‘सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करने और उन खबरों या सूचनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में क्षेत्रीय और भाषाई समाचार पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका महत्त्वपूर्ण है. ये न केवल समाज के मुखर प्रतिबिंब हैं, बल्कि भारत की प्रगति में भी सहायक हैं.’ ये उद्गार व्यक्त किए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ आए अमेरिका में प्रकाशक, चिकित्सक, सेवा भावी डाक्टर सुधीर एम. पारिख ने.
मौका था नई दिल्ली में 9 नवंबर, 2010 को भारतीय भाषाई समाचार-पत्र संगठन इलना की ओर से कौंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम का, जिसमें विदेशों में भारतीय भाषाओं के प्रकाशन, भारतीय प्रकाशकों की विदेशों में भारतीय भाषाओं के विकास में भूमिका व भारतीय प्रकाशनों में विदेशी पूंजी के मुद्दों पर चर्चा की गई.
अमेरिका से प्रकाशित गुजरात टाइम्स के प्रकाशक व संपादक श्री पारिख ने क्षेत्रीय व भाषाई समाचार पत्र-पत्रिकाओं के अधिकारों व सकारात्मक पत्रकारिता को नई दिशा देने में इलना की भूमिका व प्रयासों की न सिर्पफ जमकर प्रशंसा की, बल्कि उन्होंने इलना की सदस्यता भी ग्रहण की.
उन्होंने कहा कि अमेरिका में अखबार मुफ्त में दिया जाता है, जिन्हें स्टोरों में रखा जाता है. अखबार लेने के लिए लोग लाइन लगाते हैं. चूंकि अखबारों में लोकल विज्ञापन ज्यादा होते हैं, इसलिए अखबार का खर्च निकल जाता है. उन्होंने आगे कहा कि न्यूजर्सी में जल्द ही इलना की मीटिंग आयोजित की जाएगी.
डा. सुधीर एम. पारिख इस से पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के साथ भी उन के प्रतिनिधिमंडल में भारत के दौरे पर आए थे. भारत सरकार उन्हें ‘प्रवासी भारतीय पुरस्कार’ और ‘पद्मश्री’ अवार्ड से नवाज चुकी है. अमेरिकी सरकार द्वारा उन्हें प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘एलिस आईलैंड मैडल्स आफ आनर’ से भी सम्मानित किया जा चुका है.

इस मौके पर औपचारिक चर्चाओं के दौरान इलना के अध्यक्ष परेश नाथ ने कहा कि क्षेत्रीय व भाषाई समाचार पत्र-पत्रिकाओं की मुखर आवाज का प्रतिनिधित्व करने वाली इलना की अब अंतराष्ट्रीय पहचान भी है. डाक्टर पारिख के इस संगठन से जुड़ने से हमें मजबूती मिलेगी और सभी सदस्य प्रकाशनों का उत्साह बढ़ेगा. अमेरिका मे भी भारतीय मूल के लोगों की अच्छी खासी तादाद है और वे अपनी क्षेत्रीय खबरें और सूचनाएं जानने को उत्सुक रहते हैं. ऐसे में विदेशों में रह रहे भारतीय प्रकाशकों के बीच एक सेतु बनना चाहिए. इलना इन मुद्दों को ले कर न केवल गंभीर है, बल्कि प्रकाशकों के हितों और पाठकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए भी प्रयासरत रहती है.
परेश नाथ ने भारतीय भाषाओं की उपेक्षा किए जाने पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे ही देश में भाषाई पत्र-पत्रिकाओं को हेय दृष्टि से देखा जाता है. ऐसा लगता है मानो ये दूसरे ग्रह से आई हैं. लेकिन अब इलना के सदस्य यह न सोचें कि हम अपने देश में बेगाने हैं. हम अपने देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी छाएंगे.
इस मौके पर इलना के सदस्य अनंत नाथ ने कहा कि डा. पारिख के जुड़ने से इलना को नई मजबूती मिलेगी. इलना के महासचिव रवि कुमार बिश्नोई ने उम्मीद जताई कि श्री पारिख के इलना में शामिल होने से हमें और मजबूती मिलेगी. पिछले कुछ सालों में इलना ने जो तरक्की की है वह उल्लेखनीय है. इस दौरान भाषाई पत्र-पत्रिकाओं की बहुत सी समस्याएं दूर हुई हैं.
इस कार्यव्रफम में राजीव वशिष्ठ, अंकित बिश्नोई, गगन बिश्नोई, विवेक गुप्ता, कीरीट खामेर, देवेंद्र गुप्ता, संजय गुप्ता, चौधरी यशपाल, नरेंद्र कुमार वर्मा, सचिन कंसल, राजकुमार अग्रवाल, गौरव धमा, प्रमोद बजाज, गिरीश शर्मा, अशोक नवरत्न, इंडियन जस्टिस पार्टी के अध्यक्ष डा. उदित राज, वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय, तारिक हुसैन रिजवी, शैलेश व्यास, वेद प्रकाश के अलावा इलना के कोषाध्यक्ष चंद्रकांत भावे भी मौजूद थे. प्रेस विज्ञप्ति











