सहारा के फर्जीवाड़े के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सेबी

पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) सहारा डिबेंचर मामले में उच्चतम न्यायालय पहुंच गया है। नियामक ने उच्चतम न्यायालय में हस्तक्षेप याचिका (कैविएट) दायर की है। इसमें उसने न्यायालय से आग्रह किया है कि सहारा समूह की दो कंपनियों के खिलाफ चल रहे मामले में किसी भी याचिका पर फैसला उसके नोटिस के बगैर नहीं दिया जाना चाहिए। सेबी के वकील ने कहा कि इस मामले पर एक तरफा फैसले को रोकने के लिए उन्होंने यह याचिका दायर की है।

इससे पहले सहारा ने बताया कि उसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक फैसले से राहत के लिए अदालत में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। समूह ने कहा, ‘हमने 7 अप्रैल को दिये गए फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। हम कानून का पालन करते हुए कोई भी जमा नहीं स्वीकार कर रहे हैं।’

सहारा का यह बयान सेबी के उस सार्वजनिक नोटिस के बाद आया है, जिसमें नियामक ने स्थगनादेश खारिज होने के बाद सहारा की कंपनियों के रकम जुटाने पर पाबंदी लगाने की घोषणा की। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ  पीठ ने 7 अप्रैल को सेबी द्वारा दोनों कंपनियों के रकम जुटाने पर लगाए गए प्रतिबंध पर स्थगनादेश को खारिज कर दिया था। पिछले तीन महीनों में यह मामला दूसरी बार उच्चतम न्यायालय के समक्ष आया है। जनवरी में मुख्य न्यायाधीश एस एच कपाडिय़ा की अध्यक्षता वाले पीठ ने सेबी को अनुमति दी थी कि वह समूह की दोनों कंपनियों से रकम जुटाने संबंधी सभी जानकारी मांग सकता है। हालांकि अभी तक इन याचिकाओं की सुनवाई के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है। साभार :  बिजनेस स्‍टैंडर्ड

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  • पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) सहारा डिबेंचर मामले में उच्चतम न्यायालय पहुंच गया है। नियामक ने उच्चतम न्यायालय में हस्तक्षेप याचिका (कैविएट) दायर की है। इसमें उसने न्यायालय से आग्रह किया है कि सहारा समूह की दो कंपनियों के खिलाफ चल रहे मामले में किसी भी याचिका पर फैसला उसके नोटिस के बगैर नहीं दिया जाना चाहिए। सेबी के वकील ने कहा कि इस मामले पर एक तरफा फैसले को रोकने के लिए उन्होंने यह याचिका दायर की है।

    इससे पहले सहारा ने बताया कि उसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक फैसले से राहत के लिए अदालत में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। समूह ने कहा, ‘हमने 7 अप्रैल को दिये गए फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। हम कानून का पालन करते हुए कोई भी जमा नहीं स्वीकार कर रहे हैं।’

    सहारा का यह बयान सेबी के उस सार्वजनिक नोटिस के बाद आया है, जिसमें नियामक ने स्थगनादेश खारिज होने के बाद सहारा की कंपनियों के रकम जुटाने पर पाबंदी लगाने की घोषणा की। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ पीठ ने 7 अप्रैल को सेबी द्वारा दोनों कंपनियों के रकम जुटाने पर लगाए गए प्रतिबंध पर स्थगनादेश को खारिज कर दिया था। पिछले तीन महीनों में यह मामला दूसरी बार उच्चतम न्यायालय के समक्ष आया है। जनवरी में मुख्य न्यायाधीश एस एच कपाडिय़ा की अध्यक्षता वाले पीठ ने सेबी को अनुमति दी थी कि वह समूह की दोनों कंपनियों से रकम जुटाने संबंधी सभी जानकारी मांग सकता है। हालांकि अभी तक इन याचिकाओं की सुनवाई के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है। साभार : बिजनेस स्‍टैंडर्ड

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