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संपादक बोला- निकल निकल, केबिन से बाहर निकल…

यह 26 august २०१० की घटना है. पत्रकार अड़ा तो संपादक की बन्द हो गयी बोलती. संपादकी का गुरूर तो देखिए– संवादाता को फर्जी आरोप लगा और घूसखोर बताकर अखबार से निकाला. लखनऊ के अमर उजाला के संपादक अब नए पैंतरे पर चलकर अखबार चलाना चाहते है. उनका पैंतरा यह है कि जो संवाददाता ज्यादा वसूली करेगा उसको सीतापुर जनपद का जिला संवादाता बनाया जायेगा. बात थोड़ी पुरानी है लेकिन सच है.

<p style="text-align: justify;">यह 26 august २०१० की घटना है. पत्रकार अड़ा तो संपादक की बन्द हो गयी बोलती. संपादकी का गुरूर तो देखिए-- संवादाता को फर्जी आरोप लगा और घूसखोर बताकर अखबार से निकाला. लखनऊ के अमर उजाला के संपादक अब नए पैंतरे पर चलकर अखबार चलाना चाहते है. उनका पैंतरा यह है कि जो संवाददाता ज्यादा वसूली करेगा उसको सीतापुर जनपद का जिला संवादाता बनाया जायेगा. बात थोड़ी पुरानी है लेकिन सच है.</p> <p>

यह 26 august २०१० की घटना है. पत्रकार अड़ा तो संपादक की बन्द हो गयी बोलती. संपादकी का गुरूर तो देखिए– संवादाता को फर्जी आरोप लगा और घूसखोर बताकर अखबार से निकाला. लखनऊ के अमर उजाला के संपादक अब नए पैंतरे पर चलकर अखबार चलाना चाहते है. उनका पैंतरा यह है कि जो संवाददाता ज्यादा वसूली करेगा उसको सीतापुर जनपद का जिला संवादाता बनाया जायेगा. बात थोड़ी पुरानी है लेकिन सच है.

मामला यह है कि प्रशासन और विकास विभाग में अपनी धमक जमाने वाले अमर उजाला सीतापुर कार्यालय के पत्रकार निर्मल पाण्डेय को संपादक ने अचानक लखनऊ तलब कर लिया था. लखनऊ पहुँचने पर एक तो निर्मल पाण्डेय से संपादक काफी देर तक सीधे मुखातिब नहीं हुए, जिससे उन्हें वेटिंग रूम में २ घन्टे सम्पादक से मिलने का इंतजार भी करना पड़ा. फिर भी संपादक द्वारा नजरंदाज किये जाने पर निर्मल पाण्डेय ने उत्साह दिखा कर जबरन उनके केबिन में प्रवेश किया. फिर शुरू हुई गरमा गरम बातचीत. मुख्य अंश निम्न हैं. कृपया धयान से पढ़ें……..

साधारण पत्रकार- सर मै निर्मल पाण्डेय, सीतापुर से.
यशस्वी संपादक- हां, तो, बताओ.
साधारण पत्रकार- आपने बुलाया था.
यशस्वी संपादक- नहीं तो, हमने तुम्हे काम करने से मना कर दिया है, तुम अपने घर जाओ.
साधारण पत्रकार- क्यों, सर क्यों.
यशस्वी संपादक- हाँ भाई हाँ.
साधारण पत्रकार – सर ऐसा क्यों, मैंने क्या गलती की है.
यशस्वी संपादक- एक गलती हो तो बताऊँ, तुमने पचासों गलतियाँ की है.
साधारण पत्रकार- please सर एक गलती मेरी मुझे बता दीजिये.
यशस्वी संपादक- तुमने diet से ३००० रूपये एक बाबू से लड़ झगड़ कर लिए हैं, उसकी मेरी पास tape रिकॉर्डिंग है, सुनाऊं तुमको, यदि सुना दिया तो मुकदमा दर्ज करा कर यहीं से तुम्हें जेल भिजवाऊंगा.
साधारण पत्रकार- सर ऐसा हो नहीं सकता. diet मेरी बीट भी नहीं है, और रही बात जेल भिजवाने की तो आप मुझे वो tape सुनवा दीजिये, जिससे मैं जान तो सकूं कि मेरे खिलाफ किसकी साजिश है, यदि tape रेकॉर्डिंग में मेरी आवाज है तो आप मुझे जेल भिजवा दें, लेकिन पहले उसे सुनवायें.
यशस्वी संपादक- तुझे और कुछ बोलना हो तो बोल, यहाँ से जा.
साधारण पत्रकार- क्यों सर, कैसे जाऊं, आपने इतना बड़ा आरोप लगा दिया, इसको सिद्ध तो करें, मेरे बारे में सीतापुर अमर उजाला कार्यालय में और जिले के डीएम, cdo से लेकर bdo तक पता करिए, यदि कहीं ऐसा आरोप सामने आ जाये तो मुझे जो सजा देंगे वो मुझे मंजूर है. सर आप मुझे कितने रूपये तनखा में देते हैं, मात्र ३२५० रुपये, उसमें प्रतिदिन सुबह १० बजे से रात १२ बजे तक अखबार का काम करता हूँ. इस कम तनखा में मैं अपने परिवार को कैसे चलाता हूं इसे मैं खुद या सीतापुर अमर उजाला कार्यालय के लोग जानते हैं. आप मेरे घर का किसी भी समय निरीक्षण करा लीजिये. कहीं आटा मिलेगा तो चावल नहीं, कही सब्जी होगी तो मसाला नहीं. 
यशस्वी संपादक- तो क्या जिलों में सब गाँधी जी बसते हैं. सीतापुर में जो सबसे ज्यादा वसूली करता होगा उसको मैं अपना बयूरो चीफ बनाऊंगा, बताओ कौन है!  
साधारण पत्रकार- गाँधी जी नहीं सर, फिर भी जैसा आप यहाँ सोच रहे हैं ऐसा नहीं है. अगर ऐसा ही होता तो लखनऊ edition में सीतापुर जिले में अमर उजाला अखबार ख़बरों और सरकुलेशन के मामले में नंबर वन नहीं होता. और खबरें खुद बताने लगती हैं कि पैसे की वसूली हो रही है या नहीं. रही बात जो सबसे ज्यादा वसूली करता है, उसको आप अमर उजाला सीतापुर का ब्यूरो चीफ बनायेंगे, तो यह आपका विषय है. आप सीतापुर जाइये, ऐसा व्यक्ति खुद खोजिये.
यशस्वी संपादक- तू बोलता बहुत है, मेरे केबिन से बाहर निकल जा.
साधारण पत्रकार- क्यों निकल जाऊं, पूरी बात कह कर जाऊंगा, उचित मंच पर बात कर रहा हूँ, किसी रिक्शे वाले से नहीं. केबिन से बाहर तभी निकलूंगा जब आप मुझे tape सुनवायेंगे. क्यूंकि आपने मेरे पर गंभीर आरोप लगाया है. आप संपादक हैं, आप अमर उजाला के हित में काम करते हैं, पर जैसा व्यवहार कर रहे हैं व जो बोल रहे हैं, उसके चलते आप के रहने तक मैं खुद अमर उजाला में काम नहीं करूँगा.
यशस्वी संपादक- (काफी नाराजगी प्रकट करते हुए) निकल निकल, केबिन से बाहर निकल.
साधारण पत्रकार- जा रहा हूं, नमस्ते संपादक जी.

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0 Comments

  1. Madhwendra Pandey

    February 13, 2011 at 10:23 am

    Wo reporter utne bade badtamij sampadak ko bina joote lagaye uske kebin se bahar ho gaya bechara bhala manush tha.

  2. pawan passi

    February 13, 2011 at 10:53 am

    bhai sahab ye saab log aise hi hain
    bahar kuch ander kuch
    adarsh seminar main baad main sab dukandari
    acha kiya apne

  3. s kumar

    February 13, 2011 at 11:12 am

    ye to bilkul chirkut sampaadak hei bhai… aise logon ke sath kya kaam karna.. nirmal bhai aapne teek hi kiya…

  4. kundan

    February 13, 2011 at 12:09 pm

    पंचोली जी के यश को और पत्रकार भाई के अोज को सलाम।
    इंदु शेखर पंचोली जी का एक और कारनामा। लखनऊ अमर उजाला यूनिट को चेंज चाहिए। प्लीज…।

  5. udaybhan pandey

    February 13, 2011 at 1:34 pm

    is sampadak ko to amar ujala se bahar khaded dena chahiye . ese hi sampadak reporteron se vasuli karavate hai yadi koi reporter kadak hai to us per gambhir arop lagakar use bahar ka rasta dikha dete hai . ise logon ke karan hi aaj naye reportaron ke sath shosan ho raha hai . vaise nirmal ji apne is chirkut sampadak ko sahi aur muhtod javab diya hai . is baat ko vah hamesha yaad rakhega .

  6. puja tiwari

    February 13, 2011 at 1:36 pm

    ek baat aur batau… tamam logo ko pata bhi hogi. pancholi ji jab bhaskar mein the, tab chief reporter se mahina bandna chahtey the. inkar sunney key bad aisey tais mein aa gaiye ki chief reporter se maa-bahan karney lagey. eskey bad us chief reporter ney pancholi ji ko chember key aandar chhappl se pita tha. us chief reporter ka naam sanjay tyagi tha, jo i aaj-kal aaj samaj ki sampadak hain

  7. Badnaam Patrkar

    February 13, 2011 at 2:43 pm

    Nirmal ji,
    aap ki galti hai.. aap aadmi pahchan nahi pate..
    inko to kuch kahna bekar hai..
    aapko kya kahu…

  8. bagoda

    February 13, 2011 at 5:23 pm

    पंचोली जी के बारे में ऐसा लिखने वाले उन्हें बिलकुल नहीं जानते है वो अगर किसी से तू भी बोलते है तो उसमे उनका प्यार छिपा होता है.उनमे जो बात है किसी संपादक में नहीं वो आज के संपादको की तरह चेले नहीं पालते खुद काम करते है और काम करने वालो को ही पसंद करते है……………………..भगोड़ा.:):):):):):)

  9. aapkiawaaj

    February 14, 2011 at 5:18 am

    NIRAMAL JI YE SAMPADAK NAHI DALAL HAI……………………APNE THEEK KIYA

    MERI RAI THI KI APKO IS DALAL KO JUTA LAGAKAR ISKE CABIN S ANA CHAHIYE

    YE SAMPADAK, PATRKARITA KE NAM PAR KALANK HAI

    AGAR MAIN AMAR UJALA KA MALIK BAN JAO TO AJ HI ISE APNA DARBARI BANA DU….

    NIRMAL JI AP THEEK HAI……….

  10. aapkiawaaj

    February 14, 2011 at 5:20 am

    NIRAMAL JI YE SAMPADAK NAHI DALAL HAI

    APNE BILKUKL THEEK KIYA

    VAISE APKO ISKE CABIN SE JUTA LAGA KAR VAPAS ANA CHAHIYE THA

    AP BILKUL THEEK HAI NIRMAL JI
    YE DALAL SAMPADAK PATRKARITA KE NAM PAR KALANK HAI

  11. banshi

    February 14, 2011 at 6:43 pm

    is sampadak ki band baja do

  12. hritik roshan

    February 14, 2011 at 11:20 am

    ye bahut hi chirkut harami sampadak hai.office ki ladkio se kaam vasna ki icchhhhhha rakhta hai. isko jitne joote mare jaye utne kam hai.hamko lagta hai ki rajul ji ko is sampadak ki karastania nahi najar aaa rahi hai.iisse unki saakh ko thes pahuch rahi hai.

  13. anirath

    February 15, 2011 at 12:57 pm

    aise sampakad ki mar leni chahiye…..

  14. Anirudh Mahato

    February 21, 2011 at 10:42 pm

    editer ki bhasha thik nahi hai. wah samajik wa byoharik byakti nahi lagta. bhainsh ke aagey bin bazana hai. reporter hamesha logon ki galltion ko uzagar karta hai. galti karne waley akshar pahunch wa paise waley hote hai. ishliye patrakar ko kisi pe viswas wa aash nahi karna chahiye.

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