संबंध में लिखा है। मुझे लगता है कि, कहीं कोई गलतफहमी हुई है और मुझे विश्वास है कि ये गलतफहमी भी शीध्र ही दूर होगी।

    आरंभ (aarambha.blogspot.com)

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  • यैलो says:

    छत्तीसगढिया सबसे बढ़िया। खत्म करो यार। जो हुआ सो हुआ भूल जाइये, नई शुरुआत कीजिये। प्रेस क्लब वाले वरिष्ठ पत्रकारों को बीच में पड़कर इस मामले को यहां खत्म कर देना चाहिये। छत्तीसगढ़ के पत्रकारों में आपस में इतना प्यार रहा है, ये सिलसिला टूटना नहीं चाहिये। छत्तीसगढिया सबसे बढ़िया।

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  • पहली नज़र मे ही इन आरोपों से साजिस की भनक लग जाती है. मैं नही जनता की राजकुमार सोनी सर और प्रफुल्ल पारे जी का इतिहास क्या रहा है.. हाँ पर मैं राजकुमार सोनी सर को सालों से जानता हूँ और चाहे कोई जो कहे मैं एक बात दावे से कह सकता हूँ की ये सारे इल्ज़ाम कोरे हैं अगर इस आरोप- प्रत्यारोप के पीछे के कारण केवल कोई निजी दुश्मनी है … तो मेरा प्रफुल्ल पारे जी से ये आग्रह है की वो अपने आरोपों के बारे मे फिर से एक बार विचार करें..क्योंकि की सच्चाई से तो वो भी अवगत हैं…. अच्छे लोगों की वाकई ही कमी है और अच्छे पत्रकारों की तो और भी कमी… अगर आप लोग ही इस तरह के काम करेंगे तो फिर तो बेड़ा गर्क ही समझना चाहिए …..
    मैं श्रीमान संजीव तिवारी जी की टिप्पणी से १०० प्रतिशत सहमत हूँ की प्रोद्योगिकी क्रांति की दौर में ब्लॉग और अग्यात टिप्पणीकारों की फौज खड़ी हो चुकी है, जहाँ ये पता लगाना मुश्किल है की सच्चाई किसके करीब है, बरह-हाल मेरी टिप्पणी सायबर ला या किसी इन्वेस्टिगेशन के भीतर आती भी है तो मुझे कोई शिकायत नही है…. ये भी सच है की सच्चाई का फ़ैसला तो न्याय के मंदिर मे ही होना है.. हमारे तर्कों का मकसद तो बस इतना है की हम न्याय पक्ष को अपनी आवाज़ देकर थोड़ा समर्थन दे सकें. सोनी सर की लेखनी ने कई बार अपराधियों को शर्मसार किया है…और आज वे किसी के आरोपों का निशाना बने हुए हैं ..सोनी सर की पिछली कई खबरों ने उन्हे एक तेज़ तरर्र पत्रकार साबित किया है और ऐसे मौके पर अगर उन पर आरोप मढ़े जाते हैं तो आश्चर्य की कोई बात नही है.. हाँ दुख की बात अवश्य है क्योंकि ऐसे आरोपों से शायद उनकी साख पर उतना असर ना भी हो पर…एक अच्छे पत्रकार के समय की बर्बादी तो पक्की है…
    यहाँ पर एक छोटी सी बात और लिखना चाहूँगा श्रीमान (मोनू) की टिप्पणियाँ समझ से परे हैं ….हो सकता है इसमे मेरी समझ की ही ग़लती हो… हम सब को अपनी बात रखने का अधिकार है पर.. अगर वे अपनी बात कुछ सौम्य शब्दों के साथ सीधे -सीधे कहते तो उनकी बात शायद जल्दी समझ मे आती.
    एक छोटी सी कहावत लिखना यहाँ ज़रूरी समझता हूँ ली जो व्यक्ति दूसरों के लिए गड्ढे खोदते हैं वे खुद अंत में उसमे गिरते हैं… इसलिए ज़रा संभाल कर ….. अपने रसुख का ईस्तमाल अगर आप अच्छे लोगों को बदनाम करने मे करेंगे तो अंत मे कहीं आपके लिए ही ये बुरा परिणाम सिद्ध ना हो.

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