: हाजी याकूब कुरैशी और हाजी अखलाख के संरक्षण में चल रहा है यह कारोबार : मैं एक ऐसी समस्या से आप सभी लोगों को रूबरू कराना चाहती हूँ, जिसके बारे में अभी मेरठ के बाहर बहुत कम लोग जानते हैं, पर जब अपने आप में बहुत ही गंभीर और खतरनाक समस्या है. यह मामला है मेरठ के कमेले का. कमेला मेरठ में जानवरों का कटान करने वाला स्थान को कहते है.
यह मेरठ शहर के बाह्य इलाके में हापुड रोड पर स्थित है, यह ग्राम माफ़ी दमवा के खसरा सं0-3703 व 3708 पर स्थित है, जो मेरठ नगर निगम की जमीन है. इस तरह मूल रूप से यह कमेला मेरठ नगर निगम की सम्पत्ति है.
कमेले (पशु वधशाला) में किस प्रकार कार्य होना चाहिये, को ले कर बहुत सारे स्पष्ट नियम बनाये गए हैं. सैद्धान्तिक व कानूनी रूप से कमेले को यथा सम्भव साफ सुधरा रखा जाना चाहिये ताकि वह स्वच्छता के माप-दण्ड पूरा कर सकें. इसके साथ ही वहां जानवरो को इस प्रकार से काटा जाये जिससे किसी प्रकार का स्वच्छता सम्बन्धी खतरा उत्पन्न न हो. यह निर्देशित है कि यहॉं मात्र स्थानीय आपूर्ति के लिये कटान किया जाये, अतः यहाँ केवल वही लोग जानवरो को कटवाने के लिये जा सकते हैं जिनको उनका मॉंस बेचने का लाइसेन्स प्राप्त हो. कमेला या तो नगर निगम के द्वारा स्वयं संचालित किया जाये अथवा किसी अधिकृत ठेकेदार द्वारा नियमानुसार शुल्क जमा करने के बाद संचालित किया जाये.
जो जानवर इन कमेलों में लाये जाते है, उनकी मृत्यु पूर्व परीक्षण अवश्य किया जाये, जिससे उनके बारे में स्पष्ट जानकारी हो सकें. मुसलमानों के लिये उपयोग में लाये जाने वाले मांस के लिये इस्लाम की रीति के अनुसार हलाल खाद्य बनाने के लिए जबह की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिये. जबह की प्रक्रिया में जानवर के गले पर एक धारदार हथियार से काफी तेज व गहरा घाव किया जाता है जिसमें कई सारी बातों का ध्यान रखा जाता है. जानवर की मृत्यु के बाद उसका पोस्टमार्टम परीक्षण होना चाहिये.

इसके साथ ही प्रत्येक कमेले में एक ईटीपी प्लान्ट (एक्यूमेन्ट ट्रीटमेन्ट प्लान्ट) होना चाहिये. यह प्लांट दृव्य को साफ करने वाला होता है. इसमें खून, गन्दा पानी और शेष जल इत्यादि डाले जाते है, जिससे यह उसे साफ करके शुद्ध जल प्रदान करता है. इसके अलावा एक टेण्डरिंग प्लान्ट होना चाहिये. टेण्डरिग प्लान्ट सॉलिड वेस्ट मेन्जमेन्ट के लिये है. यह सभी ठोस अवशेष डाले जाते है और यह प्लान्ट उन्हें पर्यावरण के लिये हानिरहित बना देता है.
एक कमेले में अधिकतम 350 जानवरों का कटान अनुमन्य है. वह भी केवल वही जानवर काटे जा सकते है जो दुधारू न हो, जिनका कोई अन्य उपयोग न हो, जो बूढ़े हो गये हों और बीमार भी न हों. यह सब एक पशु चिकित्सक द्वारा जॉंचा जाता है जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है. यह नियम किया गया है कि पशु चिकित्सक द्वारा अधिकतम 96 जानवर ही एक दिन में जॉंचे जा सकते हैं.
इन नियमों के विपरीत सबसे बड़ा प्रश्न है कि मेरठ में वर्तमान स्थिति क्या है? सच्चाई यह है कि मेरठ में कमेला उप्र राज्य प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड द्वारा बन्द किये जाने के निर्देश दिये गये हैं. इस तरह से सरकारी अभिलेखों के अनुसार मेरठ का कमेला बन्द है फिर भी खुले आम अवैध तरीके से चलाया जा रहा है. इस तरह मेरठ नगर निगम की जमीन पर कब्जा करने कुछ अत्यन्त प्रभावशाली ताकतवर लोगो द्वारा पूर्णतः अवैध ढंग से यह गलत कार्य किया जा रहा है, जिसमें जानवरों को अत्यन्त ही घृणित, दूषित और अत्याचारी ढंग से काटा जा रहा है.
इस तरह जानवरों को काटने वाले लोग किसी भी नियम व कानून का पालन नहीं कर रहे है. कमेले में न कोई पशु चिकित्सक है, कोई ईटीपी प्लान्ट ही काम कर रहा है, पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर चिन्ता नहीं है, अधिकत्म 350 के स्थान पर 3-4 हजार कटान रोज हो रहे हैं. जानवरों को काटे जाते समय न तो एन्टी मार्टम, पोस्टमार्टम ही हो रहा है. इस्लामी नियम के अनुसार जबह प्रकिया का बिल्कुल पालन नहीं हो रहा है. दुधारू व काम लायक जानवर भी खूब काटे जा रहे हैं.
उन जानवरों के खून, शरीर के हिस्से, मॉंस के लोथडे, चर्बी, आन्तरिक अंग और अन्य बेकार की चीजे बहुत ही गन्दें तरीके से आस-पास के वातावरण में छोड़ दी जाती है. इन जानवरों की हड्डी खुली भट्टी में जलाई जा रही है, जिनसे कमेले के आस-पास 8 से 10 किलोमीटर में बहुत दुर्गन्ध आती है.

इस तरह खून, शरीर के अंग, अवशेष आदि के आस-पास खुली नालियो में बहने के कारण काफी पर्यावरण प्रदूषण फैल रहा है. खून और अन्य अवशेष पास ही की काली नदी में जा रहे हैं, जिसके कारण व नदी इतनी प्रदूषित हो गई है कि वह मानव के लिये पूर्णतः अनुपयोगी हो गयी है. काली नदी आगे चलकर गंगा नदी में मिल जा रही है. इस कारण गंगा नदी भी प्रदूषित हो रही है. खुले-आम मॉंस के लोथड़े और शरीर के टुकड़ों से यहॉं-वहॉं फैलने से कई तरह की बीमारियॉं व स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या हो रही है. खुले नाले में शरीर के टुकडें, खून, अवशेष के बहने से बहुत ही वीभत्स दृश्य दिखता है. जिस प्रकार एन्टीमार्टम व पोस्टमार्टम को बिना कराये मॉंस को बेच दिया जाता है, उससे कई प्रकार की बीमारियॉं, स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरों को होना सम्भव है.
चूंकि इस्लाम द्वारा निर्देशित जबह प्रक्रिया का अनुपालन नहीं हो रहा है और वह मांस मुसलमानों को दिया जा रहा है, इससे उनकी धार्मिक भावना से खिलवाड़ हो रहा है. यह पूरी प्रक्रिया बहुत ही गन्दे तरीके से भ्रष्ट उपायों को अपना कर की जा रही है, जिससे भ्रष्टाचार को सीधे-सीधे बढ़ावा मिल रहा है और स्थानीय प्रशासन के तमाम स्थानीय उच्च अधिकारी जिसमें मंडलायुक्त, जिला मजिस्ट्रेट, नगर आयुक्त, स्थानीय उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी आदि कोई भी शामिल हो सकते है, अपने अन्य कनिष्ठ अधिकारी मिलकर इस अवैध कटान को संचालित कर रहे हैं, जिससे भारी मात्रा में काला धन पैदा हो रहा है.
इस पूरी प्रक्रिया में सरकार का भारी नुकसान हो रहा है. यद्यपि इस कमेले से निकलने वाला मांस विदेशों को निर्यात हो रहा है, लेकिन उसपर न तो कस्टम और ना ही एक्साईज ड्यूटी दिया जा रहा है तथा सरकारी धन का नुकसान हो रहा है. स्थानीय प्रशासन इस मामले में पूरी तरह चुप है, क्योंकि जो व्यक्ति इस कमेले को चला रहे हैं, वह राजनैतिक रूप से काफी ताकतवर हैं और हमेशा सत्ताधारी दलों के साथ रहते है. अतः जिला प्रशासन हमेशा अपनी जान बचाने के लिये इनके साथ रहता है. इनमें खास कर स्थानीय विधायक और बसपा नेता हाजी याकूब कुरैशी तथा बसपा से सपा और अब पुनः बसपा में आये हाजी अख़लाक़ के नाम प्रमुख हैं. फिर यह लोग भारी मात्रा में अवैध पैसा भी अधिकारियों को देते हैं, जिसके कारण यह लोग ऑंख मूंद लेते हैं.
इस मामले में इस प्रकार से जानवरों को ट्रकों तथा अन्य वाहनों से सारे नियम को दरकिनार करके एकदम ठूंस कर लाया जाता है व वास्तव में अत्यन्त चिन्ताजनक है और पशु क्रूरता से सम्बन्धित नियमों का खुला उल्लंघन है. कई बार तो यह जानवर लाद कर लाने की प्रक्रिया में ही दबकर मर जाते हैं. इस विषम स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय लोग ना जाने कई बार लामबंद हुए हैं, पर हर बार पैसे और ताकत के मोल से कमेले के ठेकेदारों ने इन लोगों के संघर्षों को समाप्त करते हुए अपना काला धंधा बरक़रार रखा है. अभी इन दिनों भी मेरठ में कमेले को ले कर विरोध हुआ है, चार-पांच दिन पहले हुए दंगे में भी इसी कमेले की प्रमुख भूमिका मानी जाती है. इसे लेकर कई सारी रिट भी हाई कोर्ट में पेंडिंग है पर वहाँ से भी फैसला नहीं आ सकने के कारण अब तक कोई न्याय नहीं मिल सका है.
यह एक ऐसी गंभीर समस्या है जिस पर हर किसी को ध्यान देना और इसे दूर-दूर तक फैला कर ध्यानाकर्षण करना आवश्यक होगा. आईआरडीएस और नेशनल आरटीआई फोरम की तरफ से हम लोग स्थानीय अधिवक्ता और सामाजिक रूप से जुझारू संदीप पहल के साथ मिल कर इस मुद्दे पर काम करने में आगे बढे़ हैं. अभी प्रारम्भ में हम इस मुद्दे से बाहर के लोगों को जागरूक करने और जोड़ने का काम कर रहे हैं. हमने इसके लिए निम्न दो ब्लॉग भी शुरू किये हैं – http://kamelameeruthindi.blogspot.com/ एवं http://kamelameerut.blogspot.com/. यह एक व्यापक और कठिन लड़ाई है लेकिन इसमें बिना हार-जीत की चिंता किये लड़ा जाना बहुत जरूरी है.
डॉ. नूतन ठाकुर
सचिव, आईआरडीएस एवं
कन्वेनर, नेशनल आरटीआई फोरम












धीरेन्द्र
May 4, 2011 at 1:37 pm
नूतन जी, जब तक मुसलमानों के लिये अलग से प्रोवीजन बनते रहेंगे यही होगा.. और यह तब तक चलेगा जब तक पूरी तरह से इस्लामिक राज न आ जाये.. क्योंकि नेता वह कोई भी कार्य नहीं करते जो मुसलमानों के खिलाफ हो, चाहे फिर वह काम पूरी तरह से कानूनी हो और न्यायालय ने ही क्यों न दिया हो. अब मुद्दे की बात पर आइये, यह काम कराना किसे है, आई-ए-एस और पी-एस अफसरों को. कराते क्यों नहीं? या तो लालच होगा या डर. डर होगा तो या जान का या ट्रांसफर का. यदि जान का है तब भी नौकरी करनी बेकार है और ट्रांसफर का है तब भी. और यदि कोई लालच है तो फिर कहना ही क्या…
Yuvraj
May 4, 2011 at 2:10 pm
यह कुछ बात हुई, बहुत बढ़िया 🙂 लेकिन मैडम कृपया बताएं कि क्या ब्लॉग पर टिप्पणी करने वालों को इस स्वछता अभियान से जुड़ा मान लिया जाए और क्या सरकार यह मानेगी? लोग जागरूक तो हो जायेंगे परन्तु सिर्फ जागरूक ही होंगे| मेरठ में ख़ास कर के कमेले के आस पास के क्षेत्र के लोग इस बात से बखूबी वाकिफ हैं, कि कमेले में किस-किस का हिस्सा है| (सुनने में आया है कि पूर्व बी. जे. पी. विधायक लक्ष्मीकांत वाजपेयी का भी है?) इसके बावजूद लोग सड़कों पर नहीं उतरे| यहाँ तक कि मुस्लिम बहुल आशियाना कॉलोनी के लोग भी कुछ समय पहले हो-हल्ला करके चुप हो गए| इस कॉलोनी में अब कोई अपनी बिटिया का रिश्ता भी करना नहीं चाहता, क्योंकि यहाँ पानी के नल से खून मिला सरकारी-स्वच्छ जल ही आता है | इससे पहले, एक अधिवक्ता शायद अमित अग्रवाल ने काफी कुछ करने का प्रयास भी किया, मानवाधिकार आयोग, पर्यावरण मंत्रालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सब किया| कुछ ठोस होता अभी तक तो दिखा नहीं, तमाम तरह के आदेश आ कर नगर निगम के कूड़ा संग्रहण केंद्र में संगृहीत हो चुके हैं| एक काम हुआ कि उनको जान से मारने कि धमियाँ तक मिलने लगीं| लोग सड़कों पर तब भी नहीं उतरे| दरसल अब लोग जागरूक हो गये हैं, कि जब तक मीडिया का डंडा साथ न हो बेकार में किसी को “ब्लेकमेल” करने से कुछ फायदा नहीं| देखते हैं यह डंडा प्रोढ़-जनता को कब मिलता है|
आज आठ दिन हो चुके हैं, जैन संत मैत्री प्रभा सागर जी को बड़ोत में आमरण अनशन पर बैठे हुए| अब तक २० किलो वजन कम हो चुका है, संत महाराज का| वो भी कमेलों के विरोध में सरकार को उठाना चाहते हैं| लेकिन सरकार कुम्भकर्णी नींद सो रही है| न मीडिया की, न विरोधी पार्टियों की भूमिका जनता को एक जुट करने की दिखाई देती है| दोनों ने कुछ काम किया यह ज़रूर कह सकते हैं|
Rakesh
May 4, 2011 at 3:15 pm
भले ही मै आपके इस अभियान का एक हिस्सा न बन सकूँ लेकिन पशुओं के साथ हो रहे जघन्य अत्याचार को देखते हुए मैंने आजीवन शाकाहार का व्रत लिया है. आपके हार्दिक धन्यवाद.
umesh soni
May 4, 2011 at 7:01 pm
ईश्वर करे इन सबकी दशा वही हो जो कमेले मे कटने वाले जान्वरो की होती है।
jai kumar jha
May 5, 2011 at 3:29 am
क्या ऐसे ही गैरकानूनी और जघन्य कुकर्म करने वालों को हाजी कहा जाता है…? मेरठ के मुसलमानों को भी इस कमले तथा इसके संरक्षण कर्ताओं के विरुद्ध सड़कों पे उतरने की जरूरत है…ऐसे लोगों को तुरंत जेल में डालने की जरूरत है ऐसे लोग अपने नाम के आगे हाजी लगाते हैं ये हाजी जैसे पवित्र शब्द का अपमान है….मेरठ के DM और पुलिश अधीक्षक को या तो त्यागपत्र दे देना चाहिए या चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिये…..क्या फायदा है ऐसे DM और SP का जब नाक के नीचे इतना जघन्य गैरकानूनी काम हो रहा हो…
mukesh goel, meerut
May 5, 2011 at 12:12 pm
नूतन जी, बहुत बढ़िया
S R Pandey
May 5, 2011 at 1:50 pm
Thanx Dr Nootan.
Now only Pubilc can Stop KAMELA.
……………………………S R Pandey
sikander hayat
May 5, 2011 at 2:55 pm
muslim neta or rehnuma hi asal me musalmano ki sari samasyo ki jad ha muslim bhudijivi alapsanyak kote ki malai marte ha or aam muslim buri tarah gumrah hoker in socalled apno ka or bazrangeyo ka dohra shoshan ka shikar banta ha
geeta singh
May 5, 2011 at 4:06 pm
sahi ma kamela meerut sa hetna chahiya kyunki badbo or perdushen sa wanha ka logo ka jeena mushkil hai……….
shikha sharma
June 27, 2011 at 10:18 am
un salo suar ke sath bhi wahi hoga jo in janwaro ke sath ho raha h. ye padhkar aur dekhkar aaj musalmano se aur bhi nafrat ho gayi. bhains kat kar use pura bhi nai mara. wo bechari tadap rahi h. sale sab marenge. inki ma ki…………..