: हिंदी विवि में दिखायी गयी ‘देवनागरी लिपि और हमारी वर्णमाला एक अभिनव परिचय’ नामक डाक्यूमेंट्री : मराठी भाषा के गंभीर अध्येता, लेखक व ‘सुधारक’ के संपादक दिवाकर मोहनी ने कहा है कि देवनागरी लिपि अद्वितीय है क्योंकि इसमें व्यंजन और स्वर एक साथ लिखे जाते हैं। श्री मोहनी महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के आखर अद्यतन श्रृंखला के तहत हबीब तनवीर सभागार में आयोजित एक गरिमामय समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस समारोह का आयोजन श्री मोहनी द्वारा बनाई गई डाक्यूमेंट्री ‘देवनागरी लिपि और हमारी वर्णमाला एक अभिनव परिचय’ के प्रदर्शन व उनसे संवाद के लिए किया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय ने की।
दिवाकर मोहनी की डॉक्यूमेंट्री में देवनागरी लिपि की वर्णमाला व्यंजनवर्ण, वर्णमाला स्वरवर्ण, संयुक्त स्वर, व्यंजनांश व स्वरांश, स्वरदंड व उसके प्रकार, संयुक्ताक्षर, वर्णों के वैकल्पिक रूप, संधि व संधि विग्रह, स्वरसंधि, व्यंजनसंधि पर गंभीर विमर्श किया गया है। एक घंटे की डाक्यूमेंट्री के प्रदर्शन के बाद श्री मोहनी ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के प्रश्नों का जवाब भी दिया। उन्होंने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री सेमीफाइनल है, फाइनल तो अभी बाकी है। इस डॉक्यूमेंट्री में आवाज श्री मोहनी की पत्नी सुनंदा मोहनी ने दी है। अस्सी वर्षीय दिवाकर मोहनी के लिपि, मात्राओं, वर्तनी और व्याकरण संबंधी आवेग से अभिभूत कुलपति विभूति नारायण राय ने उन्हें प्रस्ताव दिया कि वे विश्विविद्यालय के संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल करते हुए फाइनल खेलें। वे इस डॉक्यूमेंट्री का फाइनल रूप यहीं रहकर बनाएं। कुलपति राय ने मोहनी का शॉल ओढाकर और विश्वविद्यालय का स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि देवनागरी लिपि में गंभीर चिंतन व विमर्श की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर प्रौद्योगिकी और तकनीक ने सबकुछ उलट-पुलट दिया है, ऐसे में शुद्धतावादी बने रह पाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। देवनागरी लिपि सहित हिंदी भाषा के मानकीकरण के लिए हमें गंभीरतापूर्वक सोचने की जरूरत है। साथ ही हमें अपनी भाषा को कंप्यूटर व मशीन से सामंजस्य स्थापित करना होगा। उन्होंने यूनिकोड को हिंदी के लिए कंप्यूटर पर उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। यही कारण है कि आज हमें यूनिकोड के माध्यम से हिंदी में ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों का विशाल ज्ञान भंडार प्राप्त हुआ है।
समारोह का संचालन ‘आखर अद्यतन’ के संयोजक, युवा आलोचक तथा विवि के साहित्य विद्यापीठ के असिस्टेंट प्रोफेसर अरूणेश शुक्ल ने किया तथा भाषा विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. उमाशंकर उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समारोह में चीन से आई हिंदी की शिक्षिका सुमनिका, मॉरीशस के डॉ. जयचंद लाल बिहारी, रश्मि लालबिहारी, थाईलैण्ड के डॉ. सथित चेपुनिया, जर्मनी की डॉ. राम प्रसाद भट्ट, बैंकाक के प्रो. बुमरूंग खामइक, क्रोएशिया की डॉ. बिलजाना सहित विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा के प्रो. संतोष भदौरिया, प्रो. केके सिंह, प्रो. रवि चतुर्वेदी, डॉ. कृपाशंकर चौबे, डॉ. अनिल पाण्डेय, डॉ. प्रीति सागर, डॉ. डीएन्ा प्रसाद, डॉ. राजीव रंजन राय, डॉ. अशोकनाथ त्रिपाठी, डॉ. रामानुज अस्थाना, डॉ.अख्तर आलम, राजेश लेहकपुरे तथा शैक्षणिक, गैर-शैक्षणिक कर्मी, शोधार्थी व विद्यार्थी बडी संख्या में उपस्थित थे।











