अमर उजाला में बहुप्रतीक्षित इंक्रीमेंट और प्रमोशन के लेटर बंटने शुरू हो गए हैं. इंक्रीमेंट और प्रमोशन से तमाम लोगों के उम्मीदों को झटका लगा है. सूत्रों का कहना है कि ग्रुप में जो इंक्रीमेंट की अर्हता रखते थे, उनको पांच से दस फीसदी के बीच इंक्रीमेंट मिला है. प्रमोशन में भी खास लोगों का ही ध्यान रखा गया है. इंक्रीमेंट और प्रमोशन को लेकर अंदरखाने में उजालाइटों में असंतोष व्याप्त है.
जिन लोगों का प्रमोशन हुआ है उसमें नोएडा में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत इंद्रमोहन झा तथा सुनीता कपूर को प्रमोट करके चीफ सब एडिटर बना दिया गया है. देहरादून के एनई पुरुषोत्तम कुमार को सीनियर एनई, चीफ सब एडिटर ओपी तिवारी को डीएनई, सीनियर सब एडिटर शेषमणि शुक्ला, कुमार अतुल एवं विपिन बनियाल को चीफ सब एडिटर बना दिया गया है. बरेली में शरद मौर्य और आलोक तिवारी को एनई बना दिया गया है. आगरा में अनुज शर्मा को एनई तथा ब्रजेश दूबे को चीफ सब एडिटर बना दिया गया है.












saswat
July 7, 2011 at 6:47 pm
इस बार के प्रमोषन और इन्क्रीमेंट में संपादकों के चमचों की चांदी रही। कम से कम बनारस में तो यही दिख रहा। कई वरिश्ठ और तेज तर्रार लोगों को लात मार काम कम और संपादक की चमचागिरी करने वाले सीनियर सब से चीफ सब बन गए। उनमें एक तो संपादक के सजातीय और उनके जिले के रहने वाले हैं और दूसरे के पास बास को खुष करने की कला है। कुछ माह पूर्व ही उनके दिले इजहार के किस्से की चर्चा अखबारों के आफिसों में चटकारे लेकर सुने जाते थे। हद ये हो गई थी कि षहर के आम नागरिक भी चर्चा करने लगे थ। इसके चलते लोग कयास लगाने लगे थे कि इनकी नौकरी आज गई कि कल! ल्ेकिन वाह रहे चमचागिरी कि मर्यादाओं को तोड़ने का इनाम उन्हें प्रमोषन के रूप में मिला। जिसे सर्वाधिक इन्क्रीमेंट मिला है वह षायद अमर उजाला ग्रुप में सर्वाधिक छुटटी लेने वाला व्यक्ति है। वह हमेषा कागजों में बीमार और सड़क पर फर्राटा लगाने की कला जानता है।
Raam singh
July 7, 2011 at 2:33 pm
sharad maury ko sanpadak ki chamchagiri ka labh mil hi gya badhai ho
anand singh
July 7, 2011 at 3:14 pm
ओम प्रकाश जी,
बधाई।
चलिए, देर से ही सही आपको तरक्की तो मिली। मैं आज भी आपके अंदर के संपादक को सलाम करता हूं।
कहानियों का क्या सिलसिला है। दम तोड़ दिया उन्होंने या कहीं कुछ बचा है।
rajesh patel
July 8, 2011 at 7:37 am
badhai ho sharad ji.
abhay singh munna, x rep, amar ujala
July 8, 2011 at 1:48 pm
kisi sampadak ka sajatiy hona koi demerit nahi hoti.dusaro par ungali uthane par tin ungaliya khudvkhud usaki tarph uth jati hai.alochana hamesa swasth tarike se ki jani chahiye. ek patrakar ki soch itni chhoti nahi honi chahiye. sahi arop lagane se critic ka man badta hai. hawa mei bat karane walo ki creativity samapt ho jati hai.
abhay singh varanasi.