: हिन्दुस्तान अखबार ने सुनील जैन को आगरा का पूर्व सांसद बनाया : अखबारों में गलतियां सामान्य बात है। पत्रकार तनाव में हैं कि जल्दी खबर लिखनी है। सम्पादक तनाव में है कि समय पर अखबार छपने भेजना है। लेकिन गलतियां अगर लगातार हो रही हैं तो कहीं न कहीं यह संकेत मिलता है कि कोई देखने वाला नहीं है। हिन्दुस्तान, आगरा में आजकल यही चल रहा है। शहर की खबर हो या राष्ट्र की। अगर ध्यान से पढ़ लें तो गलती मिल ही जाएगी। हिन्दुस्तान, आगरा के 12-2-2011 के अंक पर गौर फरमाएं।
इसके पेज नंबर 2 पर एक नजर कॉलम में पांचवी खबर है- तनाव मैनेजमेंट पर वर्कशॉप। नौ पंक्तियों की इस खबर में दो बड़ी गलतियां हैं। खबर की तीसरी पंक्ति में पूर्व पार्षद सुनील जैन को पूर्व सांसद लिखा गया है। छठवीं पंक्ति में होटल टूरिस्ट बंगला को टेरिस्ट बंगला लिखा गया है। जैसे कि यह टेररिस्ट के लिए बनाया गया है। पूर्व पार्षद सुनील जैन की मीडिया पर अच्छी पकड़ है। वे जो चाहते हैं, अखबारों में छपवा लेते हैं। लेकिन उन्होंने यह कभी नहीं चाहा कि उन्हें पूर्व सांसद लिखा जाए। वे भी क्या कर सकते हैं, जब उनके हिन्दुस्तानी मित्रगण पूर्व सांसद लिखना चाहते हैं।
यह हाल तब है जबकि हिन्दुतान आगरा में खबरों पर निगरानी की कड़ी व्यवस्था है। खबर रिपोर्टर से होती हुई सिटी इंचार्ज, कॉपी एडिटर, डेस्क इंचार्ज, न्यूज एडिटर, रेजीडेंट एडिटर के हाथों होती हुई छपने के लिए जाती है। इसके बाद भी इतनी बड़ी गलती कर दी। हिन्दुस्तान में यह व्यवस्था भी है कि खबर और उसके कंटेंट रिपीट नहीं होंगे। लेकिन तनाव मैनेजमेंट की खबर महानगर में आज कॉलम के तहत पेज नंबर-3 पर भी दी गई है। महानगर में आज कॉलम के साथ यह सामान्य बात है। जो लोग पत्रकारों को जेब में रखते हैं, वे अपनी खबर सिंगल कॉलम के साथ-साथ महानगर में आज में भी छपवा ही लेते हैं।
हिन्दुस्तान, आगरा 12-2-2011 के पेज नंबर-3 पर तीन कॉलम खबर है- शराब पीकर पिता का गला घोंटा। इसमें पैरा-2 में लिखा है- वारदात के समय प्रेमगिरी की बहू घर पर मौजूद थी। वह मूक बधिर है। उसने हल्ला मचाकर पड़ोसियों को बुलाया था..। यह सब जानते हैं कि मूकबधिर का अर्थ है जो बोल नहीं सकता। लेकिन हिन्दुस्तान के पत्रकार और सम्पादक की कृपा से वह हल्ला मचाने लगी। लगता है सभी मूकबधिरयों को हिन्दुस्तान के क्राइम रिपोर्टर से संपर्क करना चाहिए ताकि वे हल्ला मचा सकें।
आगरा से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.












Prem Arora
February 12, 2011 at 11:50 am
यशु भाई यह तो हिंदुस्तान की तारीफ करनी चाहिए के उनके चलते अब मूक वधिर भी बोलने लगे हैं यह तो अच्छी बात है. डेस्क पर काम करना है तो टेरोरिस्ट का दर रहता है इस लिए शायद दिल की बात जुबान पर आ गई होगी शोले फ़िल्म में ठाकुर के दोनों हाथ नहीं थे फिर भी वोह टाइप कर लेते थे समझा करो इतनी छोटी गलती पर मत जाओ आप पिछले महीने के पहले पेज चेक कार्लो हेअडिंग और है न्यूज़ कोई और फिर भी हिंदुस्तान मेरा सबसे पसंदीदा पेपर है…दूसरों से तो अच्छा है
anurag.
February 15, 2011 at 2:17 pm
goonga bahra bhee mauka aane par halla macha leta hai………………………………..ban kar dekho……………