हरेराम प्रभात खबर एवं मुकेश कशिश न्‍यूज से जुड़े

दैनिक भास्‍कर, जयपुर से हरेराम ठाकुर ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सीनियर सब एडिटर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी प्रभात खबर, भागलपुर के साथ शुरू की है. इनके ऊपर खबरों के संपादन का जिम्‍मा रहेगा. इन्‍हें चीफ सब एडिटर बनाया गया है. हरेराम ने अपने करियर की शुरुआत दैनिक पूर्वोदय गोहाटी से शुरू की थी. इसके बाद श्रीगंगानगर में भास्‍कर के जुड़ गए. अमर उजाला, चंडीगढ़ को भी अपनी सेवाएं दीं. वहां से इस्‍तीफा देने के बाद भास्‍कर के साथ जुड़ गए थे.

मुकेश कुमार ने अपनी नई पारी कशिश न्‍यूज, रांची के साथ की है. इन्‍हें कॉपी राइटर बनाया गया है. मुकेश ने अपने करियर की शुरुआत मुजफ्फरपुर से एक स्‍थानीय न्‍यूज पेपर के साथ की थी. हिन्‍दुस्‍तान को भी अपनी सेवाएं दीं. इंदौर में एक सांध्‍य दैनिक में भी काम किया. इंदौर से प्रकाशित पत्रिका धर्मयुद्ध के बिहार ब्‍यूरो प्रमुख रहे. इसके अलावा भी कई एजेंसिंयों एवं पत्रपत्रिकाओं को अपनी सेवाएं दीं.

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Comments on “हरेराम प्रभात खबर एवं मुकेश कशिश न्‍यूज से जुड़े

  • mukesh kumar says:

    रांची का कशिश न्यूज चैनल ज्वाइन करना मेरी एक बड़ी भूल….यहाँ अंडे से अभी चूजे भी न निकले कि लोग मुर्गा कढ़ी बनाने की तयारी कर ली है…प्रतिभा के अनुसार न कार्य और न ही प्रतिभा की कोई क़द्र..सब अपने चमचों की फिक्र रखते हैं….जिसे पत्रकारिता की एबीसी का ज्ञान नहीं…वे सामने होकर पत्रकारिता सिखाता है….रियल स्टेट के धंधे के पैसे से चल रहे चैनल का हाल ३६५ दिन से बुरा होने की मुझे आशंका है….बेहतर है कि कोई इस मीडिया हाउस के न्यूज रूम में काम करने के बजाय बाहर गेट कीपर बन जाये….उसे पैसा और सम्मान भी अधिक मिलेगा…

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  • mukesh kumar says:

    करीव 2 माह से शुरु रांची के एक न्यूज़ (कशिश) चैनल के चीफ एडिटर विजय भास्कर और न्यूज हेड गंगेश गुंजन जी ने 22 जनवरी को न्यूज़ रुम में कार्य करने को कहा..इसके पूर्व मीडिया के दो पीढ़ी के साक्षात् दर्शन दिखे इन दोनों ने एक साथ मेरा लिखित व मौखिक साक्षात्कार लिए थे..मेरे पास प्रिंट-वेब मीडिया में रिपोर्टिंग-एडिंग के अनुभव रहे हैं..इसलिए मैंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मैं स्क्रीप्ट राइटर बनना चाहता हूं..तब दोनों ने कहा था कि 2 माह तक 2500 रु.प्रति माह पारिश्रमिक पर बतौर इंटर्न काम करें..उसके बाद मुझे नियमित कर दिया जाएगा..उस समय चैनल सिंग्नल मोड मे भी चालू नही हुआ था..तब से इतनी लगन से काम करना शुरु किया कि सुबह भूखे पेट घर से न्यूज़ रुम पहुंच जाता और जो काम करने को मिलता….उसे बैग में टिफिन होने के बाबजूद देर शाम तक भूखे पेट भी करते रहता..साथी-संगी कहा भी करते कि अरे यार ये इलेक्ट्रॉनिक मीडिया है..जितना ज्यादा काम लगन से करोगे..इस हॉउस से उतनी जल्दी ही फेंकाओगे..
    आज ये बात सच निकली..जब चैनल के न्यूज़ हेड गंगेश गुंजन जी ने मोबाइल पर ही दफ्तर से बाहर निकल जाने को कहा..इसका मूल कारण मात्र यह है कि मैंने उनकी अनुपस्थिति में चीफ एडीटर विजय भास्कर जी को एक आवेदन दिया..जिसमे लिखा था कि 22 मार्च को 2 माह पूरा रहा है..अतएव मेरे कार्यों का मूल्यांकन करने की कृपा की जाय..इसके पूर्व मैं चैनल के प्रबंधक से भी मिला था..इसलिए कि मुझे ऑफर लेटर उन्हीं के हस्ताक्षर-हाथ से प्राप्त हुए थे..जिसे आवश्यक कागजातों के साथ ज्वायनिंग के बाद जमा कर दिया था..
    मुझ पर चैनल हेड का गुस्सा इसी संदर्भ में है कि वे चैनल के बॉस हैं और मैंने उन्हें क्रॉस किया.. यहां पर एक अनुभव यह है कि इलेक्टॉनिक मीडिया में न्यूज़ हेड के सामने चीफ एडीटर की भूमिका काफी उलट है..लेकिन यहां पर एक बात समझ में नहीं आती कि आउटपुट एडीटर रविन्द्र भारती ने आज इंटर्नशीप समाप्त होने के एक दिन बाद ये क्यों कहा कि मैं इंटर्नशीप के लिए सफिसिएंट नहीं हूं..इसलिए इंटर्न का अनुभव पत्र भी नहीं दिया जा सकता..जबकि 21 मार्च तक यही शख्स मेरे कार्य के कशीदे काढ़ते थे..

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  • mukesh kumar says:

    करीव 2 माह से शुरु रांची के एक न्यूज़ (कशिश) चैनल के चीफ एडिटर विजय भास्कर और न्यूज हेड गंगेश गुंजन जी ने 22 जनवरी को न्यूज़ रुम में कार्य करने को कहा..इसके पूर्व मीडिया के दो पीढ़ी के साक्षात् दर्शन दिखे इन दोनों ने एक साथ मेरा लिखित व मौखिक साक्षात्कार लिए थे..मेरे पास प्रिंट-वेब मीडिया में रिपोर्टिंग-एडिंग के अनुभव रहे हैं..इसलिए मैंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मैं स्क्रीप्ट राइटर बनना चाहता हूं..तब दोनों ने कहा था कि 2 माह तक 2500 रु.प्रति माह पारिश्रमिक पर बतौर इंटर्न काम करें..उसके बाद मुझे नियमित कर दिया जाएगा..उस समय चैनल सिंग्नल मोड मे भी चालू नही हुआ था..तब से इतनी लगन से काम करना शुरु किया कि सुबह भूखे पेट घर से न्यूज़ रुम पहुंच जाता और जो काम करने को मिलता….उसे बैग में टिफिन होने के बाबजूद देर शाम तक भूखे पेट भी करते रहता..साथी-संगी कहा भी करते कि अरे यार ये इलेक्ट्रॉनिक मीडिया है..जितना ज्यादा काम लगन से करोगे..इस हॉउस से उतनी जल्दी ही फेंकाओगे..
    आज ये बात सच निकली..जब चैनल के न्यूज़ हेड गंगेश गुंजन जी ने मोबाइल पर ही दफ्तर से बाहर निकल जाने को कहा..इसका मूल कारण मात्र यह है कि मैंने उनकी अनुपस्थिति में चीफ एडीटर विजय भास्कर जी को एक आवेदन दिया..जिसमे लिखा था कि 22 मार्च को 2 माह पूरा रहा है..अतएव मेरे कार्यों का मूल्यांकन करने की कृपा की जाय..इसके पूर्व मैं चैनल के प्रबंधक से भी मिला था..इसलिए कि मुझे ऑफर लेटर उन्हीं के हस्ताक्षर-हाथ से प्राप्त हुए थे..जिसे आवश्यक कागजातों के साथ ज्वायनिंग के बाद जमा कर दिया था..
    मुझ पर चैनल हेड का गुस्सा इसी संदर्भ में है कि वे चैनल के बॉस हैं और मैंने उन्हें क्रॉस किया.. यहां पर एक अनुभव यह है कि इलेक्टॉनिक मीडिया में न्यूज़ हेड के सामने चीफ एडीटर की भूमिका काफी उलट है..लेकिन यहां पर एक बात समझ में नहीं आती कि आउटपुट एडीटर रविन्द्र भारती ने आज इंटर्नशीप समाप्त होने के एक दिन बाद ये क्यों कहा कि मैं इंटर्नशीप के लिए सफिसिएंट नहीं हूं..इसलिए इंटर्न का अनुभव पत्र भी नहीं दिया जा सकता..जबकि 21 मार्च तक यही शख्स मेरे कार्य के कशीदे काढ़ते थे..

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