: कैसे चुप रहूँ? : आज एक बैठक में स्वर्गीय चंद्रशेखर जी के बेटे नीरज, वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी जी की उपस्थिति में ब्राडबैंड तकनीक की बात करने लगे. मैंने तत्काल कहा कि भाई नीरज कैसे रहूँ चुप? तुम क्या अब भी समाजवादी पार्टी में ही हो जो कम्प्यूटर, ट्रैक्टर और अंग्रेजी विरोधी है या फिर तुम्हे भी मेरी ही तरह निष्काषन का डर नहीं लगता.
सितारों के खिलाफ मेरी पुरानी पार्टी में सितारे मेरे पहले भी थे राजबब्बर जी, और मेरे जाने के बाद भी बदस्तूर कायम हैं, जया बच्चन जी. दोरंगी संस्कृति एवं दोहरे आचरण के मापदंड की सियासत के कई चेहरे हैं और आलम है कि “जब भी जी चाहे नए चेहरे लगा लेतें हैं लोग, एक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेतें है लोग”. बैठक से नीरज मुझे अपनी गाड़ी में बिठा कर बाहर लाया, आजकल मै “बे-कार” जो हूँ.
राजनीति में व्यक्तिगत हमले का बुरा हश्र होता है. जिसे हम आज गाली देते हैं कल उसकी जरूरत पड़ती है. देखिये कल तक एक दूसरे की लानत मलामत करने वाले मेरे पुराने दल के नेता बेकरार दिल लेकर किसी रूठे को वापस लाने “लखनऊ टू रामपुर” की एतिहासिक यात्रा कर रहे हैं. कभी नरेन्द्र मोदी जी जो एन.डी.ए. के भाजपा के शीर्ष नेता है तो कभी राहुल गांधी जी, बिहार में व्यक्तिगत हमलों का दौर जारी है.
घबराईये मत, राहुल जी आपको गंगा में भसांग की बात कही गई है. गंगा में भसांग तो माँ दुर्गा का होता है. कुछ सियासत के बुद्धिमानों ने आपकी अनावश्यक इतनी चर्चा से आपको राजनीति के महादेव का दर्जा दे डाला है. मैं आजकल चुप रहने की कोशिश करता हूँ पर जब इस तरह का शालीन सियासी आचरण हो तो कैसे चुप रहूँ? अपने पुराने साथियों को इतना ही-
“तिजारत अपना पेशा था मगर अब इसको क्या कहिए,
अँधेरे को उठा लाए, उजाला छोड़ आए है”
अमर सिंह के ब्लाग से साभार












अमित गर्ग. जयपुर. राजस्थान.
October 28, 2010 at 7:42 pm
बहुत खूब. आज कल अमर सिंह जी काफी जमकर लिख रहे हैं. चलिए देश में कुछ नेता तो ऐसे हैं जो लिख भी सकते है… वरना अधिकतर तो….
योगराज शर्मा
October 28, 2010 at 9:47 pm
जैसा कर्म करेगा, वैसा फल देगा भगवान….
योगराज शर्मा
Sushil Gangwar
October 28, 2010 at 11:42 pm
अगर आप http://www.writerbook .com.co.in अपने दिल की बात कहना चाहते है तो लिख दीजिये । साक्षात्कार.कॉम और प्रेसवार्ता.कॉम ने एक कम्युनिटी site http://www.writerbook.com.co.in शुरू की है । साक्षात्कार.कॉम और प्रेसवार्ता.कॉम का मकसद संसार के सभी पत्रकारों को एक जगह खड़ा करना है । जहा वह मीडिया के लिए कुछ कर सके । आप सभी लोग अपने समाचार , वीडियो राईटर बुक दर्ज कर सकते है । हम आपका इंतजार करेगे ।
सुशील गंगवार
एडिटर
.xyz.
October 29, 2010 at 1:21 am
Amar Singh ji Aap ne likha ki– …….और आलम है कि “जब भी जी चाहे नए चेहरे लगा लेतें हैं लोग, एक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेतें है लोग” ! Amar Singh ji , Aap ne bhi pata nahi kitne chehre apne chehre ke upar lagaaye aur ab khud hi naqab hata rahe hain . Darasal Rajniti mein sheersh par rahne waalon ko ye GUMAAN ho jata hai ki wo Taa-umra *Taaqatwar* bane rahenge, Par Aap ki *NAMRA AUR SHAAYARAANA* baatein bata rahi hain ki aap ke sar se apne taaqatwar hone ka gumaan utar chuka hai . Kaash is Haqeeqat ko har NETA samajh pata , par kya karein wo bhi , SATTA KA NASHA hi kuch is kadar hota hai ki…. . Khair aap ko Haqeeqat samajh mein aayee par nasha utarane ke baad . Koi baat nahi- DER AAYE DURUST AAYE !
Anamika Singh
October 30, 2010 at 12:01 am
amar singh ji, aaj aapke bekaar hone ki wajah khud aap hi hein. mane ya na mane aapne badi khoobsurti se samajwadi party ko apne isharo par nachaya hai, aaj jab ulti gaaj khud aap par giri to aapko boora lag raha hai. waise aap jaise logo mein kabhi samajwad tha hi nahi, aur samajwad ye nahi sikhta ki aap waqt se pichaad jayen. abhi bhi apne aap mein badlaw layen.
Anamika Singh
October 30, 2010 at 12:03 am
amar singh ji aap kabhi samajwadi rahe hi nahi, iss liye samajwad kaa raag alapna band karen. aur neeraj shekhar ko samajwad ka paath mat padaye, kyonki samajwad unhe apne pita se virasat mein mila hai