हिंदुस्‍तान ने इस पत्रकार परिवार की हालत बुरी कर दी है

मुंगेर। द हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड के अखबार ‘हिन्दुस्तान’ द्वारा बिना रजिस्‍ट्रेशन के अवैध तरीके से अखबार का प्रकाशन कर अरबों रुपयों के सरकारी विज्ञापन छापने के घपले को उजागर करने के कारण मुझे और मेरे परिवार को बहुत परेशानी झेलनी पड़ी। हिंदुस्‍तान अखबार के चलते मुझे और मेरे परिवार के अन्‍य पत्रकार सदस्‍यों को लगभग नौ वर्षों तक अनकही सामाजिक, प्रशासनिक और मानसिक उत्पीड़न के दौर से गुजरना पड़ा।

उत्पीड़न ऐसा कि आदमी आत्महत्या कर ले या फिर हथियार उठा ले, परन्तु मैं तथा मेरा परिवार सभी प्रकार के उत्पीड़नों का डंटकर मुकाबला करता रहा और अखबार के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखे रहा। आम लोगों के नैतिक समर्थन के कारण अब मेरा परिवार दैनिक हिन्दुस्तान और उसके सहयोगी सरकारी पदाधिकारियों के आतंक और उत्पीड़न से धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है। मुझे तथा मेरे परिवार को उत्पीड़न से बाहर निकलने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुंगेर के पोलो मैदान की आमसभा में की गई सम्मान बचाने की पेशकश महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जब जनसम्पर्क विभाग ने वयोवृद्ध पत्रकार तथा मेरे पिता काशी प्रसाद को पोलो मैदान की आम सभा में सरेआम बेइज्जत कर दिया और चिलचिलाती धूप में बैठने के लिए कुर्सी तक की व्यवस्था नहीं की, तब मंच से मुख्यमंत्री नी‍तीश कुमार ने जिलाधिकारी को फटकार लगाई और अपर समाहर्ता स्वयं मंच से कुर्सी लाकर पत्रकार दीर्घा में मेरे पिताजी को बैठने के लिए कुर्सी दी।

परिवार में मेरे अलावा अन्‍य पत्रकार सदस्य हैं काशी प्रसाद (द टाइम्स आफ इंडिया), पूनम कुमारी (स्टार न्यूज), शालिनी कुमारी (इंडिया टीवी), कर्ण कुमार (सीएनएन), चन्द्रशेखर (सीएनबी), पी.संजय (एएनआई), राजेश कुमार (कैमरामैन) और मीरा प्रसाद (कैमरामैन)।

उत्पीड़न का क्या स्वरूप रहा : हिन्दुस्तान अखबार से वर्ष 2002 में बिना कारण हटाए जाने के बाद ज्यों ही मैंने मुंगेर के श्रम विभाग में अपनी बर्खास्तगी के विरोध में मुकदमा दायर किया, वैसे ही दैनिक हिन्दुस्तान की चेयरपर्सन श्रीमती शोभना भरतीया के इशारे पर मुंगेर स्थित हिन्दुस्तान कार्यालय के संवाददाता और छायाकार अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर मेरा और मेरे परिवार के अन्य पत्रकार सदस्यों को भिन्न-भिन्न रूपों में आतंकित करना शुरू कर दिया। ब्यूरो प्रमुख और मैनेजर पत्रकार सम्मेलनों में खुले आम कहने लगे -‘‘अखबार से कोई आज तक लड़ नहीं सका है, जो सरकार लड़ी, वह सरकार बरबाद हो गई। बेहतर है श्रम विभाग का मुकदमा उठा लो।’’

जब धमकी नहीं चली, तो अखबार प्रबंधन ने तात्कालिक सहायक श्रमायुक्त, मुंगेर पर दवाब बनाना शुरू कर दिया। परन्तु सौभाग्य से तात्कालीन बिहार के श्रम मंत्री उपेन्द्र प्रसाद वर्मा के कड़े रूख और ठोस इरादों के कारण मुंगेर के श्रमायुक्त अंजनी कुमार ने मेरे श्रमिक विवाद के मामले में न्याय किया और पूरे मामले में औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की सिफारिश बिहार सरकार से कर दी।

जब अखबार के उत्पीड़न ने सभी सीमा पार कर दी : दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर कार्यालय के सभी संवाददाता और छायाकारों ने प्रेस सम्मेलनों के आयोजकों को समाचार और फोटो न छापने की धमकी देकर मेरे पत्रकार परिवार के सभी सदस्यों को आमंत्रण से वंचित करवा दिया था। हद तो तब हो जाती थी जब सामाजिक आयोजनों में मंच पर विराजमान मेरे पत्रकार परिवार के सदस्यों को मंच से उतर जाने को विवश किया जाता था, यह कहकर कि हिन्दुस्तान के छायाकार ने मंच पर आसीन विशिष्ट अतिथियों की तस्वीर लेने से इनकार कर दिया है। हिन्दुस्तान का ऐलान था कि इस अखबार के खिलाफ मुकदमा लड़ने वालों को समाज से काट दिया जायेगा, जिससे कि आत्मग्लानि में इस परिवार का कोई सदस्य कुछ भी गलत कर बैठे। मंच से उतर जाने के बाद मंच पर आसीन विशिष्ट व्यक्तियों की फोटोग्राफी की जाती थी। ऐसा रहा दैनिक हिन्दुस्तान के प्रबंधन का आतंक।

उत्पीड़न के अन्य हथकंडे : कभी-कभी मुंगेर मुख्यालय से दूर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी कार्यक्रम आयोजित होते थे। समाचार संकलन के लिए सरकार की ओर से समाचार कवर करने के लिए सरकारी गाड़ी पत्रकारों को कार्यक्रम स्थल पर ले जाती थी। निर्धारित समय पर इस पत्रकार परिवार के सदस्य तैयार होकर गाड़ी का इंतजार करते रह जाते थे, गाड़ी कार्यक्रम स्थल जा चुकी होती थी। पूछने पर गाड़ी के चालक कहते थे -‘‘हिन्दुस्तान और अन्य पत्रकारों ने गाड़ी आप तक ले जाने से मना कर दिया। उन लोगों ने कार्यक्रम के बहिष्कार की भी धमकी दी। हम लाचार और बेबस थे।’’

जब सरकारी पदाधिकारी हिन्दुस्तान के एजेंट के रूपमें काम करने लगे : मुंगेर स्थित सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के पदाधिकारियों ने पिछले नौ वर्षों तक सरकारी नियमों और कानून को ताक पर रख दिया। इस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पटना स्थित मुख्यालय के वरीय पदाधिकारियों के इशारे पर दैनिक हिन्दुस्तान के एजेंट के रूप में काम करते रहे और आज भी कमोवेश करते आ रहे हैं। जिला स्तर पर होने वाली प्रशासनिक बैठकों और निर्णय से जु़ड़ी प्रेस विज्ञप्तियां हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, प्रभात खबर के कार्यालय तक ई-मेल, फैक्स या हाथों-हाथ विगत नौ वर्षों से पहुंचती आ रही हैं, परन्तु विभाग मेरे परिवार के किसी भी सदस्य तक प्रेस विज्ञप्ति नहीं पहुंचती है। इसकी पुष्टि ई-मेल, फैक्स के डाटा और दूरभाष के काल डिटेल और डिस्पैच रजिस्टर से की जा सकती है।

सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की अन्य करतूत : यह विभाग राज्य और केन्द्र सरकारों के मुंगेर स्थित कार्यालयों को पत्रकारों की जो सूची भेजता है, उन सूचियों में मेरे पत्रकार परिवार के सदस्यों का नाम लापता रहता है कुछ अपवादों को छोड़कर।

अखिर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग का यह रवैया क्यों : मैंने अपने हटाए जाने के बाद श्रम न्‍यायालय में अपील की, इसी दौरान मुझे दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध प्रकाशन और अवैध ढंग सरकारी विज्ञापन प्रकाशित करके अरबों की कमाई करने की जानकारी मिली। इस मामले में मैंने सूचना के अधिकार के तहत कार्रवाई शुरू कर दी। बिना रजिस्‍ट्रेशन के प्रकाशित हो रहे  हिन्दुस्तान में अवैध ढंग से सरकारी विज्ञापन देने का काम पटना स्थित सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय करता रहा है। मुंगेर स्थित सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग भी नियमों के विरुद्ध सरकारी विज्ञापन दैनिक हिन्दुस्तान और जागरण को जारी करता था।

मुख्यमंत्री से विनती : मैं तथा मेरा पत्रकार परिवार मुख्यमंत्री से अनुरोध करता है कि वे इस उत्पीड़न के मामले में विधान सभा की कमिटी गठित करें। कमिटी को यह यह पता लगाने की जिम्‍मेदारी दी जाए कि आखिर इतने लंबे समय तक एक पत्रकार परिवार के पत्रकार सदस्यों का उत्पीड़न किन-किन कारणों से होता रहा? क्या पत्रकार परिवार के सदस्यों में ही त्रुटियां थीं? या ईमानदारी और कर्त्तव्यनिष्ठ पत्रकार होने के कारण इस पत्रकार परिवार के सदस्यों को इस तरह के उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और आज भी सामना करना पड़ रहा है। यह न्याय की सरकार है। इस परिवार को विश्वास है कि मुख्यमंत्री यथोचित कदम उठाएंगे और उत्पीड़न के अन्य पहलुओं को भी उजागर करने की सरकारी कार्रवाई करेंगे।

श्रीकृष्‍ण प्रसाद

पूर्व पत्रकार, हिंदुस्‍तान

मुंगेर

Comments on “हिंदुस्‍तान ने इस पत्रकार परिवार की हालत बुरी कर दी है

  • aapke pariwar main itne sadasya hain ye likh kar aap kya kahna chahte hain……aap koyee celebrety hain ki aapko log alag se ijjat kare….aapne samaj main koyee achha karya kiya hai……..ya itne patrakaaron ke kaaran hi aap itni hamak dikha rahe hain……main yeh naheen kahta ki aapke saath jo huaa wo sahhee hai ya galat….lekin aapki lekhan ki shaili yeh majboor karti hai soanchne ke liye ki …….aapki aukaat kya hai……..aapki soanch main yeh thasak kyun hai……kartabyanisth hone ka bakhan karte hain…aapki patrakarita ka ek namoona yahaan bhi aapne dikhaya hai….
    ….काशी प्रसाद (द टाइम्स आफ इंडिया), पूनम कुमारी (स्टार न्यूज), शालिनी कुमारी (इंडिया टीवी), कर्ण कुमार (सीएनएन), चन्द्रशेखर (सीएनबी), पी.संजय (एएनआई), राजेश कुमार (कैमरामैन) और मीरा प्रसाद (कैमरामैन)।
    itne logon ke bute ki baat naheen hai …..hindustan ko bura bhala kahna…….

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  • MIDEA KA FATHER says:

    ये कृष्ण भाई मिडिया को बपौदी बना कर रखा है मुंगेर जिले में.मुंगेर में इस परिवार को टोकरी खानदान के नाम से जाना जाता है.मतलब टोकरी भर समाचार चैनल के पत्रकार और अख़बार व रेडियों के संवाददाता इसके पुरे खानदान में.
    एक बानगी देखिये कितने लोग जुटे है इस परिवार के मिडिया में शायद बिहार का सबसे बरा मिडिया फैमली होगा.
    १.पिता.कशी प्रशाद TIMES OF INDIA
    २.कशी प्रसाद का प्रथम पुत्र :-कृष्ण प्रशाद:-DD1 व AIR .RTI कार्यकर्ता ,अंग्रेजी के कथित ट्यूटर
    ३.कृष्ण प्रशाद की पत्नी मीरा कुमार दूरदर्शन की अधिकृत कैमरामैन
    ४.कृष्ण प्रसाद का पुत्र कर्ण कुमार CNN
    5.कशी प्रशाद का द्वितीय पुत्र पि0 संजय ANI
    ६.पि० संजय की पत्नी पूनम STAR NEWS
    ७.पूनम की बहन शालिनी INDIA टीवी
    ८.पूनम का भाई चन्दन INDIA NEWS ,
    ९.पूनम का भाई चन्दन TAZA TV
    १०.इनके घर का गारी चालक राजेश इंडिया टीवी का कैमरा मन
    अब आप लोग ही बताये की है न यह परिवार मिडिया का टोकरी खानदान दर्जन भर जिस परिवार में चैनल का आई ड़ी हो,प्रिंट का महत्वपूर्ण अख़बार और रेडियो का भी जब संवाददाता हो तो भला कौन इनसे टेंशन ले ये तो अपनी भद पिटवाने और छोछी हरकत करने के लिए लिख रहा है यह लेख. और मजे की बात सभी एक ही छत के निचे रहते है.
    किसी के पास योह्यता नही है पत्रकार बनने की आप अनदजा लगा सकते है जब चालक ,शाला,शाली,पत्नी कैसे पत्रकार बन गई.कैसे लोग इन्हें पटना से पत्रकार बना देते है.
    मैं अपना नाम नही बताऊंगा भरक जायेगा बाप,क्यों कैसी खोली पोल…………………………………

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  • Arun Kumar Sinha, Journalist,New Delhi says:

    Dear viewer,
    I knew Mr. Kashi Prasad, from 1970 till now, he has worked under me for several years as a reporter in my newspaper published from Patna. He is Anna Hazaare of Munger. He has no bank balance nor four wheeler till now. Everyone can see him going on foot in the market or any PC organized by administration or any political party. He has never taken alcohol or tea even paan in his life. In his life, he has several times fought for general causes. Many time Superintendent of Police of district want to eliminate him but his truth saved him. In construction of Ganga bridge, he had played vital role as President of ‘Jagriti’. So, who comments on his works, should apologize to him.
    Arun Kumar Sinha, Journalist, New Delhi

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  • Arun Kumar Sinha, Journalist,New Delhi says:

    Dear viewer,

    I knew Mr. Kashi Prasad, from 1970 till now, he has worked under me for several years as a reporter in my newspaper published from Patna. He is Anna Hazaare of Munger. He has no bank balance nor four wheeler till now. Everyone can see him going on foot in the market or any PC organized by administration or any political party. He has never taken alcohol or tea even paan in his life. In his life, he has several times fought for general causes. Many time Superintendent of Police of district want to eliminate him but his truth saved him. In construction of Ganga bridge, he had played vital role as President of ‘Jagriti’. So, who comments on his works, should apologize to him.

    Arun Kumar Sinha, Journalist, New Delhi

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  • Prof. Saurav Samir, Patna says:

    आदरणीय सम्पादकजी
    पत्रकारिता में कितना भ्रस्टाचार फ़ैल गया है इसका प्रमाण सुप्रीम कोर्ट में चल रहे 2g केस में सभी को पता चल गयाअ हे. नीरा रादिया से लेकर कई बड़े अख़बार और मीडिया घराना फंसा हुआ हे. इनसबको जन लोकपाल में आना चाहिय. श्री अन्ना हजारे से जरुर मांग करेगे. पाच लाख प्रति माह कमाने वाले बड़े चैनल या बड़े अख़बार का संपादक हो या छोटे कसबे मुंगेर, लखीसराय, जमुई के कुछेक पत्रकार जो शराब के बोतल और सौ रूपया पर न्यूज़ छपते हो या लोकल चैनल पर न्यूज़ दिखाते हो को जन लोकपाल में लाना होगा. एक आदमी जो दस वर्षो से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा, जिसे बर्बाद करने में बड़े पूजीपति से लेकर जिले के वैसे पत्रकार जो शराब और पैसा के लोभ में बिक चुके है और जो अपने को मीडिया का बाप मानता हो तो श्रीकृष्ण प्रसाद पर कीचड़ उछालने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बनता है. झूटा और सनसनी खेज न्यूज़ चलाकर या चपवाकर कुछ पदादिकारियों पर धौस दिखाकर चंदा उसुलने से मीडिया का father नहीं हो सकता है. ज्यादा दिन नहीं है जब बिहार में जन लोकायुक्त गठन होगे तो इन दलालों का खैर नहीं. अभी खूब गली देने का समय है. प्रोफ्फेस्सर सौरव समीर, पटना

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  • Prof. Saurav Samir, Patna says:

    आदरणीय सम्पादकजी
    पत्रकारिता में कितना भ्रस्टाचार फ़ैल गया है इसका प्रमाण सुप्रीम कोर्ट में चल रहे 2g केस में सभी को पता चल गयाअ हे. नीरा रादिया से लेकर कई बड़े अख़बार और मीडिया घराना फंसा हुआ हे. इनसबको जन लोकपाल में आना चाहिय. श्री अन्ना हजारे से जरुर मांग करेगे. पाच लाख प्रति माह कमाने वाले बड़े चैनल या बड़े अख़बार का संपादक हो या छोटे कसबे मुंगेर, लखीसराय, जमुई के कुछेक पत्रकार जो शराब के बोतल और सौ रूपया पर न्यूज़ छपते हो या लोकल चैनल पर न्यूज़ दिखाते हो को जन लोकपाल में लाना होगा. एक आदमी जो दस वर्षो से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा, जिसे बर्बाद करने में बड़े पूजीपति से लेकर जिले के वैसे पत्रकार जो शराब और पैसा के लोभ में बिक चुके है और जो अपने को मीडिया का बाप मानता हो तो श्रीकृष्ण प्रसाद पर कीचड़ उछालने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बनता है. झूटा और सनसनी खेज न्यूज़ चलाकर या चपवाकर कुछ पदादिकारियों पर धौस दिखाकर चंदा उसुलने से मीडिया का father नहीं हो सकता है. ज्यादा दिन नहीं है जब बिहार में जन लोकायुक्त गठन होगे तो इन दलालों का खैर नहीं. अभी खूब गली देने का समय है. प्रोफ्फेस्सर सौरव समीर, पटना

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  • Prof. Saurav Samir, Patna says:

    आदरणीय सम्पादकजी
    पत्रकारिता में कितना भ्रस्टाचार फ़ैल गया है इसका प्रमाण सुप्रीम कोर्ट में चल रहे 2g केस में सभी को पता चल गयाअ हे. नीरा रादिया से लेकर कई बड़े अख़बार और मीडिया घराना फंसा हुआ हे. इनसबको जन लोकपाल में आना चाहिय. श्री अन्ना हजारे से जरुर मांग करेगे. पाच लाख प्रति माह कमाने वाले बड़े चैनल या बड़े अख़बार का संपादक हो या छोटे कसबे मुंगेर, लखीसराय, जमुई के कुछेक पत्रकार जो शराब के बोतल और सौ रूपया पर न्यूज़ छपते हो या लोकल चैनल पर न्यूज़ दिखाते हो को जन लोकपाल में लाना होगा. एक आदमी जो दस वर्षो से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा, जिसे बर्बाद करने में बड़े पूजीपति से लेकर जिले के वैसे पत्रकार जो शराब और पैसा के लोभ में बिक चुके है और जो अपने को मीडिया का बाप मानता हो तो श्रीकृष्ण प्रसाद पर कीचड़ उछालने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बनता है. झूटा और सनसनी खेज न्यूज़ चलाकर या चपवाकर कुछ पदादिकारियों पर धौस दिखाकर चंदा उसुलने से मीडिया का father नहीं हो सकता है. ज्यादा दिन नहीं है जब बिहार में जन लोकायुक्त गठन होगे तो इन दलालों का खैर नहीं. अभी खूब गली देने का समय है. प्रोफ्फेस्सर सौरव समीर, पटना

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  • Media ka Rakhwala says:

    Hindustan akhbar hamara hindustan hai. Aapke kuch kehne ya karne se hindustan ka bal baka bhi nahi ho sakta.mujhe lagta hai aap baten to bhaut badi badi likhte hai lakin unme such kam nazar aata hai.aap or aapka pura parivaar media se hai shayed isi k balbute aap Hindustan se ladne chale hai,lekin aap kuch nahi kar payegen,kyonki aapke parivaar me aadhe log pagal hai khaskar k poonam kumari jo apne aapko star news ki patrakar kahti hai, aisa lagta hai mano star news uske baap ka hai. Uske parivar me sab criminal type k hai, sharab ka theka chalta hai,aap inke balbute hindustan se ladne chale hai?
    Ap Ghabrao mat sab thik ho jayega.

    Reply
  • Media ka Rakhwala says:

    Hindustan akhbar hamara hindustan hai. Aapke kuch kehne ya karne se hindustan ka bal baka bhi nahi ho sakta.mujhe lagta hai aap baten to bhaut badi badi likhte hai lakin unme such kam nazar aata hai.aap or aapka pura parivaar media se hai shayed isi k balbute aap Hindustan se ladne chale hai,lekin aap kuch nahi kar payegen,kyonki aapke parivaar me aadhe log pagal hai khaskar k poonam kumari jo apne aapko star news ki patrakar kahti hai, aisa lagta hai mano star news uske baap ka hai. Uske parivar me sab criminal type k hai, sharab ka theka chalta hai,aap inke balbute hindustan se ladne chale hai?
    Ap Ghabrao mat sab thik ho jayega.

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  • Mr. Arun Kumar Sinha, New Delhi says:

    Dear viewer,

    I knew Mr. Kashi Prasad, from 1970, he has worked under me for several years as a reporter in my newspaper published from Patna. He is Anna Hazaare of Munger. He has no bank balance nor four wheeler till now. Everyone can see him going on foot in the market or any PC organized by administration or any political party. He has never taken alcohol or tea even paan in his life. In his life, he has several times fought for general causes. Many time Superintendent of Police of district want to eliminate him but his truth saved him. In construction of Ganga bridge, he had played vital role as President of ‘Jagriti’. So, who comments on his works, should apologize to him.

    Arun Kumar Sinha, Journalist, New Delhi

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  • sunil kumar gupta says:

    abe salo chutiya ho gye ho kisi ne to himmat kr hindustan ke khilaf jhanda uthaya hai aap randibaj log to gandhi ko bhi gali dete ho.kyon sfy faimly ko srabi bta rhe ho.yhi priwar hindustan ke nak me dm kr rha hai,ise km mat aanko,chiti bhi hathi ko bedm kr skta hai.
    main aapke sath hu punam ji.lro larai…..
    munger se sunil kumar jakhmi………

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