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अमर उजाला, गाजियाबाद में जश्‍न का दौर

 

ऐसा नहीं है कि अमर उजाला मे राजुल महेश्वरी कहीं कोई कसर छोड़ रहे हों या संस्थान को आगे बढ़ाने मे किसी प्रयास से पीछे हट रहे हों. अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने मेरठ मे सभी कर्मचारियों से मुलाकात की और डटे रहने का जज्बा दिया. लेकिन अमर उजाला में बाहर से आये “व्यास्कर्मी” खुश हैं. ऐसा लगता है कि उन्हें सबसे बड़ा डर स्वर्गीय अतुल जी का ही था, जिनके स्वर्गवासी होने के एक महीने के अन्दर ही उन्होंने जश्न मनाना शुरू कर दिया. अतुल जी को स्वर्गवासी हुए अभी एक महीना भी नहीं हुआ है कि अमर उजाला गाज़ियाबाद मे जश्न मनाये जा रहे हैं, केक काटा जा रहा है.

 

ऐसा नहीं है कि अमर उजाला मे राजुल महेश्वरी कहीं कोई कसर छोड़ रहे हों या संस्थान को आगे बढ़ाने मे किसी प्रयास से पीछे हट रहे हों. अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने मेरठ मे सभी कर्मचारियों से मुलाकात की और डटे रहने का जज्बा दिया. लेकिन अमर उजाला में बाहर से आये “व्यास्कर्मी” खुश हैं. ऐसा लगता है कि उन्हें सबसे बड़ा डर स्वर्गीय अतुल जी का ही था, जिनके स्वर्गवासी होने के एक महीने के अन्दर ही उन्होंने जश्न मनाना शुरू कर दिया. अतुल जी को स्वर्गवासी हुए अभी एक महीना भी नहीं हुआ है कि अमर उजाला गाज़ियाबाद मे जश्न मनाये जा रहे हैं, केक काटा जा रहा है.

गाज़ियाबाद मे अमर उजाला मे काम करने वाले जो पुराने पत्रकार हैं, नए लोगो के इस कुकृत्य पर वह उन्हें कोस रहे हैं और पूरे जश्न का बायकाट कर रहे हैं. बात शुरू होती है अमर उजाला की हाल मे ही लांच हुई पत्रिका “पंचायत प्रहरी” से. पिछले छह महीनों से, जबसे अमर उजाला गाज़ियाबाद मे कुछ कथित “व्यास्कर्मी” उपस्थित हुए हैं, पुराने लोगों को परेशान किए जाने और हटाये जाने का दौर जारी है. इसी के साथ नए लोगों की उपयोगिता सिद्ध करने के पुरजोर प्रयास किये जा रहे हैं. पहले सोचा गया कि गाज़ियाबाद में ट्रांस हिंडन का अलग अख़बार निकाला जायेगा, जो पूरा नहीं हो पाया. इसके पीछे असल बात तो यह थी कि स्व. अतुल जी इस विचार से सहमत नहीं हो पाए. लेकिन व्यास्कर्मियों ने किसी तरह जोड़ जुगाड़ के दम पर अपने सभी खास लोगों को भरती कर लिया था. इन लोगों की योग्यता की बानगी दो उदाहरणों से देखी जा सकती है –

1- नए लोगों ने कई बार गाज़ियाबाद की लिंक रोड को लिंग रोड लिखा और प्रकाशित किया.

2- ब्लड डोनेशन कैम्प में जब इन लोगों को महिलाएं नहीं दिखती थी, तो पहले पेज पर खबर प्रकाशित होती थी कि महिलाएं रक्तदान नहीं करती. इसे प्रकाशित करने से पहले इस तथ्य पर कतई ध्यान नहीं दिया गया कि साठ फीसदी से भी ज्यादा महिलाएं एनीमिक होती हैं, रक्त की कमी से जूझ रही होती हैं. मजे की बात ये है कि इस खबर को लिखने वाली भी एक महिला पत्रकार थीं.

बहरहाल ऐसे लोगों से जब कुछ नहीं हो पाया तो व्यास्कर्मियों ने नए आये लोगों की उपयोगिता सिद्ध करने को “पंचायत प्रहरी” निकला. अमर उजाला के एमडी स्व. अतुल जी के स्वर्गवास को अभी एक महीना भी नहीं बीता कि इन लोगों ने मंगलवार को अमर उजाला के कार्यालय में “पंचायत प्रहरी” का बाकायदा जश्न मनाया. दफ्तर मे स्व. अतुल जी के कमरे में केक काटा गया. सूत्र तो बताते हैं कि शाम को दारू मुर्गे की पार्टी भी हुई. इस दौरान अमर उजाला के दो पुराने लोगों को छोड़कर कोई भी पुराना पत्रकार या कर्मचारी इस जश्न मे शामिल नहीं हुआ.

पुराने लोगों का कहना है कि एमडी के जाते ही इन लोगों ने खुलेआम कहना शुरू कर दिया है- अब अखबार पर उन्हीं का राज है, वह जो चाहे, वह करेंगे. कुछ लोगों से जब यह देखा नहीं गया, तो उन्होंने राजुल जी को मेल करके मामले की जानकारी भी दी. पुराने लोगों ने यह भी बताया कि जो पंचायत प्रहरी निकला है, बाज़ार मे उसे खपाना भी मुश्किल हो गया है. आंकड़ों से भरी इस पत्रिका को किसान समझ ही नहीं पा रहे तो खरीदेंगे क्या. और जो आंकड़े भी दिए गए हैं, वह भी गलत दिए गए हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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0 Comments

  1. बेनामी

    February 4, 2011 at 6:48 am

    अगर सच है तो शर्मनाक है। पिछले 15 साल से देख रहा हूं अमर उजाला को कभी कोई, कभी कोई लूटकर ही खा रहा है। राजुल जी बेचारे अब तक लो प्रोफाइल रहते थे अब अचानक इतनी ज़िम्मेदारियां आ गई हैं तो शायद समझ ही नहीं पा रहे हैं कहां से शुरु करें। उनकी भलमनसाहत को लोग इस तरह से कैश कर रहे हैं ये तो बड़ी शर्म की बात है। भगवान राजुल जी को अपना भला-बुरा समझने की ताकत दे। आमीन।

  2. shyam singh

    February 4, 2011 at 7:50 am

    Naam majedaar diya:
    Vyaskarmi!!!
    Badhaaee

  3. राजेश पांडे

    February 4, 2011 at 8:07 am

    अभी अमर उजाला गाजियाबाद की टीम आगरा भी घूमकर आई है। इसकी जानकारी फेसबुक पर भी देखी जा सकती है।

  4. rahul sharma

    February 5, 2011 at 8:25 am

    YE JANKARI YADI SAHI HAI TO NISHCHIT TOR PAR DUKHAD HAI, MAGAR YE TAY HAI KI BHADAAS KO YE JANKARI BHEJNE WALE SAJJAN NISHCHIT TAUR PAR BHI BANDHU HONGE JO AMAR UJALA KI NAI TEAM KE HISAAB SE YA TO APNE KO DHAAL NAHIN PAYE HONGE YA FIR NAI TEAM KO PACHA NAHIN PA RAHE HONGE.MAIN TO ITNA HI KAHUNGA KI JISKI LATHI USKI BHENS WALI KAHAWAT BARSO SE KAHI JATI AA RAHI HAI. TO AMAR UJALA ME YADI AESA HO RAHA HAI TO KYA GALAT HO RAHA HAI.RAHUL SHARMA

  5. Aarchi

    February 7, 2011 at 2:57 am

    जहां दिनकर गुप्ता जैसे दलाल रहेंगे वहां ये तो होना ही था

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