: कई संगठनों ने लखनऊ में किया प्रदर्शन : गणतंत्र दिवस के दिन बुधवार को सोनभद्र जिले में आरटीआई कार्यकर्ता अमरनाथ पाण्डेय पर जानलेवा हमला हुआ. नेशनल आरटीआई फोरम के साथ अग्रणी फाउन्डेशन, सीसीआरएस, यूथ इनिशिएटिव तथा अन्य तमाम सामाजिक संगठन एवं अधिवक्ता समुदाय ने इस घटना के विरोध में एक मीटिंग और प्रदर्शन शहीद स्मारक, गाँधी पार्क, लखनऊ में किया.
नेशनल आरटीआई फोरम की कन्वेनर डॉ. नूतन ठाकुर ने आरटीआई कार्यकर्ता अमरनाथ पाण्डेय पर हुए जानलेवा हमले की तीव्र निंदा की और कहा कि डॉ. पाण्डेय पर हुए हमले और उन पर इससे पूर्व हुए हमले के मामलों में तत्काल गिरफ्तारी करते हुए उन लोगों पर कठोरतम वैधानिक प्रावधानों जैसे रासुका, गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट आदि में कार्रवाई की जाए. साथ ही उन्होंने आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के मुद्दे को भी सामने रखा. मानावाधिकार कार्यकर्ता आशीष अवस्थी ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं के मन में भय उत्पन्न करती हैं और क़ानून-व्यवस्था का मजाक हैं.
अग्रणी फाउन्डेशन के अनुपम पाण्डेय ने कहा कि डॉ. पाण्डेय ने मनरेगा में हुए भ्रष्टाचार के सम्बन्ध में अपने इलाके में कई बार आवाज उठायी थी और इस हेतु सूचना का अधिकार अधिनियम का समुचित इस्तेमाल किया था. अतः यह हमला लोकतंत्र पर हमला है. अधिवक्ता अभय कुमार सिंह ने कहा कि अपने ब्लॉक के जिस बीडीओ और अन्य स्थानीय अधिकारियों और ताकतवर लोगों के खिलाफ डॉ. पाण्डेय ने आवाज उठायी थी, उन्हें किसी प्रकार से बख्शा नहीं जाना चाहिए.
अधिवक्ता विनय शाही का मानना था कि इन सभी मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से मुकदमे की तुरंत सुनवाई होनी चाहिए जिससे तुरंत न्याय हो सके. वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण राय ने बताया कि वे उसी इलाके के हैं और अमरनाथ पाण्डेय के कार्यों से भली-भाँती परिचित हैं. उन पर हुआ हमला नितांत निंदनीय है. आल इंडिया बैंक एसोसिएशन के आरके अग्रवाल ने इसे देश में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक ज्वलंत उदाहरण माना और इसे महाराष्ट्र में घटित यशवंत सोनावाने को ज़िंदा जलाने की घटना से जोड़ कर देखा.
इसके साथ ही आरटीआई कार्यकर्ता अखिलेश सक्सेना तथा देवदत्त शर्मा, अधिवाक्तागण सौरभ मिश्रा, राज कुमार शर्मा, सीमा त्रिपाठी, अश्विनी राय, निलय शंकर आदि ने भी इसमें सहभागिता की. इन लोगों ने राज्यपाल के नाम से एक ज्ञापन दिया जिसमें नेशनल आरटीआई फोरम की ओर से इस प्रकरण में और पूर्व प्रकरण में दोषी व्यक्तियों पर कठोरतम वैधानिक कार्यवाही जैसे रासुका, गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट आदि में कार्यवाही करने, मामले में शामिल सभी शासकीय अधिकारियों के खिलाफ जांच उनके गलत प्रशासनिक और आपराधिक कृत्यों के लिए दण्डित करने, पुलिस अधिकारियों के स्तर पर जानबूझ कर सुरक्षा अथवा न्यायोचित कार्यवाही करने में लापरवाही के लिए उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही करने तथा भविष्य में आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के सम्बन्ध में गंभीरता से देखने और तत्काल कार्यवाही करने विषयक शासनादेश सभी आयुक्तों, पुलिस रेंज अधिकारियों, जिला मजिस्ट्रेटों, पुलिस अधीक्षकों के लिए जारी करने की मांग रखी.











