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हिंदुस्‍तान के खिलाफ श्रम न्‍यायालय में अदालती कार्रवाई शुरू

भागलपुर। अंततः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर बिहार सरकार ने उच्च न्यायालय की सहमति से भागलपुर स्थित श्रम न्यायालय के पीठासीन पदाधिकारी न्यायाधीश के पद पर अशोक कुमार पांडेय को पदस्थापित कर दिया है। लगभग एक वर्ष सात माह तक एकमात्र न्यायाधीश के पद खाली रहने से एक हजार श्रमिक सहित मुंगेर के पांच पत्रकारों के औद्योगिक विवाद के मुकदमों की अदालती कार्रवाई पूरी तरह ठप रही।

भागलपुर। अंततः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर बिहार सरकार ने उच्च न्यायालय की सहमति से भागलपुर स्थित श्रम न्यायालय के पीठासीन पदाधिकारी न्यायाधीश के पद पर अशोक कुमार पांडेय को पदस्थापित कर दिया है। लगभग एक वर्ष सात माह तक एकमात्र न्यायाधीश के पद खाली रहने से एक हजार श्रमिक सहित मुंगेर के पांच पत्रकारों के औद्योगिक विवाद के मुकदमों की अदालती कार्रवाई पूरी तरह ठप रही।

बिहार में श्रम विभाग भाजपा के कोटे में है और श्रम मंत्री भाजपा के कोटे के होते हैं। यह भी सत्य है कि श्रम मंत्री उप मुख्य मंत्री सुशील कुमार मोदी के दिशा-निर्देश पर काम करते हैं। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और दैनिक हिन्दुस्तान के रिश्ते जग-जाहिर हैं। इस बीच, श्रम न्यायालय के पीठासीन पदाधिकारी अशोक कुमार पांडेय के योगदान के बाद श्रम न्यायालय ने 05 अगस्त को मेसर्स हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड, जो अब मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड के नाम से जाना जाता है,  के मामले में अदालती कार्रवाई शुरू कर दी है और मेसर्स हिन्दुस्तान टाइम्स और कामगार श्रीकृष्ण प्रसाद के औद्योगिक विवाद के मामले में सुनवाई की अगली तारीख आगामी 19 अगस्त तय कर दी है।

बिहार के राज्यपाल ने बिहार सरकार के अनुरोध पर 11 अगस्त 2008 को आदेश पारित किया। आदेश में था- ” मेसर्स एच0टी0 मीडिया लिमिटेड के प्रबंधन और कामगार श्रीकृष्ण प्रसाद के बीच इसके साथ संलग्न अनुबंध ‘क’ में उल्लेखित विषय के संबंध में विवाद चल रहा है और राज्यपाल उक्त विवाद को निर्णयार्थ निर्देशित करना वांछनीय समझते हैं। इसलिए औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 10 की उपधारा ( 1-सी0 )  द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार राज्यपाल उक्त विवाद राज्य सरकार द्वारा गठित श्रम न्यायालय भागलपुर को न्याय निर्णयार्थ निर्देशित करते हैं ।”

राज्पपाल ने आगे लिखा है कि ” उक्त अधिनियम की धारा 10 की उप धारा ( 2-ए)  द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार राज्यपाल इस अधिसूचना की प्राप्ति की तिथि से तीन महीनों की कालावधि भी विनिर्दिष्ट करते हैं जिसके भीतर श्रम न्यायालय भागलपुर उक्त विवाद पर अपना परिनिर्णय समर्पित कर देगी।”

अनुबंध ‘क’

”क्या दी हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड, जो अब एचटी मीडिया लिमिटेड के नाम से जाना जाता है,  के संपादक दैनिक हिन्दुस्तान एवं दी हिन्दुस्तान टाइम्स द्वारा श्रीकृष्ण प्रसाद कामगार की सेवा समाप्ति न्यायोचित है? अगर नहीं, तो वे किस सहाय्य के हकदार हैं?”

राज्यपाल के आदेश के बाद बिहार श्रम विभाग के संयुक्त सचिव विश्वनाथ प्रसाद ने कामगार श्रीकृष्ण प्रसाद के औद्योगिक विवाद को भागलपुर श्रम न्यायालय को सुनवाई हेतु सुपुर्द कर दिया। द हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड, नई दिल्ली और मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड, बुद्ध मार्ग, पटना को भी श्रम विभाग ने विधिवत सूचना दे दी है।

श्रम न्यायालय, भागलपुर में एक वर्ष सुनवाई चली थीं कि पीठासीन पदाधिकारी का तबादला वर्ष 2009 के दिसंबर माह में हो गया। दिसंबर, 2009 से जून, 2011 तक न्यायालय का कार्य पूरी तरह ठप रहा। सभी पत्रकरों के औद्योगिक विवाद से जुड़े मुकदमों की अदालती सुनवाई ठप रही। राज्यपाल के आदेश में पत्रकारों के औद्योगिक विवाद के निर्णय के लिए तीन माह की कालावधि तय की गई थी। परन्तु सरकार की इस व्यवस्था की हवा निकल गई। श्रम विभाग के कारनामों के कारण तीन वर्ष बीत गए, कामगार पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद का औद्योगिक विवाद से जुड़ा मुकदमा आज भी लंबित है।

श्रम न्यायालय के सूत्रों ने बताया कि भागलपुर श्रम न्यायालय में बीस-बीस वर्षों से औद्योगिक विवाद के पूरे एक हजार मुकदमों का निबटारा नहीं हुआ है। अनेक मजदूर लड़ते-लड़ते स्वर्ग चले गए हैं, तो अनेक प्रबंधक भी इस अवधि में स्वर्ग सिधार गए हैं। शाबास, बिहार सरकार। बिहार सरकार सुशासन का दावा करती है और बिहार श्रम न्यायालयों में पत्रकार सहित लगभग एक हजार श्रमिकों का मुकदमा न्याय की बाट जोह रहा है। 15 अगस्त, 2011 पर बिहार सरकार को मजदूर हित कार्य (?) के लिए ढेर सारी बधाईयां।

श्रीकृष्ण प्रसाद का मामला क्या है?

बिहार के मुंगेर मुख्यालय में दैनिक हिन्दुस्तान और अंग्रेजी दैनिक द हिन्दुस्तान टाइम्स के लिए अंशकालीक संवाददाता श्रीकृष्ण प्रसाद को कंपनी ने दशकों की सेवा के बाद अचानक एक दशक पूर्व काम से बाहर कर दिया था। श्री प्रसाद तक से अपने हक की कानूनी लड़ाई लड़ते आ रहे हैं।

श्रीकृष्‍ण प्रसाद

मुंगेर, बिहार

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