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अमर उजाला, बरेली से अमरीश वाराणसी भेजे गए

अमर उजाला, बरेली से लोगों का तबादला किए जाने का दौर जारी है. ताजी खबर है कि बरेली से आईटी हेड अमरीश त्‍यागी को बनारस यूनिट भेजा गया है. अमरीश की जगह बरेली यूनिट में कानपुर से किसी को भेजा जा रहा है. अमरीश के पहले अशोक शर्मा, भूषण वर्मा, पंकज अग्रवाल का तबादला दूसरे यूनिटों में पहले ही किया जा चुका है. तबादला से नाराज पंकज ने इस्‍तीफा दे दिया था. अमर उजाला, बरेली में कर्मचारी सहमे हुए ना जाने कब उन्‍हें कहीं दूसरे जगह जाने का फरमान न थमा दिया जाए.

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0 Comments

  1. Anil

    January 25, 2011 at 7:37 am

    Amar Ujala ke liyen ye koi nayee baat nahi hain….Mr. Sunil Rastogi to suroo se hi Hitler hain ,,,or hamesha se Management ko Black mail karte rahe hain tabhi to wo kisi Senior ka appointment IT Dept. main nahi hone dete hain……bus kuch chamche paal rakhe hain unhi ko sab milta hain……

    Unko daar lagta hain ki koi senior banda IT Dept. main aa gaya to unki chutthi ho jayegi……kyonki hum sabhi jante hain ki unki qualification kya hai….Hotel Management karne ke baad wo IT Head hain……hey Amar Ujala tera kya hoga……..

    Ye transfer bhi unki Hitler wazi ka namoona haim…..

    MD Sahab jago or koi dang ka banda layo IT Head ke liyen….nahi to….bus

  2. dhanish sharma

    January 26, 2011 at 6:36 am

    amreesh ji so sad. apki hi tarah sa bahad hi honest sub editer ramesh thakur ji ka tabadla chandigar kar diya tha.jissa bareilly k logo ko jhatka laga tha. imandaro k lia bareilly main jagah nai hai.

  3. Ankush

    January 27, 2011 at 9:44 am

    ” Please SAVE this IT Dept. from a Hitler called Mr. Sunil Rastogi”

    I am agreed with the comments of Mr. Anil, Mr. Sunil Ratogi ji kisi ko nahi aane dete hain IT Dept. main as a Sr. Person kyonki unko dar lagta hain ki unki naukri chali jayegi or kaali kamayee bhi band ho jayegee….tabhi to DO DO Honda city rakhte hai.

    Ha ha …Hotel Management ki Degree or IT Head…….Hasi aati hain Amar Ujala per……..HR walo kuch karo ..vaise HR bhi kya karega….Mr. Vaibhav ke vaski to vaise hi kuch nahi hain…wo to khud hi aapni naukri bachane main lage hain……..ek saal se ghar baitha insaan aapni naukri bachayen ya IT Dept. ko sudharen…….
    Hum sub hi jantein hain ki HR Dept. main ek hi insaan tha jo inki band bajata tha jisko Mr. Vaibhav ne Mr. sanjeev chauhan se pahele hi nikar diya…….vaise HR ka bhi Bhagwan hi maalik hain………jo HR ko sudharna chaten hain unhe nikal diya jata hain………..MD Sir, please save old good plople and save Amar Ujala..

  4. abhishek bhattacharya

    February 5, 2011 at 4:26 am

    अमर उजाला पुराने लोगों को हटाकर अपनी दुर्दिनों को आमंत्रण दे रहा है। प्रबंधन, खासतौर से राजुल जी को इस पर इस वक्त विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। अखबार का दिनों-दिन भट्टा बैठा जा रहा है। अगर हालातों पर जल्द ध्यान नहीं िदया गया तो अमर उजाला प्रबंधन सर्कुलेशन के झूठे आंकड़ों पर ही अपने आपको गौरवांवित महसूस करता नजर आएगा। यहां मैं राजुल जी को बताना चाहता हूं कि सर्कुलेशन वाले कई बार खुद अमर उजाला की प्रतियां नकली हाकरों को बिकवा कर बाद में अखबार या तो जाल डालते हैं या फिर उसे रद्दी में बिकवा देते हैं। हालांकि वो एेसा सिर्फ आपको भेजी झूठी सर्कुलेशन फिगर कोमैंटेन करने के लिए करते हैं, लेकिन कितने दिनों वो एसा कर सकेंगे अपनी जेब से यह तो वक्त या फिर संस्थान के साथ कब तक उनकी निष्ठा उनकी बरकरार रहती है। उस पर ही तय करेगा। संपादक से लेकर पूरा संपादकीय विभाग में फेरबदल की जरूरत है। अगर संपादक की बॉयलाइन पर गौर फरमाए तो च्यवनप्राश वाली खबर से लेकर उमंग 2011 की लीड स्टोरी को पढ़कर लोग यह अबतक नहीं समझ पाए हैं कि वह कहना क्या चाहते हैं। मुझ जैसे सुधिपाठक के पास उस वक्त अखबार को फेंकने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं था। हालांकि मैने अपने आप को प्रेस लाइन से वापस ले लिया है, लेकिन मेरी निष्ठा अभी भी अखबार के प्रति बरकरार है और सदा ही रहेगी। लेकिन राजुल जी आपके अडिग फैसले अब शायद अडिग न रहकर काफी लचर हो गए हैं, जिससे आपकी छवि काफी प्रभावित हो सकती है। एसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि आपने बरेली में सीनियर सबएडीटर कंचन वर्मा का तबादला मुरादाबाद कर दिया था,लेकिन बरेली में पुनः बैठने का आदेश देकर आपने अपने फैसलों की अहमियत को हल्का किया है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि कंचन बरेली में धंधा कर रहे है, वो कोई बिजनेस नहीं अपने जीजा अजय सक्सेना के साथ लोगों के राइफल के लाइसेंस, लोगों को थाने से छुड़वाना जैसा काम अमर उजाला के बैनर का सहारा लेकर कर रहे हैं। अजय, अमर उजाला कॉम्पैक्ट, बरेली में सबएडीटर है। शराबी किस्म का अजय और कंचन दैनिक जागरण से निकाले हुए हैं, जो अब सिरमौर बन गए हैं। राजुल जी, मेरा आपसे अनुरोध है कि प्रभात सिहं, संपादक, बरेली की बायलाइन और स्थापना दिवस के मौके पर निकाले गए पूरे संस्करण को पढ़िएगा जरूर।

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