
अतुल माहेश्वरी
पहले दूसरे शहरों में अखबारों के बंडल ट्रेनों से भेजे जाते थे, लेकिन आज शायद ही कोई अखबार इस माध्यम को प्रयोग में लाता है। अब सभी समाचार पत्रों के पास अखबार को पाठकों तक पहुंचाने की अपनी परिवहन व्यवस्था है। जहां तक अमर उजाला की बात है, तो हम अपना अखबार बदरीनाथ तक अपने ही साधन से भेजते हैं। बेहतर वितरण प्रणाली के जरिये हम अखबारों के लिहाज से छोटे माने जाने वाले बाजारों में भी, दस्तक दे सकने में सफल हुए हैं। इसके अलावा पहले अखबार एक ही जगह से छपते थे और उसे अन्य शहरों में भेजा जाता था। मगर अब विभिन्न शहरों में अत्याधुनिक छपाई मशीनें लग गई हैं, जिससे अखबारों के वितरण में भी मदद मिलती है। आखिर कुछ साल पहले तक किसने सोचा था कि पानीपत जैसी जगह से भी अखबार छपने लगेंगे?
प्रौद्योगिकी ने अखबारों का काम आसान तो किया है, मगर इससे उनकी लागत भी बढ़ गई है और लगातार बढ़ती जा रही है। इसलिए पत्र समूहों को अब कहीं, अधिक निवेश करना पड़ रहा है। यह स्वीकार करना होगा कि अखबार एक ऐसा उत्पाद है, जिसकी जीवन अवधि बहुत सीमित होती है। ऐसे में अखबार को तैयार कर उसे पाठकों तक पहुंचने के लिहाज से समय का अत्यंत महत्व होता है। मान लीजिए, हम नोएडा से अपने हरियाणा संस्करण की छपाई करते हैं और कोई दूसरा अखबार पानीपत से। तब वह अखबार तो खबरों के कवरेज के मामले में दो-ढाई घंटे आगे रहेगा। कहने का मतलब अखबारों में समय को लेकर भी प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
अखबारों के सामने एक और चुनौती खबरिया चैनलों से भी है। इसने पाठकों की अखबारों से अपेक्षाएं बदल दी है। पहले लोग हार्ड न्यूज के लिए अखबार खरीदते थे, मगर अब तो वे ये सब खबरें खबरिया चैनल में देख ही लेते हैं। टेलीविजन में तो हर घंटे कोई न कोई खबर ब्रेक होती रहती है। जाहिर है, खबरें ब्रेक करने के मामले में टीवी चैनलों का एकाधिकार-सा हो गया है। असल में हमारी (अखबारों की) भूमिका दर्शकों के खबरिया चैनलों के आखिरी बुलेटिन देख लेने, यानी मध्य रात्रि के बाद शुरू होती है। आधी रात तक खबरों में जो कुछ दिखाया या बताया जा चुका होता है, हमें उससे परे जाकर खबर को देखने की जरूरत होती है। हमें विभिन्न खबरों या स्टोरीज पर अगले दिन होने वाले घटनाक्रम का अनुमान लगाना होता है। हम अगले दिन के संभावित घटनाक्रम पर अपना नजरिया पेश करते हैं। यह बेहद चुनौतीपूर्ण काम होता है।
खबरिया चैनलों के बीच आपस में भी काफी प्रतिस्पर्धा है और इसी होड़ में वे कई बार खबर पहले ब्रेक करने के फेर में गलतियां करते हैं और इससे उनकी विश्वसनीयता पर काफी बुरा असर भी पड़ता है। अखबारों के पास खबर को पुष्ट करने का मौका होता है, वे एक नहीं, दो नहीं, तीन बार इसकी पुष्टि कर सकते हैं। खबरिया चैनलों ने यूपी सहित पूरी हिंदी पट्टी में दखल तो दी है, मगर यहां तमिलनाडु जैसी स्थिति नहीं है, जहां टीवी चैनलों की पहुंच भीतर तक है। टीवी चैनल महानगरों पर केंद्रित हैं और उनका महानगरों में असर भी है, मगर ग्रामीण इलाकों के घर-घर तक पहुंचने में अभी वक्त है।
अखबारों के मामले में एक बड़ा बदलाव और आया है, वह यह कि क्षेत्रीय अखबार क्षेत्रीय और स्थानीय मुद्दों को पहले से आक्रामक तरीके से कवर कर रहे हैं। मसलन, मेरठ में जब बाढ़ आई थी और पूरे शहर का जनजीवन ठप पड़ गया था, तब हमने इससे संबंधित खबरों को उन दिनों की कई राष्ट्रीय सुर्खियों से अधिक तरजीह देते हुए पहले पेज पर छापा था। उत्तर प्रदेश के बाजार से हम अच्छी तरह से वाकिफ हैं। प्रदेश के कोने-कोने तक हमारी पहुंच है और हमें बाजार की नब्ज का पता है। ऐसे में हम उद्योगों को उनके लक्ष्य हासिल करने में मदद कर सकते हैं। अखबारों के मूल्य को लेकर प्रतिस्पर्धा कोई नई नहीं है। हैरत नहीं होनी चाहिए कि भारत में अखबारों के दाम सबसे कम हैं। यहां तक कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी अखबार महंगे हैं। पाकिस्तान के डॉन अखबार की कीमत 14 रुपये है।
पहले की तुलना में अब पाठकों के पास समय कम है। अखबारों से आज उनकी अपेक्षाएं भी बदल गई हैं। हमें पाठकों की अपेक्षाओं के अनुरूप अखबार को ढालना होता है। हम इस हकीकत को नजरअंदाज नहीं कर सकते। हमारा नया ले-आउट और डिजाइन पाठकों की इन अपेक्षाओं पर खरा उतरता है। इसके साथ ही हमने विज्ञापनों की दिशा में भी काम किया है, ताकि क्लाइंट्स को अधिक लाभ हो सके। हमें यह स्वीकार करना होगा कि स्थानीय और क्षेत्रीय पेज किसी भी अखबार की ताकत होते हैं। स्थानीय खबरों की बेहतरीन कवरेज ही अमर उजाला की ताकत है। बीते कुछ वर्षों में हमने विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर विस्तार किया है और आज देश के 120 जिलों में हमारी पहुंच है। अमर उजाला अपने मूलभूत मूल्यों के प्रति समर्पित रहा है और हम इस दिशा में आगे भी काम करते रहेंगे।
अतुल माहेश्वरी द्वारा अंग्रेजी पोर्टल एक्सचेंज4मीडिया को दिए साक्षात्कार पर आधारित. इस इंटरव्यू का हिंदी में प्रकाशन अमर उजाला की वेबसाइट पर आज किया गया है. वहीं से साभार लेकर हम यहां इसे प्रकाशित कर रहे हैं.











