सहारा मीडिया के साथ काम कर रहे कर्मचारियों को एक बार फिर से उम्मीद की नई किरण नज़र आ रही है। चर्चाएं कुछ यूं है कि जिसका इंतज़ार पिछले तीन सालों से है वो शायद इस बार हो जाएगा। जी हां तीन साल से सहारा में कर्मचारियों का वेतन नहीं बढ़ा है। 2009 में आई आर्थिक मंदी का बहाना लेकर जो वेतन बढ़ा था उसे कंपनी ने वापस ले लिया था, जिसके बाद से लगातर सहारा के कर्मचारी मन मसोस कर काम कर रहे हैं।
पिछले दिनों जिस तरीके से सहारा में उथल-पुथल का माहौल देखने को मिला है उसे देखते हुए एक बार फिर से ये उम्मीद डूब गई थी, लेकिन जैसे ही सहारा के नोएडा स्थित दफ्तर के कर्मचारियों को पता चला कि मुंबई में वेतन बढ़ा दिया गया है उसके बाद से कर्मचारियों के बीच उम्मीद की किरण एक बार फिर से देखने को मिल रही है। हालांकि उपेंद्र राय ने जाते-जाते वेतन बढ़ाने की प्रक्रिया तो शुरू करा दी थी लेकिन हाल ही में कमान संभालने वाले सीईओ स्वतंत्र मिश्रा ने आते ही सबसे पहले वेतन बढ़ाने की प्रक्रिया पर ही ग्रहण लगा दिया था, इस बात का हवाला देकर कि कहीं उपेंद्र राय ने कुछ लोगों के साथ अन्याय ना किया हो.
यह सोच अच्छी थी क्योंकि वाकई में कई लोगों के साथ अन्याय हुआ था। किसी को सोना तो किसी ज़ंग लगा हुआ लोहा देने वाली स्थिति बना दी गई थी, लेकिन अब सुनने में आया है कि कंपनी के चेयरमैन ने स्वतंत्र मिश्रा से सवाल किया है कि आखिर नोएडा में वेतन क्यों नहीं बढ़ाया गया तो स्वतंत्र मिश्रा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के दिन इस बात की घोषणा कर दी जाएगी। काबिले गौर बात ये है कि स्वतंत्र मिश्र का जन्मदिन भी 15 अगस्त को ही है इसलिए कर्मचारियों की उम्मीद ज्यादा बढ़ गई हैं। चर्चा इस तरह की भी है कि बढ़ा हुआ वेतन सितंबर महीने की पहली तारिख को आने वाले वेतन में लगकर मिलेगा वो भी दो महीने के एरियर के साथ, अब देखते हैं क्या होता है 15 अगस्त के दिन झंडारोहण के दौरान।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.












mini sharma
August 13, 2011 at 8:09 am
Yeh too har baar hota hai….. per dekhte hain parso 15 auguest ko kya hota hai…………. mishra jee kya karte hain………….
Praveen Kumar
August 13, 2011 at 7:32 pm
Good News………
pankaj piyush
September 11, 2011 at 9:27 pm
jishne bhi jankaree dee hai use sahara ke baree mai nahee malum. khoon chushne ke mamle mai yah pariwar. dene ke naam par baiyan hai. baneya padata hai to kankh-kankh kar taki hawa hee nekle.jun mai. maharaj saharasri ke janmdivash par pagar badhne kii sugbugahat huii thee, abhi tal hath me damrii nahee laga.ye sahara hai bhiya ek kahawat in par sateek baithee ha. “jaat mara tab janiye jab tervii hoy jay” jaat bhai maf karige
kumarkalpit
October 13, 2011 at 8:33 am
badee pagar kaya abheetak bonas bhee nahee mila hai.:):)