यह एक ऐसे घोटाले की खबर है जिसे पढ़ कर आप बरखा दत्त और वीर सांघवी के कर्म को भूल जाएंगे। यह घोटाला करने का आरोप एनडीटीवी के चेयरमैन प्रणय रॉय पर है और इसे गंभीरता से लेने पर प्रणय रॉय हर्षद मेहता और केतन पारिख से ज्यादा अलग नजर नहीं आएंगे। यह इल्जाम किसी आम आदमी ने नहीं लगाया। देश के सम्मानित पत्रकारों में से एक, भूतपूर्व सांसद, हेडलाइंस टुडे चैनल के मुखिया और संडे गार्जियन के संपादक एमजे अकबर ने बाकायदा लिख कर लगाया है और प्रणय रॉय और उनकी राधिका रॉय को चुनौती दी है कि इसका खंडन करे। यह घोटाला आईसीआईसीआई बैंक के साथ मिल कर किया गया बताया गया है।
घोटाले का तौर-तरीका बताता है कि आरआरआरआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के पास एनडीटीवी के अपार शेयर पड़े हैं। इन शेयरों की कीमत नकली खरीदारी कर के जुलाई और अक्टूबर 2008 के बीच बढ़ा-चढ़ा कर 439 रुपए प्रति शेयर बताई गई। कहा गया कि शेयर बढ़ रहे हैं इसलिए कंपनी अपनी शेयर वापस खरीदना चाहती है मगर उसके पास नकदी नहीं है। ईमानदार एनडीटीवी ने इंडिया बुल्स फाइनेंस सर्विस से 9070297 शेयर गिरवी रख कर 363 करोड़ रुपए ले लिए। यह कर्ज था और जुलाई 2008 में लिया गया था। अगस्त 2008 को शेयर बाजार लुढ़क गया। इंडेक्स 22 हजार से घट कर दस हजार पर आ गया और एनडीटीवी के शेयर की कीमत 100 रुपए रह गई। इंडिया बुल्स ने एनडीटीवी से कहा कि हमारा पैसा वापस करो।
एनडीटीवी हमेशा की तरह कंगाल था। प्रणय रॉय ने अपनी साख का सहारा ले कर और शायद बरखा दत्त के टाटाओं, अंबानियों और राडियाओं से रिश्तों को इस्तेमाल कर के आईसीआईसीआई बैंक से अक्टूबर 2008 में 4741721 शेयरों के बदले 375 करोड़ रुपए का कर्ज लिया और ये वे शेयर थे जो आरआरआरआर नाम की अज्ञात कंपनी के पास थे। आईसीआईसीआई की चंदा कोचर जानबूझ कर अंधी हो गई और उन्होंने 100 रुपए का शेयर 439 रुपए का मान कर गिरवी रख लिया। यह पहला बड़ा घोटाला था।
इसके बाद एक और आर्थिक शातिर चाल में शेयर्स का दाम 23 अक्टूबर 2008 को 99 रुपए रह गया और 375 करोड़ के कर्जे के बदले बैंक के पास सिर्फ 47 करोड़ की गारंटी मौजूद रह गई और अब इस शून्य को भरना था। आरआरआरआर कंपनी के बारे में पता चला कि इसके मालिक प्रणय रॉय और राधिका रॉय हैं और जुलाई 2008 से पहले इसके पास एनडीटीवी का एक भी शेयर नहीं था और इसकी कुल पूंजी ही मात्र एक लाख रुपए थी। धंधा यह जरूर सैकड़ों का कर रही थी। केतन पारिख ने ये किया तो बेचारा जेल में और प्रणय रॉय देश को ज्ञान बांटने का पेशा कर रहे हैं।
अभी आघात खत्म नहीं हुए हैं। पैसा का हेर फेर हो जाने के कुछ ही दिन बाद पति पत्नी की चार बार आर नाम वाली कंपनी को चंदा कोचर की बैंक ने लगभग 74 करोड़ का कर्ज फिर दे दिया। यह गैर कानूनी था और अनैतिक भी। कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय भी खामोश रहा। नवंबर में सीबीआई ने जब जीवन बीमा निगम और अन्य बैंकों के अधिकारियों को कुख्यात कर्ज घोटाले में पकड़ा तो पता चला कि एनडीटीवी विदेशों से भी मोटा कर्जा लेता रहता है और उसके बदले वही शेयर गिरवी रखता रहता है जो भारत में दूसरों के पास गिरवी रखे होते हैं। इसके लिए एनडीटीवी की विदेशों में कुछ फर्जी कंपनियां भी है।
अब बिक चुके एनडीटीवी इमेजिन के दस रुपए के शेयर 776 रुपए में बेचे गए। यह तब हुआ जब चैनल बिक जाने के बावजूद घाटे में हैं। मगर प्रणय रॉय ने नकली तौर पर बढ़ाए गए दामों का एक पैसा भारतीय शेयर धारकों को नहीं मिला। वैसे एनडीटीवी के शेयर लगातार लुढ़क रहे हैं और अब विदेशों से नाम भुनाने की कोशिश की जा रही है। जो कंपनियां एनडीटीवी के लिए विदेशों में काम कर रही है उनमें से एक का पता 90, हाई हॉल बॉर्न लंदन हैं और यह रैगरपुरा की तरह अपेक्षाकृत गरीब लोगों के रहने की बस्ती शायद इसी झोपड़पट्टी में प्रणय रॉय को अपना भविष्य नजर आ रहा हो।
लेखक आलोक तोमर जाने-माने पत्रकार हैं.












Rupesh
December 7, 2010 at 4:06 pm
wah wah wah wah, kya kahne. New Delhi Television ki tarz par RPTV Regar Pura Television kyon na chaalu karen aur iske share desh bhar me faile regarpuraon me rahne wale logon me bechen.
बिल्लू
December 7, 2010 at 4:36 pm
प्रणय राय से यह उम्मीद नहीं थी लेकिन क्या करें जब इनके स्टॉफ वाले ही घोटोले बाज है तो यही असली गुरु घंटाल निकले। प्रणय की जगह कोई और होता तो अब तक जेल में होता या सीबीआई के हाथों। लेकिन आप देख लेना न तो कुछ बिगडेगा मिस्टर राय का और न ही चंदा कोचर का। इन घोटोलेबाजों ने इस देश को गांव की भाभी समझ लिया है। करोड़ो खाओं और चलते बनो।
K.P.Malik
December 8, 2010 at 6:40 am
hona to kuch nahi par ALOKJI logon ki ankhe kholte rahiye…….dhanvad.
sanjay
December 8, 2010 at 6:45 am
bahut hi bakvas, aap nakaratmak dimag ke vakti, sabki kamiya ujaagar karte hai, kisi din apni kamiyon par lekh likhiye ham jarur prtikriya denge. har vishay me buraee dundhate rahte ho yaar……
uday
December 8, 2010 at 9:57 am
… ab ghotaalon kaa daur chal rahaa ho to rai ji ne bhi sochaa hogaa ki peechhe rahanaa theek nahee hai … !!!
Jyoti Krishna
December 9, 2010 at 11:36 am
TOMAR JI, LAGTA HAI APNE PATRAKARITA SE TAUBA KAR …LANKSHAN KI LEKHNI SURU KAR DI hai …aap jaise patrakar ko ye shobha nahi deti… PLz aap mudde ki patrakarita karein jis-se aapki pahchan bani hai—— U r the great—but being a well-wisher , Mujhe lagta hai aap jaise logon ko Jan Sarokar ki hi Patrakarita Janchti hai…
JAI KUMAR JHA
December 17, 2010 at 3:50 pm
चंदा कोचर,प्रणय रॉय और राधिका रॉय को इसका जवाब साथ बार जनम लेने के बाद भी नहीं मिलेगा………जैसा आपने लिखा है और तथ्यों के आधार पर सत्य है तो इसकी जाँच भी बहुत ही आसन है | अगर कोई अनारी आर्थिक अपराध शाखा का अधिकारी भी इसकी जाँच करे तो इन तीनों को देश और समाज के साथ गद्दारी के लिए सरेआम फांसी होनी चाहिए………चंदा कोचर की अगर सही तरीके से जाँच हो तो आईसीआईसीआई बैंक इस देश के बर्बादी और इंसानियत को कब्र में पहुँचाने वाला बैंक साबित होगा……..इस देश के सभी बैंक के उच्च स्तर के अधिकारी शर्मनाक स्तर के भ्रष्टाचार के प्रमोटर हैं……..इन सालों को आम आदमी को एक लाख का ऋण देने में भी नानी याद आती है और इस देश के गद्दार को ये लोग अरबों रुपया एक दिन में दे देते हैं……RBI या बैंकों की कार्यवाही पर नियंत्रण रखने वाली साडी प्रक्रिया ख़त्म हो चुकी है इस देश में……..ये सभी बैंक इस देश के इमानदार नागरिकों का नहीं बल्कि भ्रष्टाचारियों की सेवा में लगे हुए हैं…..