: विनायक सेन राजद्रोह के दोषी करार : अजीब दौर है. लुटेरों पर कोई अंकुश नहीं. छापे के नाटक हो रहे हैं. अरबों-खरबों को गड़प कर जा रहे हैं नेता. किसी को कोई दंड या सजा नहीं. सब मजे और मौज में हैं. लेकिन गरीबों के लिए लड़ने वाले विनायक सेन जेल भेजे जा चुके हैं. उन्हें भारत की एक अदालत ने राजद्रोह का दोषी माना है. डा. विनायक सेन एक साल से जमानत पर रिहा थे. आज फैसला होने के साथ ही उन्हें नारायण सान्याल व पीजूष गुहा के साथ जेल में दाखिल कर दिया गया. कोर्ट के अंदर उनकी पत्नी व पीयूसीएल की कार्यकर्ता डा. इलिना सेन उनकी दोनों बेटी व उनके भाई मौजूद थे.
फैसले के बाद जब डा. सेन को पुलिस ने गाड़ी में बिठाया तो उनका पूरा परिवार बिलख-बिलख कर रो रहा था. इलिना डा. सेन की पत्नी इलिना सेन कह रहीं थीं कि उन्हें अब भी देश के कानून पर भरोसा है. उनके पति ने गरीबों के मानव अधिकार के लिए संघर्ष किया है. यह लड़ाई उनकी अकेले की नहीं है बल्कि मानवों के अधिकारों के हनन करने वालों के खिलाफ है.
उल्लेखनीय है कि राजद्रोह मुकदमे में विनायक सेन को द्वितीय अपर सत्र न्ययायाधीश बीपी वर्मा ने दोषी करार दिया है. शुक्रवार को सेशन कोर्ट ने डा. सेन के साथ ही नारायण सान्याल व पीजूष गुहा को भी सजा सुनाई. कोर्ट की नजर में तीनों ने राज्य के खिलाफ षडयंत्र किया था. आईपीसी की धारा 124 ए के तहत राज्य के खिलाफ षडयंत्र करने का आरोप उन पर लगा था. छत्तीसगढ़ जन सुरक्षा अधिनियम की धारा 1, 2, 3 व 5 के तहत डा. सेन को दोषी करार दिया गया. राज्य के खिलाफ गतिविधियों के तहत धारा 39-2 के तहत भी उन्हें दोषी करार दिया गया. देखना है कि देश के बुद्धिजीवी, पत्रकार और समाजसेवी डा. विनायक सेन को जेल भेज जाने के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं.












KKC
December 25, 2010 at 4:03 am
Koi kadam nahin utha sakte.
vartul
December 25, 2010 at 11:04 am
lutere mouj jaroor kar rahe hain magar vinayak sen koie janneta nahi hain. hamen adalat ka samman karna chahiye. vinayak sen videshi agent hain desh aur loktantra ke khilaf kam kar rahe hain. unhen jel men hi hona chahiye. kirpya unhen itna mahan mat banaye ki nobel puraskar dilane ka pucl ka shadyantra safal ho jay.
John D. Horo
December 30, 2010 at 10:12 am
कथित आदरणीय न्यायलय के पदासीन न्यायधीश का यह “अन्याय” शायद किसी व्यक्तिगत व अन्य विचारधारा से ज्यादा प्रभावित लगता है. विनायकजी पर राजद्रोह का आरोप असंगत, तर्कहीन और विवेकहीन है. भारतवर्ष जैसै एक विशाल जनतांत्रिक राज्य को उखाड़ फेंकना कोई मामूली बात नहीं है. यहाँ राजनीतिक अराजकता और अव्यवस्था अवश्य है लेकिन भई, भारतीय जनता की जाग्रता पर भी तो कुछ भरोसा कीजिए !!!!!!!!!!!!!!!!!
John D. Horo
December 30, 2010 at 11:52 am
कथित आदरणीय न्यायलय के पदासीन न्यायधीश का यह “अन्याय” शायद किसी व्यक्तिगत व अन्य विचारधारा से ज्यादा प्रभावित लगता है. विनायकजी पर राजद्रोह का आरोप असंगत, तर्कहीन और विवेकहीन है. भारतवर्ष जैसै एक विशाल जनतांत्रिक राज्य को उखाड़ फेंकना कोई मामूली बात नहीं है. यहाँ राजनीतिक अराजकता और अव्यवस्था अवश्य है लेकिन भई, भारतीय जनता की जाग्रता पर भी तो कुछ भरोसा कीजिए !!!!!!!!!!!!!!!!!